मेरी आंटी मेरी जान – दूसरा भाग

एक सुबह जावमा की पायल की झाँक सुनआडी देने पर मैने अपना सर घूमलिया और नींद कीनटक की. आंटी ने छाए टेबल मे न्यू एअर और मेरे गाल मे हल्के से चूमि और बोली‘मेरा लाल उठ लो सुभह होगआई’ मैने जब आख खोली तो वो अपनी मस्त गाँधिलते चल दी. दिल झूम उठा क्यू की मुझे आंटी की चुंबन अपनी गाल पर अच्चीलगी. दो दिन बाद अंकल आ गया. मुझे कुचखास नही लगी इसे बात पे लेकिन आंटी कुछ ज़्यादा खुश थी. अंकल आतेही आंटी ओर्पिता की मिलन दिखने लायक थी. मेरी तो गला सुख रही थी. मुझे एसा क्यू लगकी काश अंकल नही होते तो!.फिर वी हमेशा मैं आंटी की ख़ुसी के साथ था. औरसामय मेरा साथ था,सयद खुदा वी येई चाहते. वो साम आंटी हर चीज़ जल्दी मेकर रहिति मैं आव समझ सकता था. मैने वी अपनी एग्ज़ॅम ख़त्म हो गयेा बोलकेउनको काम मे हेल्प किया. दोस्तो सयद मोहोब्बत यही होती है मुझे आंटी को खुश दिखनबहुत अच्छा लग रहा था.मैने मूठ मराते आंटी की रेप की बहुत कल्पना की हैलेकिन हक़ीकत मे मुझे आंटी को रेप करना दुनिया मे सबसे बड़ा पाप करना लगतता. मैं अपनी कारण से आंटी को ख़ुसी देना चाहता था. इसलिए मैने आंटी से कहा‚मापापा हमारे साथ मे हार्डिन रहजाये तो कितना अछा होता ना‚ आंटी मुस्कुरा के बोले‚हमेरा लाल लेकिन जिंदगी मजबूरी मे जीने पड़ती है‚ मैने फिर बोला‚आंटी आप दोनोको साथ मे दिख के मुझे बहुत ख़ुसी मिलती है‚ आंटी ने मुस्कुराते बस इतनिबोली‚मेरा लाल आव समझदार और जवान हो गयेा‚. रात सोने के टाइम मे सोचने लगामेरा अंकल बड़ा लकी इंसान है जो उनको इतनी मस्त माल मेरी आंटी मिली है छोड़नेके लिए. सोचने लगा लेकिन अंकल बेबकुफ़ है जो घर कम आते है. मैं होता तोहेक पल साथ नही 6ओदता था. हू रात मैने खुद को अंकल के जगह रख के आंटी की सतखब चुदाई की कल्पना की. मूठ मारना बहुत अछा लग रहा था लेकिन पाणिनिकलते वक्त दिमाग़ मे आंटी आंटी आया और पानी की धारा चोद दी. कल्पनाओ मे विमैन बेटा होकर ही आंटी को छोड़ना चाहता था. उसका प्रूफ मेरा लंड का पानी नेदिका दिया. रात भर लंड हिलाते सो गया. कल का सुबह आंटी की पायल की झंकरसुन्ते ही मैं खुश हुवा. आंटी हार्डिन की तरह छाए टेबल पे रख के मेरी निडर पेचुमि और मेरे बाल सहेलते बोली‚बेटा छाए पिलो‚ और धीमी से चालदी. आजूनकी चलना कुछ आहिस्ता था और उनकी आवाज़ वी खिसकी हुई थी. मैं सोचने लगजरूर अंकल ने रात भर आंटी को मस्त पेला होगा इसलिए आंटी सुस्ती पड़ी. मैने जातेहुई आंटी की गांड को दिखके लंड मसालते लंबी सास ली और सोचा मुझे अपनी ख़यल्मे आंटी को छोड़ने से कोई रोक नही सकता. मुझे लगा अगर इंसान की खुद की कोई होतो बस उसकी कल्पनाए और ख्वाव है बाकी कुछ बस मे नही. फिर मैं मन ही मन सोचता था क्या हुवा मैं अपनिमा को खुश रखूँगा अपने बस्तविक जीवन मे चाहे मुझे जान देना पड़े. कशदाड़ को घर मे रख के मैं काम लग्जाो और आंटी को यह जतासकु आप का बेटाअप के ख़ुसी के लिए कुछ वी कर सकता हू यक़ीनन मैं उनसे मोहोब्बत कर रहता सयद एसए महेसुसी होरही थी.

