नौकरी के बाद छोकरी भी वाह !

Naukari ke baad chhokri bhi waah:

kamukta, desi kahani

मेरा नाम राहुल है और मैं एक बार अपने काम से शहर से कहीं दूर जा रहा था। तभी रास्ते में मेरी गाड़ी का टायर पंचर हो गया और मैं उस टायर पर पंचर लगाने के लिए किसी पंचर वाले को देख रहा था लेकिन मुझे दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दिया। मैं ऐसे ही अपनी गाड़ी के अंदर काफी देर तक बैठा रहा। मैं लिफ्ट भी मांगता लेकिन किसी ने मुझे लिफ्ट नहीं दी। काफी देर बाद एक युवक अपनी बाइक से आ रहा था और उसने मुझे देखकर अपनी बाइक रोक ली। मैंने उसे बताया कि मेरी गाड़ी का टायर पंचर हो गया है और यहां पर कोई पंचर वाला भी मुझे नहीं मिल रहा है। तो क्या तुम मुझे आगे तक ले जा सकते हो। जहां पर कोई पंचर वाला हो और वह मेरी गाड़ी ठीक कर दे। उसने मुझे कहा कि आप मेरे साथ ही बैठ जाइए। मैं आपको पंचर वाले के पास ले जाता हूं और वह आपकी गाड़ी ठीक कर देगा। वह मुझे अपने साथ अपनी बाइक पर ले गया। हम दोनों बातें करने लगे। मैंने उससे कहा कि मुझे यहां पर देखकर कोई भी गाड़ी नहीं रोक रहा था और किसी ने भी मुझे लिफ्ट नहीं दी। तुमने मुझे लिफ्ट दी, उसके लिए मैं तुम्हे धन्यवाद कहना चाहता हूं।

वह कहने लगा कि इसमें धन्यबाद कहने की क्या बात है। यह तो मेरा फर्ज था। मैंने उस युवक का नाम पूछा तो उसने अपना नाम हरीश बताया। वह मुझे पंचर वाले के वहां पर ले गया और मैंने पंचर वाले से कहा कि मेरी गाड़ी का टायर पंचर हो गया है। तो तुम मेरे साथ चलो। वह मेरे साथ जाने के लिए तैयार हो गया। जाते-जाते मैंने हरीश का नंबर भी ले लिया और फिर वह वहां से चला गया। अब मैं पंचर वाले के साथ ही उसकी गाड़ी में बैठ कर आया। उसने मेरा पंचर ठीक किया। मैने उसे पैसे दिए और उसके बाद मैं अपने काम से निकल पड़ा। जब मैं काम कर कर वापस लौटा तो मुझे ध्यान आया कि मुझे हरीश को फोन कर देना चाहिए। क्योकि उसने मेरी मदत की थी। इसलिए मेरा उसको फोन करने का हक बनता था। मैंने उसे फोन किया तो अब हम दोनों के बीच बहुत ही अच्छी दोस्ती हो गई और हम लोग फोन पर बातें कर लिया करते हैं। जब भी मैं उसके घर की तरफ से जाता था तो उससे मिल लिया करता था। वह भी अब मेरे घर पर आने लगा। ऐसे ही हम दोनों की काफी गहरी दोस्ती हो गई। एक बार उसने मुझे कहा कि मैं अपने फार्म हाउस में जा रहा हूं। तो क्या तुम मेरे साथ वहां चलोगे। मैंने उसे कहा कि ठीक है। हम लोग वहां चलते हैं और हम दोनों फार्महाउस में चले गए। हम दोनों ने वहां काफी इंजॉय किया और उसके बाद हम अपने घर वापस लौट आए। अब जब भी मेरा मन होता तो मैं उसके फार्महाउस में चला जाता और हरीश से उसके फार्महाउस की चाबी ले लिया करता और वहां पर खुब एन्जॉय करता।

मैं काफी दिनों तक अपने काम में ही बिजी था इसलिए मुझे हरीश से बात करने का समय नहीं लग पा रहा था और मैं सोच ही रहा था कि हरीश से बात करता हूं लेकिन अपने काम की व्यस्तता के चलते मैं बिल्कुल भी समय निकालना मेरे लिए मुश्किल हो रखा था। परंतु एक दिन हरीश ने मुझे खुद ही फोन कर दिया और कहने लगा आजकल तुम मुझे फोन नहीं कर रहे हो क्या बात है। मैंने उसे बताया कि आजकल कुछ ज्यादा ही काम आ रखा है इस वजह से मैं तुम्हें फोन नहीं कर रहा था। मैंने बीच में सोचा था कि तुम्हें कॉल करूं परंतु मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिला जिसकी वजह से मैंने तुम्हें फोन नहीं किया। अब वह मुझे कहने लगा कि अगर तुम्हारे पास समय हो तो कुछ दिनों के लिए फार्म हाउस पर चल पड़ते हैं। खूब इंजॉय करेंगे मैंने उसे कहा ठीक है मैं समय निकालता हूं। फिर वह कहने लगा कि इस बार हम किसी कॉलगर्ल को भी बुला लेते हैं तो हमारा मन भी अच्छे से बहल जाएगा। मैंने उसे कहा मैं ऐसे किसी भी बंदे को नहीं जानता जो कॉल गर्ल अरेंज करवा पाए। उसने मुझे कहा कि तुम मुझ पर छोड़ दो तुम आने की तैयारी करो।

