नंगा देखा और चोद डाला

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Nanga dekha aur chod dala मैंने अपने कमरे की खिड़की खोली तो मैं बाहर देख रहा था बाहर काफी सुहाना मौसम था और बारिश भी आने वाली थी तभी सामने की खिड़की से मुझे एक सुंदर सा चेहरा दिखाई दिया उस चेहरे को देखकर मैं जैसे उस चेहरे का दीवाना हो गया। मेरे लिए यह सब इतना आसान नहीं होने वाला था मुझे अभी तक उस लड़की के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था और ना ही मैं आस पड़ोस में किसी को जानता था क्योंकि मुझे कुछ समय ही हुआ था जब मैंने कॉलोनी में घर लिया। मेरे साथ में रहने वाला मेरा रूममेट जिसका नाम अविनाश है वह बड़ा ही जुगाड़ू किस्म का है अविनाश के पास हर बात का जवाब होता है और अविनाश के लिए कोई भी चीज असंभव नहीं है। मैं चुपचाप अपने कमरे में बैठा हुआ था तभी अविनाश आया और मुझे कहने लगा रूपेश तुम यहां कोने में बैठ कर क्या कर रहे हो क्या तुम चेयर पर नहीं बैठ सकते तुम तो नीचे जमीन पर बैठे हुए हो।

मैंने अविनाश से कहा बस ऐसे ही बैठने का मन था तो जमीन पर बैठ गया इसमें क्या कोई परेशानी है अविनाश मुझे कहने लगा रुपेश इसमें परेशानी की तो बात नहीं है लेकिन मैंने तो तुम्हें कहा कि तुम कुर्सी पर भी बैठ सकते थे अब यह तुम्हारी मर्जी है कि तुम्हें बैठना है या नहीं। अविनाश और मेरी मुलाकात को भी ज्यादा समय नहीं हुआ था हम लोग पिछले एक महीने से एक दूसरे को जानते थे इसलिए अब तक शायद हम लोग पूरी तरीके से खुल नहीं पाए थे। ना ही अविनाश पूरी तरीके से खुल पाया था और ना हीं मैं पूरी तरीके से अविनाश से बात किया करता था लेकिन उस दिन अविनाश और मेरी बात काफी देर तक हुई। मुझे इस बात की खुशी थी कि अविनाश के साथ मेरी बातें इतनी देर तक हो रही है क्योंकि अविनाश से मुझे काम जो था। मैंने उस दिन अविनाश से कुछ भी नहीं कहा लेकिन जब एक दिन मैंने अविनाश को इस बारे में बताया तो अविनाश कहने लगा रूपेश तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया अब तक तो तुम उस लड़की से बात भी कर चुके होते। अविनाश मुझे कहने लगा चलो मैं तुम्हारी मदद करता हूं अविनाश ने मेरी मदद करने का वादा मुझसे कर लिया था और मुझे इतना तो मालूम था कि अविनाश मेरी मदद जरूर करेगा।

कुछ ही दिनों में अविनाश ने उस लड़की के बारे में सब कुछ मुझे बता दिया अविनाश ने मुझे उस का संक्षिप्त वर्णन दिया और इस तरीके से अविनाश ने मुझे सुप्रिया के बारे में बताया। अविनाश ने मुझे बताया कि सुप्रिया ने अपनी पढ़ाई शहर के नामचीन कॉलेज से की और उसके बाद वह एक लड़के को पसंद करती थी जिससे कि वह शादी भी करना चाहती थी और उन दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया शादी के कुछ ही महीनों के बाद उस लड़के का देहांत हो गया। यह बात मुझे थोड़ा बुरी लगी थी लेकिन मैंने अविनाश से कहा कि क्या तुम्हें उसके बारे में और कुछ भी पता है तो अविनाश मुझे कहने लगा कि हर सुबह वह मॉर्निंग वॉक के लिए जाती है यदि तुम्हें सुप्रिया से बात करनी है तो तुम भी सुबह मॉर्निंग वॉक पर जा सकते हो। मैंने अविनाश से कहा यार अविनाश तुमने मेरी बहुत ही मदद की है अविनाश कहने लगा दोस्ती में यह सब तो चलता रहता है। अविनाश ने मेरा दिल जीत लिया था और अविनाश ने मेरी मदद की तो उससे मुझे अब सुप्रिया के पास आने का मौका मिलने लग गया था मैं भी हर रोज मॉर्निंग वॉक पर जाने लगा था। यह मेरी आदतों में बिल्कुल भी शुमार नहीं था लेकिन मुझे भी तो सुप्रिया से बात करनी थी और उसके लिए मैंने ना जाने कितने ही पापड़ बेले। मैं सुबह के वक्त मॉर्निंग वॉक पर चला जाया करता था मुझे हर रोज सुप्रिया दिखाई देती लेकिन सुप्रिया ने मेरी तरफ कभी देखा ही नहीं था। एक दिन जब उसने मेरी तरफ देखा तो मुझे लगा शायद अब बात कुछ आगे बढ़ने वाली है और धीरे-धीरे वह भी मुझे देखने लगी थी मेरी नजरें भी सुप्रिया को हमेशा ही देखती रहती थी। एक दिन जब वह घर के पास ही एक दुकान में सामान लेने के लिए आई हुई थी तो मैं भी उसकी तरफ देख रहा था उसने मुझसे कहा कि आप तो वही है ना जो हर सुबह मॉर्निंग वॉक पर आते हैं।