मेरा दिल इतना बड़ा हो रहा था दोस्तो कयबताउ. आव आंटी की चुत बस्तविक दुनिया मे मिलनी नही है तो क्यू अपने आंटी केलिए ना जीऊ. अगर बस आंटी के नाम पर मूठ मरके रहूँगा तो एकदिन ज़रूर पागलवली हरकत करज़ौंगा. आज दिन मे आंटी उदास और थाकेली दिख रही थी इसकामतलाव मैने कुछ और समझा. साम को मैं अंकल को रूम मे गया,बात चिट केलिए. मेरा मख़साद था अंकल को घर मे रूकौउ. अंकल ने मेरी स्टडी क बड़े मेपुचताछ की बात जनरल हुई फिर मैने अंकल को बोलडिया.’ अंकल आप घर मे आंटी केसाथ रहिए हमारे पास क्या चीज़ की कमी है, मेरी फिकर मत करिए अगर आप किखवाहिस कुछ है तो वी बोलदीजिए मैं पूरा करनेके लिए कोसिस शुरु करूँगा अगर इसके लिए मैं आर्मी पे ज़ोइंवई कर सकता हू!’यह साव बात एकसाथ मैने जोश मे बोला. मेरा बात सुनके दड़त्ोड़ा मुस्कुराए और मुझको अपने साथ बेड मे बुलाए. ‘बेटा बात तूने बड़े वालीकिया है लेकिन गौर कर बोलना चाहिए. पहेले बोल तू क्यू चाहता है की मैंघर मे रहएजाओ. और तू बाहर चले यह तो फिर वोही बात हुई मुझ से दूर होनेकी’. मैं बोला ‘ हा अंकल मैं बड़ा हुवा हू पड़ाई इतना ही बहुत है. अगर आपमा के साथ रहेंगे तो आंटी बहुत खुषोंगी वो आप को बहुत याद कराती है. आप के साथ आंटी बहुत खुश है’ अंकल नेलम्बी सास लिया और कहा ‘बेटा आज यह कहेकर तूने मेरा मन जितलिया मुझे तुझेबहुत चीज़ बतने है. और मेरे जीवन की सारे कड़वाहट बठानी है. मुझे तू यहबता की क्या तू आंटी से दूर रह सकता है. सच मे तू आर्मी जाय्न कर सकता है.मैनेतुज़े कवि किसी के साथ नही देखा मेरा जानकारी से आंटी ही तेरेलिए सावकूचहाई,और उस से दूर रहेना वो वी पहेली बार अचानक क्या तू अंदाज कर सकता है.मैं जातना हू तू मुझे वी प्यार कराता है लेकिन मुझसे दूरी तो पहेले से है’मैने हिम्मत से बोला ‘हा अंकल मैं जनता हू मेरे लिए आसान नही है. आंटी कहतो की खाना और उनकी केरिंग को त्यागना मुस्किल है लेकिन जाव मे यह चीज़ उस्मा के लिए ही कर रहा हू तो इसमे मुझे खोने की कुछ फिकर नही है.’अंकल ने बादीलंबी सास लिए जेसे उनको चिंता होगआई और बोले ‘बेटा तूने अंकल का मन को जितलिया. मुझे गर्व है तू जेसा बेटा मिला मुझे. मुझे तुज से और बात बठानी हैलेकिन तेरे बात से आव वो खास नही रही. चल यह बार मैं 1 महीने के बदावँगा.जाव मैं रिटर्न आऊगा तो पूरे घर के लिए तव तक तू कुछ मत करना.मैं बताउँगा तुझे क्या करना है. आज तूने मेरा मँको शांत कर दिया.’ वो बतसे मुझे लगा अंकल वी आंटी के साथ रहेना चाहते है जिसके लिए वो सेल्फिशदिखने लगे मुझको फिर वी अंकल की बात मुझे कुछ उलझे से लगे. मैं तो आंटी केलिए कर रहा था की वो खुश रहे.

