मेरी आंटी मेरी जान – तीसरा भाग

आव हद होगआई थी. बरसो से थमा ठंडी बदलाज गरज गरज के बरसनी थी. मैने आंटी की बाल को पकड़ के उनकी सर को अलग्किया. और जिस तरह से उन्होने कुछ देर पहेले मेरा सर को नोच लिया था. मैिनेवी वोही किया.हमारी आख मिल रही थी. आंटी की लाल ओत काप रही थी.मैने अपनदिल को खोल दिया. आप क्या सोचती हो इसे घर मे सिर्फ़ अंकल ही आपको चाहतेहैई,प्यार करते है,और आप की फिकर करते है..इसका आगे मुझे कुछ नही सुलझबास उनको चूमना चाहा. चुम्मा चुम्मि बहुत होगआई थी. इसका आगे लिखना मुझहेबहुत मुस्किल होरही है. वो महेसुसी और पागलपन को मे कैसे लेखु जाव की उस्वक्त मेरा होश अपना जगा चोद रहा था. चूमते चूमते हम और बाहोमे कसे गाएेते किसी दो प्रेमी की तरह. काव से मेरा अंतर्मन मुझ पे ज़्यादा हावी हुवा पताही नचला. मैं आंटी को अपनी बिस्तर पर लितने को कोसिस कर रहा था. आंटी वीपयर मे बहेक चुकी थी इसलिए उन्होने इसबार अपना लिप्स को मैने चूसने पर विकोइ अवरोध नही की. यह काफ़ी देर तक चला. मेरा दिल उछाल रहा था जाव मैइनेतंलिया की आज मैं आंटी की अंदर घुसने जा रहा हू,मेरी लंड पेंटी की अंदरकसमसाया. आंटी की बाल खुलगया था. उनकी सारी का पल्लू ने जगा पहेले से छोड़देती. मेरा हाथ उनकी चुचि महेसुस करने पे जुट रहेते और मेरा पर उपर्णीचे करके उनकी सारी उपर करने मे जुट रहे थे. मेरी घूँट के कोसिस से सरीऊपआर वी होरही थी. मेरा दिल तेज चल रहा था और दिमाग़ चला ही नही रहा तबास अंतर्मन ही साव कर रहा था. कुछ देर बाद मैने आंटी की चुचि को नंगी कारपाया आगे बतन से लेकिन सारी बस उनकी घूँट की उपर ही कर पाया. मेरा लूंडबेटाव होरहता. मैने अपने हाथ के सहायता से आंटी की सारी और पेट्तीको कुचज्यदा उपर कर दिया लेकिन मैं एक दम नीरस हो गयेा आंटी ने तो चड्डी वी पहनन्यू एअर थी. कुछ और वक्त लगी आंटी को इडार उदार हिलाते और चूमा लेते उंकीचड्डी निकालने को पर इसी दौरान मेरी हाथ ने आंटी की झांते महेसुस किया ताओर दिल ज़ोर से धड़क रहा था. चड्डी को मैं पूरा निकलना चाहा रहा था ताकिमैन उनकी टाँगे फैला सकुन. मैं खड़ा होके निकालने को सोच रहा था ताकि मैं अपनी सपनो की सहेजडी की नॉवब बनके चुत वी डरसन कर सकुन. लेकिन माने सयद शरम से मेरा सार्को डाओच लिया सयद उनको अंदाज़ा था मेरा सर उठनेसए मैं उनकी चुत दिखूंगा. चड्डी नीचेतक मैने अपने पर से किया. आव मुझेसबर नही था. मैने अपनी पेंटी को आगे से नीचे खिचके मेरा लंड निकाला.लुंदसर हिला हिलाकर आंटी की चुत ढूड़ रहा था जिसके साथ मिलने के लिए उसको 6 सलींटेजर करना पड़ा. सच मे मेरा लंड को वी पता था सवार का फल मीठा होताहै इसलिए वो वी झूम रहा था. जाव मेरा अंधे लंड ने आंटी की झट को महेसुसकी तो उसने मेरी कमर नीचे जोड़ से खिच दिया. जाव अंधे लंड ने ग़लत निसनेलगाई तो आंटी की निकलते हुई आवाज़ थम गई. लंड ने चुत की गीलापन महेसुसकिया तो मैने वी जान लिया आंटी की चुत वी मेरे लंड के लिए चिकनी बनके मारखाने को तरस रही थी.

