मेरी आंटी मेरी जान – पहला भाग

मैं कहानी लिख रहा हू जो अपनी है. कहानी मे कोई फॉरमॅलिटी नही होगी जेसे कोई फॉर्मल कहानी मे होती है.मैं इसमे कोई मसाला और कोई काल्पनिक मस्ती की बात डालके इसको ड्रमलीज़ेड नही करूँगा हा अपना दिल और भावना की तो बात ज़रूर करूँगा.
मेरा नाम जगदीश लेकिन कामन्ली जग्गू बुलाया जाता हू . मद्याम परिवार से हू.मेरा अंकल आर्मी मैं है. अंकल का नाम मोहनलाल है,और मेरी आंटी का नाम सकुंतला है. मेरा पालन पोसन आंटी ने की. मैं आंटी से ज़्यादा करीब था. अंकल तो कवि कवि ही मिलते थे. मेरी आंटी का कामन नाम सकुन था.
दोस्तो आदमी खुद कुछ नही है बस बेहेता हुवा पानी जहा नीचे धार होता उधर ही बेहेता है. अगर आप को भुख प्यास लगी तो आप क्या करते हा ज़रूर अपने करीब इसका खोज करेंगे. हा मेरा साथ कुछ एसा ही हुवा. पहेले आश्पस आंटी की पायल की झाँक से सेक्यूर महेसुस होने वाला मेरा मन इसे उमरसे ही केसे कौनसा दिन से और क्यू यह झाँक से रोमांचित होने लगा था. यह कोई सामानया बात तो नही थी लेकिन मेरा साथ एसा ही हो गया. मेरा पहेली सेक्स ड्रीम गर्ल अपनी आंटी होगआई थी,हलकी आंटी आम आंटी की तरह ही थी. मेरा लंड को चुत की तलाश थी और बाहरी दुनिया से बेखवार होते हुवे मुझे तो अपनी आंटी ही इसकी इलाज लगी. सेक्स की भूख ज़्यादा हद तक मूठ से वी बुझती है इसीलिए आंटी के नाम से ही मूठ मारना शुरु कर दिया.

क्या करे सेक्स तो नसे वाली चीज़ थी जिसका जितना सोचा करो उतना चाहत. आंटी को नंगी दिखनेको उनकी गुप्तँग महेसुस करने को दिल होने लगी. अंकल जी को बहुत कुछ की फिकर थी.जाव वी घर होते, हमेशा नयी ज़मीन नयी फ्लॅट की बात करते थे.उनका स्ववाव कूल था और लोगों के कंपनी उनको पसंद थी. दोस्तो मेरा दिमाग़ तो आंटी की पास ही घूमता था. आंटी की बारएमए क्या बताउ उनकी सुंदराता और स्ववाव? मैं उनके किसी चीज़ की बड़े बताके अपना पूरा जीवन खट्तम कर सकता हू. सच मे उनकी आख बड़ी थी.केश घनी लंबी, 6आती तनतन और गांड काफ़ी मस्त बड़ा था जो मुझे बहुत पसंद थी. मेरी आंटी दबंग्ग थी.उनसे कोई वी आदमी ग़लत तरिकेसे पेश आनेकी हिम्मत नही कर सकते थे.वो अपने आपको शिहराती थी और प्रॅक्टिकल वी थी. और वो मुझ से काफ़ी प्यार कराती थी.मेरा हर चीज़ की ख़याल रखती थी.लेकिन उसको जरासा वी साख नही था की उनका एकलौता नादान बेटा की लंड उनकी लेने की चाहत कराता है. जाव वी आंटी की नज़र मेरे से हटजति थी तो मैं उनको घूर्ने लगता था. ज़्यादातर आंटी पीछे मुड़ने की वक्त ही लंबा वक्त होता था आंटी को घूर्ने के लिए. इसलिए आंटी की पिछवादी हिस्सा मुझे अपना सा लगता था. अगर आप औरात की पीछे कुछ चीज़ दिखने चाहते हो तो और क्या चाहोगे सिवाए गंद. मैं वी उनकी गान्ड को दिखता था. सारी मे कसी हुई उनकी गांड वी मुझको बहुत तरंग देती, काश एक बार ही सही उनकी सारी और पेट्तीकोत उठाके उस मन मोहिनी को दिख पता. होता तो कुछ भी नही था लेकिन मूठ मरने के लिए घटिया सोच काफ़ी थे.

*** साल की पूरा मेरा सेक्स चाहत माकी उपर ही थी. हर दिन दो तीन बार मूठ मराता था कवि तो 5 बार भी मारी होगी लेकिन वो साव आंटी के नाम पर ही थे. दोस्त लोग आप हैरान होंगे की दिन मे 5बार मूठ .! मेरा दिमाग़ बुरी तरह से आंटी की तरफ आकरसीत होता था,और मुझे उनको कासके पकड़ने को दिल होता था तब मूठ इसका इलाज था. मूठ मरने की बाद कुछ देर मुझे आंटी बस आंटी लगने लगती. इसीलिए दिमागी उलझन को दूर करने के लिए मैं ज़्यादा मूठ मराता था.दर वी लगता था ज़्यादा मूठ मरके कही कोई हेल्त मे असर प़ड़ जाए. कवि कवि निचला वाला पेट खाली महेसुस होता था,और बॉल फूला लगता था परंतु एसा कुछ नही हुवा.
हैरानी की बात तो यह थी की सयद ज़्यादा लंड हिलने और मसालने से मेरा लंड तो काफ़ी बड़ा हो रहा था. मैने सुना वी था किसी ने ससेंसे मे यह कहा था.. कोई वी चीज़ की ज़्यादा पर्योग से उसकी बिकस जल्दी हो जाती है उसने क्या एग्ज़ॅंपल दिया पता नही लेकिन प्रूफ तो मेरा लंड ही कर रहा था.मैं अपना लंड दिख के मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश होता था आप तो जानते है की इसकी कारण, क्यू की बड़ी औरात की चुत वी बड़ा होती है लगता था यह लंड खुदा ने मेरी आंटी के लिए बनाई है,यह सोचता तो लंड और उछालता था.

