मुझे तुम अपना बना लो

Mujhe tum apna bana lo:

antarvasna, kamukta मुझे बचपन से ही होटल इंडस्ट्री में जाना था, मेरी जब 12वीं की परीक्षा पूरी हो गई तो उसके बाद मैं अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहा था और जब मेरा रिजल्ट आ गया तो उसके बाद मैंने अपने पिताजी से बात की और उन्हें कहा कि मैं होटल मैनेजमेंट का कोर्स करना चाहता हूं, वह मुझे कहने लगे बेटा हमारे परिवार से तो कोई भी होटल इंडस्ट्री में नहीं है तुम क्यों इस में जाना चाहते हो? मैंने उन्हें कहा पापा मुझे अपना शौक पूरा करना है और मुझे इसी में एक नाम हासिल करना है इसलिए आप मुझे मत रोकिए। उन्होंने कहा ठीक है बेटा तुम किसी अच्छे कॉलेज के बारे में पता कर लेना और उसके बाद मुझे उस बारे में बता देना। मेरे पापा ने आज तक मुझे किसी भी चीज के लिए मना नहीं किया वह बड़े ही अच्छे व्यक्ति हैं और मैंने कुछ दिनों बाद उन्हें एक कॉलेज के बारे में बताया वह मेरे साथ खुद उस कॉलेज में आए और जब उन्होंने वहां पर देखा तो वहां सब कुछ अच्छा था और उन्होंने मुझे उस कॉलेज में दाखिला दिलवा दिया।

जब मेरे होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी हो गई तो उसके बाद कई होटलो से मुझे जॉब के ऑफर आने लगे और हमारे कॉलेज में भी प्लेसमेंट के लिए कई बड़े होटलों के मैनेजर आए हुए थे, मेरा सिलेक्शन दुबई के एक होटल में हो गया मैं बहुत ही खुश था क्योंकि यह मेरी पहली ही जॉब थी और जब दुबई में मेरा सिलेक्शन हुआ तो मेरे पिताजी भी काफी खुश थे, मुझे एक अच्छी सैलरी मिलने वाली थी, मैं जब दुबई गया तो उस होटल में काम कर के मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने करीब दो वर्ष तक वहां पर काम किया, दो वर्षों बाद मुझे जब चेन्नई के एक बड़े होटल से ऑफर आया तो मैंने सोचा मुझे वहीं चले जाना चाहिए, मैं अब चेन्नई के उस 4 स्टार होटल में काम करने लगा, मैंने जब वहां जॉइनिंग की तो मैंने उनसे कहा मैं कुछ दिनों बाद घर जाना चाहता हूं, मैं कुछ समय तक वहां काम करता रहा और उसके बाद मैं अपने घर मेरठ लौट आया, मैं जब मेरठ आया तो मेरे पापा कहने लगे बेटा तुम तो जैसे घर का रास्ता भूल ही चुके हो, मैंने कहा नहीं पापा ऐसा कुछ नहीं है आपको तो पता है मैं अपने काम के प्रति कितना सीरियस हूं, मेरी मम्मी कहने लगी बेटा गगन तुम अपने काम को लेकर बहुत सीरियस हो हमें पता है लेकिन तुम्हारा हमारे प्रति भी तो कोई जिम्मेदारी है और हम लोग भी तुम्हारे लिए इतना तड़प रहे हैं क्या तुम हमें कभी याद करते हो, मैंने उन्हें कहा मम्मी मैं तो आपको हमेशा ही याद करता हूं और आप लोगो के बिना मेरा जीवन अधूरा है।

मैं जितने दिनों तके घर पर रुका उतने दिन पापा मम्मी बहुत खुश थे और जब मैं वापस चेन्नई चले गया तो मैं अपने काम पर लग गया, उसी होटल में मेरी मुलाकात श्वेता से हुई श्वेता हाउसकीपिंग का काम करती है और उसे मेरी उससे अच्छी बातचीत होने लगी, हम दोनों के बीच दोस्ती होने लगी थी। श्वेता चेन्नई की रहने वाली है इसलिए उसे मुझसे बात करने में थोड़ा प्रॉब्लम होती है क्योंकि उसे हिंदी ठीक से समझ नहीं आती लेकिन वह दिखने में बहुत सुंदर, बहुत ही सिंपल और साधारण है इसीलिए मैं उसे पसंद करता हूं। श्वेता मुझे एक दिन अपने घर पर पर ले गई और उसने मुझसे अपने परिवार के सदस्यों से भी मिलवाया, उसके परिवार के सब लोग बड़े ही अच्छे और सिंपल साधारण हैं, जिस दिन हमारी छुट्टी थी उस दिन श्वेता कहने लगी आज हम लोग कहीं घूमने के लिए चलते हैं, मैंने उसे कहा लेकिन मैं यहां ज्यादा किसी को नहीं जानता और हम लोग घूमने कहां जाएंगे? वह मुझे कहने लगी हम लोग घूमने के लिए मेरे दोस्तों के साथ चलते हैं। मैं उसके दोस्तों से मिला तो उसकी एक सहेली मुझसे बात करने लगी और उसने श्वेता से कहा कि क्या यह तुम्हारा बॉयफ्रेंड है? मैंने यह बात तो समझ ली थी लेकिन श्वेता ने उसके बाद कोई जवाब नहीं दिया, उसकी इस बात से श्वेता के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई थी, मैंने उसकी बात से अंदाजा लगा लिया कि श्वेता तो मुझे पसंद करने लगी है और उसके दिल में भी मेरे लिए कुछ चल रहा है, उस दिन जब हम लोग सब साथ में टाइम बिता रहे थे तो मैंने श्वेता को पूछ ही लिया कि क्या तुम मुझे पसंद करने लगी हो?