आव मैं इसी स्तिति मे था अगर खुदा मेरे जान ले विलेटे तो वी मैं आंटी की चुत मे लंड घुसा देता था. इसकी कोई कीमत नही थी. अंधेलुँद बर्बर निसना चुका रहा था. मैने हाथ की सहायता से आंटी की चुत की वॉहजगा ढूड़ने की कोसिस की जहा से पूरा मैं निकल आया था. अजीब बात थी मैइनेऊंगली से चुत को फैलने की कोसिस की तो आंटी काँप पड़ी उनके मूह ने आहे वरलिया. एसा असर मेरे लंड ने 6उते वक्त वी किया नही था. मुझे उनकी चुत किउपली हिस्से पर अजीब सी कुछ कड़क और उठा हुवा चीज़ महेसुस किया. मुझे उसेपकड़ने की नज़ाने क्यू बहुत दिल हुवी. चुत की हर हिस्से बेख़बर मेरा लूंदफुल्ा जराहा थी. जाव मैने उसे हाथ लगाया तो आंटी ने जल्द इसका अवरोध कियओर मुझे धीमी से नालयक बोलके मेरी हाथ को अपनी चुत से अलग कर दिया. हेयभागवान आंटी की मूह से नालयक सबडा सुनके मुझे अवी बात थोड़ा बहुत समझ मेआगेया अंकल ने मुझे इसी बात की जीकर कीटि. आंटी को खुश करनेको अगर मानालायक बोली तो उसे मीठा दर्द देना. क्या टाइमिंग थी. ज़रूर दूँगा मीठी दर्द. मेरा लंड बेचैन हुवा. मैने सोचा क्यू नचूत की उस हिस्से को लंड से महेसुस करू पहेले. मैने लंड को उस हिस्से पेघीसना शुरु कर दी दरअसल ओह आंटी की दानी थी.आंटी आहे वारने लगी. मुझे इतनेमज़ा लगा की कई मे घुसे बिना बाहर की रास्ते से निकल ना जौ,फिर मैं रुकगाया. मैं तक चुका था उनकी गुप्त अमर्टद्वार ढुड़ते. मैने कान मेफुसफुसाया‚आंटी प्लीज़! आंटी समझ चुकी थी बेटा का लंड ने उसकी मूह खोलदिया.और जाव वी मैं बहुत ज़रूरी चीज़ आंटी सेमगा कराता तव आंटी से प्लीज़ बोला कराता था,छोटी मोटी चीज़ तो मुझे आसानी सेमिलता था एक्लोटा बेटा होने की कारण.यह बात को आंटी वी जानती थी बेटा बहुत दिलसे उनकी चुत की छेद चाहता है. इसलिए उन्होने कोई देर नही की. एक पल मे हिमुझे अपनी लंड की उपर हिस्से मे आंटी की दो उंगली महेसुस हुई. मैं काप उठाकस मुति मे लेती. उन्होने लंड कुछ आगे खीची और चूतड़ उठाके थोड़े अपनियाप को नीचे की. मेरा लंड ने उनकी चुटकी दरार महेसुस की. आंटी मे मेरे लंड को मुति मे ले बिना अपनी हाथ अलग की.उन्होने अपनी हाथ को मेरी पीछे ले जाके मेरी पेंटी को पीछे से खिसका दी ओरमेरी गांड मे अपने हाथ से थोड़ा सा थपथपाई. आप नही जानते मुझ पर इसका असर्कया बीती. आंटी की इसे हरकत ने मुझे मेरी बचपन की ताज़ा याद दिलाई. मुझेपीसाहब करना हो और टट्टी करना हो, आंटी जाव मेरी छड़ी उतार देती तो मैं पहेले कूचनाई करके एसा ही बिठा कराता था. एसए हलद मे अक्सर आंटी ‘जल्दी बेटे’ बोलकेमेरी गांड थपथपाती. नज़ाने क्यू इसका मुझ पर बहुत असर था. कई बार तो माको दो तीन बार एसा करनी पड़ती.बड़े होते पर मुझे इस्क एहसास वी हुवा था कीमा की थपथपाई की मुझे काफ़ी आदत पड़ी थी. मेरा बदन उवार उठा मैनबचपन मे खो गया था. मेरी गांड मे दूसरी ठप तपाई मिली तो मेरी सर घूँगाया. आंटी वी ओह बात वूली नही थी,दूसरी हरकत का मतलाव था मैं देर कर रहहू, मुझे कन्फ्यूज़ नही होना चाहिए मुझे ओही करनी है जो करने के लिए आंटी नेमेरी चड्डी नीचे की है यहा बात पिसाहब की नही थी. मैं पूरा जोश मे आगेया.मेनेज़ल्द ही आंटी की कान मे ‘ओह मेरी आंटी!! बोलके कमर को नीचे दबाब दिया. हम दöनॉकापे.

