मुंह और चूत मे पहली बार लंड

Muh aur chut me pahli baar lund:

Hindi sex story, antarvasna हाईवे से कुछ दूरी पर हमारा घर है उस दिन रात के वक्त मुझे आने में देर हो गई थी क्योंकि मैं अपने ऑफिस के काम में बिजी थी। मेरे पापा को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था मैं रात को अपने ऑफिस से ऑटो लेकर घर पहुंची तो मैंने देखा पापा भी घर पहुंच चुके थे। पापा की कार घर के बाहर ही खड़ी थी मैं देखकर समझ गई कि पापा आ चुके हैं लेकिन मुझे देर हो चुकी थी इसलिए मुझे पापा से डर भी लग रहा था। मैं सोचने लगी यदि पापा से मेरा सामना हो जाएगा तो मैं उन्हें क्या जवाब दूंगी क्योंकि पापा की पीने की वजह से मुझे उनसे रात के वक्त बहुत डर लगता था। वह मम्मी को भी कई बार डांट दिया करते थे इसलिए मैंने भी हल्के से अपने घर के दरवाजे को धक्का दिया तो वह अंदर की तरफ खुल गया। मैंने जैसे ही अंदर कदम रखा तो मैं दबे पांव जाने लगी।

मैंने देखा पिताजी सोफे पर बैठे हुए थे वह टीवी देख रहे थे। मैं अपने कमरे की ओर बढ़ी मैंने पीछे पलट कर भी नहीं देखा मैं जब अपने कमरे में चली गई तो मैंने दरवाजे को बंद किया और लेट गई। मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई सुबह के वक्त जब मेरी आंख खुली तो मुझे शोर सुनाई दे रहा था शोर काफी बढ़ता जा रहा था। मैं जब अपने रूम से बाहर आई तो पापा घर की सफाई करवा रहे थे वह नौकरानी को निर्देश देते कि तुम अच्छे से सफाई करो और कहते कि वहां देखो कितना गंदा है। पापा ने मुझे देख लिया तो वह मुझसे कहने लगे गुनगुन बेटा आज तो तुम्हारे ऑफिस की छुट्टी होगी? मैंने पापा को बड़े ही धीमी स्वर में कहा हां पापा आज ऑफिस की छुट्टी है आज शनिवार है। वह मुझे कहने लगे ठीक है मैं तुम्हारे रूम की भी सफाई करवा देता हूं। मैंने जल्दी से अपने रूम को ठीक कर लिया क्योंकि मेरा रूम पूरी तरीके से अस्त-व्यस्त पड़ा था मेरे कपड़े इधर-उधर बिखरे हुए थे मैंने उन्हें ठीक कर दिया ताकि पिताजी को ऐसा न लगे कि मैं बहुत लापरवाह हूं। पिताजी डिसिप्लिन के बहुत पक्के हैं वह गंदगी पसंद नही करते हैं इसीलिए मैंने अपने कपड़ों को ठीक कर लिया।

