मुझे बिस्तर पर पटक दिया

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Mujhe bistar par patak diya मैं अपनी सहेली की शादी में गई हुई थी जब मैं उसकी शादी में गई तो उसकी शादी के दौरान मेरी मुलाकात सुनील के साथ हुई शादी में जब मैं सुनील से मिली तो सुनील से मिलकर मुझे अच्छा लगा। मैं लखनऊ की रहने वाली हूँ मैं अपनी सहेली की शादी में बनारस गई हुई थी तो उसके बाद मैं लखनऊ वापस लौट आई लेकिन सुनील से मेरी बात फोन पर होती थी। हम दोनों की बातें फोन पर अक्सर होने लगी थी और मुझे सुनील के साथ बात करना अच्छा लगने लगा था लेकिन मुझे नहीं पता था कि सुनील से मैं प्यार करने लगी हूं और सुनील भी मुझसे प्यार करता है। एक दिन यह बात सुनील ने मुझसे फोन पर कहीं तो मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं उस दिन काफी खुश थी मैं सुनील से मिलना चाहती थी लेकिन मैं सुनील से मिल नहीं पा रही थी।

सुनील और मेरे बीच की दूरी तो इतनी नहीं थी लेकिन पापा ने मेरे लिए लड़का देखना शुरू कर दिया था वह चाहते थे कि मेरी शादी हो जाए परन्तु मैं किसी तरीके से उन्हें टालने की कोशिश कर रही थी और कोई ना कोई बहाना मैं बना दिया करती थी लेकिन शायद मैं अब ज्यादा समय तक उन्हें मना नहीं कर सकती थी। उन्होंने मुझे ना जाने कितने ही लड़कों से मिलवाया मैं चाहती थी कि सुनील और मैं शादी कर ले मैं सुनील के साथ शादी करना चाहती थी लेकिन सुनील मुझे हमेशा ही कहता रहा कि राधिका हम लोग थोड़े समय बाद शादी कर लेंगे लेकिन उसके बाद ना तो सुनील से मेरी शादी हो पाई और ना ही सुनील से मैंने उसके बाद कभी बात की। मेरी सगाई रजत के साथ हो चुकी थी रजत जो की एक कंपनी में मैनेजर के पद पर थे और उनका परिवार भी काफी सम्पन था इसलिए मेरे पापा ने रजत से मेरी शादी तय कर दी। जब मैं पहली बार रजत से मिली तो मैंने रजत से कहा कि मैं शादी के बाद जॉब करना चाहती हूं रजत को भी इससे कोई आपत्ति नहीं थी रजत और मेरे ख्यालात एक-दूसरे से काफी मिलते थे। मैं रजत को पसंद तो नहीं करती थी लेकिन मुझे रजत से शादी करनी ही थी और कुछ समय बाद मेरी शादी रजत के साथ हो गई।

