मेरी तो चुद गयी रे चूत

Meri to chud gayi re chut:

मेरा नाम सतीश है और मेरी उम्र 55 वर्ष है। मैंने अपनी जिंदगी में बहुत ज्यादा मेहनत की और अपने बच्चों को एक अच्छी जिंदगी दी। मेरे दो बच्चे है। उनके लिए मैं गांव से शहर आ गया था और शहर में ही मैंने अपना एक अच्छा घर भी बना लिया और अपने बच्चों को सेटल भी कर चुका हूं। अब मुझे लगने लगा है कि मुझे अपने घर वापस चला जाना चाहिए और मैं यह सोचता हूं कि मेरी पत्नी और मैं अब गांव में ही रहे और मेरे बच्चे शहर में रहे। क्योंकि अब मैं अपनी जिंदगी आराम से और शांति में जीना चाहता हूं। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में अब मुझसे रहा नहीं जाता और मैं अपने आगे का जीवन गांव में ही व्यतीत करना चाहता हूं।

इस बारे में मैंने अपनी पत्नी से भी बात की। वह कहने लगी कि हां मैं भी यही सोच रही हूं कि हम लोगों को अब गांव चला जाना चाहिए। क्योंकि गांव में हमारे लिए रहने के लिए अच्छा है और हम वहां पर सुकून से भी रह सकते हैं। जब कभी हमें ऐसा लगेगा तो हम अपने बच्चों के पास आ जाया करेंगे। मेरी पत्नी बहुत खुश थी और वह कह रही थी कि हम लोग गांव चले जाएंगे। अब मैंने यह बात अपने बच्चों से कही तो वह बहुत दुखी हो गये और कहने लगे की आपको यदि हमारे साथ कोई परेशानी है तो आप हमें बोल दीजिये लेकिन इस तरीके से आप गांव चले जाएंगे तो हमें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा। मैंने उन्हें समझाया कि मैं अब कुछ समय गांव में ही रहना चाहता हूं और वहीं पर मैं अपना समय व्यतीत करना चाहता हूं लेकिन वह माने नहीं और बहुत जिद करने लगे कि, नहीं हम आपको कहीं नहीं जाने देंगे और आपको हमारे साथ यही शहर में रहना होगा। मैं उनकी बात मान गया और कुछ समय तक मैं शहर में ही उनके साथ रहने लगा।

उसी बीच मेरी पत्नी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई और मुझे उसे हॉस्पिटल ले जाना पड़ा और मेरे बच्चे भी बहुत टेंशन में थे। वह कहने लगे कि अचानक मां की तबीयत खराब हो गई है। पता नहीं उसकी तबीयत को क्या हो गया और वह ज्यादा बीमार होने लगी। डॉक्टर से हमने उसके बारे में पूछा भी तो कहने लगे उन्हें गंभीर बीमारी हो गई है। जिसकी वजह से अब शायद वह आगे अपनी जिंदगी ना जी पाए। मैं इस बात से बहुत आहत हो गया और अपने आप को बहुत ही ठगा सा महसूस करने लगा। मैं अंदर से बहुत ज्यादा टूट चुका था और मैं अपनी पत्नी की सेवा करने लगा। मैं दिन-रात उसके साथ हॉस्पिटल में ही रहता था लेकिन एक दिन अचानक उसकी मृत्यु हो गई और मैं उस बात से बहुत ज्यादा आहत हो गया। मुझे इस बात का बहुत सदमा लगा। कुछ समय तक तो मेरे बच्चों ने मुझे संभाला लेकिन उसके बाद मैंने उन्हें कहा कि अब मैं गांव जाना चाहता हूं और मैं गांव में ही रहूंगा। उन्होंने इस बार मुझे नहीं रोका और अब मैं गांव आ गया। गांव में मैं अपने आपको बहुत ज्यादा अकेला महसूस कर रहा था और मुझे बहुत बुरा लग रहा था अपनी पत्नी की मृत्यु का।

मुझे इससे उबरने में बहुत ही समय लगा और जब मैं गांव में अपने पुराने मकान में पहुंचा तो वह बहुत बुरी तरीके से टूट चुका था और कितने वर्षों बाद मैं अपने गांव आया था। मुझे कई लोग तो पहचान भी नहीं पा रहे थे लेकिन जब मैंने उन्हें अपना परिचय दिया तो वह लोग मुझे पहचान गये और कहने लगे आप तो गांव आते ही नहीं हैं। मैंने उन्हें कहा कि मैं अपने कामों में व्यस्त था लेकिन अब मुझे समय मिल चुका है इसलिए मैं अब गांव में ही रहूंगा। जब उन्हें मेरी पत्नी की मृत्यु का पता चला तो वह सब मुझे सांत्वना देने लग जाते। अब मैं अपने घर में ही बैठा रहता था और दिन रात अपनी पत्नी की यादों में डूबा रहता था। मुझे ऐसा लगने लगा कि मैं बहुत अकेला हो चुका हूं। मैं कहीं भी नहीं जाता था और सिर्फ अपने घर की छत में ही मेरा जाना होता था और मैं वहीं पर बैठ कर दिन रात अपनी पत्नी के बारे में सोचता रहता था। मेरे पड़ोस में ही एक गरीब परिवार रहता था। मैं अक्सर उन्हें अपनी छत से देखा करता था। वह लोग बहुत ही परेशान रहते थे और उनके पास दो वक्त खाने के लिए भी रोटी नहीं थी। एक दिन मैंने सोचा मैं उनके पास चला ही जाता हूं।

