नौकरानी की रूई जैसी गांड

Naukrani ki rui jaisi gaand:

antarvasna, kamukta

मेरा नाम हर्षित है मैं दिल्ली में रहता हूं, मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता हूं, मेरी उम्र 28 वर्ष है। मेरे पिताजी का देहांत 3 वर्ष पहले हो गया था और मेरी मां घर पर अकेली थी इसीलिए मैंने शादी करने का विचार बना लिया, मैं जिस ऑफिस में जॉब करता हूं उसी ऑफिस में मेरी मुलाकात सुमन के साथ हुई, सुमन मुझे बहुत अच्छी लगी और हम दोनों ने एक दूसरे से शादी करने का निर्णय भी ले लिया, सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था। जब मैंने सुमन को अपनी मम्मी से मिलवाया तो मेंरी मम्मी सुमन से मिलकर बहुत खुश हो गई और सुमन भी काफी खुश थी, कुछ समय तक तो सब कुछ अच्छा चल रहा था और हम दोनों की शादी भी हो गई, जब हम दोनों की शादी हो गई तो उसके बाद सुमन ने मुझसे कहा कि मैं नौकरी करना चाहती हूं? मैंने उसे रोका नहीं हम दोनों साथ में हीं ऑफिस जाया करते और साथ में ही घर लौटते, काफी समय तक तो सब कुछ नॉर्मल चलता रहा कुछ समय बाद सुमन ने कहा मैं अब नौकरी छोड़ रही हूं मैं कुछ समय घर पर रहना चाहती हूं तो मैंने उसे कहा की ठीक है तुम्हे जैसा ठीक लगता है तुम वैसा ही करो।

वह घर पर ही रहने लगी, जब वह घर पर रहने लगी तो उसके और मेरी मां के बीच काफी झगड़े होने लगे उन दोनों के झगड़े की वजह से बीच में मैं पीसने लगा, जब सुबह का नाश्ता भी मुझे वक्त पर नहीं मिलता तो मैं अपने ऑफिस चला जाता लेकिन मैं उन दोनों को कुछ समझा नहीं पा रहा था क्योंकि एक तो मेरे ऊपर ऑफिस के काम का प्रेशर था और दूसरा मैं घर पर आता तो हमेशा ही मेरी पत्नी और मेरे मम्मी के बीच में किसी ना किसी बात को लेकर बहस हो जाती है। मैंने सोचा एक दिन मुझे उन दोनों से बात करनी चाहिए, मैंने एक दिन उन दोनों से बात की लेकिन उसके बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ, मेरी पत्नी की भी काफी गलतियां होती थी मेरी पत्नी घर का कुछ भी काम नहीं करती और यदि मेरी मम्मी कुछ काम कर रही होती तो वह जानबूझकर उनके साथ उलझ जाती थी, मैंने कई बार सुमन को समझाने की कोशिश की लेकिन वह मुझ पर ही गुस्सा हो जाती मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।

एक दिन ऑफिस में मैंने अपने दोस्तों से यह बात कही, वह कहने लगे की तुम ऐसा क्यों नहीं कर लेते कि घर में किसी नौकरानी को काम पर रख लो, मैंने उसे कहा तुमने यह आइडिया तो बिल्कुल सही सुझाया, मैं इस पर अमल करता हूं और यदि तुम्हारी नजर में भी कोई अच्छी नौकरानी हो तो तुम मुझे बता देना, वह कहने लगा ठीक है मैं भी ढूंढने की कोशिश करता हूं, मेरे पास इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं था मुझे भी उसकी बात समझ आ गई और मैंने भी एक नौकरानी को अपने घर पर रख लिया, उसका नाम कमली है और जब से वह हमारे घर में काम करने लगी है तब से मेरी मम्मी और सुमन के बीच में झगडे कम होने लगे थे, मैंने ऑफिस में अपने दोस्त को कहा यार तुमने तो बिल्कुल ही सही बात कही अब मेरी पत्नी और मेरी मम्मी के बीच में झगड़े वाकई में कम होने लगे हैं क्योंकि वह दोनों एक दूसरे से मिलते ही नहीं है तो झगड़े होने का तो सवाल नहीं बनता, घर का सारा काम तो नौकरानी करती है, मेरी मम्मी अपने रूम में बैठी रहती हैं और मेरी पत्नी भी अपने रूम में ही बैठी रहती हैं, अब मैं भी काफी खुश था क्योंकि मैं उन दोनों के झगड़े सुलझाते हुए बहुत परेशान हो गया था। एक दिन सुमन मुझसे कहने लगी कि मुझे एक कंपनी से जॉब ऑफर आया है और वहां पर सैलरी भी काफी अच्छी दे रहे हैं, मैंने उससे कहा कि तो फिर तुम देख लो तुम्हें क्या करना है, वह कहने लगी मैं सोच रही हूं कि वहां पर जॉब कर लेती हूं। सुमन ने वह कंपनी ज्वाइन कर ली, सुबह के वक्त मैं उसे छोड़ता हुआ अपने ऑफिस चला जाता और शाम को उसे अपने साथ ही ले आता, मैं हमेशा ही अब सुमन को अपने साथ ऑफिस लेकर जाता और शाम के वक्त उसे अपने साथ घर ले आता था यही दिनचर्या हमेशा चलने लगी थी और मेरे घर में किसी बात को लेकर झगड़े भी नहीं थे क्योंकि सुमन भी अपने काम में बिजी हो गई थी और घर का सारा काम कमली ही समालने लगी थी इसीलिए मैं अब बिल्कुल निश्चिंत हो गया था लेकिन काफी समय बाद एक दिन मेरी मम्मी और मेरी पत्नी के बीच झगडा हो गया, जब वह दोनों झगड़ रहे थे तो उस दिन मैंने अपनी पत्नी को भी डांट दिया वह इतने गुस्से में हो गई थी की वह अपने मायके चली गई, मैंने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन वह कई दिनों तक घर नही लौटी, मेरी मम्मी मुझे कहने लगे कि बेटा सुमन को घर ले जाओ सब लोग क्या कहेंगे, यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं है, जब मेरी मम्मी ने मुझसे यह बात की तो मुझे लगा कि मेरी मम्मी सुमन के बारे में कितना सोचती है लेकिन वह हमेशा मेरी मम्मी से झगड़ा करती रहती हैं, मैंने कहा चलो कुछ दिनों बाद ही मैं सुमन को लेने उसके घर चला जाऊंगा।

