नैन से नैन मिलाए

Nain se nain milaye:

Hindi sex story, antarvasna मैं गवर्नमेंट जॉब में हूं और मेरा जीवन बहुत ही सामान्य तरीके से चल रहा है मेरी शादी को करीब 15 वर्ष हो चुके हैं और मैं अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ रहता हूं, पहले हम लोग ज्वाइंट फैमिली में रहते थे लेकिन मेरी भाभी और मेरी पत्नी के बीच में झगडे होने लगे जिस वजह से मेरे भैया अविनाश ने मुझे कहा देखो राजीव तुम बहुत ही समझदार हो और तुम्हें तो पता ही है कि तुम्हारी भाभी और तुम्हारी पत्नी के बीच अब बिल्कुल भी नहीं बनती मैं नहीं चाहता कि अब उन दोनों के बीच झगड़े हो जिससे कि हमारे काम पर भी उसका बुरा असर पड़े। मेरे भैया अविनाश दिल के बहुत ही अच्छे हैं और वह बहुत समझदार भी हैं मैं उनकी बात को कभी भी नहीं टालता, मैंने उन्हें कहा भैया हम लोगों को साथ में रहना चाहिए लेकिन मुझे अविनाश भैया ने कहा कि मैं तो तुम्हारे साथ हमेशा ही हूं लेकिन इस वक्त शायद हम दोनों का अलग होना ही बेहतर है मुझे नहीं पता था कि भैया और मुझे कभी अलग होना पड़ेगा क्योंकि मेरे पापा हमेशा से ही चाहते थे कि हम दोनों साथ में रहे लेकिन अब हम दोनों को अलग होना पड़ा।

मेरे पिताजी ने हम दोनों भाइयों के नाम पर दो प्रॉपर्टी ली हुई थी एक प्रॉपर्टी से तो हमें किराया आता था और उस पैसे का हम दोनों भाई आधा-आधा बंटवारा कर लिया करते लेकिन जब भैया ने यह बात मुझे कहीं तो अब मैं अपने दूसरे घर में रहने के लिए चला गया भैया और भाभी जिस घर में हम पहले रहते थे वह वहीं पर रहने लगे अब सब कुछ बहुत ही सामान्य था मेरी पत्नी घर पर ही रहती थी और मैं कभी कबार अपने भैया से मिलने चले जाया करता था क्योंकि मेरे पास ज्यादा समय नहीं होता था इसलिए मैं भैया से मिलने के लिए तो नहीं जा पाता था लेकिन उन्हें फोन जरूर कर दिया करता था हम दोनों भाइयों के बीच अब भी पहले जैसा ही प्यार और प्रेम था मुझे जब भी मेरे भैया अविनाश की जरूरत होती तो मैं उन्हें फोन कर दिया करता और वह मेरी मदद हमेशा ही कर दिया करते।