उसने मेरी बात का जवाब नहीं दिया लेकिन उसके हाव-भाव से मुझे यह लग गया था कि वह मुझे प्यार करने लगी है, मैंने श्वेता से कहा तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और तुम जिस प्रकार से मेरे बारे में सोचती हो मुझे बहुत अच्छा लगता है, श्वेता कहने लगी देखो गगन तुम मुझे अच्छे लगते हो लेकिन मैं तुम्हें यह नहीं कह सकती कि मैं तुम्हें पसंद करती हूं क्योंकि यह रिलेशन फिर आगे जाकर शादी तक पहुंच जाऐगा और मैं अपने परिवार वालों से पूछे बिना कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती जिससे कि उन्हें मेरे फैसले से तकलीफ पहुंचे इसीलिए मैं तुम्हें इस बात का जवाब नहीं दे सकती हालांकि तुम मुझे बहुत पसंद हो तुम्हारे जैसा अच्छा और नेक लड़का मुझे मिल पाना शायद मुश्किल है, मैं तुम्हें इस बात का जवाब नहीं दे सकती। मैंने भी अब इस बात को अपने दिमाग से निकाल दिया था लेकिन हम दोनों के बीच पहले जैसी ही अच्छी दोस्ती थी। जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे हम दोनों के बीच में प्यार पनपने लगा, हम दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे। श्वेता का नजरिया भी पूरा बदल चुका था और लेकिन जब मैंने उससे फोन पर बात की तो उस दिन हम दोनों की सेक्स को लेकर बात होनी शुरू हो गई, मैंने उस दिन उसका फिगर भी पूछ लिया, उस रात मैंने उसका नाम की मुठ मारी। जब हम दोनों के बीच सेक्स को लेकर बातें हो चुकी थी तो हम दोनों एक दूसरे के साथ संभोग करने के लिए तैयार थे, मैं जब श्वेता को अपने साथ लेकर अपने रूम मे आया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत डर लग रहा है। मैंने उसे कहा डरने की कोई बात नहीं है यह तो जीवन का एक पहलू है।

वह जब मेरे साथ बिस्तर पर लेटी हुई थी तो वह मुझे कहने लगी मैं नहीं कर पाऊंगी लेकिन मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसे कहा मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। वह कहने लगी मैं ऐसा नहीं कर पाऊंगी मैंने आज तक कभी भी ऐसा नहीं किया, मैंने उसे कहा सब कुछ पहली बार ही होता है तुम एक बार ट्राई करके तो देखो। उसने मेरे लंड को अपने मुंह मे लिया तो वह कहने लगी तुम्हारे लंड से तो बहुत बदबू आ रही है। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं थोड़ी देर बाद सब सही हो जाएगा। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और सकिंग करने लगी वह बड़े अच्छे से मेरे को चूस रही थी, वह जिस प्रकार से मेरे लंड को चूस रही थी मेरा लंड एकदम से तन कर खड़ा हो गया और मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने उसे कहा तुम बड़े अच्छे से मेरे लंड को चूस रही हो, मैंने जब उसके कपड़े खोलने शुरू किए तो वह मुझसे शर्मा रही थी लेकिन उसे बाद में अच्छा लगने लगा। जैसे ही मैंने उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाना शुरू किया तो वह पूरे जोश में होने लगी। मै उसके स्तनों का रसपान अपने मुंह से करने लगा मैंने काफी देर तक उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसा जिससे कि उसकी और मेरी गर्मी बढ़ गई। जब मैंने उसकी मुलायम और चिकनी चूत पर अपने लंड को लगा दिया वह पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि के अंदर घुसाया तो वह मुझे कहने लगी तुमने तो आज मुझे अपना बना लिया, अब तुम मुझे तेजी से चोदना शुरू कर दो। मैं उसे तेजी से चोद रहा था, मैं उसे जिस गति से धक्के मार था उसकी योनि से उतनी ही तेजी से पानी बाहर निकलने लगा। मै उसकी टाइट योनि का आनंद ज्यादा समय तक नहीं ले पाया, मेरा वीर्य पतन कुछ ही मिनट बाद हो गया, जब मेरा वीर्य उसकी योनि में गिर गया तो वह मुझे कहने लगी आज तुमने मुझे अपना बना लिया, मैं तुमसे बहुत खुश हूं। उसके बाद उसने मुझे अपना लिया लेकिन हम दोनों के बीच अभी भी शादी को लेकर ऐसी कोई बात नहीं हुई है परंतु हम दोनों एक दूसरे के हो चुके हैं। यह श्वेता का मेरे साथ पहला सेक्स था जिस प्रकार से मैंने और उसने सेक्स का आनंद लिया हम दोनों एक दूसरे से बहुत खुश हो गए।


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