मेरी इच्छा पूरी करने का ठेका लिया

Meri ichchha puri karne ka theka liya:

hindi chudai ki kahani, antarvasna

मेरा नाम काजल है मैं स्कूल में अध्यापिका हूं, मैं जोधपुर में पढ़ाती हूं, जोधपुर में मुझे पढ़ाते हुए दो वर्ष हो चुके हैं। मेरे पति भी मेरे साथ ही रहते हैं, उन्होंने अब अपनी नौकरी से रिजाइन दे दिया है और वह घर पर ही रहते हैं। मैंने उन्हें कई बार समझाया और कहा कि तुम कुछ काम क्यों नहीं कर लेते लेकिन वह कुछ भी काम करने को तैयार नहीं है और हमेशा ही मुझ पर गुस्सा हो जाते हैं। मैं भी अब उनके इस व्यवहार से बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी हूं और मैं इतनी ज्यादा तंग आ चुकी हूं कि कई बार सोचती हूं कि उनके साथ में ना रहूं लेकिन अब मेरे पास कोई चारा भी नहीं है। मेरी एक 10 साल की लड़की है, मुझे उसे देखकर लगता है कि यदि मैंने अपने पति के साथ अपने संबंधों को तोड़ दिया तो उसके भविष्य पर क्या असर होगा इसीलिए मैं इस बारे में नहीं सोचती, मैं सिर्फ अपने काम पर ही लगी रहती हूं। मेरी कई इच्छाएं हैं लेकिन मैं अपनी इच्छाओं को अपने मन में ही दबा लेती हूं।

जब मैं जोधपुर में आई थी तो उस वक्त मेरे पति का व्यवहार ठीक था लेकिन उसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी से रिजाइन दे दिया। वह दिल्ली में एक अच्छी कंपनी में जॉब करते थे लेकिन जब से उन्होंने रिजाइन दिया है उसके बाद से वह घर पर ही बैठे हैं,  वह सिर्फ घर पर बैठकर शराब पीते हैं। एक दो बार तो उन्होंने मुझ पर हाथ भी उठा दिया था जिससे कि मैं बहुत परेशान हो चुकी हूं, इस हरकत के बाद मैं अब उनसे बात नहीं करती। हमारे पड़ोस में ही एक दुकानदार है वह बहुत ही सज्जन है, वह हमारे मोहल्ले में ही दुकान चलाते हैं और मैं जब भी उनसे मिलती हूं तो उनसे बात कर के मुझे अपनापन सा लगता है। मेरा बचपन जयपुर में बीता है और मेरे माता-पिता भी जयपुर में ही रहते हैं। उन दुकानदार का नाम मोहन है, मोहन और मेरे बीच में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई, मेरे पति जब भी मुझे मोहन के साथ देखते हैं तो वह बहुत ज्यादा गुस्सा हो जाते हैं लेकिन मेरे और मोहन के बीच में सिर्फ एक दोस्ताना संबंध है। हम लोगों का परिचय मेरी पुरानी सहेली ने करवाया, वह जयपुर में ही रहती है।

मोहन उसके रिश्ते में भाई लगते हैं इसीलिए हम दोनों का परिचय बहुत अच्छा हो गया और मुझे जब भी अकेलापन लगता है तो मैं मोहन को फोन कर लेती हूं, उन्हें भी मेरे पति और मेरे रिश्ते के बारे में सब कुछ पता है। वह हमेशा ही मुझसे पूछते हैं कि तुम्हारे पति और तुम्हारे बीच में सब कुछ सही चल रहा है या नहीं, मैं उन्हें हमेशा ही कहती हूं हम दोनों के बीच में बिल्कुल भी अच्छा रिलेशन नहीं चल रहा है क्योंकि वह ना तो मुझे समझ पाते हैं और ना ही मैं उनकी किसी भी बात को समझ पाती हूं। मैंने उन्हें सब कुछ बता दिया था जिससे कि मुझे कभी भी कोई जरूरत पड़ती तो वह हमेशा ही मेरे लिए खड़े रहते थे। एक दिन मेरे पति उनकी दुकान से कुछ सामान ले रहे थे। यह बात करीबन 6 महीने पहले की है जब वह उनकी दुकान से सामान ले रहे थे तो उन्होंने मोहन से झगड़ा कर लिया और उसी वक्त मैं भी अपने स्कूल से लौट रही थी। मैं जब अपने स्कूल से लौट रही थी तो मैंने देखा मेरे पति मोहन के साथ झगड़ा कर रहे हैं और उन दोनों के बीच में बहुत गर्मा गर्मी हो रही है। वहां पर काफी भीड़ भी लग गई थी, हमारे मोहल्ले के सारे लोग वहां पर जमा हो गए। जब मैं उन दोनों के बीच में गई तो मेरे पति ने उस दिन सब लोगों के सामने मुझे बहुत ही बेजत किया, उन्होंने मुझे कहा तुम चरित्रहीन हो और तुम्हारा चरित्र बिल्कुल भी अच्छा नहीं है, तुम्हारा और मोहन का संबंध है। जब यह बात मोहन ने भी सुनी तो मोहन ने मेरे पति को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया, मुझे भी लगा कि शायद मोहन ने उस दिन सही किया लेकिन उस थप्पड़ के वजह से मेरा रिलेशन कहीं ना कहीं खराब हो गया था क्योंकि पहले ही मेरे और मेरे पति के बीच में अच्छे संबंध नहीं थे लेकिन उसके बाद तो वह संबंध और भी ज्यादा बिगड़ गए। जब मोहन ने मेरे पति को थप्पड़ मारा तो उस वक्त मेरे पति ने मोहन से कहा कि आज के बाद कभी भी मैं तुम्हारी दुकान में नहीं आने वाला, मोहन ने भी कहा कि तुम्हारे जैसी छोटी सोच के लोगों को मेरी दुकान पर आने की भी जरूरत नहीं है और ना ही मैं तुम्हारा चेहरा कभी आज के बाद देखना चाहता हूं।

