मुझे तो आपसे ही सील तुडवानी है

Mujhe to aapse hi seal tudwani hai:

Hindi sex story, kamukta मेरी शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं और मैंने अपने घरवालों की मर्जी से शादी की थी मेरी मुलाकात जब पहली बार मीना से हुई तो वह मुझे अच्छी लगी हम दोनों की जब भी फोन पर बात होती या हम दोनों एक दूसरे से मिलते तो हम दोनों को अच्छा लगता। हम दोनों की जल्द ही शादी हो गई शादी के पांच वर्ष बीत गए कुछ पता ही नहीं चला सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था हमारा एक तीन वर्ष का लड़का भी है मेरे माता पिता हमारे साथ ही रहते हैं और मैं एक सरकारी नौकरी में हूं जिस वजह से मेरा ट्रांसफर बेंगलुरु में हो गया। मेरा ट्रांसफर जब बेंगलुरु में हुआ तो मुझे कुछ समय तो वहां पर अकेले ही रहना पड़ा क्योंकि मैं नहीं चाहता था वहां पर मेरी पत्नी और बच्चे को कोई दिक्कत हो इसलिए मैं उस वक्त वहां पर अकेले ही रहा हालांकि मुझे हमारे सरकारी क्वार्टर मिल चुका था लेकिन उसके बावजूद भी मैंने सोचा कुछ समय तक वह लोग मेरे माता पिता के पास रह लेंगे इसलिए मैं उन्हें अपने साथ बेंगलुरु लेकर नहीं आया।

अब सब कुछ ठीक होने लगा था मुझे भी बेंगलुरु में दो-तीन महीने हो चुके थे और अब वहां के लोग भी मुझे पहचानने लगे थे जिस जगह मैं रहता था वहां आस-पड़ोस में भी सब लोग मुझे पहचानने लगे थे। मैंने एक दिन अपनी पत्नी मीना को फोन किया और उसे कहा मैं कुछ दिनों के लिए छुट्टी आ रहा हूं वह लोग कहने लगे ठीक है आप घर आ जाइए वैसे भी आप से मुलाकात हुए काफी समय हो चुका है। मैं भी अपने परिवार से मिलने के लिए बेताब था क्योंकि इतने समय से मैं अपने परिवार से नहीं मिल पाया था तीन महीने उनसे अलग रहना मेरे लिए बड़ा ही तकलीफ दायक था क्योंकि मुझे उस वक्त खुद ही खाना बनाना पड़ता था और उसके बाद मुझे ऑफिस जाना पड़ता था। जब मैं घर पहुंचा तो मेरी पत्नी ने मुझे गले लगा लिया मैंने उसे कहा क्या तुम्हें मेरी इतनी याद आ रही थी तो वह कहने लगी मैं आपको क्या बताऊं मुझे आपकी कितनी याद आ रही थी लेकिन आपने तो इस बीच में फोन ही नहीं किया मैंने मीना से कहा मैं तुम्हें फोन करना चाहता था लेकिन ऑफिस से आने के बाद अपने लिए खाना बनाना पड़ता था और उसके बाद मैं इतना थक जाता था कि मेरी फोन करने की हिम्मत ही नहीं हो पाती थी।