मेरे लिए इतना ही काफी था इतनी बातें सुनकर मैं खुश हो गया और मैंने सुप्रिया से हाथ मिलाते हुए अपना परिचय दिया अब जैसे बात एक कदम आगे बढ़ चुकी थी और सुप्रिया से मेरी पहली बार बात हुई थी। मैं बहुत ज्यादा खुश था मैंने यह बात अविनाश को भी बताई अविनाश कहने लगा कि जल्द ही तुम सुप्रिया का दिल भी जीत लोगे बस ऐसे ही तुम हमेशा ही उससे मिलते रहो। अगले दिन जब भी सुप्रिया मुझे मॉर्निंग वॉक पर दिखती तो मैं उसे देखकर मुस्कुरा दिया करता था धीरे धीरे हम दोनों की बातचीत हर रोज होने लगी। पहले तो बात हाय हेलो तक ही सीमित थी लेकिन अब बात और आगे बढ़ने लगी थी हम दोनों साथ में मॉर्निंग वॉक जाने लगे थे। मुझे सुप्रिया को जानने का मौका मिल गया था क्योंकि सुप्रिया का दिल जीतने के लिए मुझे यह सब तो करना ही था उसके चेहरे पर भले ही मुस्कान थी लेकिन उसके अंदर डर भी था उस ड़र को मैं मिटाना चाहता था। उस डर को जीतने के लिए मैंने ना जाने क्या कुछ नहीं किया और तब जाकर सुप्रिया ने मुझसे खुलकर बात करनी शुरू की। सुप्रिया को मुझ पर पूरा यकीन हो चुका था और वह मुझसे खुलकर बातें किया करती थी मुझे इस बात की खुशी थी कि चलो कम से कम मैं सुप्रिया का दिल जीतने में कामयाब तो रहा। मैंने जब यह बात अविनाश को बताई तो अविनाश कहने लगा कि तुम तो बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे हो मैंने अविनाश से कहा कि हां दोस्त बस अब तेजी से आगे बढ़ना पड़ेगा।