मेरा लुंदजालदी मे था. मैने आख़िर और एक जोरदार शॉट मर्डिया. आंटी चिल्लई‚ ओह जग्गू!मैने सबसे बड़ी माउंट एवरेस्ट पे झंडा गाड़ लिया था मेरा सरीर पूरा उभरूता. मैने पालिया मैने जन्नत पालिया हा पालिया मैं ख़ुसी मे था प्यार मेटा बचपाने पे था और चुदाई मे था. मेरा खून और गरम हुई. जिस चुत सेमैन निकला था आज उशी चुत ने मेरा लंड मुस्किल से ले परही थी. मैं कुछ रुका. मेरा आ घोड़े जेसा लंड फिर वियाधा बाहर था. मैं रुक के आंटी की इशारा की शावर करने लगा. मुझे पेलने कीड़िल खूब होरहा था. आंटी ठीक होना? मैने आंटी की फिकर की. मुझे धीरे धीरे माकी रोने की आवाज़ सुनाई दी,मुझे घुस्सा हुवा मैं घुसने को जल्दी की यह जांतहुई की मेरी लंड किसी घोड़े से कम नही है चाहे कितनी भी बड़ी चुत हो.हलकी आंटी की चुत एसए ही 6 साल से बंद थी. मैने आंटी की खातिर घबरा केबोला‚आंटी मैने यह क्या किया आप को रूलदिया.आंटी मुझे माफ़ करिए’ बोलके मैनेलुँद बाहर निकालने लगा. आंटी ने फाटक से मेरा गांड को उपर होने से रुका और एखी सास मे बोली रोते आवाज़ मे बोली ‘बहुत हो गयेा तेरा प्यार’उन्होने मेरा बाल कोखिच और सर उत्ाड़िया. मैने भारी सासो से बोला ‘मा मुझे आप की दर्द बर्दस्तनाई होती.’ मेरी यह बात ने और तहेलका मचा दिया. आंटी ने मेरी बाल को सहेलत्ेओर आख मे आख डालके अपनी छाती हिलाते बोली ‘अगर खुश कर देना चाहता हाइतो वो दर्द दे जो दर्द तेरा अंकल 6 सालो से देनाइ पाए,वो दर्द दे जिस से मैंटेरी पैदा होने की पल भूल्सकु.’ एसा बेशरम साहबद बोलते बोलते आंटी ने अप्निसर उठाके मुझे चूमने लगी. अब मैने आंटी की एक नसूनी. लूंदको पूरा दबाद देटेूनकी चुत मे और घुसाड़ने लगा. आंटी ने मुझे जोड़ से बाहोमे खिच लिया. आंटी किचूत मे पूरी लंड घुसने के लिए. मैने उनकी कंध को नीचे दबाब दिया ओरबोला ‘आज आपकी लाल आपकी वो हालत करड़ेगा जो किसी रंडी ना हो’ मुझे जोश मेआपनी मूह से निकली साहबद से और वी जोश मिल रहा था. मेरा लंड की दबाब इतनी हुइथि की आंटी की बदन उपर हिल रहा था. मेरा हाथो की दबाब से अब लंड का धक्कका असर पूरा चुत की अंदर प़ड़ रहा था. मैना और एक बहेरेमी से झड़का मारा.लंड पूरा जड़त्ाक समा गया. आंटी चीलाई…मारगाई….ओईए माआ…मुझे रहएमारहता लेकिन क्या करू आंटी मुझसे दर्द ही तो चाह रही थी. मैने बिन रूकेधहाक्का देना जारी रखा. मैं पागल होरहा था. आंटी मुझे रोक बोल नही पा रहिति लेकिन मेरी कंध अपनी दाता से कातने लगी थी. मैने इसकी परवाह नही किबाल्कि और मरने लगा, उनकी चुत की गर्मी और नर्मी का साथ उनकी चुत की कसीककया मज़ा दरही थी और मैं चुच्हिमसालने की मज़ा वी लेरहता. मुझे कढ़ पे दर्द हुवा तो मैने आंटी की सर कोपाकड़ के पीछे खिछा और आंटी को देखा.