मुझे ठोकते रहो मालिक

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Mujhe thokte raho malik मैं बाथरूम से नहा कर बाहर निकला ही था कि एकाएक मेरे फोन की घंटी बज उठी मेरे फोन की घंटी बजते ही मैंने अपने फोन को उठाया और सामने से एक रॉक धार और कड़क आवाज में किसी ने हेलो कहा। मैंने उन्हें हेलो का जवाब देते हुए कहा कौन बोल रहे हैं तो वह मुझे कहने लगे कि क्या तुम्हारे पापा घर पर है मैंने उन्हें कहा पापा तो घर पर नहीं है लेकिन आपको क्या कोई जरूरी काम था। उन्होंने कहा कि हां उनसे मुझे जरूरी काम था इसलिए उन्हें फोन किया था जब वह घर आ जाए तो उनको बताना की कर्नल साहब का फोन था। मैंने कहा ठीक है मैं बता दूंगा और उन्होंने उसके अलावा मुझसे कोई और बात नहीं की और फोन रख दिया पापा कुछ देर बाद घर लौटे तो वह मुझे कहने लगे कि दीपक बेटा तुम अपनी मम्मी को दुकान से ले आओगे।

मैंने पापा से कहा हां पापा मैं उन्हें मार्केट से ले आता हूं शायद मम्मी की तबीयत खराब हो गई थी इसलिए मुझे ही मम्मी को लेने के लिए जाना पड़ा। मैं मम्मी को लेने के लिए अपनी मोटरसाइकिल से चला गया मैं जब दुकान पर गया तो देखा मम्मी दुकान में ही बैठी हुई थी। मम्मी को दुकान चलाते हुए काफी समय हो चुका है मम्मी अपनी कॉस्मेटिक की शॉप को पिछले 20 वर्षों से चला रही है और उनके चेहरे पर कभी भी थकावट या फिर गुस्सा मैंने नहीं देखा वह अपने काम से बहुत खुश हैं। पापा ने उन्हें कई बार मना भी किया और कहा कि तुम्हें दुकान करने की क्या जरूरत है लेकिन उसके बावजूद भी मम्मी ने कभी पापा की एक ना सुनी और वह अपने दुकान में ही बिजी रहती हैं। मैंने मम्मी से कहा चलो मम्मी मम्मी कहने लगी बेटा मेरी मदद कर देना थोड़ा सामान को सही से रख देते हैं। मैंने मम्मी से कहा ठीक है मम्मी मैं आपकी मदद कर देता हूं मैंने अपनी मोटरसाइकिल को दुकान के बाहर ही खड़ा कर दिया और मम्मी के साथ मैं मदद करने लगा। मम्मी के साथ दुकान में काम करने वाली लड़की भी हमारी मदद करने लगी वह मम्मी के साथ काफी समय से काम कर रही है। हम लोगों ने दुकान का सारा सामान अच्छे से रख दिया था और उसके बाद मैं मम्मी को अपने साथ घर ले आया मम्मी मुझसे कहने लगी कि बेटा तुम्हारी पढ़ाई तो ठीक चल रही है ना।

मैंने मम्मी से कहा हां मम्मी मेरी पढ़ाई अच्छी चल रही है मम्मी अपने काम में व्यस्त रहती है और पापा भी अपने जॉब में ही बिजी रहते हैं इसलिए उन दोनों के पास मेरे लिए बहुत कम समय हो पाता है। अब हम लोग घर पहुंच गए थे जब हम लोग घर पहुंचे तो उस वक्त पापा कहने लगे तुमने अच्छा किया जो अपनी मम्मी को ले आए। मैंने मम्मी से कहा मम्मी आप आराम कर लीजिए मम्मी आराम करने लगे क्योंकि मम्मी के पैर में दर्द हो रहा था घर में काम करने वाली नौकरानी ने घर का खाना बना दिया था और वह अपने घर जा चुकी थी। मम्मी ने कुछ देर आराम किया और तभी मुझे ध्यान आया कि पापा को मुझे बताना था कि उनके किसी दोस्त का फोन आया था। मैंने पापा से कहा कि पापा आज कर्नल साहब का फोन आया था तो पापा कहने लगे दीपक बेटा तुमने मुझे क्यों नहीं बताया तो मैंने पापा से कहा पापा मेरे दिमाग से यह बात निकल गई थी। पापा कहने लगे चलो कोई बात नहीं मैं अभी कर्नल को फोन कर देता हूं पापा ने उसी वक्त कर्नल साहब को फोन कर दिया। मुझे उनके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था लेकिन जब पापा ने मुझे बताया कि कर्नल साहब और वह बचपन के दोस्त हैं वह कुछ दिनों के लिए बेंगलुरु आने वाले हैं और वह हमारे घर पर ही रुकेंगे। मम्मी और पापा उनको अच्छे से जानते थे लेकिन मैं उनसे कभी मिला नहीं था और ना ही मैंने उनके बारे में सुना था परंतु जिस दिन वह आए तो उस दिन पापा ने मम्मी से कहा कि तुम आज दुकान पर मत जाना क्योंकि कर्नल बहुत समय बाद यहां आ रहे हैं। पापा और कर्नल साहब की दोस्ती बहुत पुरानी है और मैं भी उनसे मिलने वाला था पापा ने भी मुझे उनके कुछ किस्से सुना दिए थे जिससे कि मैं उनका दीवाना हो गया था।