अब मैं भी सोच में पड़ गया जब उसने कॉल गर्ल को लेकर बात कही क्योंकि मैंने भी काफी समय से कोई कमसिन लड़की की चूत नहीं मारी। मैंने शाम को हरीश को दोबारा से फोन किया और उसे कहने लगा कि मैं फॉर्म हाउस पर आ रहा हूं तुम बताओ कब चलना है। वह कहने लगा कि 3 दिन बाद का प्रोग्राम बनाया है तो तुम 3 दिन बाद वही पर ही पहुंच जाना। मैंने उसे कहा ठीक है मैं वहीं पर पहुंच जाऊंगा। अब मैं 3 दिन बाद उसके फार्म हाउस पर ही पहुंच गया। जब मैं  फार्म हाउस पर गया तो मैंने देखा वहां एक सुंदर सी लड़की बैठी हुई है उसकी उम्र 25 साल की थी और वह बहुत ही सुंदर थी। उसकी हाइट भी बहुत ज्यादा थी मैंने जैसे ही उसे देखा तो मेरा लंड उसे देखते ही खड़ा हो गया। हरीश ने मुझसे हाथ मिलाया और हम दोनों वहां बैठ गए। अब हम तीनों आपस में बैठकर बात कर रहे थे हरीश ने मुझे उस लड़की का नाम बताया उसका नाम जयंती था। जयंती भी हमारे साथ बहुत ही अच्छे से बात कर रही थी थोड़ी देर बाद उसने अपने कपड़े खुद ही खोल दिए। मैंने जब उसके बदन को देखा तो मेरा लंड और ज्यादा खड़ा हो गया मैंने भी तुरंत अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह के अंदर डाल दिया। जैसे ही मैंने उसके मुंह के अंदर अपना लंड डाला तो हरीश ने भी उसकी टांगों के बीच में से अपनी जीभ को डालकर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

वह बहुत ही अच्छे से उसकी चूत को चाटे जा रहा था। जयंती मेरे लंड को मुंह में लेकर अच्छे से सकिंग कर रही थी मुझे बहुत ही मजा आ रहा था जब वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करती जाती। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा कितने दिनों बाद किसी ने चूसा हो। अब मुझसे बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हो रहा था और मैंने हरीश को कहा कि तुम इससे अपना लंड चूसवालो। मैं अपने लंड को चूत मे डाल रहा हूं मैंने तुरंत ही अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाल दिया और बड़ी तेजी से झटके मारने शुरू कर दिए। मैं इतनी तेजी से उसे चोदते जा रहा था कि उसका पूरा शरीर हिल रहा था और वह हरीश के लंड को अपने मुंह में ले रही थी। हरीश भी अपने लंड को उसके गले तक उतार देता और मैं उसके दोनों पैरों को पकड़कर बहुत ही अच्छे से उसे चोदने पर लगा हुआ था। मैं इतने अच्छे से चोद रहा था कि वह चिल्ला भी नहीं पा रही थी। हरीश ने मुझे कहा कि तुम इसे अपने ऊपर लेटा दो मैंने उसे अपने ऊपर लेटाया और उसकी चूत मे अपने लंड को डाल दिया। हरीश ने भी अपने लंड पर तेल लगाते हुए उसकी गांड के अंदर अपने लंड को उतार दिया। जैसे ही उसने अपने लंड को उसकी गांड के अंदर डाला तो वह बहुत ही तेज चिल्लाने लगी और कहने लगी कि तुमने तुम्हारी गांड और चूत दोनों ही फाड दी है। हरीश ने भी बड़ी तेजी से झटके मारना शुरू कर दिया और मैं भी ऐसे ही धक्के मार रहा था।

जब हरीश उसकी गांड मार रहा था तो वह बहुत ही तेज तेज चिख रही थी और कुतिया के जैसे आवाज निकाल रही थी। मैं भी उसे ऐसे ही धक्के दे रहा था मुझे बहुत ही आनंद आ रहा था जब मैं उसे ऐसे ही झटके देता जाता। कुछ समय बाद हरीश का माल झडने वाला था और उसने वह उसकी चूतडो के ऊपर ही गिरा दिया। मैंने उसे अब भी ऐसे ही पकड़ा हुआ था और ऐसे ही मैं धक्के मार रहा था। कुछ देर बाद उसने भी अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया और मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। जब वह अपनी चूतडो को ऐसे करती जाती मुझे ऐसा लग रहा था कि वह भी अब मजे में आ चुकी है। कुछ देर बाद उसने हरीश के लंड को अपने मुंह में ले लिया और अपन चूतडो को मेरे लंड पर ऐसे ही ऊपर-नीचे करती जाती और हरीश उसके मुंह में अपना लंड डाले जा रहा था। मेरा वीर्य थोड़ी देर मे गिरने वाला था और मैंने जयंती को कहा कि मेरा वीर्य गिरने वाला है। उसने हरीश के लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला और बड़ी तेज तेज अपने चूतडो को ऊपर नीचे करने लगी और तभी मेरा वीर्य भी उसकी योनि के अंदर जा गिरा। मैंने जब आपने लंड को बाहर निकाला तो वह हरीश के लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी। मुझे उसके साथ सेक्स करके बहुत ही मजा आया और हमने फार्म हाउस में उसे पूरी रात भर चोदते रहे। वह एक नंबर की कॉल गर्ल है।

 


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