कुछ दिनों बाद में सुमन को लेने के लिए उसके घर पर गया लेकिन उसने मेरे साथ आने से साफ इंकार कर दिया मुझे लगा चलो कुछ दिनों बाद उसका गुस्सा शांत हो जाएगा। एक दिन मेरी छुट्टी थी उस दिन मैं घर पर ही था मेरा उस दिन सेक्स करने का बड़ा मन होने लगा लेकिन सुमन अपने मायके में ही थी। मैंने सोचा क्यों ना मुठ मारकर काम चला लिया जाए मैं बाथरूम में चला गया। मैंने बाथरूम मे मुठ मारकर अपने वीर्य को गिरा दिया लेकिन मैंने पानी नहीं डाला। जब कमली ने वह साफ किया तो वह कहने लगी साहब आपने बाथरूम तो बड़ा गंदा किया हुआ है। मैं उसके कहने का मतलब समझ गया मैंने उसे सारी बात बताई तो वह कहने लगी मेरे होते हुए आपको कैसी कमी हो सकती है। मैंने उसे कुछ पैसे पकड़ा दिया जिससे कि वह मेरे साथ संभोग करने के लिए तैयार हो गई। उसने मेरे मोटे लंड को मेरी पजामे से बाहर निकालते हुए सकिंग करना शुरू कर दिया।

वह मेरा लंड को अपने गले तक ऐसे ले रही थी जैसे कि उसके लिए बड़ा ही मामूली हो। कमली मुझे कहने लगी साहब आपके लंड को चूसने मे बड़ा अच्छा लग रहा है आपके लंड का शेप तो बिल्कुल केले के जैसा है उसको सकिंग करना बहुत ही अच्छा लग रहा था वह काफी देर तक मेरे लंड को सकिंग किया। जब मेरा मन उसे चोदने का होने लगा तो उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए उसकी गांड बहुत ज्यादा मोटी थी। मैंने उसकी चूत के अंदर लंड को डाल दिया, उसकी चूत मे मुझे लंड डालने मे मजा आ गया। वह भी अपनी चूतडो को मुझसे टकराती तो मुझे ऐसा लगता जैसे उसकी गांड के अंदर रूई भरी हुई हो। मैंने उसे लगातार तेज गति से चोदने प्रारंभ कर रखा उसका बदन भी पूरा हिल जाता लेकिन मुझे उसे धक्के मारने में बड़ा आनंद आ रहा था। वह अपनी मोटी गांड को मुझसे लगातार मिला रही थी मैंने उससे कहा तुम्हारे साथ तो मुझे आज बड़ा आनंद आ रहा है ऐसे मजे मुझे सुमन भी नहीं देते। यह कहते हुए मैंने उसे बड़ी तेजी से पेला जब मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने उसकी बड़ी गांड के ऊपर वीर्य को गिरा दिया लेकिन उसकी गांड देखकर मेरा मन उसे दोबारा चोदने का होने लगा। मैंने उसकी योनि के अंदर दोबारा लंड को डाल दिया वह कहने लगी साहब आप तो बड़े ही हिम्मतवाले हैं अपने तो दोबारा से मेरी योनि के अंदर लंड डाल दिया। मैंने बड़ी तेजी से उसे चोदना प्रारंभ कर दिया मैं उसकी बडी चूतड़ों क रंग लाल कर दिया। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था काफी देर तक मैं उसके साथ सेक्स का आनंद लेता रहा जैसे ही मेरा वीर्य दोबारा से गिरा तो मैंने कमली से कहा आज तो तुम्हारे साथ सेक्स कर के मजा आ गया तुम हमेशा ही मुझे अपने यौवन का जाम पिला दिया करो। वह कहने लगी साहब आपके लिए तो मैं हमेशा ही हाजिर हूं लेकिन उस दिन वाकई में उसके साथ सेक्स करने मे मुझे बड़ा मजा आया। उसके कुछ समय बाद सुमन भी घर आ गई लेकिन उसके झगड़ों की वजह से मेरा उसकी तरफ देखने का मन नहीं होता मैं उससे सिर्फ काम की ही बात किया करता। हम दोनों के रिलेशन ऐसा हो चुका था जैसे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ जबरदस्ती रह रहे हो और हम दोनों को एक दूसरे से कोई लेना देना ना हो।


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