मैं हर रोज सुप्रिया से मिलता रहता था और उसके दिल में मैंने अपने लिए जगह भी बना ली थी। यह बहुत ही बड़ी बात थी कि मैं सुप्रिया के दिल में अपने लिए जगह बना पाया था अब उसे कोई भी जरूरत होती तो वह सबसे पहले मुझे भी याद किया करती थी। सुप्रिया ने मुझे अपने घर पर भी एक दो बार बुलाया था मै उसके घर पर जाया करता था परंतु अब मुझे उसके नजदीक आने के लिए उसकी मां को भी तो पटाना था इसलिए मैं उसकी मां से भी मिलता रहता था। सुप्रिया की मम्मी कुछ दिनों के लिए बाहर गई हुई थी और सुप्रिया घर पर अकेली थी मैं सुप्रिया से मिलने के लिए चला गया दरवाजा खुला ही हुआ था। मैं अंदर गया तो सुप्रिया अपने कमरे में कपड़े चेंज कर रही थी मेरी नजर सुप्रिया के नंगे बदन पर पड़ी तो मैं जैसे अंदर से हिल चुका था और सुप्रिया के साथ मैं शारीरिक संबंध बनाना चाहता था। सुप्रिया बाहर आई और कहने लगी सॉरी मैंने दरवाजा बंद नहीं किया था। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं वैसे भी मैंने कुछ भी नहीं देखा है। सुप्रिया मुस्कुराने लगी उसके चेहरे की मुस्कान बयां कर रही थी शायद वह भी खुश है और सुप्रिया मेरे लिए चाय बना कर ले आई। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और आपस में बात कर रहे थे मैं जब सुप्रिया से बात कर रहा था मुझे उससे बात करना अच्छा लगता। मैंने जब सुप्रिया के हाथ को पकड़ते हुए उसकी जांघ पर अपने हाथ को रखा तो वह मेरी ओर देखकर मुझे कहने लगी मुझे चोदो। मैंने उसके नंगे बदन को देख लिया था मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया। मैंने जब सुप्रिया के बदन से कपड़े उतारे तो मैंने अपने होठों को सुप्रिया के होठों पर लगाया तो वह मुझे किस करने लगी।

मेरा लंड मेरे अंडरवियर से बाहर आने के लिए बेताब था जब सुप्रिया ने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया तो मेरा लंड एकदम से तन कर खड़ा हो चुका था। जब सुप्रिया मेरे लंड को हिला रही थी तो उसे भी अच्छा लग रहा था जब उसने अपने मुंह के अंदर लंड को लिया तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि सुप्रिया मेरे लंड को चूस रही है। मुझे बहुत मजा आ रहा था वह बड़े अच्छे से अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को लेकर चूस रही थी जब वह मेरे लंड को चूस रही थी तो मुझसे भी रहा नहीं गया और मैंने सुप्रिया की पैंटी को उतारते हुए उसकी चूत को कुछ देर तक आपनी जीभ से चाटा। जब मैंने अपनी उंगली को उसकी योनि के अंदर घुसाया तो वह मचल उठी थी और मैंने उसकी योनि के अंदर लंड को डाल लिया। मेरा लंड सुप्रिया की योनि में जाते ही उसके मुंह से तेज चीख निकाली और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। मैंने धीरे धीरे अपनी गति पकड़नी शुरू की अब मैं सुप्रिया को बड़े अच्छे तरीके से धक्के मार रहा था। मुझे उसे धक्के मारने में मजा आता और सुप्रिया बहुत ज्यादा खुश नजर आ रही थी क्योंकि मैं उसे जमकर चोद रहा था। कुछ देर तक हम लोगों ने एक दूसरे के साथ ऐसे ही सेक्स का मजा लिया लेकिन जब सुप्रिया की गांड के बीचोबीच मैंने अपने लंड को लगाकर अंदर धक्का मारा तो लंड अंदर नही गया।

मैने लंड पर थूक लागाकर चिकना बना दिया जैसे ही मैंने सुप्रिया की गांड के अंदर लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी। मेरा लंड उसकी गांड के अंदर जा चुका था वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा दर्द हो रहा है। सुप्रिया को बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था मैंने उसकी चूतडो को कसकर पकड़ लिया और मैं बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मैं उसे जिस गति से धक्के मार रहा था उससे मुझे बड़ा मजा आता और वह भी बहुत खुश थी। सुप्रिया भी अपनी चूतडो को मुझसे मिलाए जा रही थी वह मुझे कहती कि तुमने मेरी गांड के अंदर ऐसे ही लंड डालते रहो। मैंने उसे कहा सुप्रिया तुम्हारे बदन का हर एक हिस्सा बड़ा ही कमाल का है भला मैं कैसे तुम्हारे बदन के हिस्से को छोड़ सकता था। सुप्रिया कहने लगी अच्छा तो तुम इसीलिए मेरे साथ बातें किया करते थे मैंने उसे कहा अब तुम्हें जो भी लगे लेकिन इस वक्त तो मुझे बड़ा ही आनंद आ रहा है मैं पूरे मरे ले रहा हूं करीब 5 मिनट बाद वीर्य सुप्रिया की गांड मे गिरा उसे भी आनंद आ गया।


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