मेरी पहली चुदाई प्रीति के साथ

मेरा नाम राज है तथा मेरी उम्र 26 साल है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मैं आपको अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।

बात अब से कई साल पहले की है जब मैं सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं जानता था। मैंने बारहवीं कक्षा पास की थी तथा कॉलेज में प्रवेश लिया था।

अभी कॉलेज जाते जाते एक महीना ही गुजरा था कि मेरे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के की शादी हुई जिसका नाम विक्की था। वो उम्र में मुझसे चार साल बड़ा था। मैं भी उसकी शादी में गया, खूब मज़े किए तथा जब जयमाला का वक़्त आया तो उसकी बीवी को देख कर आँखें खुली रह गई। उसका नाम प्रीति था, वो गज़ब की सुंदर थी, गोरा बदन, उठी हुई चूचियाँ, उभरी हुई गांड, मानो कि स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो। उसकी नशीली आँखें जिसकी तरफ भी देखती थीं वो उसका दीवाना हो जाता था। उसके बॉब-कट बाल उसके चेहरे पर गजब के सुंदर लगते थे। खैर उसकी शादी से में लगभग रात में तीन बजे वापस घर आया पर आँखों से नींद गायब थी। सारी रात उसके बारे में सोच कर गुजार दी, मन में तरह तरह के ख्याल आए कि काश वो मेरी होती। यही सब सोचते सोचते पता नहीं कब नींद आई।

सुबह नौ बजे मैं सो कर उठा तो थोड़ा शोर सुन कर मैं बाहर आया। तो देखा कि विक्की अपनी बीवी को घर लेकर आ गया था। मन हुआ कि एक बार उसकी सूरत देखने को मिल जाये, पर औरतों की भीड़ के कारण मैं उसको देख नहीं पाया।

दो दिन रहने के बाद वो अपने मायके चली गई और मैंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया। लगभग दस दिन बाद विक्की ने मुझे अपनी सुसराल चलने के लिए कहा, बोला कि तेरी भाभी को लेने चलना है !

मेरे मन में तो जैसे लड्डू फूटने लगे। मैंने तुरंत हाँ कही और तैयार होकर विक्की के साथ चला गया।

उसकी ससुराल ज्यादा दूर नहीं थी, हम वहाँ पहुँचे तो वहां हमारा खूब स्वागत हुआ और लगभग दो घंटे बाद हम अपने घर के लिए चल दिए।

उस दिन मैंने उसे “भाभी, नमस्ते !” कहा और कोई ज्यादा बात नहीं हुई।

कुछ दिन बीतने के बाद हमारी बातें होनी शुरू हो गई, वो मुझसे मेरे कॉलेज के बारे में पूछती थी या कोई छोटा मोटा काम बता दिया करती थी, पर मेरा मन तो हमेशा भाभी की चूचियों पर अटका रहता था और हमेशा उसको चोदने के बारे में सोचता था। पर मुझे लगता था कि उसकी चूत के दर्शन शायद कभी नहीं होंगे।

एक दिन किस्मत ने साथ दिया, मैं घर पर अकेला था, घर के लोग शादी में गए हुए थे जो कि रात में करीब 11 बजे से पहले वापस आने वाले नहीं थे।

अचानक दरवाजे की घंटी बजी दरवाजा खोला तो प्रीति भाभी दरवाजे पर थी। मैं उसको देखता ही रहा, उसने टोका- अन्दर नहीं आने दोगे क्या ?

मैं शरमा कर पीछे हो गया और वो अन्दर आ गई। उस समय शाम के लगभग छः बजे थे। वो अन्दर आकर सोफे पर बैठ गई, मैं सामने वाले सोफे पर बैठ गया। थोड़ी देर हम दोनों चुप रहे, फिर वो बोली- क्या तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो?

मैंने शरमा कर ना कह दिया। वो मेरी घबराहट समझ गई और मुझसे मेरे कॉलेज के बारे में पूछने लगी।

उसने मुझसे पूछा कि मेरी कोई गर्ल फ्रेंड है क्या?

मैंने मना कर दिया तो वो चौंक कर बोली- मैं यह बात नहीं मान सकती ! आजकल कोई लड़का इतना शरीफ नहीं हो सकता !

मैंने फिर मना किया तो वो बोली- क्या कभी किसी लड़की को किस किया है?


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