मुझे ऊपर से आने दो

Antarvasna, hindi sex story:

Mujhe upar aane do मैं अपने ऑफिस के बाहर बस का इंतजार कर रहा था लेकिन बस अभी तक आई नहीं थी और शाम के वक्त काफी भीड़ थी। जैसे ही बस आई तो सब लोग बस की तरफ दौड़े और बस पूरी तरीके से भर गई थी उसी बस में मैं हर रोज आता जाता था लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि उस दिन मेरी मुलाकात महिमा से हो जाएगी। मुझे बस में बैठने के लिए सीट मिल चुकी थी लेकिन महिमा को सीट नहीं मिली थी और वह काफी बीमार लग रही थी मैंने उसे बैठने के लिए सीट दी और उसे कहा कि तुम आराम से बैठ जाओ। मैंने अपने बैग से पानी की बोतल निकालते हुए उसे पानी पिलाया तो वह मुझे कहने लगी कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है मैंने उसे कहा कोई बात नहीं। वह सीट में बैठ चुकी थी मैं उसकी तरफ ही देख रहा था और जब उसका स्टेशन आया तो वह उतर गई, मुझे वहां से थोड़ा आगे और जाना था तो फिर मैं भी अपने स्टेशन पर उतर गया और अपने घर की तरफ मैं पैदल ही जा रहा था। मैं अपने घर की तरफ जा रहा था तो उस वक्त रास्ते में मेरी मुलाकात मेरे दोस्त निखिल से हुई मैंने निखिल को कहा निखिल तुम अभी कहां जा रहे हो। निखिल ने मुझे बताया कि वह आज एक प्रोग्राम में जा रहा है मैंने उसे कहा ठीक है निखिल हम लोग रात को मिलते हैं।

निखिल मेरे पड़ोस में ही रहता है और वह मेरे बचपन का दोस्त है निखिल कहने लगा ठीक है रजत मैं तुम्हें बाद में मिलता हूं निखिल जा चुका था। मैं अपने घर पहुंचा तो मेरी मां ने मेरे लिए गरमा गरम चाय बनाई मैं चाय पी रहा था और अपनी मां से मैं बात कर रहा था वह मुझे कहने लगी कि बेटा हम लोग कल अहमदाबाद जा रहे हैं। मैंने अपनी मां को कहा मां अहमदाबाद में क्या कोई काम है तो वह कहने लगी कि हां बेटा अहमदाबाद में जरूरी काम है अहमदाबाद में हमारे जो दूर के रिश्तेदार हैं उनके यहां शादी का फंक्शन है इसलिए हमें वहां जाना जरूरी है तुम्हारे पापा और मैं अहमदाबाद जा रहे हैं। मैंने मां से कहा लेकिन इस बारे में आप लोगों ने मुझे कुछ भी नहीं बताया तो मां ने मुझे कहा बेटा मुझे भी खुद इस बारे में कोई सूचना नहीं थी लेकिन जब तुम्हारे पापा ने आज दोपहर को मुझे फोन कर के इस बारे में बताया तो मैंने उन्हें कहा आपने इस बारे में मुझे कुछ भी नहीं बताया तो वह कहने लगे मेरे दिमाग से यह बात उतर गई थी लेकिन आज जब उन्होंने फोन किया तो हमें वहां जाना ही पड़ेगा।