आंटी की आख मे आसू भारी थी. मैइनेउनको देखा. आंटी फिर वी बहुत खूबसूरात दिख रही थी. उलझे हुवे बाल ओरबेचैन भारी और तड़प हुवी उनकी चहेरा मुझा अच्छा लग रहा था. मैने उंकीकान मे जोस से फुसफुसाया: ‘मा ई लव यू’. आंटी ने धीमी से कहा ‘मेरा लाल आझडिखा तू कितनी प्यार कराता है अपनी आंटी को.’ इतनी दर्द को आंटी ने सहलिया. माकी मूह से इतनी गाँधी मतलब वाला साहबद सुनके मैने लंड को इतना तेज और अंदर तक छलके एसचोड़ा पूरा रूम उनकी चुत मे पड़ी मेरी लंड की मार की आवाज़ से गुज़्ने लगा.मैं इतना लंबा टिक पौँगा मैने सोचा ना था. आंटी वी अब गांड एसए उछाल उछलकर मेरी लंड की तरफ उपर दरही थी की जेसे वो वी अपनी प्यार दिखा रही होबेठएके लिए. मेरा रॅफटर और तेज हो गयेा. मैं आंटी को किस कर रहा था हमरजुबान लार एक हो चक्का था. मैं उनका मस्त दूध दोनो हाथ से मसल रहाताओर नीचे चुत और लंड की मिलन बहुत जल्दी जल्दी होरहा था. आंटी ने अपनी दोनोटंगे से मुझे उपर से वी घेर लिया था ताकि मैं अलग ना हो जाो.मुझसे रहनगया. पानी की धारा बहएने लगा. पानी बहेते बहेते मेरा लंड ने फिर वी खुद ही धीमी धीमी से आंटी की चुत मेडो तीन गहेरी शॉट मारा और पूरेपिचकारी निकालडिया. आंटी ने वी मुझे अपनी पर से जाकड़ के अपनी गरम रस निकल दी.मैं उनकी उपर गिर्पाड़ा. एसा लग रहा था मुझे हवा कम मिल रही है.आंटी की वी कुछ एसए ही हालत थी. मेरा लंड उनकी चुत मे मारझा गया.

मेरी आंटी कब चल पड़ी मुझे पता भी नचला. मैं सो चुका था. इतना पहेबार मैं ताकता. मुझे लगता है दिन रात काम करने वाले भी इसे तरह नही तक सकता है. मुझे पिसाहब की दबाब अपनी लंड पर महेसुस हो गयेा तब मेरी नींद जागी. मैं जगा और अपना होश संभाला. मेरी लंड दिखने लायक था. चुत और लॅंड की लार सुख के सफेद रंग की दाग से धक्का हुवा था और लंड की कॅप बंद हुवा था. मैने लंड की कॅप खोलने की कोसिस की लेकिन बहुत दर्द हो गयेा. बेड पे आंटी की बाल थे बेडशीट इतना गंदा मैने पहेले कवि नही दिखता. हमारा लार से पूरा दाग फैला हुवा था और चादर तकिया का कोई ठिगना नही था और तो और मेरा बेड भी वॉल पे चिपका हुवा था. मैं मन ही मन सोचने लगा एसए बेड की हालत तो सुहागरात का दिन भी किसीने किया ना हो. मुझे यह चीज़ सपने जेसे लगा. मैं सोचने लगा आंटी केसे चली होगी यह रूम से उनको तो बहुत दर्द हुवता. यह सोचतेही मेरा लंड जागने की कोसिस की लेकिने मुझे दर्द का एहेसस हुवा उपर से पिसाहब का वी दबाब था तो मैं बाथरूम चलगे.