अंकल इसे बार जल्दी चले. आंटी तो और निरासलगी. साम को अंकल जातेही आंटी ने खाना टायर की. आंटी कुछ ऑफ मूड मे थी. माकूछ नही बोल रही थी और मे वी चुप रहा. कल की सुबह आंटी ने टेबल मेरी तबलेचाए न्यू एअर और मेरे बाल बहुत देर तक सहेलाइ. आज वो मुझे नही चूम रहिति इसका मुझे खेद रहा. लेकिन वो आज मेरी बेड मे बेठी थी. मैने गौर कियामा उदास थी. मैने आख को पूरा खोलके बोला‚आंटी क्या हुवा?‚ वो कुछ ना बोली.मैने फिर बोला‚आंटी आप उदास क्यू होती हो,अंकल आएँगे प्लीज़ आंटी मुझे आप को इशूदसीपान को दिखना बहुत मुस्किल होती है.’ एसा बोलते ही आंटी एक छाँटा मुझकॉएसा मारा मुझे दर्द होगआई. मार मुझे पड़ी थी पर आंटी रोने वाली थी. मुझेकुच समझ मे नयी आया. मैने कुछ सुलझे बिना झट से बोला ‘मैं क्या करूमा मैने कोसिस की लेकिन अंकल ने मेरी सुनी नही. ‘ मैं अदक के बोल रहा तज़ैईसे रोनेवाला हू.आंटी ने ‘ बस कर मेरे लाल’ बोलके मुझे गलिया देने लगी ‘तुखुद को क्या सोचता है,तू इतना बड़ा हो गयेा की मेरी चिंता अवी से उठा ले. तुझेठ़ो चाय केसे बन जाता है वो वी मालूम नही है,और इतना बड़ा बड़ा बातें कार्डिदाड़ से.’ आव बात मुझे समझ आगाई साव अंकल का किया हुवा था. आंटी बोलटेही जारही थी कवि एकदिन घर छोड़ा है तूने! बड़ा आगेया आंटी को प्यार करनेवाला.मैं अपना दर्द वारा गाल को सहेलते बोला..’अरे आंटी घाव्राती क्यू हो अंकल मेरएकोसव बतायांगे.’मेरे रसीले आख मैं दिख के आंटी तो कूद पड़ी. मुझे बाहोमे लेकेमेरी गाल मे चुम्मा के एसए बारिस करदी मैने साव दर्द उलगया. आंटी ने प्यार सेकहा‘बस कुछ नाì करनी है तुझे मैं कोई थोड़ी तेरा अंकल के नहोटे मरने वलिहू.तू क्या सोचता है की तू मेरे लिए कोई महीने नही रखता है. तू कोई आसमन्से गिरा है! अगर तूने एसए बात कवि सोच वी लिएगा ना तुझे मेरी कसम मेजान दूँगी.’ दोस्तो मैं ज़्यादा एक्सप्लेन नही कर सकता उस समय मेरा माइंड और मंकिस तरह चल रहेते. आप लोगो को वी समझना मुस्किल हो गयेा होगा. आंटी किस हड़त्ाक मुझे प्यार कराती थी जेसे की मैं उनकी दिल की टुकड़ा हू. एक बात सच बटौउतो हू महेसुस काफ़ी अलग था और कॉंटरोलिएशस. मेरा अंतर्मन अंतरंग रचने लगा.मेरे बदनौर मन दिमाग़ मे एसा कोई हिस्सा नहोगा जहा तरंग नचला. मैने आंटी को पीछहत से सहेलते बोला‚बस करो आंटी अपने हद करदी. नही होने मुझे आर्मी मुझे किसीकि परबाह वी नही है. बस आप ही मेरी जिंदगी हो आपको नीरस नही करना हैईमुझे. मुझ से जान डेनेकी बात मत करना फिर कवि. ओह! मा’ बोलके मैने भी उंकीचहेरा पे चूमना शुरु कर दिया. जाव दोनो तरफ से हवा चलती तो चीज़ काहौड़ती है किसको पाट! हमारी लिप्स टकराई मैने बिना दिक्कत होते हुवे उनकोचुसलिया और मैने उनको और खिछा यह बिल्कुल ग़लत था. मेरा अंतर्मन कुछ ग़लतचह रहा था. आंटी की स्वास तेज चली और उन्होने फाटक से अपने को अलग करदी.सयद उनको अंदाज़ा चला गया क्या होनेवाली थी. क्या कोई इंडियन आंटी बेटे सएचोड़ने की ख़याल कर सकती है ,बिल्कुल नही,चुंबन ही ज़्यादा था इंडियन आंटी केलिए. मैने खुद को गली दिया बेबकुफी के लिए लेकिन आंटी वी तो समेल थी इसलिएेतोड़ा रहट मिली.