मैं नहाने के लिए बाथरूम में चली गई तब तक पापा ने रूम की सफाई भी करवा दी थी मैं जैसे ही नहा कर बाहर आई तो मैंने अपने रूम को देखा रूम अच्छे से साफ हो चुका था। मैंने पापा से कहा पापा आपने तो अच्छे से सफाई करवा दी है वह कहने लगे हां बेटा नौकरो को पहले अच्छे से समझाना पड़ता है तभी वह लोग काम करते हैं। पापा घर के नौकरों से अच्छे से काम करवाया करते थे। नाश्ते का भी टाइम हो चुका था मुझे काफी तेज भूख लग रही थी मैंने अपने फ्रिज को खोल कर देखा तो फ्रीज में सेब था मैंने सेब निकाला और मैं सेब खाने लगी। पापा कहने लगे बेटा तुम्हारी मम्मी आती ही होगी मेरी मम्मी मेरे मामा जी के घर गई हुई थी और मम्मी आने वाली थी। पापा ने तब तक नाश्ता भी बनवा लिया था मम्मी कुछ देर बाद आ गई हम सब लोगों ने साथ में बैठकर नाश्ता किया। पापा के तीखे सवालों से मैं बचने की कोशिश कर रही थी लेकिन फिर भी उन्होंने मुझसे पूछ ही लिया आगे तुमने क्या सोचा है? मैंने पापा से कहा पापा मैं तो अभी जॉब कर रही हूं फिलहाल आगे के बारे में मैंने ऐसा कुछ नहीं सोचा है लेकिन पापा तो मेरी शादी के पीछे पड़े हुए थे और वह मेरी शादी करवाना चाहते थे परंतु मैं अभी शादी नहीं करना चाहती थी। मैंने जल्दी से नाश्ता किया और मैं अपने रूम में चली गई मैं अपने रूम में गई तो मैंने एक पुराना नोवल खोला उसे मे काफी समय से पढ़ नहीं पाई थी मैंने उसे खोल कर पढ़ना शुरू किया।  मेरे पिताजी ने मुझे आवाज दी और कहने लगे गुनगुन बेटा बाहर आना। मैं बाहर गई तो पिताजी सोफे पर बैठे हुए थे उनके हाथ में तस्वीर थी मेरी समझ में नहीं आया कि वह मुझसे क्या कहना चाहते हैं लेकिन उन्होंने मुझे वह तस्वीर देते हुए कहा बेटा मैंने तुम्हारे लिए एक लड़का पसंद किया है। मेरे पास कोई जवाब नहीं था मैं चुपचाप उनके चेहरे की तरफ देखती रही। वह मुझसे पूछने लगे मैंने तुम्हारे रिश्ते की बात कर ली है मैं इस बात से चौक गई। मैंने अपने पापा से पूछा आप एक बार मुझसे पूछ तो लेते लेकिन उनके सामने सवाल करना मतलब मुसीबत खुद ही मोल लेना था।

मैंने उस वक्त कुछ नहीं कहा मैं अपने रूम में चली गई। उन्हें भी लगा कि शायद मैं उनकी बात मान चुकी हूं और उन्होंने मेरी सगाई पक्की कर दी। पापा से कुछ भी पूछना ठीक नहीं था मैंने भी सगाई कर ली मेरी सगाई हो चुकी थी मैं अपना जीवन अपने तरीके से जीना चाहती थी। मेरे पापा ने मुझे अपने जीवन को अपने तरीके से जीने ही नहीं दिया उन्होंने मेरे ऊपर आज भी वही पुराने रीति रिवाज थोप रखे थे जो पुराने समय से चलते आए थे। मेरी सगाई हो चुकी है लेकिन मैंने अपने दिल से स्वीकार नहीं किया था। मेरी सहेली के भैया उनसे मेरी मुलाकात हुई तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं उनसे पूरी तरीके से प्रभावित हो चुकी हूं। मैंने उनसे अपनी नजदीकिया बढ़ानी शुरू कर दी हम दोनों की फोन पर बातें और मिलना जुलना लगा रहा जिससे कि हम दोनों को एक दूसरे से प्यार होने लगा। हम दोनों ने प्यार का इजहार एक दूसरे से नहीं किया था मैंने राकेश से अपनी सगाई की बात कर ली थी वह न्यूजीलैंड में डॉक्टर हैं। एक अच्छे ओहदे में होने की वजह से उनके बात करने का तरीका भी बड़ा अच्छा है। मुझे उनसे बात करने के तरीके ने अपनी और बहुत प्रभावित किया था राकेश को मेरे बारे में सब कुछ पता था क्योंकि मैंने उनसे कुछ भी नहीं छुपाया था।

