मुझे लंड लेने दो

Mujhe lund lene do:

Hindi sex stories, kamukta मैं हर दिन की तरह अपने ऑफिस के लिए घर से निकला था मैं एक सरकारी कर्मचारी हूं और मैं भोपाल का रहने वाला हूं मेरी बचपन में पढ़ाई भी भोपाल में ही हुई है। मेरे पिताजी भी सरकारी कर्मचारी थे इसलिए उन्होंने भोपाल में रहने का ही फैसला किया उन्होंने भोपाल में ही एक घर ले लिया, मेरी नौकरी भी भोपाल में लग चुकी थी और मुझे काम करते हुए 7 वर्ष हो चुके हैं मैं हमेशा ही अपने ऑफिस के लिए घर से समय पर निकल जाता हूं मेरी शादी को भी 5 वर्ष हो चुके हैं और मेरा शादीशुदा जीवन भी अच्छा चल रहा है। मेरे पिताजी रिटायरमेंट होने के बाद अब घर पर ही रहते हैं उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता इस वजह से वह घर से बाहर कम ही जाया करते हैं मैं उन्हें कई बार कहता हूं कि आप घूमने के लिए चले जाया कीजिये लेकिन वह कहीं नहीं जाते। एक दिन पापा मुझे कहने लगे बेटा क्या तुम आज मुझे तुम्हारे चाचा जी के घर छोड़ दोगे मैंने उन्हें कहा जी पिताजी क्यों नहीं।

मैंने उन्हें अपने चाचा जी के घर पर छोड़ दिया और जब पिताजी उनसे मिले तो वह बहुत खुश थे मैंने उन्हें कहा मैं शाम को आपको लेने के लिए आ जाऊंगा और यह कहते हुए मैं अपने ऑफिस के लिए निकल गया। जब मैं पापा को लेकर घर जा रहा था तो मैंने देखा सामने वाले घर में कोई सामान शिफ्ट कर रहा है मैंने अपने पापा से पूछा क्या आपको पता है यहां सामने कौन रहने आया है पापा कहने लगे मुझे तो नहीं पता लेकिन इतना सुना है कि कोई व्यक्ति है जो इटावा के रहने वाले हैं और शायद किसी सरकारी विभाग में हैं। कुछ ही दिनों बाद मेरी मुलाकात मेरे पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति से हुई उनका नाम गोपाल है जब मैं उनसे मिला तो उनसे मिलकर मुझे अच्छा लगा वह बहुत ही खुशमिजाज इंसान हैं उनसे मेरी दोस्ती अच्छी हो चुकी थी हम लोगों की बातचीत अक्सर होती रहती थी क्योंकि वह हमारे पड़ोस में ही रहते हैं और हमारे घर के सामने वाला घर होने की वजह से उनकी पत्नी भी मेरी पत्नी से मिलने आ जाया करती थी। गोपाल और उनकी पत्नी बड़े व्यवाहरिक है वह दिल के बड़े अच्छे हैं।