मुझे एसा कवि नही हुवा था. लंड से पिसाहब भी बहुत मुस्किल से निकला. मुझे अपना लंड को दिख के दया आगेया. मैना बाथरूम के सीसे मे अपने आप को दिखा. लग रहा था मैं पूरा एक हप्ते से सोक जगा हू. मुझे नहाना चाहिए. मैने बल्तीं मे पानी भरने की सोचके बल्तीं देखा. बल्तीं मे मुझे आंटी के वोही कपड़ा मिला जो उन्होने हमारी चुदाई पे पहेनीति. ज़रूर हमारी रस उसमे भी लगी होगी इसलिए. मैने अपना पेंटी भी उसमे रखने की सोचलिया लेकिना नज़ाने क्यू पलंग तोड़ चुदाई होने की बाद भी मुझे आंटी से कसमकस लग गया.

मैने पानी ऑन करली और अपनी बदन को उसके नीचे किया. जब एक बूँद पानी मेरी लंड मे पड़ी तो मुझे एसा जलन हुवा जो पहेली कभी नही हुवा था. हे भगवान मेरी लंड की चाँदी कई हिस्सा मे निकल गया था. पूरा जोश मे मैने चुदाई किया था और मुझे आंटी की फिकर थी लेकिन मेरी खुद की एसा हालत मैने कवि महेसुस नही की. मुझे लंड मे पानी डालना इतना मुस्किल कवि नही हुवता. फिर वी मैं सम्हालके नया. मुझे अजीब महेसुस हुवता आख़िर मैने आंटी को चोद लिया. एसा लग रहा था मैने अपनी जिंदगी की मख़साद हासिल करदी. मेरा सीना चौड़ा हुवा था. अगर आदमी को अपनी चाहत मिली तो क्या चाहिए लेकिन आदमी की चाहत कवि पूरी नही होती. मैं तो माकी चुदाई की कल्पना करके बाथरूम पे मूठ मारने वाला था लेकिन लंड की दर्द ने मुझे नही दिया. आप सोचे होंगे इसे तरह आंटी की चुदाई की बाद मूठ मारना ज़रूरी है जब की आंटी घर मे ही है. हा दोस्तो आंटी की चुदाई मेरे लिए एक अचानक हुवा हादसा था क्या पता आंटी की अबकी रिक्षन क्या होगा. मुझे मे उतना दम तो नही की मैं आंटी बोलू ‘प्लीज़ आंटी मुझे अपना सहेजादा या सोहर मनले.‚

मैं नहाते वक्त देखा आंटी अपने रूम से निकल रही थी हमारी आख मिली. पता नही क्यू मैने अपना आख नीचे किया और अपना रूम मे चला. मुझे अजीब महेसुस हो रहता. मैने कपड़ा बदल ली. मैं अदक गया मैं बोलने वाला था आंटी मुझे गरम चाय पिलाओ लेकिन आज बोलने को वी दिल धड़क रहा था. दोस्तो आंटी की चुदाई मेरी अकेले कोसिस से नही हुवी थी फिर वी मेरी दामाग तो बोल रहा था तू एक मदारचोड़ है हरामी है, जिस चुत से निकला उस चुत का तूने अपमान किया है. तूने ग़लत किया है. अपनी आंटी की बेइज्जत किया है.. और मेरा मन बोल रहा था तू सही जा रहा है. आंटी को तूने खुश किया है. बाप की धरम निवाया है. घर को उजेला दे रहा है. तू अभी भी आंटी इज़्ज़त कराता है इसलिए आंटी को देखकर तेरी आख झुकी. और मेरा अंतर्मन बोल रहा था. जा अपनी आंटी के पास उनको छाए बनाने को बोल. उनको बाहोमे भर प्यार कर. उनका आशिक़ बानिया उनका चुदाई करले.