मेरी पत्नी का प्यार भी अपनी जगह लाजमी था और उसकी बातें भी अपनी जगह ठीक थी मैं जब अपने माता पिता से मिला तो वह लोग भी खुश हो गए और कहने लगे बेटा तुम्हारी नौकरी कैसी चल रही है मैंने उन्हें कहा मेरी नौकरी तो ठीक चल रही है लेकिन मैं सोच रहा था आप लोग भी मेरे साथ बेंगलुरू चले। मेरे पिताजी मुझे कहने लगे बेटा हम लोग वहां आकर क्या करेंगे हम लोग यही ठीक है मैंने उन्हें कहा लेकिन आप लोगों को मेरे साथ आना ही पड़ेगा क्योंकि मुझे वहां पर बहुत अकेला महसूस होता है और आपके सिवा मेरा है ही कौन। मैं घर में एकलौता हूं इसलिए मेरे माता-पिता की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर ही है पापा भी अब रिटायर हो चुके हैं और वह घर पर ही रहते हैं इसलिए मैंने सोचा उन्हें भी अपने साथ ही ले चलते हैं और मेरी मम्मी भी हमारे साथ आ जाएगी तो मेरी पत्नी को भी अच्छा लगेगा लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया मैंने सोचा मैं अभी कुछ दिनों तक तो घर पर रहने वाला हूं इस बीच उन्हे मना लूंगा। मैं घर पर ही था और अगले दिन मेरी बहन का फोन आया जब उसका फोन मुझे आया तो वह कहने लगी भैया मैंने सुना आप छुट्टी लेकर घर आए हुए हैं मैंने उसे कहा हां मैं घर पर आया हूं वह मुझे कहने लगी मुझे आपसे मिलना था मैंने उसे कहा ठीक है तो तुम घर पर ही आ जाओ वह कहने लगी कल हम लोग घर पर आ जाएंगे कल इनकी भी छुट्टी होगी तो हम लोग आपस में मुलाकात भी कर लेंगे। मेरी बहन के पति बैंक में जॉब करते हैं और मेरी बहन घर का काम संभालती हैं उसकी शादी को भी दो वर्ष हो चुके हैं और उसका मेरे साथ बहुत ज्यादा लगाव था जिस वजह से वह मुझसे मिलने के लिए आ रही थी क्योंकि इतने समय से उससे भी मेरी मुलाकात नहीं हो पाई थी और जब मैंने अपनी पत्नी मीना को बताया कि  शिखा भी घर पर आने वाली है तो वह कहने लगी चलिए इस बहाने उससे भी मुलाकात हो जाएगी काफी समय से वह भी हमें मिली नहीं है।

शिखा भी घर पर आ गई उसके पति भी उसके साथ आए हुए थे शिखा ने मुझे गले लगाया और कहा भैया मैं आपसे कितने समय बाद मिल रही हूं मैंने शिखा से कहा मैं भी तो तुमसे काफी समय बाद मिल रहा हूं। अब वह लोग हॉल में बैठे हुए थे सब लोग आपस में बात कर रहे थे और शिखा तो मेरी पुरानी बातों को सबके सामने बड़े ही अच्छी तरीके से पेश कर रही थी जिससे कि सब लोग हंस रहे थे घर का माहौल बड़ा ही अच्छा था इतने समय बाद पिताजी और मां खुश थे क्यों की शिखा का नेचर बड़ा ही अच्छा है और उसके आते ही घर में रौनक आ जाती है। वह लोग उस दिन घर पर ही रुक गए और अगले दिन वह लोग चले गए मेरी भी छुट्टियां खत्म होने वाली थी मैंने पापा मम्मी को अपने साथ आने के लिए मना लिया और मेरी पत्नी भी तैयार हो चुकी थी हम लोगो ने बेंगलुरू जाने की तैयारी कर ली थी मैंने ट्रेन की टिकट करवा ली और जब हम लोग ट्रेन में बैठे हुए थे तो मीना मुझे कहने लगी मेरा मोबाइल तो घर पर ही रह गया मैंने उसे कहा कोई बात नहीं हम लोग वहां जाकर नया मोबाइल ले लेंगे और उसके बाद हम लोग बेंगलुरु पहुंच गए। जब हम लोग बैंगलुरु पहुंचे तो पापा कहने लगे यहां का माहौल काफी अच्छा है उन्हें वहां बहुत अच्छा लगा मीना ने भी घर को बड़े अच्छे से संभाल लिया था अब मैं अपने ऑफिस आराम से जाया करता और मुझे घर की कोई भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं थी सब कुछ बड़े ही अच्छे से चल रहा था मेरे माता-पिता भी बहुत खुश थे क्यों की उनकी खुशी इसी वजह से थी कि वह लोग भी हमारे साथ में रह रहे हैं।

