मेरी गांड ना मारो

Meri gaand na maaro:

antarvasna, hindi sex story मेरे चाचा और मेरे पिताजी एक साथ ही कारोबार करते हैं हम लोगों की रोहतक में बहुत बड़ी दुकान है लेकिन हम लोग साथ में नहीं रहते हैं कुछ वर्षों पहले ही हम लोग अलग रहने के लिए चले गए और मेरे चाचा अपने पुश्तैनी मकान में रहते हैं लेकिन हम लोगों का कारोबार एक साथ ही है। काम इतना ज्यादा होता है कि हम लोगों ने भी अपने पापा और चाचा के साथ ही काम करने की सोची मेरे भैया और मैं भी मेरे पिताजी के साथ ही काम करते हैं और मेरे चाचा के दोनों लड़के भी वही काम करते हैं, समय के साथ पता ही नहीं चला कि कब उम्र इतनी ज्यादा हो गई कि भैया की शादी की उम्र भी नजदीक आ गई मेरे भैया के लिए अब रिश्ते आने शुरू हो गए थे और उनके लिए काफी अच्छे घरो से रिश्ते आ रहे थे क्योंकि हम लोगों का परिवार भी अच्छा है इसलिए उनके लिए भी काफी अच्छे घरो से रिश्ते आने लगे थे और इस बात से हम लोग भी बहुत खुश हैं।

जब हम लोग माया भाभी को देखने के लिए गए तो भैया को भाभी पसंद आ गई क्योंकि वह दिखने में बहुत ज्यादा सुंदर और बात करने में भी अच्छी थी उन्होंने उनके साथ अच्छे से बात की लेकिन जिस व्यक्ति ने यह रिश्ता करवाया था वह पापा के दूर के दोस्त हैं मुझे नहीं पता था कि पापा और उनकी दोस्ती इतनी गहरी होगी उनसे पापा कभी एक दो बार ही मिले थे। चाचा ने भी रिश्ते के लिए हां कह दिया था, भैया की सगाई माया भाभी से हो गई और कुछ ही समय बाद उनकी शादी भी हो गई जब उनकी शादी हो गई तो सब लोग बहुत ही खुश थे क्यों कि शादी में सब लोगों ने बड़ा ही एंजॉय किया कुछ समय तक सब कुछ ठीक चलता रहा करीब एक साल से अधिक हो चुके थे एक दिन जब भाई और मैं काम से लौटे तो मेरी मां घर पर बहुत परेशान थी मैंने अपनी मां से पूछा कि आखिरकार क्या बात है तुम इतनी ज्यादा परेशान हो तो वह कहने लगी कि बेटा तुम पूछो मत तुम्हारी भाभी ने तो हमारी नाक कटा दी है हम लोग अब सब को क्या मुंह दिखाएंगे, मैंने अपनी मम्मी से पूछा कि आखिरकार बात क्या है तो वह बता नहीं रही थी।