मेरी दिमाग़ मेरी मन और मेरी अंतर्मन एक साथ चल रहे थे. मैं उलझन मे था. मैं यह वी सोच रहा था की आंटी ने क्यू मुझे रोकने वजह उकसाया. बात जो भी हो एक हाथ से टली कवि नही बजती इसलिए मैने मन को शांत किया. फिर वी आंटी तक पहुचने की हिम्मत नही हुई. अचानक मुझे आंटी की पायल सुनाई दी. मुझे पता था आंटी ज़रूर चाय लेके आएगी. अगर मैं रात मे वी नहाता होगा तो वी आंटी चाय लेके आती. आंटी को अपना बेटा का आदत अच्छी तरह से पता था. उनका केरिंग इतनी खास थी की मेरी बारएमए सयद वो मुझसे वी ज़्यादा जानती हो.लेकिन फिर वी पायल की आवाज़ से मेरी धड़कन तेज हुवी. आज मेरे सामने आने वाली आंटी पहेली वाली आंटी मैं मन नही सकता क्यू की सुबह ही मैने वो आंटी की चुत मे अपनी लंड पेला था. बात कोई सामानया नही थी. आंटी अंदर आगाई मैने मुस्किल से एकबार आंटी की और देखा आंटी की नज़र मुझसे मिली तुरूनत ही मैने अपनी आख नीचे किया. ना मे सॉरी बोलने की हालत मे था ना तो और कुछ. आंटी के आगे मैने मंडी वी नीचे करदी. आंटी की पायल की झाँक मेरी टेबल तक पहोची और उन्होने उदार सयद चाय रख दिया. आंटी ने गला दो तीन बार ख़ासी लेली जेसे की उनको बोलना मुस्किल हो रहा है. सयद गला सूखा था और सुस्त से कुछ बोली “बेटा चाय पीना..” आंटी कुछ और वी बोलने वाली थी लेकिन उसका गला कंसाकस गया आरू आंटी फिर बिन कुछ बोले धीमी से चल दी.
आंटी जातेही मैने बहुत लंबी सास खीची. आज पहेलिबर मेरा लंड ने कुछ गाँधी हरकत नही किया. मुझे आंटी की तबीयत पूछने को दिल हुवा था लेकिन मैं नर्वस हो गयेा. यह सब पहेलिबर हो रहता. मेरा पेट एक दम खाली महेसुस होरहा था लेकिन भुख बिल्कुल नही थी. जब मैने छाए की और देखी तो वोा पेपर्स भी थे. मैं सोचने लगा क्या होगा! मैने जल्दी से वो पेपर पड़ना शुरु किया. वो लेटर अंकल ने आंटी को लिखा था. लेटर लंबी थी और मेरे लिए एक दम अनौूखी थी.

अंकल ने बहुत कुछ लिखता लेकिन मैने इसको ध्यान दिया”सकुन अब तुम भी जान गयी हो मैं अब नपुंशकतरह हुवा. मैं अब फिर कवि तुम्हारे साथ सेक्स नही करसकता हू. सकुन जब तुम मेरी साथ मे बेड मे होती हो तो मेरा हालत क्या होता तुम सोच नही सकती. मेरा दिल तुम्हारे साथ सेक्स करनेको बहुत होता है लेकिन मेरा बदन मेरा साथ नही देता. काश मेरा मन भी काम का नही होता. सकुन मेरी तो बदन मे चोट है इसलिए यह भोग रहा हू. तुम को सही हो तुमको तो सेक्स करना चाहिए, मैं जनता हू मेरी सकुंतला मेरे होते हुवे दूसरे मर्द के साथ आख वी नही मिलाएगी. सकुन मैं नही चाहता की मेरे साथ जो हो रहा है उसका सज़ा तुमको भोगना पड़े. मैं तो अपनी जिंदगी से नीरस हू तुम को क्यू होना है. सकुन मुझे मरने की तो दिल नही है लेकिन मरने से नही डराता, मैं पूजा पाठ मे लगना चाहता हू दूर तक चलना चाहता हू. मैं तुम्हारा पास फिर कवि नही आऊगा. सकुन मुझे ग़लत नासमझना. यह मैने अपने लिए बस नही किया है. मुझे तुम्हारी फिकर होती थी अब नही. जग्गू बड़ा हुवा है तुमसे बहुत प्यार कराता है. सकुन मेरा कहेने का मतलब मेरा नाहोने पर वी घर तो चल ही रहा था अब तो जग्गू भी बड़ा हुवा है. मैं चाहता हू तुम अपनी सेक्स जीवन की वी सुरुवत करना अपने मर्ज़ी के मर्द के साथ. इसमे मुझे कोई रोक नही है. लेकिन घर की शांति को ख्याल करना,समाज ख़याल वी करना सब से बड़ा तो अपना एक्लोटा बेटा को भी जो अपनी आंटी को बहुत प्यार कराता. सकुन एक बात बताउ अगर तुमको अच्छा नालागे तो मुझे माफ़ करना यह सवाल मैने जग्गू के साथ भी किया था. ग़लत नही समझना घर के लिए इज़्ज़त के लिए. मैने उसे यह बात गोपया रखने की कसम के साथ मेरी पूरा बात क्लियर करके पुचछा था “जग्गू क्या तू अपनी आंटी को मुझ से ज़्यादा प्यार करेगा?” तो क्या बोला मालूम है सकुन! हमारा बेटा नालयक निकला. मुझे उसे कोई जोड़ लगाने ना पड़ी बोला ” अंकल मैं आंटी की खुश के लिए कुछ भी कराता हू जान वी दे सकता हू”.

