नौकरानी को नए फ्लैट में रगडा

Naukrani ko naye flat me ragda:

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मेरा नाम राजीव है और मैं एक बहुत ही अच्छी कंपनी में जॉब करता हूं। मैं लखनऊ का रहने वाला हूं और मैं फरीदाबाद में नौकरी करता हूं। मुझे यहां पर काफी वर्ष हो चुके हैं और मैं अब यहीं पर रह रहा हूं। मैंने एक फ्लैट भी खरीद लिया है। मेरे साथ मेरी पत्नी कल्पना भी रहती है। हमारी जिंदगी बहुत ही अच्छे से चल रही थी। कभी कबार मेरे माता पिता भी हमारे पास आ जाते हैं और वह भी बहुत खुश हैं।  मैंने अब फरीदाबाद में ही घर ले लिया है। एक दिन हमारे ऑफिस के बाहर  एक औरत भीख मांग रही थी। मैंने उसे देखा तो उसकी उम्र ज्यादा नहीं थी। वह 30 वर्ष की रही होगी। उस दिन तो मैं उसे पैसे देकर आ गया लेकिन मैं उसे अब हमेशा ही वहां पर देखता तो वह मुझसे पैसे मांगती रहती। मुझे भी उसे देखकर अब अच्छा नहीं लगता था। क्योंकि कभी कुछ लोगों उसे  पैसे दे दिया करते हैं और कुछ लोग कुछ बताने मार दिया करते थे। मैं भी उसे कभी कुछ खाने के लिए दे दिया करता था। उसे इस तरह भीक मांगते हुए मुझसे अब देखा नहीं जा रहा था।

मैंने सोचा आज मैं इस औरत से बात कर ही लेता हूं। जब मैं उसके पास गया तो मैंने उससे पूछा कि तुम भीख क्यों मांगती हो। वह कहने लगी कि मेरी मजबूरी है। इसलिए मुझे भीख मांगनी पड़ रही है। नहीं तो पहले हम लोग भी बहुत अच्छे से रहते थे लेकिन मेरे पति की मृत्यु के बाद हमारी घर की स्थिति खराब हो गई और मुझे इस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया। मुझे उसकी बात पर बहुत दया आयी। मैंने  सोचा कि उसे अपने घर ले चलता हूं। वह हमारे घर पर ही कुछ घर का काम कर लेगी। मैंने उस औरत से उसका नाम पूछा। तो उसने अपना नाम बसंती बताया। मैंने उसे कहा कि तुम एक काम करो मेरे साथ मेरे घर पर ही नौकरी कर लेना। मेरे घर की साफ-सफाई और खाना बनाने का काम कर लिया करना। मैं तुम्हें उसके बदले कुछ पैसे दे दिया करूंगा। वह कहने लगी ठीक है। यदि आप मुझे रहने के लिए और खाने पीने के लिए दे देंगे तो मेरा गुजारा चल जाया करेगा और आप थोड़े बहुत पैसे भी मुझे दे दिया कीजिए। मैंने उसे कहा ठीक है तुम मेरे साथ मेरे घर चलना।  मैंने उसे कुछ अच्छे कपड़े लाकर दिए उसके बाद उसने वह कपड़े पहने और  मैं उसे अपने घर पर ही ले आया।

जब मैं उसे अपने घर पर लाया तो मैंने अपनी पत्नी से बसंती के बारे में बात की। तो वह मुझे कहने लगी कि तुम्हें क्या जरूरत है किसी पर दया खाने की। तुम अपने काम से काम रखा करो। मैंने उसे कहा तुम फालतू में गुस्सा हो रही हो। मैंने तो किसी की भलाई की है। मैंने उसे उस दिन तो मना ही लिया। हमारे घर पर एक सरवेन्ट रूम था। तो मैंने उसे वहीं पर रखने को कह दिया। अब वह हमारे घर का काम करने लगी। कुछ दिन तक तो मेरी पत्नी मुझसे बहुत ज्यादा गुस्सा थी और उसने मुझसे बात भी नहीं की लेकिन अब बसंती घर का काम कर दिया करती तो उसे भी बहुत राहत मिलती क्योंकि वह भी जॉब करती थी और उसके पास भी इतना समय नहीं होता था। अब वह मुझसे अच्छे से बात करने लगी और हम दोनों का पहले जैसे ही अच्छे से रिलेशन चलने लगा और बसंती भी अब हम लोगों के साथ घुल मिल गई थी और वह हमारे परिवार के सदस्य की तरह ही थी।