मेरी पत्नी को भी अच्छा लगता था जब उनकी पत्नी हमारे घर पर आ जाया करती थी उनकी पत्नी का नाम सुधा है और सुधा भाभी जब भी मुझे मिलती तो हमेशा कहती भाई साहब क्या मंजू आज घर पर है मैं उन्हें कहता जी भाभी मंजू आपका ही इंतजार कर रही है और फिर वह खुश हो जाती। गोपाल भैया और हम लोग शाम के वक़्त एक साथ बैठा करते थे हमारी सोसायटी के अंदर ही एक जूस की दुकान है शाम के वक्त वहां पर भीड़ रहती है इसलिए हम लोग वहां पर जाया करते थे। जब भी गोपाल भैया वहां आते तो सब लोगों के चेहरे पर एक रौनक सी आ जाती उनके चुटकुले सुनकर सब बहुत खुश होते हैं और उनकी पुरानी बातें तो बड़ी मजेदार होती सब लोग उनकी बातें बड़े ही ध्यान से सुना करते थे दिन-ब-दिन गोपाल भैया कॉलोनी में फेमस होते जा रहे थे और अब कॉलोनी में अधिकांश लोग उन्हें पहचाने लगे थे। जिस दिन मेरी छुट्टी थी उस दिन मैं अपने घर के छत पर बैठा हुआ था और मैं गाने सुन रहा था तभी गोपाल भैया आ गए और वह कहने लगे अरे दिनेश भैया क्या कर रहे हो? मैंने उन्हें कहा बस बैठकर पुराने गाने सुन रहा था वह कहने लगे तो फिर आप हमें भी कुछ गाने सुना दीजिए। वह भी पुराने गानों के बड़े शौकीन हैं और उन्होंने जब मुझसे फरमाइश की तो मैंने उनकी फरमाइश सुनकर गाने लगा दिए हम दोनों बैठ कर आराम से गाने सुन रहे थे तभी मेरी पत्नी मंजू आई और वह कहने लगी मैं आपके लिए कुछ बना दूं मैंने उसे कहा गोपाल भैया से पूछो वह क्या खाएंगे। गोपाल भैया कहने लगे जो आप को ठीक लगे आप हमारे लिए बना दीजिए मेरी पत्नी चली गई और हम दोनों एक साथ बैठकर गाने का आनंद ले रहे थे करीब एक घंटा हो चुका था तभी मंजू आई और कहने लगी मैंने आप लोगों के लिए गाजर का हलवा बनाया है मैंने मंजू से कहा तुमने इतनी जल्दी कैसे बना लिया तो वह कहने लगी मैं वैसे भी आज आप लोगों के लिए हलवा बनाने ही वाली थी तब तक गोपाल भैया आ गए तो सोचा अभी बना देते हैं। जब गोपाल भैया ने वह हलवा खाया तो वह कहने लगे अरे मंजू भाभी आपके हाथो में तो वाकई में जादू है आप तो बड़ा ही लाजवाब गाजर का हलवा बनाते हैं सुधा तो ऐसा हलवा नहीं बना पाती क्या आप भी सुधा को सिखा देंगे मंजू कहने लगी हां गोपाल भैया क्यों नहीं।

करीब आधे घंटे और गोपाल भैया हमारे साथ बैठे रहे उसके बाद वह घर चले गए हम दोनों के परिवारों में बहुत घनिष्ठा हो चुकी थी कभी भी कोई काम होता तो सबसे पहले गोपाल भैया हमें याद किया करते थे मेरे पिताजी और मेरी मां के साथ तो उनकी बहुत अच्छी बनती थी और उनका मिजाज ही कुछ ऐसा था कि जो भी उनसे मिलता था वह तो उनके बारे में ही बात किया करता था। एक दिन हमारी कॉलोनी में कुछ प्रोग्राम था उस प्रोग्राम में भी गोपाल भैया ने अपने चुटकुले जब मंच से सुनाए तो सब लोग खुश हो गए और उसके बाद गोपाल भैया ने बड़ा ही जबरदस्त डांस किया सारी कॉलोनी में वह बहुत फेमस है और मेरी दोस्ती भी उनसे बहुत अच्छी हो चुकी थी। मेरी पत्नी हमेशा कहती कि गोपाल भैया बड़े ही अच्छे हैं और तुम्हें उनसे कुछ सीखना चाहिए मैं अपनी पत्नी से कहता की मैं उनकी तरह तो शायद नहीं हो सकता लेकिन मैं तुम्हें प्यार जरूर करता हूं वह मुझे कहने लगी हां यह तो तुम बिल्कुल सही कह रहे हो वह तो हर एक चीज में आगे रहते हैं और उनकी तो बात ही अलग है। इस बात से मैं कभी-कभार थोड़ा बहुत जल जाता था लेकिन फिर मैं सोचता था कि गोपाल भैया भी तो कौन सा यह सब पहले से ही सीखे होंगे उन्होंने भी तो इन सब चीजों को सीखने में समय लगाया होगा मैं भी उनसे कभी-कभार थोड़ी बहुत टिप्स ले लिया करता था वह भी मुझे हमेशा कुछ न कुछ बताया ही करते थे।