एक दिन भैया का मुझे फोन आया और वह कहने लगे राजीव तुम कैसे हो? मैंने भैया से कहा मैं तो ठीक हूं आप सुनाइए आप कैसे हैं भैया कहने लगे तुम आजकल काफी दिनों से घर पर नहीं आए हो, मैंने उनसे कहा हां भैया मुझे आने का समय ही नहीं मिल पाया इसलिए मैं घर पर नहीं आ पाया वह मुझे कहने लगे लेकिन तुमने तो मुझसे मिलने के लिए कहा था और मैं उस दिन से तुम्हारा इंतजार करता रहा मैंने अपने भैया से कहा उस दिन मेरी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मैं घर पर ही रह गया था, वह मुझे कहने लगे अब तुम्हारी तबीयत कैसी है मैंने भैया से कहा अब तो मैं ठीक हूं। मैंने भैया से पूछा भैया आपने मुझे फोन किया था क्या कुछ जरूरी काम था? भैया कहने लगे नहीं जरूरी काम तो नहीं था लेकिन मैं तुमसे पूछ रहा था क्या तुम कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले सकते हो, मैंने भैया से कहा लेकिन ऑफिस से छुट्टी लेकर मैं क्या करूंगा भैया कहने लगे मैं सोच रहा था कि बच्चों को कुछ दिनों के लिए इंदौर मौसी के घर लेकर चलते हैं क्योंकि मौसी का मुझे फोन आया था और वह कह रही थी कि तुम लोग तो मुझे भूल ही चुके हो और मुझसे मिलने भी नहीं आते हो मैंने भैया से कहा मौसी ने क्या आपको फोन किया था वह कहने लगे हां मौसी ने मुझे फोन किया था और उनसे मेरी बात काफी देर तक हुई, मैंने भैया से कहा हां भैया मैं ऑफिस से छुट्टी ले लूंगा भैया कहने लगे ठीक है तुम ऑफिस से छुट्टी ले लेना। मैंने उनसे पूछा लेकिन हमें इंदौर कब जाना है तो वह कहने लगे मैं सोच रहा हूं कुछ दिन बाद हम लोग इंदौर चले जाते हैं और इससे बच्चों का मूड फ्रेश हो जाएगा और हम लोगों को भी वैसे एक साथ में गए हुए काफी समय हो चुका है मैंने भैया से कहा हां भैया ठीक है मैं आपसे घर पर आकर मिलता हूं। मैं एक-दो दिन बाद भैया से मिलने के लिए घर पर चला गया भैया ने मुझे कहा मैंने रिजर्वेशन करवा दी है और हम लोग ट्रेन से ही वहां जाएंगे, मैंने भैया से कहा आपने रिजर्वेशन क्यों करवाई आप मुझे कह देते मैं ही करवा देता  भैया कहने लगे कोई बात नहीं राजीव, तब तक भाभी भी आ गए और वह कहने लगे कि और देवर जी आप कैसे हैं मैंने भाभी जी से कहा मैं तो ठीक हूं आप सुनाइए भाभी आप कैसी हैं, भाभी पूछने लगी देवरानी जी कैसी हैं मैंने उन्हें कहा वह भी ठीक है।

यह बात तो सबको ही पता थी कि हम लोग घूमने के लिए जाने वाले हैं मैंने अपनी पत्नी और बच्चों को भी बता दिया था और शायद वह लोग भी बहुत खुश थे क्योंकि काफी समय से हम लोग कहीं गए भी नहीं थे, कुछ दिन बाद मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी जिस दिन हमारी ट्रेन थी उस दिन भैया और मैं साथ में रेलवे स्टेशन चले गए मेरे साथ मेरा परिवार भी था जब मेरी पत्नी ने भाभी को देखा तो वह उनसे अच्छे से बात नहीं कर रही थी मैंने अपनी पत्नी को समझा दिया था कि मैं नहीं चाहता कि तुम लोग आपस में झगड़ा करो वह कहने लगी मैं कहां झगड़ा करती हूं तुम्हारी भाभी हमेशा मुझसे जलती रहती हैं मैंने अपनी पत्नी को कहा हम लोग घूमने जा रहे हैं और मैं नहीं चाहता कोई भी परेशानी हो। जब हम लोग मेरी मौसी के पास पहुंच गए तो मेरी मौसी हम सब को देख कर बहुत खुश थी और कहने लगी चलो कम से कम तुमने मेरी बात को टाला तो नहीं मौसी ने मुझे देखा और कहा राजीव बेटा तुम्हारी नौकरी कैसी चल रही हैं मैंने मौसी से कहा मेरी नौकरी तो ठीक चल रही है आप सुनाइए आपका स्वास्थ्य कैसा है वह कहने लगी बस अब तो कुछ ही समय बचा है ना जाने कब क्या हो जाए अब तो शरीर भी साथ नहीं देता और बहुत ज्यादा तकलीफ भी होती है।

