ना चाहते हुए भी लंड ले ही लेती

Na chahte hue bhi lund le hi leti:

Antarvasna, hindi sex story प्रताप भैया मुझसे उम्र में 5 वर्ष बड़े है उनके और मेरे बीच बचपन में बहुत अच्छी बनती थी लेकिन जैसे-जैसे उम्र होती चली गई वैसे ही सब कुछ बदलता चला गया। मेरे और प्रताप भैया के बीच में अब पहले जैसी मस्ती नहीं होती थी और अब मैं शरारत भी नहीं करती थी क्योंकि हमारी उम्र हो चुकी थी। भैया की शादी पिताजी ने बड़े धूमधाम से करवाई शादी में हमारे जितने भी रिश्तेदार आए हुए थे सब लोग बहुत खुश थे और भैया भी अपनी शादी के बाद बहुत ज्यादा खुश थे। मेरी भाभी का नाम सुजाता है सुजाता भाभी ने भी हमारे परिवार को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया था और हमने भी भाभी को कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी। मैं अपने बीएड की पढ़ाई पूरी कर के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगी और उसी दौरान मुझे भोपाल से एक दिन नौकरी के लिए कॉल आया।

मैंने जब इस बारे में अपने पिताजी से बात की तो वह कहने लगे बेटा यदि तुम्हें वहां पर अच्छी नौकरी मिल रही है तो तुम भोपाल चले जाओ। मैं इस बात से खुश थी की पिताजी और मेरे घर के लोग मुझसे कितना प्यार करते हैं और उन्हें मुझ पर कितना भरोसा है। मैं जब भोपाल पढ़ाने के लिए चली गई तो वहां पर मेरी सहेली कोमल जोकि पहले से ही उस स्कूल में पढ़ाती थी। कोमल हमारे शहर इंदौर की रहने वाली है और कोमल स्कूल में मुझसे एक क्लास आगे थी लेकिन हम लोगों की बात होती रहती थी। जब मैंने उसे भोपाल में पहली बार देखा तो मैं खुश हो गई और हम दोनों एक ही स्कूल में पढ़ाने लगे थे इस बात से मैं और भी ज्यादा उत्साहित थी। करीब दो महीने बाद जब मैं अपने घर इंदौर गई तो वहां पर मुझे कुछ ठीक नजर नही आ रहा था सुजाता भाभी और प्रताप भैया के चेहरे को मैं पढ़ते हुए सोचने लगी कि क्या भैया और भाभी के बीच में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उन दोनों के बीच अब पहले जैसा प्रेम भाव और एक दूसरे के प्रति आदर नहीं है मुझे मेरे सवालों का उत्तर सिर्फ मेरी मां दे सकती थी। मैंने अपनी मां से जब इस बारे में पूछा तो मेरी मां मुझे कहने लगी बेटा मैं भी कुछ दिनों से देख रही हूं कि प्रताप और सुजाता एक दूसरे से अलग रहते हैं वह दोनों एक दूसरे से काफी कम बात किया करते हैं।