मैंने मां से कहा लेकिन आप लोग वहां से वापस कब लौटेंगे वह कहने लगे कि बेटा हम लोग एक हफ्ते में वहां से वापस लौट आएंगे मैंने उन्हें कहा ठीक है मां, आप लोगों की ट्रेन कल सुबह की है क्या? वह कहने लगी कि हां हम लोगों की ट्रेन सुबह की है तुम्हारे पापा ने रिजर्वेशन करवा दिया था। अगले दिन मां और पापा अहमदाबाद के लिए निकल चुके थे वह लोग सुबह ही निकल चुके थे मैं अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था मां ने मेरे लिए नाश्ता बना दिया था मैंने नाश्ता किया और मैं अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था। मैं बस का इंतजार कर रहा था लेकिन बस अभी तक आई नहीं थी थोड़ी देर बाद ही बस आई और मैं बस में बैठ गया, मैं जब बस में बैठा तो मुझे उस वक्त सीट मिल चुकी थी क्योंकि बस खाली थी बस में ज्यादा भीड़ नहीं थी। बस अगले स्टॉप पर रुकी तो मैंने देखा महिमा भी बस में बैठ रही है मैंने महिमा की तरफ देखा नहीं लेकिन महिमा मेरे पास आकर बैठ गई मेरे सामने वाली सीट खाली थी इसलिए वह मेरे साथ बैठ गई। उसने मुझसे बात की और वह मुझसे कहने लगी कि रजत तुम क्या हमेशा इसी बस में जाते हो तो मैंने उसे कहा कि हां लगभग मैं घर से 9:00 बजे के आसपास ही निकलता हूं। महिमा ने मुझे कहा तुम्हारे घर में सब लोग ठीक है तो मैंने उसे बताया कि मेरे पापा मम्मी अहमदाबाद गए हुए हैं तो वह कहने लगी कि क्या वह कुछ काम से गए हैं। मैंने महिमा को बताया कि नहीं वहां हमारे किसी रिश्तेदार की शादी है इसलिए वह लोग वहां गए हुए हैं। महिमा को मैं काफी समय से जानता हूं महिमा से मेरी पहली मुलाकात मेरे दोस्त ने करवाई थी लेकिन महिमा से मेरी इतनी ज्यादा बातचीत नहीं थी परंतु उस दिन मुझे लगा की महिमा मेरे कुछ ज्यादा ही नजदीक आने की कोशिश कर रही है और उस दिन हम दोनों के बीच बहुत बात हुई। महिमा ने मुझे बताया कि उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी मैंने महिमा को कहा महिमा तुम अपनी तबीयत का ध्यान रखा करो वह कहने लगी कि उस दिन मुझे बहुत ही अजीब सा महसूस हो रहा था। महिमा अपने ऑफिस पहुंचने वाली थी तो महिमा ने मुझे कहा रजत हम लोग शाम के वक्त मिलते हैं मैंने महिमा को कहा ठीक है।

महिमा और मैं अब अपने ऑफिस के लिए निकल चुके थे मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन हमारे ऑफिस में मीटिंग होने वाली थी और उस मीटिंग में हमारे बॉस हमें कुछ बताने वाले थे। हमारी मीटिंग हुई और उसके बाद मैं अपना काम करने लगा मैं अपना काम कर रहा था कि तभी मैंने देखा कि निखिल का मुझे फोन आ रहा है मैंने निखिल का फोन उस वक्त उठाया नहीं लेकिन लंच टाइम में मैंने जब निखिल को फोन किया तो निखिल मुझे कहने लगा कि मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत थी। मैंने निखिल को कहा हां निखिल कहो ना तुम्हें क्या जरूरत थी निखिल ने मुझे कहा कि रजत मुझे कुछ पैसे चाहिए थे मैंने उसे कहा अभी तो मैं ऑफिस में हूं वह कहने लगा कि ठीक है तुम शाम को मुझे मिलोगे तो उस वक्त मुझे पैसे दे देना। मैंने निखिल को कहा ठीक है तुम मुझसे शाम के वक्त पैसे ले लेना। निखिल और मेरे बीच बहुत अच्छी दोस्ती है लेकिन ना जाने निखिल को पैसों की क्या जरूरत थी निखिल से जब मैं शाम के वक्त मिला तो निखिल घर पर आया हुआ था और वह मुझे कहने लगा कि रजत मुझे पैसों की जरूरत इसलिए है क्योंकि मैं कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहा हूं और मैं तुम्हारे पैसे जल्द ही लौटा दूंगा।