जब रजत से मेरी शादी हुई तो पापा ने शादी में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रखी उन्होंने बड़े ही धूमधाम से मेरी शादी रजत के साथ कारवाई। हमारे सारे रिश्तेदार भी शादी में आए हुए थे सुनील ने उसके बाद मुझसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन मैंने सुनील से अपने सारे संपर्क खत्म कर लिए थे और मैं उससे कभी बात करना ही नहीं चाहती थी। उसने मुझे हमेशा ही धोखे में रखा वह मुझे अक्सर कहता रहा कि मैं तुमसे मिलने के लिए जरूर आऊंगा लेकिन ना तो सुनील मुझे कभी मिला और ना ही हम दोनों की बात आगे बढ़ पाई। हम दोनों ने काफी समय तक एक दूसरे से फोन पर ही बात की और उसके बाद सुनील मेरी जिंदगी से दूर हो चुका था अब रजत और मेरी शादी हो चुकी थी तो रजत मेरा काफी ध्यान रखते थे। रजत तो अपने काम में काफी बिजी रहते थे इसलिए वह मुझे कम ही समय दिया करते थे मैंने भी एक कंपनी ज्वाइन कर ली थी और वहां पर मैं जॉब करने लगी थी मैं भी जॉब करती थी इसलिए जॉब करने के दौरान मेरी ऑफिस में ही काम करने वाली सुमन के साथ अच्छी दोस्ती हो गई। सुमन से जब मेरी दोस्ती हुई तो मुझे सुमन के साथ काफी अच्छा लगता था और सुमन भी मेरे साथ काफी अच्छे से बात किया करती हम दोनों ऑफिस खत्म हो जाने के बाद साथ ही घर आया करते थे। कुछ दिनों से सुमन ऑफिस नहीं आ रही थी मैंने उसे फोन किया तो वह फोन भी नहीं उठा रही थी मैंने उस दिन सोचा कि क्यों ना मैं सुमन के घर चली जाऊं। उस दिन मैं जब सुमन के घर पहुंची तो सुमन काफी ज्यादा उदास थी मुझे नहीं पता था कि सुमन की मां का देहांत हो चुका है जिस वजह से सुमन ऑफिस नहीं आ पा रही थी। जब मैंने सुमन से इस बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया कि मां की तबीयत अचानक से बिगड़ गई थी जिसके बाद उनकी तबीयत काफी ज्यादा खराब होने लगी और उन्हें अस्पताल ले गए तो वहां पर उनकी मृत्यु हो गई। मैंने जब यह बात सुनी तो मुझे भी काफी बुरा लगा मैं तो हर रोज ऑफिस जा रही थी और काफी दिनों तक सुमन ऑफिस नहीं आई लेकिन थोड़े समय बाद सुमन ने ऑफिस आना शुरू कर दिया।

जब वह ऑफिस आने लगी तो सुमन धीरे धीरे अब ठीक होने लगी थी क्योंकि सुमन को अपनी मां के देहांत का काफी ज्यादा दुख था जिस वजह से वह बहुत परेशान भी थी और मैं भी सुमन के दुख से काफी ज्यादा परेशान थी। सुमन मुझसे कहती की मुझे अपनी मां की बहुत याद आती है लेकिन अब सुमन धीरे धीरे इस बात को भूलने लगी थी और सुमन ने भी शादी करने का फैसला कर लिया था। सुमन के पापा ने उसके लिए लड़का देख लिया था और सुमन ने उसके साथ शादी करने का फैसला कर लिया सुमन की शादी जल्दी होने वाली थी मैं भी सुमन की शादी में गई थी। इस बात को काफी समय हो चुका था और सुमन की शादी हो जाने के बाद उसने अब ऑफिस आना भी छोड़ दिया था उसने ऑफिस से रिजाइन दे दिया। मैंने भी कुछ समय के बाद ऑफिस से रिजाइन दे दिया था क्योंकि मैं दूसरे ऑफिस में जॉब करना चाहती थी। मेरी बात सुमन से होती रहती थी सुमन से जब भी मैं बात करती तो मुझे उससे बात करके अच्छा लगता।