मौसी बहुत ही ज्यादा बीमार लग रही थी मैंने उन्हें कहा आप अपना ध्यान क्यों नहीं रखती हो वह कहने लगी मेरा इस दुनिया में आखिर हैं कौन? भैया ने मौसी से कहा कि आप हमारे साथ रहने के लिए क्यों नहीं चली आती मैंने तो आपसे कितनी बार कहा है, मौसी कहने लगी जब तक हाथ पैर चल रहे हैं बेटा तब तक तो मैं अपने घर में ही रहना चाहती हूं, मौसी का हमारे सिवा इस दुनिया में कोई भी नहीं है और वह हम दोनों भाइयों को ही अपना बच्चा समझती हैं मैंने भी मौसी से कई बार कहा था कि आप हमारे साथ रह सकते हैं लेकिन वह हमारे साथ रहने के लिए भी तैयार नहीं है और बच्चे भी बहुत खुश थे क्यों की मौसी का घर बहुत बड़ा है और वह लोग उनके घर के आंगन में खेलने लगे, मेरे दोनों बच्चे बहुत ही ज्यादा शरारती हैं वह इतना ज्यादा शरारत करते हैं कि सब लोग उनसे परेशान हो जाते हैं हम लोग मौसी के साथ ही बैठे हुए थे और उनके साथ बात कर रहे थे मौसी कहने लगी तुम दोनों जब छोटे थे तो कितनी शरारत किया करते थे लेकिन अब देखो तुम्हारे बच्चे भी कितने बड़े हो चुके हैं और देखते ही देखते समय भी ना जाने इतनी तेजी से निकल गया कुछ मालूम ही नहीं पड़ा। मौसी मुझे कहने लगी जब तक तुम्हारी माँ थी तब तक तो तुम लोग यहां पर बहुत आते थे लेकिन जब से तुम्हारी मां का देहांत हुआ है तब से तुम लोगों ने यहां आना ही छोड़ दिया है मैंने उनसे कहा ऐसा नहीं है हम तो चाहते हैं कि आप हमारे साथ ही रहो लेकिन आप तो अपना घर छोड़ने को तैयार ही नहीं है अब आपकी उम्र भी हो चली हैं और आप कब तक ऐसे अकेले रहेंगे वह मुझे कहने लगी बेटा अब तो बस आदत सी हो चुकी है। मेरी पत्नी ने अंदर से आवाज लगाई और कहां आप लोग खाना खाने के लिए आ जाए, हम लोग खाना खाने के लिए चले गए और साथ में बैठकर खाना खाने लगे।

जब हम लोगों ने साथ में खाना खा लिया तो उसके बाद मै मौसी जी के छत पर चला गया, मैंने वहां पर देखा एक हसीन और गदराए बदन की महिला सामने छत पर खड़ी है, उसे देखकर मेरे और उसके नैन आपस में टकराने लगे। मैंने उसे इशारों इशारों में बातें कर ली, मैं भी कुछ बहाना मार कर वहां से निकला और उसके घर में चला गया। मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं कोई आ ना जाए लेकिन वह घर में अकेली थी जब मैं उस महिला के पास गया तो उसकी सेक्सी अदाओं को देखकर मैं उस पर पूरी तरीके से फिदा हो गया। मैंने उसका नाम पूछा उसका नाम सविता था उसकी मनमोहक अदाओं से मैंने जब उसके होठों को चूमना शुरू किया तो उसने भी मेरे होंठो को चूमना शुरू कर दिया हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत देर तक किस करते रहे। जब हम दोनों के शरीर में पूरी तरीके से उत्तेजना जाग उठी तो मैंने उन्हें उनके बिस्तर पर लेटा दिया और उनके शरीर से कपड़े उतार दिए उन्होंने भी मेरे कपड़े उतार दिए, मैंने उनके बदन को महसूस करना शुरू कर दिया।

मैं जब उनके बदन को महसूस करता तो मेरा लंड भी तन कर खड़ा हो जाता मैंने भी उन्हें घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया उनकी चूत में लंड बड़ी तेजी से अंदर बाहर हो रहा था जिससे कि उनकी चूत की चिकनाई में बढोतरी हो गई थी, वह भी अपनी बड़ी चूतड़ों को मुझसे मिला रही थी। मैंने उनसे कहा आप तो बड़ी सेक्सी है क्या आपके पति आपको नहीं चोदते है। वह कहने लगी मेरे पति तो नपुंसक हैं उनका लंड तो खड़ा ही नहीं होता आप जैसे मोटे लंड यदि मुझे हमेशा मिलता रहे तो मेरी जवानी सफल हो जाए। यह कहते हुए मैंने भी उन्हें बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए, उन्हीं धक्को के बीच में मेरा वीर्य गिर गया मेरा वीर्य उनकी योनि के अंदर जा गिरा और वह खुश हो गई। मैं भी वहां से मौसी के घर चला आया लेकिन सविता के साथ सेक्स करना मेरे लिए एक अलग ही अनुभव था।


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