मेरी मां की चिंता भी बिल्कुल जायज थी उन्होंने यह बात अब तक पिताजी को नहीं बताई थी क्योंकि पिताजी का ब्लड प्रेशर बहुत जल्दी हाय हो जाता है इस वजह से मेरी मां उन्हें बिल्कुल भी परेशान नहीं करना चाहती थी। मेरी मां ने घर का पूरा संतुलन बना कर रखा हुआ था लेकिन अब तो जैसे मुट्ठी से रेत फिसलती जा रही थी मैं करीब 10 दिनों तक घर में रही लेकिन इन 10 दिनों में मुझे वह प्यार और एक दूसरे के प्रति सम्मान कहीं नजर ना आया। मैं कुछ दिन बाद वापस भोपाल आ चुकी थी मैं जब भोपाल आई तो मेरे भैया का मुझे फोन आया मैंने भैया से उस दिन काफी देर तक बात की करीब 10 वर्षों बाद हम दोनों ने फोन पर इतनी बात की थी। भैया मुझसे कुछ कहना चाहते थे लेकिन वह मुझसे कुछ कह ना सके और उसके बाद उन्होंने फोन रख दिया मैं चाहती थी कि भैया मुझसे अपनी परेशानी की वजह बताएं कि आखिरकार उनकी और सुजाता भाभी के बीच में क्या चल रहा है लेकिन भैया ने मुझे कुछ नही बताया। मैं उस दिन बहुत खुश थी क्योंकि मेरे भैया का फोन मुझे आया था और जब मैंने यह बात अपनी सहेली कोमल को बताई तो कोमल कहने लगी चलो इतने वर्षों बाद ही सही लेकिन तुम्हारे भैया ने तुम्हें फोन तो किया। मैंने भी अपनी मां को फोन कर दिया जब मैं अपनी मां से बात कर रही थी तो मेरे सामने जैसे पुरानी छवि चलचित्र की तरह आंखों के सामने आ रही थी। बात करते करते मेरी मां ने मुझे बताया कि सुजाता और तुम्हारे भैया के बीच में कल रात बहुत ज्यादा झगड़ा हुआ और तुम्हारे पिताजी को इस बारे में पता चल गया और वह परेशान हो गए उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है। मेरी मां ने जब मुझे यह बात बताई तो मैंने अपनी मां से कहा मां मुझे घर आना चाहिए तो मेरी मां कहने लगी बेटा तुम रहने दो बेवजह ही तुम भी परेशान हो जाओगी और मैं नहीं चाहती कि तुम भी किसी परेशानी में पड़ो।

मेरी मां के यह सब कहने पर मैंने उन्हें कहा ठीक है मां यदि बात ज्यादा आगे बढ़े तो आप मुझे बताइएगा मैं घर से जरूर आऊंगी वैसे मैंने अपनी मां को इस बारे में भी बता दिया था कि भैया से मेरी काफी देर तक बात हुई थी और भैया काफी परेशान नजर आ रहे थे। मेरी मां ने उस दिन फोन रखा तो मैं अब हर रोज घर पर फोन किया करती लेकिन बात अब बहुत आगे बढ़ चुकी थी आखिरकार मुझे भी घर जाना पड़ा। मैं जब घर गई तो मैंने अपनी भाभी से जानने की कोशिश की कि आखिरकार बात क्या है तो भाभी ने मुझे बताया तुम्हारे भैया मुझ पर बेवजह ही शक करते रहते है। उनके शक का कारण भाभी का एक दोस्त है जिस वजह से वह उन पर शक करते हैं मैंने भाभी से कहा आपने क्या भैया को उससे मिलवाया नहीं। भाभी कहने लगी मैंने एक दिन अपने दोस्त से तुम्हारे भैया को मिलवाया भी था लेकिन जब हम लोग घर आए तो वह कहने लगे कि तुम्हारा उसके साथ में कोई चक्कर चल रहा है मैं इस बात से बहुत परेशान हूं। मैंने अपनी भाभी से कहा भाभी आप बिल्कुल सही हैं और आपकी गलती कहीं भी नहीं है मैं इस बारे में भैया से जरूर बात करूंगी और आखिरकार मैंने इस बारे में भैया से बात की। मैंने भैया से कहा भैया आप तो ऐसे बिल्कुल भी नही थे लेकिन आप भाभी पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं कर रहे हैं आप ही बताइए ऐसे में भाभी क्या करें। भैया को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि वह अपने काम की वजह से परेशान थे। उन्होंने घर में किसी को भी नहीं बताया था कि उनका बिजनेस में बहुत बड़ा नुकसान हुआ है जिस वजह से वह काफी तनाव में भी रहने लगे थे लेकिन उसके बावजूद भी वह अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।