एक बार जब मेरे माता-पिता हमारे घर आए तो वह भी कहने लगे कि तुम्हें नौकरानी रखने की आवश्यकता क्या थी। मैंने उन्हें बताया कि यह हमारे ऑफिस के बाहर भीख मांगा करती थी। तो मुझे उसे देखकर दया आ गई। इस वजह से मैं उसे घर पर ही ले आया और अब ये हमारे यहां पर ही नौकरी कर रही है। तब मेरे पिताजी ने कहा कि यह तुमने बहुत ही अच्छा किया। उसकी  मदद कर के पिताजी भी बहुत खुश हुए। बसंती भी उनका बहुत ध्यान रखती। जब भी वह हमारे पास आते तो वह उन्हें बहुत ही अच्छे से रखती और उनका ध्यान भी देती थी। मुझे भी वह बात बहुत ही अच्छी लगती और अब हम लोगों का ऑफिस का भी काम अच्छे से चल रहा था। कुछ दिनों बाद मैंने भी एक नया फ्लैट और खरीद लिया। जहां पर मैं रहता था। उससे कुछ दूर पर ही मैंने वह फ्लैट ले लिया था। क्योंकि कुछ दिनों तक मेरे माता-पिता हमारे घर पर ही रहने वाले थे। इस वजह से मैंने बसंती को कहा कि तुम वहीं पर रह लिया करना। वैसे भी वह अभी फिलहाल खाली पड़ा है। वो कहने लगी ठीक है मैं कुछ दिनों तक वहां रह लूंगी। वह अब वहीं रहने चली गई और हमारे घर पर आकर काम कर दिया करती थी। उसके बाद दुबारा फ्लैट में  चली जाया करती। ऐसा करने से वह घर पर भी अच्छे से साफ सफाई करके रखती थी। मैंने भी धीरे-धीरे उसमें भी सामान जोड़ने लगा और उसे भी अच्छे से रहने लायक बना दिया। कभी भी हमारे कोई गेस्ट आ जाए तो मैं उन्हें वही पर रखता था।

एक दिन मैं अपने फ्लैट में चला गया और वहां पर बसंती भी लेटी हुई थी जैसे ही मैंने उसे देखा तो वह  नंगी लेटी हुई थी। मुझे देखते ही उसने बिस्तर से चादर को उठाया और उसे ओठ ली। मैंने उसे कहा कि तुम्हें नंगे सोने की जरूरत क्या है तुम्हारे पास कपड़े नहीं है। वो कहने लगी आज बहुत गर्मी है इसलिए मैं ऐसे ही लेटी हुई थी। मैंने जब उसके शरीर से चादर को हटाया तो उसके स्तन और उसकी चूत देखकर मै उसकी तरफ आकर्षित हो गया और मुझसे रहा नहीं गया। मैंने तुरंत ही उससे वही बिस्तर पर लेटा दिया और उसके स्तनों को चूसने लगा मैंने बहुत देर तक उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना जारी रखा। मैने उसकी चूत के अंदर भी उंगली डाल दी मैं अपनी उंगली को अंदर बाहर करता जाता तो उसका पानी निकलने लगा लेकिन मैं ऐसे ही उसे बड़े अच्छे से चाट रहा था। अब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैंने तुरंत ही अपने लंड को उसके मुंह के अंदर डाल दिया। जैसे ही मैंने उसके मुंह में डाला तो उसने मेरा पूरा लंड को अपने मुंह के अंदर ही ले लिया और उसे अपने गले तक उतार दिया। अब वह मेरे लंड को अंदर बाहर करने लगी वह बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को सकिंग कर रही थी। जिससे कि मेरा वीर्य मेरे टोपे पर आ गया और वह इतनी तेजी से उसके मुंह के अंदर गिरा की उसने वह सारा ही अपने अंदर ले लिया।

अब उसने दोबारा से मेरे लंड को हिलाना शुरू किया और वह दोबारा से खड़ा हो गया। मैंने उसके दोनों पैरों को एकदम से चौडा करते हुए अपने लंड को झटके से अंदर घुसा दिया। मैंने इतनी तेजी अपना लंड डाला की उसकी सांसे रुक गई और वह बड़ी तेज चिल्लाने लगी और कहने लगी साहब आपका तो बहुत ज्यादा मोटा और कड़क है। मैंने उसे कहा अब मैं तुम्हें चोद रहा हूं चुपचाप रहो लेकिन वह अपने मुंह से आवाज निकाल रही थी। मै ऐसे ही धक्के मारे जा रहा था मैंने बहुत देर तक उसे ऐसे ही धक्के मारना जारी रखा। उसकी चूत अभी भी बहुत टाइट थी और मुझे बहुत मजा आ रहा था जब मैं उस को चोद रहा था। मैंने उसके स्तनों को भी अपने मुंह में ले लिया और उसके होठों को भी अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में ले रहा था। मुझे ऐसा प्रतीत होता कि उसके स्तनों से दूध निकल रहा है और मैंने वह सब अपने अंदर ले लिया। मैंने उसे झटके से उठाते हुए अपने लंड के ऊपर ला दिया। वह भी अपनी चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी और मै उसे बड़ी तेज झटके मारता। मैं जब उसके शरीर पर इतनी तेजी से झटके मार रहा था तो उसका शरीर पूरा ही हिल रहा था। वह मुझे कहती कि साहब आप तो बहुत ही अच्छे से मेरे साथ संभोग कर रहे हैं मुझे बहुत ही आनंद आ रहा है। मैं बहुत खुश हो रहा था उसके यौवन का रसपान करके और मैं ऐसे ही उसे झटके मारे जा रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने उसे अपने नीचे लेटा दिया और उसे बड़ी तेजी से झटके मारने लगा। हम दोनों पसीना-पसीना हो गए और बहुत ज्यादा गर्म हो गए मुझसे  गर्मी बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और मेरा वीर्य उसके योनि के अंदर ही चला गया। जिससे कि वह बहुत ज्यादा खुश हुई। मैं वहां से अपने घर चला गया और जब भी मेरा मन होता तो मैं अपने नए फ्लैट में उसे अच्छे से चोद कर आता हूं।


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