मेरा शादीशुदा जीवन अच्छे से चल रहा था लेकिन रजत मुझे समय नहीं दे पाते थे इसलिए मैं अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए अपने दोस्तों से फोन पर बात कर लिया करती थी। एक दिन रजत के चाचा जी का लड़का हमारे घर पर आया हुआ था उसका नाम अजीत है अजीत दिखने में बहुत ही ज्यादा हैंडसम है। वह मेरे साथ बैठा हुआ था मैंने अजीत को कहा अजीत तुम्हारी तो बहुत सारी गर्लफ्रेंड होंगी? वह कहने लगा भाभी मेरी तो कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं है मैं सिंगल ही हूं। मुझे अजीत को देखकर हमेशा अच्छा लगता और कई बार तो मुझे ऐसा लगता कि काश मेरी शादी अजीत से हुई होती उसकी कद काठी और उसके गठीले शरीर को देखकर मुझे हमेशा ही अच्छा लगता। एक दिन जब अजीत और मैं साथ में बैठे हुए थे तो उस दिन अजीत मुझसे बात कर रहा था मैं उसकी तरफ देख रही थी जब अजीत ने मुझे कहा कि भाभी आपका फिगर बड़ा ही अच्छा है तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि अजीत मुझसे ऐसी बात भी कर सकता है। मै अजीत के साथ अब बातें करने लगी थी हम दोनों एक दूसरे के नजदीक आने लगे थे जब उसने मेरे होठों को चूमकर मुझे बिस्तर पर पटक दिया। मैंने उसे कहा लगता है तुम मुझे पहले से ही चोदना चाहते थे। वह मुझे कहने लगा आज मेरा बहुत ज्यादा मन हो रहा था वह बहुत ज्यादा खुश था।  मैने रजत के साथ काफी दिनों से सेक्स नहीं किया था। अजीत मेरे स्तनों को दबाने लगा था वह जब मेरे स्तनों को दबा रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से वह मेरे स्तनों को दबाता उससे मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और मैं बहुत ज्यादा खुश हो रही थी। अजीत मुझे कहने लगा मुझे वाकई में बहुत ज्यादा मजा आ रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे बस आपके बदन के मजे लेता रहूं। अजीत ने मेरे स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें चूसकर वह बहुत ज्यादा खुश था अब उसने मेरी चूत को सहलाना शुरू किया।

जब मैंने अपने पैरों को खोला तो उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डालना शुरू किया और कहने लगा भाभी आपकी योनि तो बहुत ही ज्यादा टाइट है। मैंने उसे कहा अजीत मुझे इतना ना तड़पाओ मैं बिल्कुल भी रह ना पा रही हूं। अजीत मुझसे कहने लगा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। जब उसका लंड मेरी चूत के अंदर जाने लगा तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैं काफी तेज आवाज मे सिसकिया ले रही थी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। अजीत मुझे ऐसे धक्के मार रहा था जैसे कि वह मेरी चूत फाड़ कर रख देगा थोड़ी देर बाद उसका माल मेरी चूत मे गिर गया जब उसका माल मेरी योनि में गिरा तो मैंने अजीत को कहा तुम अपने लंड को मेरी चूत में दोबारा से डाल दो। मैने अपनी चूत को साफ कर लिया मैंने अपनी चूतडो को अजीत की तरफ किया अजीत ने जैसे ही मेरी चूत के अंदर लंड घुसाया तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और मैं काफी ज्यादा खुश हो गई थी।

मैं अजीत से अपनी चूतड़ों को टकराए जा रही थी और मुझे अजीत के साथ सेक्स करना बहुत अच्छा लग रहा था। अजीत ने मुझे पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया था उसका लंड मेरी योनि के अंदर जा रहा था उससे मेरी गर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती और मुझे ऐसा लगता बस मे अजीत के साथ संभोग करती रहू। अजीत मेरी इच्छा को पूरा करता जा रहा था। अजीत काफी देर तक ऐसे ही मेरी इच्छा को पूरा करता रहा उसने मुझे कहा अब मेरा वीर्य गिरने वाला है। मैंने अजीत से कहा तुम मेरी चूत मे वीर्य गिरा दो। अजीत ने मेरी योनि मे वीर्य गिरा दिया और मेरी इच्छा को पूरी तरीके से शांत कर दिया था। मैं इस बात से काफी ज्यादा खुश थी जिस तरह अजीत ने मेरे साथ संभोग किया था। मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गई उसके बाद तो अजीत ने मेरे साथ कई बार सेक्स किया। अजीत मेरी सेक्स की इच्छा को अच्छे से पूरा कर दिया करता था और मुझे उसके साथ सेक्स करना बहुत अच्छा लगता।


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