अब यह सिलसिला काफी समय तक चलता रहा था एक दिन गोपाल भैया के परिवार में कुछ मेहमान आए हुए थे और उन्होंने मुझे और मंजू को भी घर पर बुला लिया और कहा आज आप लोगों के लिए हमारे घर में ही खाना बनेगा मैंने उन्हें कहा लेकिन मम्मी पापा भी तो घर में हैं मंजू ने कहा कि कोई बात नहीं मैं उन लोगों को खाना खिला दूंगी उसके बाद ही हम लोग गोपाल भैया के घर पर चलेंगे। जब मंजू ने यह बात कही तो मैंने मंजू से कहा ठीक है पहले तुम पापा मम्मी के लिए रात का खाना बना देना उसके बाद हम लोग गोपाल भैया के घर पर चलेंगे। उस दिन मेरी पत्नी ने पापा मम्मी के लिए खाना बना दिया उसके बाद हम लोग गोपाल भैया के घर पर चले गए उनके घर पर उनके मामाजी और उनका परिवार आया हुआ था उन्होंने हमें उनसे परिचित करवाया उनके मामा भी बैंक में नौकरी करते हैं और उनकी मामी स्कूल में अध्यापिका है और उनका बड़ा लड़का इंजीनियरिंग कर रहा है उनकी लड़की भी आई हुई थी वह भी कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी उनके लड़के का नाम विमल है और उनकी लड़की का नाम मीना। हम सब लोगों ने साथ में डिनर किया वह लोग कुछ दिनों तक गोपाल भैया के घर पर रुकने वाले थे उनके मामा का मिजाज भी बिल्कुल गोपाल भैया के जैसा ही था वह भी बड़े हंसमुख और बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं। गोपाल भैया कहने लगे जब भी मैं मामा से मिलता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है हम लोगों ने उनके साथ में काफी अच्छा समय बिताया, मैंने उनके मामा से कहा आप हमारे घर पर आइएगा वह कहने लगे क्यों नहीं हम लोग जरूर तुम्हारे घर पर आएंगे और उसके बाद हम लोग अपने घर लौट आए। मेरी पत्नी मंजू मुझे कहने लगी गोपाल भैया के मामा भी बिल्कुल उनकी तरह ही हैं उनकी शक्ल और सूरत भी बिल्कुल उनसे मिलती है और नेचर भी बिल्कुल उनकी तरह ही है।

मैंने कहा हां तुम बिल्कुल सही कह रही हो उसके बाद हम लोग अपने घर पर आकर सो गए। कुछ दिनों बाद गोपाल भैया के मामा और उनका परिवार हमारे घर पर आया, मैंने उन्हें अपने पिताजी और मां से मिलवाया वह लोग उनसे मिलकर बहुत खुश हुए, जब हम सब लोग साथ में बैठे हुए थे तभी उनकी लड़की मीना ने मुझसे पूछा आप बथरुम किधर है। मैंने उन्हें कहा मैं आपको दिखा देता हूं मैं अपने बेडरूम के वॉशरूम में मीना को ले गया, मेरी पत्नी मंजू किचन में काम कर रही थी। मेरे माता-पिता और वह लोग साथ मे बैठकर बात कर रहे थे, जब मैं मीना को बाथरूम में लेकर गया तो वह मुझसे लिपटने लगी। मैं यह सब देखकर थोड़ा डर सा गया क्योंकि मुझे बहुत डर लग रहा था परंतु वह अपने बदन को मुझसे मिलाने लगी, मैं समझ नहीं पाया कि आखिरकार मीना को क्या चाहिए। जब वह मुझसे अपने बदन को मिला रही थी तो उसके बदन की गर्मी का एहसास मुझे हो रहा था उसने मेरे लंड को पकड़ते हुए बाहर निकाल लिया और उसे अपने मुंह के अंदर तक लेने लगी। जब वह मेरे लंड को अपने मुंह मे लेकर सकिंग करती तो मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होता, मैंने भी बहुत देर तक मीना से अपने लंड को चुसवाया, वह अच्छे से मेरे लंड को सकिंग कर रही थी।

जब मैंने उसके कपड़े उतारकर उसकी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाते हुए कहने लगी आपका मोटा लंड तो बहुत ही अंदर चला गया। मैंने उसे कहा यदि कोई देख लेगा तो वह कहने लगी जल्दी से आप अपना काम कीजिए। मैं तेजी से धक्के दे रहा था और वह भी अपन चूतडो को मिला रही थी उसके मुंह से मादक आवाज आ रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, मैं उसे धक्के दे रहा था। मैंने काफी देर तक उसे धक्के दिए वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई। जब वह झड़ गई तो मैं उसे धक्के देता रहा कुछ क्षणो बाद मेर वीर्य पतन मीना की योनि में हो गया। उसने जल्दी से मेरे वीर्य को साफ किया और हम दोनों बाहर आ गए, मेरी पत्नी मंजू मुझे पूछने लगी तुम इतनी देर तक कहां थे। मैंने उसे कहा मैं अपना कुछ काम कर रहा था उसके कुछ देर बाद मीना भी वापस आ गई और हम सब लोग आपस में बैठे रहे, हमने काफी देर तक बात की फिर वह लोग चले गए।


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