जब मैं उनके पास गया तो मैंने उनसे पूछा तो वह कहने लगे कि हमारी स्थिति बहुत ही खराब है। गांव में ना तो अनाज होता है और ना ही हमें कुछ काम मिल पा रहा है। जिसकी वजह से हम लोग बहुत ही परेशान हैं। दो वक्त की रोटी के लिए भी हमें बहुत मेहनत करनी पड़ती है। मैंने सोचा क्यों ना किसी तरीके से मैं इन्हें पैसे दे पाऊं। तो मैंने उन्हें कहा कि यदि आप मेरे घर का कुछ काम कर दिया करें तो मैं आपको उसके बदले पैसे दे दिया करूंगा। मैंने उस व्यक्ति का नाम पूछा तो उसने कहा कि मेरा नाम राजू है और मेरी पत्नी का नाम मीना है। उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे थे। जो कि बहुत ही ज्यादा छोटे थे। अब उन दोनों को मैंने कहा कि तुम मेरे घर पर कभी साफ-सफाई का काम कर दिया करो और तुम्हारी पत्नी के पास समय हो तो वह मेरे लिए खाना बना दिया करेगी। उसके बदले मैं तुम्हें पैसे दे दिया करूंगा और तुम्हारे घर का खर्चा चल जाया करेगा। वह इस बात से बहुत ही खुश हो गया और कहने लगा कि आपने तो हम पर बहुत बड़ा उपकार कर दिया है।

अब वह दोनों मेरे घर पर आ जाते हैं और दोनों के दोनों ही काम करते हैं। मीना मेरे लिए खाना बना दिया करती और राजू घर की साफ-सफाई और जो भी छोटा-मोटा मेरा घर का काम होता था  वह कर दिया करता था। मैं उसके बदले उन दोनों को पैसे देता था। वह दोनों बहुत खुश हो जाते। अब धीरे-धीरे मैं भी अपनी पत्नी कि यादो से बाहर निकलने लगा था और वह दोनों मुझसे बहुत सारी बातें किया करते थे और गांव के बारे में बताते थे। जिससे कि मेरा टाइम पास हो जाया करता था। मैं एक दिन दोपहर में सोया हुआ था तभी मीना मेरे पास आई। उस दिन में नंगा लेटा हुआ था मैंने अपने लंड को हाथ में पकड़ा हुआ था। उसने जैसे ही मेरे लंड को देखा तो उससे रहा नहीं गया और उसने तुरंत ही उसे हिलाना शुरू कर दिया। जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा मीना मेरे लंड को हिला रही है और अपने मुंह में ले रही है। मुझे बड़ा ही अच्छा लगा जब वह अपने मुंह में मेरे लंड को ले रही थी। कई वर्षों बाद किसी ने मेरे लंड को मुंह में लिया था और मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

जब वह उसे चूस रही थी मुझे बहुत ही अच्छा महसूस होने लगा।  मैंने भी उसे अपने बगल में लेटा दिया और उसके सारे कपड़े खोल दिए। जब मैंने उसके स्तन देखे तो मुझे उसके स्तन देखकर बड़ा ही मजा आया और मैंने तुरंत ही उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैं उसे बड़े ही अच्छे से चूस रहा था। मैं उसे इतने अच्छे से चूस रहा था कि उसका शरीर पूरा गर्म होने लगा। मैंने तुरंत ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मैंने उसकी योनि में अपने लंड को डाला तो वह चिल्ला उठी और बड़ी तेज तेज चिल्लाने लगी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था जब मैं उसे चोदे जा रहा था। वह मेरे मोटे लंड को झेल भी नहीं पा रही थी और चिल्लाने पर लगी हुई थी। वह कह रही थी आपका तो इस बुढ़ापे में भी बहुत ही मोटा लंड है। मैंने उसे कहा मैंने इतने सालों से अच्छे से किसी को चोदा नहीं है और तुमने मेरे अंदर की उत्तेजना को जगा दिया है तो मैं तुम्हें कैसे छोड़ सकता हूं। मैंने अब उसे बड़ी ही तेज तेज झटके मारना शुरू कर दिया। मैं इतनी तेजी से उसे चोद रहा था उसके मुंह से आवाज निकलती जाती और उसका शरीर गर्म होने लगा था। वह कहने लगी कि मेरा शरीर पूरा गरम हो चुका है। जैसे ही उसका झडने वाला था तो उसने मुझे अपने पैरों के बीच में कस कर जकड़ लिया और मुझे इतनी तेजी से जकड़ा की मैं हिल भी नहीं पा रहा था। लेकिन फिर भी मैं उसे चोदता और मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर ही जा गिरा। अब मैं खड़ा हुआ तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जवान हो चुका हूं। वह मुझसे कहने लगी कि आपका तो इस बुढ़ापे में भी बड़ा ही मस्त लंड है। अब वह जब भी मेरे घर आती तो मैं उसे जरूर चोदता था और वह मेरी पत्नी की कमी को पूरा कर रही थी।

 


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