मैं उस दिन अपने पति को अपने साथ घर ले गई और मैं सोचने लगी कि क्या मुझे भी आज के बाद मोहन से बात करनी चाहिए,  मैं इसी दुविधा में थी और मैंने भी काफी दिनों तक मोहन से बात नहीं की। मेरे पति ने भी मुझे साफ कह दिया था कि तुम आज के बाद कभी भी मोहन के साथ कोई भी संपर्क नहीं रखोगी, मेरी बेटी भी उसके बाद से उनकी दुकान पर नहीं जाती थी। एक दिन मैं अपने स्कूल के लिए जा रही थी तो उस वक्त मोहन मुझे मिले और कहने लगे क्या उस दिन मैंने कुछ गलत किया, मैंने उन्हें समझाया कि आपने उस दिन कुछ भी गलत नहीं किया लेकिन मेरे पति और मेरे बीच में बिल्कुल भी संबंध अच्छे नहीं हैं और उसके बाद से तो और भी ज्यादा हम दोनों के संबंध खराब हो चुके हैं। मोहन मुझे कहने लगा जब आपके पास वक्त हो तो आप मुझसे फोन पर बात करना, मैंने उनसे कहा ठीक है मैं तुमसे फोन पर बात करती हूं। मैं शाम को जब स्कूल से लौट रही थी तो मैंने मोहन को फोन कर दिया और उस वक्त मोहन ने भी मुझ से अपने दिल की बात शेयर की, मैंने भी उसे कहा कि तुमने उस दिन कुछ भी गलत नहीं किया। हम दोनों काफी देर तके एक दूसरे से बात कर रहे थे।

मैं मोहन से उस दिन बात कर रही थी तो मोहन ने मुझे कहा आज तुम मुझे मेरी दुकान पर मिलना, मैने उसे कहा ठीक है मैं कुछ देर बाद तुम्हारी दुकान में पहुंच जाऊंगी। मैं जब मोहन की दुकान पर पहुंची तो वह दुकान पर ही था, मैं उस दिन उसकी दुकान के अंदर पहली बार बैठी मोहन मेरे साथ ही बैठा हुआ था। हम दोनों मेरे पति को लेकर बात कर रहे थे, उस वक्त मुझे बहुत ही बुरा महसूस होने लगा, मैंने मोहन को गले लगा लिया जब मैंने मोहन को गले लगाया तो मोहन ने भी मुझे कहा तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारे साथ हूं। उसके हाथ मेरे बदन पर टच हो रहे थे तो मेरे अंदर की उत्तेजना जाग रही थी मैंने भी मोहन से कहा आज इतने समय बाद किसी ने मुझे अपने गले लगाया है। मोहन ने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो मैं उसके लंड को देखती रह गई। मैंने उसके लंड को हिलाना करना शुरू कर दिया उसके दुकान के काउंटर के नीचे से कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था मैंने उसके लंड को सकिंग करना शुरू कर दिया काफी देर तक मैं उसके लंड को सकिंग करती रही जब उसका पानी छुटने लगा तो उसने मुझे काउंटर के नीचे घोड़ी बना दिया वह मुझे झटके देने लगा और अपनी नजरों से वह बाहर की तरफ भी देख रहा था। वह बड़ी तेज अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था जिससे कि मेरी चूत दर्द होने लगी थी। मैंने मोहन से कहा आज तुम्हारा लंड मेरी योनि के भीतर तक चला गया है और मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरी इच्छाएं आज पूरी हो रही है तुम ऐसे ही मुझे बड़ी तीव्र गति से चोदते रहो और मेरी इच्छाओं को पूरा कर दो मैं काफी समय से सेक्स की भूखी बैठी हूं। वह कहने लगा मुझे भी अच्छा लग रहा है जब मैं तुम्हें चोद रह रहा हूं। मेरा तरल पदार्थ तेजी से निकल रहा था और उसका भी पूरा लंड मेरी चूत के अंदर जा रहा था। उसका लंड जब मेरी योनि के अंदर बाहर होता तो मेरे अंदर की उत्तेजना और भी ज्यादा जाग जाती। वह मुझे कहने लगा तुम्हारी योनि से बहुत सारा तरल पदार्थ निकल रहा है। मैंने उसे कहा तुम ऐसे ही मुझे धक्के देते रहो और मेरी चूत को तुम अपना बना लो। उसके लंड से मेरी चूत बुरी तरीके से छिल चुकी थी और जैसे ही उसकी वीर्य की पिचकारी मेरी चूतडो पर गिरी तो मुझे बड़ा गर्म महसूस हुआ और अच्छा लगा। मै काफी देर तक घोडी बनी रही और जब मैंने अपनी चूतडो को साफ किया, मैं उसके बाद  अपने घर चली गई। मोहन ने हमेशा मेरी इच्छा पूरी करने का ठेका ले लिया है।


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