मैंने निखिल को कहा निखिल आज तक हम लोगों ने कभी भी पैसों को लेकर एक दूसरे से बात नहीं की है तुमने भी तो मेरी बहुत मदद की है निखिल कहने लगा कि हां रजत वह सब रहने दो लेकिन मुझे इस वक्त पैसों की जरूरत थी। मैंने निखिल की मदद कर दी थी और निखिल भी इस बात से बहुत खुश था कि मैंने उसकी मदद की। निखिल घर से जा चुका था और अगले ही दिन में अपने ऑफिस के ले जा रहा था तो महिमा मुझे सुबह के वक्त ऑफिस जाते वक्त बस में मिली। हम दोनों की मुलाकात हुई तो वह मुझसे बात करने लगी कुछ दिनों से मैं देख रहा था कि महिमा मुझसे कुछ ज्यादा ही नजदीक आने की कोशिश कर रही थी। मैंने महिमा से जब पूछा कि क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? वह मुझे कहने लगी मेरा बॉयफ्रेंड था लेकिन उस से कुछ दिनों पहले ही मेरा ब्रेकअप हो चुका है। मैने उसे कहा क्या उस दिन तुम्हारी तबीयत इसी वजह से खराब हुई थी? महिमा ने मुझे बताया हां मैं आपसे बहुत प्यार करती थी लेकिन अब मुझे उसकी असलियत पता चल चुकी है इसलिए मुझे वह बिल्कुल भी पसंद नहीं है। इस वजह से महिमा मेरी नजदीक आने की कोशिश कर रही थी क्योंकि महिमा को भी किसी की जरूरत थी और मुझे नहीं पता था कि महिमा और मेरे बीच इतनी जल्दी यह सब हो जाएंगा। मैं उसे अपने साथ घर आने के लिए कहूंगा तो वह मेरे घर भी आ जाएगी। यह उस वक्त हुआ जब मम्मी पापा घर पर नहीं थे मेरे लिए यह अच्छा मौका था। महिमा घर पर आई हुई थी हम दोनों साथ में बैठे हुए थे जब दो जवां दिल साथ में हो तो शायद कोई भी अपने आपको नहीं रोक सकता। मैंने महिमा को किस किया उससे वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है और मैंने महिमा को बहुत देर तक किस किया।

मैने महिमा के होठों को चूम लिया था और उसके होठों को चूम कर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं सिर्फ उसे किस किस करता ही जाऊं। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो माहिमा ने उसे अपने हाथों में ले लिया और महिमा ने मेरे लंड को अपने हाथों में लेते हुए हिलाना शुरू किया मुझे भी मज़ा आ रहा था। महिमा ने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया उससे मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा और वह बहुत देर तक मेरे लंड को चूसती रही। मैंने महिमा के कपड़े उतारे और उसके बदन को मैंने ऊपर से लेकर नीचे तक चाटना शुरू कर दिया था महिमा की चूत को मैंने बहुत दर तक चाटा और उसकी चूत से निकलता हुआ पानी इतना अधिक होने लगा था कि वह अपने आपको बिल्कुल रोक नही सकी और अपनी चूत मे  उंगली घुसाने लगी। मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था और जिस प्रकार से मैं अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था उससे वह इतनी अधिक खुश हो रही थी कि मुझे उसे धक्के मारने में बहुत मजा आ रहा था।

महिमा मेरा पूरा साथ दे रही थी और मुझे भी इस बात की बहुत खुशी थी महिमा मेरे साथ सेक्स कर रही है। महिमा ने मुझे कहा मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करने में बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने महिमा के होठों को बहुत देर तक चूसा लेकिन जब महिमा ने मुझे कहा मुझे तुम्हारे ऊपर आना है। महिमा ने अपनी चूत के अंदर मेरे लंड को समा लिया वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करने लगी जिससे कि मेरे अंदर की गर्मी और भी अधिक बढ़ने लगी। वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करती तो मुझे और भी ज्यादा मजा आता काफी देर तक उसने ऐसा ही किया आखिरकार हम दोनों इतने ज्यादा गरम हो गए कि मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सका और ना ही वह अपने आपको रोक पा रही थी। मैंने अपने वीर्य को महिमा की चूत के अंदर गिरा ही दिया उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी देर तक बैठे रहे और बहुत देर तक एक दूसरे से बात की। मुझे और महिमा को जब भी मौका मिलता है तो हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करते हैं।


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