जब भैया कमरे में गये तो उन्होंने कमरे की हालत देखी और उनके अलमारी में कुछ पैसे भी गायब थे भैया गुस्से में आए और कहने लगे यह क्या हो गया, उन्होंने मम्मी से पूछा कि माया कहां है? मम्मी ने कोई भी जवाब नहीं दिया और कुछ देर बाद मम्मी गुस्से में बोले कि उसी की वजह से तो यह सब कुछ हुआ है वह ना जाने कहां भाग गई है उसका कुछ पता ही नहीं चल रहा। भैया को भी बहुत गुस्सा आया और उसके बाद वह इतना ज्यादा गुस्से में हो गए कि वह सीधा ही गाड़ी उठा कर अपने ससुराल चले गए वहां उन्होंने कहा कि माया कहां है तो वह लोग कहने लगे कि हमें क्या पता कि माया कहां है। उन्हें भी वाकई में कुछ पता नहीं था फिर हम लोगों ने पुलिस स्टेशन में कंप्लेंट दर्ज करवा दी भैया इस बात से बहुत ज्यादा दुखी थे और पापा को भी बहुत दुख पहुंचा था पापा भी बहुत ज्यादा दुखी थे लेकिन अब हमारे पास कोई रास्ता नहीं था माया भाभी मिली नहीं थी और इस बात को करीब एक महीना हो चुका था, एक महीने में सब कुछ ठीक नहीं हुआ था भैया तो काम पर भी नहीं आते थे और वह घर पर ही बैठे रहते थे मैं भैया के चेहरे पर उदासी देख कर बहुत दुखी हो चुका था क्योंकि वह किसी से भी अच्छे से घर में बात नहीं किया करते वह सिर्फ अपने बेडरूम में ही बैठे रहते हैं। मैंने भी ठान लिया की मैं भाभी का पता करके रहूंगा, मैं पुलिस स्टेशन गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक उसका कोई भी पता नहीं चला है मैं भी माया भाभी की ढूंढ में निकल पड़ा मुझे कुछ भी नहीं पता था कि आखिरकार वह कहां गई हैं सबसे पहले तो मैं उनके घर गया और उनसे पूछा कि क्या उनका किसी और के साथ कोई संबंध तो नही था वह कहने लगे कि बेटा हमें कुछ भी नहीं पता माया ने हमें कुछ भी नहीं बताया और यदि हम लोग गलत होते तो क्या तुम्हारा साथ देते हम तो खुद चाहते हैं कि वह हमें एक बार मिले तो सही यदि हमें वह पहले ही बता देती कि वह शादी नहीं करना चाहती तो हम लोग तुम्हारे भैया से उसकी शादी ही नहीं करवाते हमें भी पता है कि गगन के ऊपर क्या बीत रही होगी गगन बहुत दुखी हो चुका है।

मैंने उनसे कहा लेकिन आपको तो कुछ माया भाभी के बारे में पता होगा माया भाभी की मां मुझे कहने लगे कि बेटा तुम उसके कमरे में जा कर देख लो यदि तुम्हें कुछ ऐसा मिले तो तुम देख लेना, मैं उनके कमरे में गया तो वहां पर मुझे कुछ भी ऐसा नहीं मिला लेकिन मेरे हाथ उनकी डायरी लगी और डायरी को मैंने जब खोला तो उसमें एक नंबर लिखा हुआ था उस नंबर पर मैंने जब फोन किया तो वह नंबर बंद आ रहा था लेकिन मुझे शक था कि इसी नंबर से मुझे उनका पता मिल सकता है और इसके लिए मैंने पुलिस की मदद ली, मुझे जब उस नंबर की जानकारी मिल गई तो वह नंबर जिसके नाम पर था मैं उनके घर पर चला गया जब मैं उनके घर पहुंचा तो वहां पर एक बुजुर्ग व्यक्ति थे मैंने उनसे पूछा क्या यह ललित का घर है तो वह कहने लगे कि हां यह ललित का घर है लेकिन वह घर पर नहीं है मैंने उनसे पूछा क्या मैं आपके घर पर बैठ सकता हूं वह कहने लगे हां बेटा आ जाओ।

मैंने उनसे पूछा क्या आप घर में अकेले रहते हैं तो वह कहने लगे कि हां मैं घर में अकेला ही रहता हूं मैंने उनसे पूछा तो ललित कहां है वह कहने लगे कि ललित के बारे में मैं तुम्हें क्या बताऊं वह तो एक लड़की के प्यार में इतना पागल था कि उसने सब कुछ छोड़ दिया था और उसके बाद उसका भी कुछ पता नहीं है काफी समय से वह घर भी नहीं आया है उन्होंने मुझे माया भाभी के बारे में बताया तो मैं सुनकर चौंक गया, उन्होंने मुझे बताया कि माया और ललित एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं लेकिन दोनों की शादी शायद कभी हो ही नहीं सकती थी क्योंकि माया के पिताजी एक अच्छे परिवार से हैं और मैं एक स्कूल में चपरासी का काम क्या करता था इस वजह से शायद वह कभी भी इस रिश्ते को मंजूरी नहीं देते और ललित तो बेरोजगार ही था लेकिन माया और ललित एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे तभी माया की शादी भी हो गई। मैंने उन्हें बताया कि जिससे माया की शादी हुई थी वह मेरे भैया ही थे अब वह बहुत दुखी हैं यदि माया पहले ही यहां सब बता देती तो शायद इतना बड़ा बखेड़ा नहीं होता और इससे दो परिवार बर्बाद नहीं होते, वह कहने लगे मैंने तो उसको पहले ही समझा दिया था लेकिन उसके सर पर तो प्यार का भूत सवार था इसलिए वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था। उन्हें भी उन दोनों के बारे में पता नहीं था लेकिन मैंने भी ठान ली थी कि मैं ललित के बारे में पता लगा कर ही छोडूंगा। एक दिन उसके दोस्त के माध्यम से मुझे ललित का पता चल गया और मैं जैसे ही ललित के घर पर गया तो वह घर पर नहीं था परंतु जब माया भाभी ने दरवाजा खोला तो वह मुझे देख कर डर गई जब मैं अंदर गया तो ललित घर पर नहीं था मैंने गुस्से में माया को एक जोरदार तमाचा मारा और कहा कि मुझे आपसे बात करनी है वह मेरी बात सुनने लगी, मैंने उन्हें कहा तुमने मेरी भाई की जिंदगी बर्बाद कर दी तुम मेरे भाई से शादी ही नहीं करती वह मेरी बात सुनती रही। कछ देर बाद वह कहने लगी मैं ललित से बहुत ज्यादा प्यार करती थी, मेरे पास कोई भी रास्ता नहीं था। उन्होंने मुझे जब अपनी आप बीती सुना दी तो मैंने उन्हें कहा तुम्हें तो भाभी कहना भी अब मेरे लिए गुनाह है, तुमने तो भैया के साथ बहुत बुरा किया तुम मेरी नजरों में अब रांड के सिवा कुछ भी नहीं हो।