देखो सकुन मैं मर्द हू मर्द को अच्छा जनता हू. हमारा बेटा काफ़ी जवान हो चुका है. तुम भी किसी जवान लड़की से कम नही हो, जग्गू का दिल कही ना कही से तुम्हारे साथ सेक्स करने को कहेता है. लेकिन इसको ग़लत नही समझा ना यह उमर मे हम मर्द सब नालयक होते है लेकिन पापी नही है. वो हर चीज़ नियंत्रण कर सकता है. अगर तुम उसे मेरी खोज मे भेजोगी वी वो तुरूनत निकल पड़ता है. लेकिना एसा ग़लती मत करना. अगर वो आसपास वी दिखा दिया तो मैं अपना जान दूँगा तुम्हारी कसम. आव सकुंतला घर की इज़्ज़त सान और ख़ुसी सब तुम्हारा हाथ मे है. तुम चाहो तो एसए ही जीवन कटपावगी लेकिन मेरी कसम तुम्हारी जीवन अगर सेक्स बेगार गई तो मेरा मन को कही शांति नही मिलेगी…सकुंतला बेटा तुम्हारा ऑप्षन है,बेटा का साथ सेक्स पाप है लेकिन दिल को तड़पाना उस से वी बड़ा पाप. अब तुमने बेटे की वी दिल जंलिया है. वो अपनी माको बस प्यार नही कराता है चाहता है किसी आशिक़ की तरह जान वी देसाकता है. यह साव इसलिए हुवा की तुम बहुत सुंदर और प्यारी हो सकुंतला…..” अंकल की झूठ मूठ की कहानी ने मेरा दिमाग़ चौका दिया. आज पता चला अंकल ने कितना आसानी से मेरेको समझ लिया. यह भी एक बात है मर्द सब एक जेसे होता है क्या पता अंकल को वी किसी उमर मे अपना घर की औरात से ही सेक्स करने की दिल आई हो. और आंटी की खूबसूरात और जवानी को दिख के तो अंकल को साख होना ही था जवान बेटा का दिल मे वी गाँधी सोच तो होगा. उसपर मैने उतना प्यार आंटी के लिए अंकल का सामने दिखाया था. मेरी नज़र पेपर की बॉटम पे पड़ी वोा नीचे आंटी की राइटिंग थी “बेटा मुझे माफ़ कर दे, मैने तन लिया था चाहे तेरी अंकल कुछ वी कहे हो तेरे साथ सेक्स मे सपने वी कर नही सकती लेकिन लाल जब तुमने मेरी ओत को दूसरी बार महेसुस करदी तो मुझे एसा लगा मैं चारो तरफ से खुली हू. मुझे रोकने वाला कोई नही था और मैने इसववर की परबाह भी नही की तेरे अंकल ने जो कहा वोही हुवा. मुझे माफ़ करना बेटा. मैं तेरी आंटी थी मुझे रोकना चाहिए था, लेकिन मैं पागला गयी.” मुझे आंटी की यह कहेना बहुत घुस्सा आया. ओत चूसना चुचि मसलना सबकुछ मैं करू और माफी आंटी मागे. अंकल का इतना एनकरेज के बात वो खुद भी कराती वी उसको सही मन ना चाहिए. मुझे क्या मिला आंटी को पता नही है,बेटा जीवन मे पहेली बार इतना उत्साहित हुवा था,इश् बात को आंटी को अंदाज वी नही हुवी. अंकल का दिल बहेलने वाली लेटर के बाद भी आंटी तो यह समझ रही है की ग़लती उसकी है.मैं एसा सनक मे आगेया की अवी आंटी की रूम मे जाकर उनको एक बार चोद के बोलडू की अगर पाप की है तो मैने. मैने छाए वी नही पिया. मैने हिम्मत एक करके माकी तरफ अपना कदम बदाया.


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