जब पापा ने मुझे कर्नल साहब से मिलवाया तो उनकी कद काठी और शरीर देखकर मैंने पापा से कहा पापा के दोस्त तो कितने लंबे हैं। कर्नल साहब बहुत कम बातें कर रहे थे लेकिन वह जो भी बातें करते वह सब सोच समझ कर ही करते थे वह कुछ दिनों के लिए हमारे घर पर ही रुकने वाले थे। पापा मम्मी दोनों ही खुश थे क्योंकि वह पापा मम्मी के साथ ही पढ़ाई किया करते थे अब इतने सालों पुरानी उनकी दोस्ती थी तो वह लोग एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश थे। कर्नल साहब हमारे घर पर करीब 5 दिन रूके मेरी उनसे बहुत कम ही बात हुई लेकिन जितनी भी उनसे बात हुई उससे मुझे पता चला कि वह दिल के बहुत ही अच्छे हैं और अब वह दिल्ली वापस लौट चुके थे। उनकी पोस्टिंग दिल्ली में ही थी और मेरे भी कॉलेज में एग्जाम शुरू होने वाले थे मेरे कॉलेज के एग्जाम शुरू हो चुके थे और जब मेरे कॉलेज का पहला एग्जाम था उस वक्त मुझे थोड़ा घबराहट महसूस हो रही थी क्योंकि मैंने पूरे वर्ष कोई भी पढ़ाई नहीं की थी लेकिन फिर भी मुझे अब अच्छे से पढ़ाई तो करनी ही थी। मैं पूरी रात भर पढाई करने पर लगा रहा लेकिन मुझे कुछ भी याद नहीं हो रहा था मेरे दिमाग में ना जाने क्या-क्या ख्याल आ रहे थे और मुझे तो लगा कि शायद मैं अब फेल ना हो जाऊं। मैं अगले दिन अपने पेपर देने के लिए चला गया जैसे तैसे पेपर तो मेरा ठीक हो चुका था। घर आकर पापा पूछने लगे कि बेटा तुम्हारा पेपर तो ठीक हुआ ना मैंने उन्हें बताया हां पापा पेपर तो ठीक रहा।