राकेश चाहते थे कि इस बारे में मेरे पिताजी से बात करें लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी और मेरे पापा शायद कभी भी हमारे रिश्ते को स्वीकार नहीं करने वाले थे क्योंकि उन्होंने मेरी सगाई करवा दी थी। वह मेरी सगाई बिल्कुल नहीं तोड़ सकते थे मुझे पूरी उम्मीद थी कि वह अब सगाई नहीं तोड़ेंगे और हुआ भी ऐसा ही जब राकेश ने पापा से बात की तो पापा इस बात से बहुत गुस्सा हुए। उन्होंने राकेश को भला बुरा कहा और कहने लगे तुमने सोच भी कैसे लिया कि तुम गुनगुन के साथ शादी करने का मन बना लोगे तुम्हें मालूम नहीं है कि उसकी सगाई हो चुकी है। राकेश ने पापा को जवाब देते हुए कहा मुझे सब मालूम है कि उसकी सगाई हो चुकी है लेकिन हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं और एक दूसरे के बिना हम नहीं रह सकते। इस बात से पापा और भी भड़क उठे उन्होंने राकेश को घर से जाने के लिए कहा। राकेश भी घर से जा चुके थे मुझे पापा से बहुत डर लगने लगा था मेरी कुछ समझ में नहीं आया कि मुझे ऐसा क्या करना चाहिए जिससे कि पापा मेरी बात मान जाए लेकिन वह तो मेरी बात मानने ही नही वाले थे। राकेश और मेरी फोन पर बातें होती रहती थी राकेश से मिलकर मुझे अच्छा लगता था लेकिन राकेश से मिलना कुछ दिनों से बंद हो चुका था। राकेश और मेरी मैसेज के द्वारा ही बात हुआ करती थी एक रात हम दोनों बातों में इतना खो गए कि हम दोनों ने फोन सेक्स का सहारा लिया और फोन सेक्स के द्वारा ही हम दोनों ने एक दूसरे को संतुष्ट किया। राकेश भी खुश थे पहली बार मैंने किसी के साथ फोन सेक्स किया था यह सिलसिला चलता ही जा रहा था लेकिन हम दोनों चाहते थे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स का आनंद लें। मै राकेश से शादी करने के पूरे पक्ष में थी लेकिन पिताजी की वजह से मुझे राकेश से दूर रहना पड़ रहा था परंतु अब मैं राकेश के नजदीक जा चुकी थी और मैं राकेश के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहती थी।

यह मेरा पहला ही मौका था मैंने अपनी इच्छा से राकेश के साथ सेक्स संबंध बनाने के बारे में सोच लिया था एक दिन हम दोनों को मौका मिल गया और उस दिन मैंने राकेश को अपने घर पर बुला लिया। राकेश हालांकि डर रहे थे वह कहने लगे गुनगुन यह बिल्कुल भी सही नहीं है लेकिन मैंने उन्हें कहा राकेश आप रहने दीजिए मुझे तो आपसे मिलना था आप तो जानते हैं मैं आपके लिए कितना तड़प रही थी। यह कहते कहते मैंने राकेश को बिस्तर पर लेटा दिया और राकेश भी अपने आपको रोक ना सके उन्होंने जब मेरे कपड़े उतारने शुरू किए तो मेरे अंदर से गर्मी और भी ज्यादा बढ़ने लगी। राकेश ने मेरे पूरे कपड़े उतार दिए थे मेरे बदन पर सिर्फ मेरे अंतर्वस्त्र ही थे। उन्होंने मेरे ब्रा के हुक को खोलते हुए मेरे स्तनों को अपने हाथों से बहुत जोर से दबाना शुरू किया और मैं पूरी तरीके से मचलने लगी। पहली बार ही किसी ने मेरे स्तनों पर अपने हाथ का स्पर्श किया था मेरे लिए यह एक अलग ही फीलिंग थी। राकेश ने मुझसे पूछा क्या तुमने कभी किसी के लंड को चूसा है? मैंने उनसे कहा नहीं। राकेश ने अपने लंड को बाहर निकालते हुए मेरे मुंह में डाल दिया मैं उसे बड़े अच्छे से चूसने लगी।

मुझे मालूम ही नहीं पड़ा कि कब मैंने राकेश के लंड को अपने गले तक ले लिया है। मेरी योनि पूरी गीली हो चुकी थी जैसे ही राकेश ने अपने मोटे लंड को मेरी योनि पर सटाते हुए अंदर की तरफ प्रवेश करवाया तो मैं चिल्लाने लगी। मेरे मुंह से तेज चीख निकली जिसके साथ मेरी योनि से खून निकलने लगा और मेरी सील टूट चुकी थी लेकिन मुझे बड़ा आनंद आ रहा था और राकेश मुझे बड़ी तेजी से धक्के मारते। मेरे अंदर से करंट सा दौड़ने लगा था और राकेश के धक्को में भी तेजी आती जा रही थी। उन्होंने मुझे काफी देर तक धक्के मारे जिससे कि मैं पूरी तरीके से राकेश की हो चुकी थी और राकेश का साथ दे रही थी। काफी देर तक ऐसा चलता रहा लेकिन जब राकेश ने अपने वीर्य को मेरे स्तनों पर गिराया तो मैंने राकेश को गले लगा लिया अब मेरी शादी हो चुकी है लेकिन राकेश और मेरे बीच में सेक्स संबंध बनते रहते हैं।


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