मैंने भैया से कहा भैया देखिए भाभी आपसे बहुत प्यार करती हैं और आप दोनों को अपने रिश्ते को पहले जैसा ही करने की कोशिश करनी चाहिए। भैया मेरी बात मान गये और उन्होंने अपने रिश्ते को पहले जैसे करने की कोशिश की लेकिन अब भैया और भाभी के बीच में जो दूरियां पैदा हो गई थी उसे मिटा पाना मुश्किल था। मेरे दिमाग में भी अब सिर्फ यही चल रहा था कि यदि कभी मैं भविष्य में शादी के बारे में सोचती हूं तो कहीं मेरे साथ भी ऐसा ना हो इसलिए मैं ऐसे रिश्ते से बचने की कोशिश करती हूं। मैंने अपने दिल के दरवाजे जैसे हमेशा के लिए बंद कर दिए थे और मैं किसी को भी कभी अपने दिल में आने नहीं देना चाहती थी। मुझे क्या पता था मेरे जीवन में सोहन मेरे दिल में दस्तक देगा। जब सोहन मेरे जीवन में आया तो मैं भी सोहन को मना ना कर सकी उसे मैंने स्वीकार कर लिया हम दोनों ही एक दूसरे को पूरी तरीके से स्वीकार कर चुके थे। मुझे भी सोहन के साथ कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि जल्दी ही हम दोनों के बीच में शारीरिक संबंध भी बन जाएंगे। सोहन और मेरे बीच में जब पहली बार किस हुआ तो हम दोनों एक दूसरे को लेकर उत्तेजित होने लगे। मेरी उत्तेजना पूरे चरम सीमा पर थी मैं ज्यादा देर तक सोहन को किस ना कर सकी मै उसे अपने से दूर करने की कोशिश करने लगी लेकिन सोहन मुझे कहने लगा मुझे तो तुम्हारे गुलाबी होठों को दोबारा से चूमना है। उसने मुझे दोबारा से अपनी ओर आने के लिए विवश कर दिया मैं और वह दोबारा से एक दूसरे के होठों को चुंबन करने लगे। सोहन ने अपने हाथों को मेरे स्तनों की तरह बढाया और मेरे स्तनों को दबाने लगा जिस प्रकार से सोहन मेरे स्तनों को दबा रहा था उससे मैं और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी।

मैं इतनी ज्यादा उत्तेजना में आ गई थी मैंने सोहन से कहा तुम्हारा लंड को मुझे अपने मुंह में लेना है और आखिरकार मैंने सोहन के लंड को अपने मुंह में ले लिया। जैसे ही मैंने सोहन के मोटे से लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो उससे मेरी उत्तेजना और भी ज्यादा चरम सीमा पर पहुंच गई और कुछ ही क्षणों बाद सोहन ने मुझसे कहा मुझे तुम्हारी योनि के अंदर लंड को डालना है। मै पहले तो घबरा रही थी लेकिन जब सोहन ने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मेरी सील टूट गई थी और मेरे खून की पिचकारी से सोहन का लंड नहाने लगा था। जैसे ही सोहन अपने लंड को अंदर बाहर करता जाता तो उससे मेरी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंच जाती। मैं ज्यादा समय तक सोहन के लंड को बर्दाश्त नहीं कर सकती थी यह बात मुझे भली भांति मालूम थी लेकिन उस वक्त मुझे बड़ा आनंद आ रहा था। मैं अपने मुंह से मादक आवाज मे सिसकिया ले रही थी मेरी सिसकियो से सोहन मेरी ओर आकर्षित होता जाता और काफी देर तक सोहन ने मेरा साथ दिया।

जैसे ही सोहन ने अपने वीर्य की पिचकारी से मुझे नहला दिया तो मैं सोहन को कहने लगी मैं अपने दिल में किसी को आने नहीं दूंगी सोहन अब तुमने मुझे अपना बना दिया है और अपना बना कर मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं तुम्हारी बाहों में रहूं। सोहन मुझे कहने लगा तुम अब हमेशा मेरे दिल और बाहों में रहोगी। उसके बाद तो सोहन का लंड लेने की मुझे आदत हो चुकी थी जब भी सोहन का मन होता तो वह मुझे अपने पास बुला लिया करता। मैं भी सोहन के पास दौड़ी चली जाती और उससे अपनी चूत मरवा दिया करती। मैं काफी मजे में आ जाती ऐसा ही काफी  समय तक चलता रहा लेकिन सोहन ने कुछ समय बाद किसी और के साथ संबंध बनाने शुरू कर दिए। मैं इस बात से बहुत परेशान रहने लगी थी लेकिन फिर भी सोहन मुझे खुश करने की कोशिश किया करता और ना चाहते हुए भी मैं उसके साथ सेक्स करने के लिए मजबूर हो जाती।


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