हर वक्त आंटी के साथ रहएने की चाहा और उनको घूर्ने की तो नासा पड़ी थी. सुबह मेरी तव होती जाव आंटी की पायल की झाँक मुझे रूम पे सुनआदिटी. हर सुबह आंटी छाए टेबल मे रख के मेरी माथे मे चूंके सहेलती तब ही मैं आख खोलता. फिर आंटी बहुत प्यार से बोलती ‘सुबह होगआई लाल,चाय पिलो‚ जाव मुदके चली जाती तो मैं उनकी मटकते गांड की उछाल दिख के अपने लंड को सहेलते सोचता था‚काश आंटी मेरी बीवी होती‚ और काश हर सुबह मेरी जीवन की मेरी आंटी एसए ही रोसनी डालती, और मेरी आंटी कुछ देर मेरी पास सो जाती!मान मे उनकी चुत और गांड की दिखने लालच हर दिन बदती थी.सोचता था बाथरूम 6एड करू या मोबाइल 6उपके उनकी रूम मे वीडियो रेकॉर्ड करू लेकिन यह साव प्रॅक्टिकल मे ईज़ी नही थी क्यू की आंटी इतने आसानी औरात नही थी. वो मज़ा ही क्या मज़ा जहा दर ना हो.

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आप लोग सोचते होंगे की मुझे अपनी इसे गंदी ख़याल आने पर मैं खुदा से क्यू नही डरा! इसकी जवफ तो आसान थी. हम लोग गाइ को देवी मानते है और गये की बचे अपनी आंटी की चुत सुघ के हुकार हुवा मेने बहुत देखा था और कही तो उपर चड़ा वी दिखा था. बचो से यह जाना ताकि खुदा का मतलब प्यार है जो बिना नॉक्सन किसी के साथ किया जा सकता है.मेरा धरम को मे इसलिए आज तक वी रेस्पेक्ट कराता हू,लेकिन धांडे वालो के लिए धरम बस एक आदरसा है पोलिटिकल वर्ड है और खुद को उछा दिखाने की ढोंग है खेद आती है और हसी वी उनलोगो को दिख के,सला जो इन चीज़ को नही समाज सकते है. मैं *** साल छोटा था लेकिन बेबकुफ़ नई.हन गिल्टी महेसुस ज़रूर होती जाव आंटी का नज़र मेरे लिए कुछ और था और मेरा जो सांड की तरह ही था.

चलते चिजको बदलना मुस्किल होती है ख़ासकर आप कचे है तो! हा मेरा साथ वी एसा ही हुवा. मैने अपनी 5 साल मूठ से ही गुजरदिया. जाव मे *** साल का हुवा मेरी आंटी का वी एज 37 हो गयेा था. हैरानी की बात थी आंटी थोड़ी सी मोटी हुई थी जिसका असर उनकी गांड मे दिख रहा था. आंटी तो और कामुक दिखती थी कोई 30 साल की मस्त खूबसूरात मादा जेसी. सच बोलू तो मुझे आंटी इतनी मस्त लगती थी की सोचटता खुदा ने छोड़ने के लिए रचना की है उनका. मुझ मे वी बहुत बदलाव आई.बॉडी स्ट्रक्तुरे बाप से वी उछा और मोटा हो गयेा था. यह साव आंटी का हाथ की खाना और प्यार का कमाल था. और मेरी लंड की बात करू तो दोस्तो मुझे कवि अपने को दिख के उपर इतनी घमाद नही हुई जितनी इसको दिखकर हुवा था. इतना मोटा और लंबा था की जेसे आवरेज हाथ उसको मूठ मे ले नही पाते. लंड की जो कॅप था दिखने मे अछा ख़ासा गोल मोटा पिंक आलू लगता था. जिस तरह आंटी की हाथ की खानसे मैं मोटा हुवा था सयद इसी तरह आंटी के नाम के मूठ और सहेलने से लंड वी मस्त हुवा था. मेरी आंटी बोलती थी‚अगर मैं मोटा हुंगा तो हेल्ती हुंगा और लंबी जीऊँगा इस बात से उनको ख़ुसी मिलेगी‚ मैं बोलता था ‘आप मेरी ख़ुसी मे अपनी ख़ुसी दिखती हो और मैं वी हमेशा आप को खुश रखूँगा आंटी‚ यह बात सुनकर आंटी खुश होती थी लेकिन मैं हवस की पुजारी सोचता था ‘काश आंटी यह लंड आप के लिए पर्योग कर सकता‚
आव मेरा उमर का साथ मेरा सोच वी मेच्यूर होरहा था. मुझे मीठी सपने से ज़्यादा हक़ीक़त मे जीना था. सोकता था आंटी की चुत पे एक बार लंड दलदु तो समझू मैने जीते जीते जन्नत हासिल की. क्या आप अंदाज़ा लगा सकते है इसे चाहत को.हा ज़रूर अगर आप के वी मेरे जेसे आंटी होतो! जी कराता था पूरा दुनिया को उनकी कदमो मे कार्दु और उनको दुनिया की सहेजडी बनडु और अपनी गोद मे बिठा लू.


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