मैं अपने एग्जाम के टेंशन में तो था लेकिन एग्जाम के दौरान मेरा एक हफ्ते के अंतराल पर पेपर था। घर की नौकरानी को देखकर मेरी नियत खराब होने लगी थी। मैंने अपने घर की नौकरानी से कहा कि आज तुम मुझे खुश कर दो। वह कहने लगी आप यह किस प्रकार की बातें कर रहे हैं मैंने उसे पैसों का लालच देते हुए अपने पास बुला लिया। वह मेरे कमरे में आ गई जब वह कमरे में आई तो मैंने दरवाजा बंद कर लिया और नौकरानी की बड़े और भारी भरकम स्तनों को मैं दबाने लगा। वह मुझे कहने लगी आप बड़े अच्छे तरीके से मेरे स्तनों को दबा रहे हैं मैंने उसके होठों को भी चूसना शुरू कर दिया था। मेरा लौंडा अब मेरे अंडरवियर से बाहर आने की कोशिश करने लगा था वह मुझे कहने लगा मुझे अब आजाद कर दो। कुछ मिनटो की चुम्मा चाटी के बाद मैंने उसे अपनी गोद में बैठाया मैंने जब उसकी साड़ी को उतारा तो वह मुझे कहने लगी आप पहले मेरे स्तनों को तो दबाते रहिए। मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू किया और मैंने उसके स्तनों को दोबारा दबाया। वह मुझे कहने लगी आप मेरी ब्रा को उतार दीजिए मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी ब्रा को भी उतार देता हूं। मैंने उसकी ब्रा को फाड़ दिया और उसे उतारकर एक कोने में फेंक दिया मेरा मन उसकी चूचियों को महसूस करने का हो रहा था और मैं उसकी चूचियो को पीने लगा अब में समुद्र की गहराई में उतरने लगा था और समुद्र में गोते लगाने लगा था। वह अपने मुंह से मादक आवाज मे सिसकिया भरने लगी थी और उसके मुंह से अनेकों प्रकार की आवाज निकलती। मैंने उसकी चूचियों का पूरा रस निचोड़ कर पी लिया था और अब उससे दूध भी बाहर निकलने लगा था। मैं अपने एक हाथ से नौकरानी के बालों को सहलाने की कोशिश कर रहा था और दूसरे हाथ से मैं उसके स्तनों को दबाया जा रहा था। मैंने जब नौकरानी से कहा कि तुम मेरे लंड को हिलाओ और उसे हिला कर मुठ मारने की कोशिश करो।

वह मेरे लंड को हिलाने लगी और उसने मेरे लंड को खड़ा कर दिया था मैंने भी तेजी से उसकी पैंटी को उतार फेंका और उसकी चूत को मै चाटने लगा। मैं अपनी जीभ से नौकरानी की चूत को अच्छे से चाटे जा रहा था। जब मैं अपनी जीभ को उसकी योनि के छेद में घुसाता तो उसे मजा आ जाता मैं उसकी चूत की झिल्ली को चाटे जा रहा था। वह अपने मुंह से तरह-तरह की आवाज निकालती कभी वह उफ्फ कहती तो कभी वह आह कहती। वह बहुत ही ज्यादा मचलने लगी थी और मैंने तो काफी समय से किसी को चोदा भी नहीं था मैंने उसकी चूत की भरपूर तरीके से चूसाई कर दी थी जिससे कि बहुत झड़ने लगी थी। मैं उसके चूत का सारा पानी अपने मुंह के अंदर लेकर पीने लगा मेरा लंड नौकरानी की चूत की तरफ देख रहा था और वह अंदर जाने के लिए बेताब था। नौकरानी भी अपने आपको ना रोक सकी उसने मेरे अंडरवियर को उतारते हुए मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो मेरा लंड 9 इंच मोटा था वह उसे अपने मुंह में लेकर अच्छे से चूसने लगी। वह मेरे लंड पर ऐसे लपकी और उसे ऐसे चूस रही थी जैसे कि मेरा लंड कोई चूसने की वस्तु हो।

वह बड़े ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी और चूस चूस कर उसने उसे गिला बना दिया था हम दोनों ही बिस्तर पर बैठ चुके थे। नौकरानी ने मुझे कहा कि लंड को मेरी चूत में डाल दो और मुझे चोदते रहो। मैंने उसे कहा पहले तुम घोड़ी बन जाओ और मैंने उसे घोड़ी बना दिया। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और उसके बाद मैंने उसे अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया क्योंकि चूत पूरी गीली हो चुकी थी इसलिए मेरा लंड आसानी से अंदर चला गया लंड अंदर गया तो नौकरानी के मुंह से चीख निकली। मैंने कोई भी परवाह किए बिना तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए अब मैं पूरी मस्ती में आ चुका था वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी। वह कहती आज तुम मेरी चूत का भोसड़ा बना दो 5 मिनट के बाद जब नौकरानी झड़कर बेहाल हो गई तो मैंने उसकी योनि से अपने लंड को बाहर निकाल लिया। मैंने नौकरानी के साथ उस दिन 5 बार लंबी चुदाई का आनंद लिया। अब कई बार वह मुझे थका देती है और कई बार मैं उसे थका दिया करता हूं।


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