जिस दिन मेरी छुट्टी होती है उस दिन हम लोग कहीं घूमने के लिए चले जाया करते थे जिससे की मीना और मेरे माता पिता को अच्छा लगता और मैं भी बहुत खुश होता अब पड़ोस में भी सब लोग हमें पहचानने लगे थे। मेरी पत्नी मीना की तो पड़ोस में ही रहने वाली एक भाभी से बड़ी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी वह हमारे घर पर कभी कबार बैठने के लिए आ जाया करती थी जिससे कि मीना का समय भी कट जाया करता था। हम लोग कभी साथ में मूवी देखने के लिए चले जाया करते थे मेरी शिखा से फोन पर कम ही बात होती थी लेकिन मेरी मम्मी और मीना की शिखा से हमेशा बात होती रहती थी मीना मुझे हमेशा बता दिया करती थी कि उसकी बात शिखा से होती रहती है। सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था और मैं भी बहुत खुश था क्योंकि मेरा परिवार मेरे साथ था और अब मेरे भी दोस्त बनने लगे थे, बेंगलुरु में मेरे लिए आना बड़ा ही अच्छा था हमारा ऑफिस भी काफी बड़ा था और वहां पर काफी स्टाफ है। हमारे स्टाफ में एक नई लड़की आती है उसने कुछ दिन पहले ही जॉइनिंग की थी वह बेंगलुरु की रहने वाली है उसका नाम कोमल है। कोमल मेरी जूनियर है इसलिए वह मेरे पास काम के लिए आया करती थी और वह जब भी मुझसे बात करने के लिए आती या फिर उसे मुझसे कोई काम होता तो अनचाहे में वह मेरे हाथ को छू दिया करती या फिर जान-बूझकर मुझे कहीं ना कहीं टच किया करती।

मुझे पहले तो बड़ा ही अजीब सा लगा लेकिन जब मुझे एहसास हुआ कि उसे भी मुझसे कुछ चाहिए तो मैंने भी मौके को नहीं छोड़ा और मैंने एक दिन कोमल से कहा क्या तुम आज शाम को फ्री हो तो वह कहने लगी हां मैं तो आज फ्री हूं। मैं उसे ऑफिस के बाद अपने साथ घुमाने के लिए ले गया हम दोनों कार में ही बैठ कर बात करते रहे और काफी देर तक हम दोनों की बातें होती रही। जब उसने मुझसे कहा मुझे आप बड़े अच्छे लगते हैं और जब भी मैं आपको देखती हूं तो मेरे अंदर एक अलग ही फीलिंग आ जाती है। यह बात सुनकर मैं जोश में आ गया और मैंने उसके होठों को चूम लिया वह खुश हो गई, उसके बाद तो यह सिलसिला आम होने लगा। वह मुझसे अपने सील तुडवाना चाहती थी वह मुझसे कहती सर आज कहीं चलते हैं लेकिन इस बीच मुझे समय नहीं मिल पाया परंतु एक दिन मेरा भी मन उसे देखकर डोल गया और मैं उसे लेकर अपने साथ चला गया। मैं उसे एक होटल में लेकर चला गया और वहां पर मैंने कोमल की सील तोड़ी मैने कोमल की गोद में बैठा लिया, वह मेरे गोद में बैठी तो कहने लगी सर मुझे आपके होठों को किस करना है।

मैंने उसे कहा इसमें पूछने की क्या बात है मैंने और उसने काफी देर तक किस किया, मैंने जब उसके कपड़े उतारे तो उसने पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थी और उसकी गांड कका ऊभार साफ दिखाई दे रहे थे, मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गया और अपने आप पर काबू नहीं रख सका। मैंने अपने लंड को कोमल के मुंह में डाल दिया और वह मेरे लंड को संकिग करने लगी काफी देर तक उसने ऐसा ही किया  उसे मेरे लंड को संकिग करने में बड़ा मजा आ रहा था। जब मैंने उसकी टाइट चूत में अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाते हुए कहने लगी सर मेरी सील टूट चुकी है। मैंने उसे कहा तुम अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लो उसने अपने दोनों पैरों को खोलते हुए मुझे कहा अब तेजी से ऐसे ही धक्के दीजिए। मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए उसके मुंह से चीख निकलने लगी। मैं बड़ी तेजी से उसे धक्के देता हम दोनों ने करीब 5 मिनट तक एक दूसरे के शरीर का सुख भोगा, मेरा वीर्य जैसे ही कोमल की योनि के अंदर तेजी से गिरा तो वह कहने लगी सर आज आपने मेरी इच्छा पूरी कर दी। मैंने उसे कहा आज के बाद तुम मुझे कभी सर मत कहना तुम मेरा नाम लेकर मुझे बुलाओगी मेरा नाम रोशन है और वह खुश हो गई।


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