वह कहने लगी तुम ऐसा मत कहो मैं तुम्हारी बहुत इज्जत करती हूं। मैंने उसे कहा लेकिन मैं तुम्हारी इज्जत नहीं करता मैंने उसकी साड़ी को खोलना शुरू किया और माया को पूरी तरीके से नंगा कर दिया। मेरे अंदर बहुत ही ज्यादा गुस्सा था मैंने उसके शरीर से पूरे कपड़े उतार दिए, उसकी चूत और गांड को चाटने लगा। उसकी चूत से मैंने पानी निकाल कर रख दिया था वह भी मेरे सामने चुपचाप खड़ी थी क्योंकि उसकी सारी गलती थी। मैंने अपने लंड पर तेल की मालिश की और लंड को पूरी तरीके से चिकना कर दिया, जब उसकी गांड में लंड में नहीं घुस रहा था तो मैंने उसे कहा थोड़ा सा गांड को चौडा कर लो। उसने अपने हाथ से चूतडो को चौडा किया मैंने धक्का देते हुए उसकी गांड के अंदर प्रवेश करवा दिया। जब मेरा लंड उसकी गांड में प्रवेश हुआ तो उसके मुंह से चीख निकल पड़ी, वह कहने लगी मुझे दर्द हो रहा है उसकी गांड से खून निकलने लगा था लेकिन मेरे दिल में थोड़ी बहुत शांति थी।

मैंने माया की गांड मारकर उसे उसकी गलती का एहसास दिला दिया, मैंने उसकी गांड के मजे बहुत देर तक लिए। उसकी टाइट गांड को मैंने अपने दोनों हाथों से पकड़ा हुआ था और उसकी गांड के अंदर बड़ी तेजी से धक्के देकर प्रहार करता। मैंने इतनी तेज गति से उसकी गांड मारी कि उसे बहुत ज्यादा तकलीफ हुई, जैसे ही मेरा वीर्य उसकी गांड में गिर गया तो मेरी इच्छा पूरी हो गई। मैंने उसे अपने सामने नंगा लेटा कर रखा था और उसे कहा कि तुम पैसे वापस कर देना और आज के बाद जब भी मैं तुमसे मिलने आऊंगा तो तुम उस दिन अपनी गांड मुझसे मरवाओगी नहीं तो मैं सबको बता दूंगा। वह मुझे कहने लगी ठीक है जैसा तुम कहोगे लेकिन यह बात ललित को पता नहीं चलनी चाहिए। मैंने उसे कहा मैं ललित को कभी भी पता नहीं चलने दूंगा और ललित के बारे में भी किसी को नहीं बताऊंगा। मैं जब भी माया से मिलता तो उसकी गांड जरूर मारा करता मैंने माया को चोद कर प्रेग्नेंट भी कर दिया था। वह अपने प्यार के लिए अपनी गांड और चूत मरवाने तैयार थी।


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