आंटी फाटक सेचआलदी. मैने अपनी पेंटी बहुत टाइट महेसुस किया. पेंटी नीचे करके दिखा टोमैन दिखता ही रहेगया. मेरा लंड किसी घोड़े का तरह दिख रहा था. लंड कीकअप मे पानी थोड़ा निकल रहा था. काश आंटी की चुत ने वी एसी हरकत कार्दिहटी. आप को मेरी बात झेलना मुस्किल होरहा होगा. जाव आदमी मन और दिमाग़ की एकसाथ बातें कराता तो कन्फ्यूषन बाद जाती है. मेरा दिमाग़ तो दर रहा था किकही इसे हादसे के बाद कही मे अपनी पहेली वाली आंटी वी ना खो जाो. पहेले तोमुझ्े मूठ मारना ज़रूरी था. मूठ मराते मैने आंटी को कुट्टिया बनके वी छोड़ा. कल्पनाओ की कोई हद नही थी इसलिए मैइनेउनकी मोटी गांड वी मर्डिया. वो दिन यही उलझन मे फसगाया क्या होनेवाली है.इतना एमोशनल होने के बाद मुझे यह गुमसूँ अच्छी नही लगी. क्यू ना पहेली वालिमा को हासिल नकरू जो तो हुवा हुवा. जब आंटी खाना बना रही थी तब मैने बोला‘मा मुझसे हुई ग़लती के लिए मुझे माफ़ करना’ आंटी ने लंबी सास लेके बोली ‘नाबेटा तू बड़ा हो गयेा है मुझे क्या मालूम तुझे किस करना वी मालूम है. मैंजांटी हू किस उसको किया जाता है जिसको हम प्यार करते है. हम एमोशन मेखोगआय थे. मेरा अपना लाल प्यार से चूमा तो इस्मी माफी की कोई बात नही है,माफ़ीमैगने वाली कम तो तूने अंकल से किया था.आंटी ने बहुत नॉर्मली बात बोला जेसे की बात कुछ वी नही हो.’ सॉरी आंटी मैं आवसे एसा बात नही करूँगा’. आंटी ने एसा नही बेटा यह कोई बड़ी चीज़ तो नही लेकीन्मुझे अजीब लगा,अंकल तो पहेलेसए आर्मी मे है. मुझे आदत पड़ी है झेल सकतिहू, तू मुझ से दूर केसे हो सकता है. एसा होना ही नही चाहिए.’ मैं समझचुका था. बात ठीक लगी अछी वी लगी. वो पहेले किस की पल मैं उला नैसाकता हू. खैर फिर मैने आंटी को नॉर्मल पाया. अंकल और आंटी को एक करने चक्करमे मैं खुद आंटी के साथ एक होने वाला था. मैने सुना था अगर तुम दूसरो कियच्चाई सोचोगे तो खुदा तुम्हारा अच्छा करेगा आज प्रॅक्टिकल लगा. मैं सोचनेलागा अंकल का और मेरा प्लान मे पानी फिरगया इसमे साव गड़बड़ी अंकल ने कर दिया जो कीमा को कन्विन्स्ड करे बिना रिटर्न चले. फिर नॉर्मल चला.

अगर कुचलग चीज़ होनी है तो कुछ अलग सा हादसा और सदमा ज़रूरी है. आप क्या समझे! मेरा साथ एसा ही हुवा. 1 मंत बाद अंकल की लटतर आई. आंटी के लिए और मेरेलिए अलग अलग. हम दोनो अपनी अपनी रूम मे छलके पड़ने लगे. मेरे लिए लेटत्ेरपहेला था अंकल के तरफ से सयद आर्मी जाय्न के लिए संदेसा आया बोलके मैनेलेत्तर पड़ने लगा. मैं शॉक्ड हो गयेा. एसा लग रहा था मैने आज अंकल कोपेहेचना वो वी लेटर से. लेटर पड़ते पड़ते एसा लग रहा था मे सास लेनउुल्जौ. लटतर खट्तम होतेही मैं नीले और बहुत गहेरा समुंदर के नीछेपहुचा. आख़िर आंटी की चुत मेरे लिए खुल ही जाएगे. अंकल का गये 5 साल सेआपनी जाँघ मे लगे चोट के वजह से सेक्स बिफल थे. उन्होने अंतिम बार इलाज किकोसिस करने पर वी हो नही पाया. अंतिम बार उन्होने आंटी को वी बताया था जिस्किवाजह से आंटी काफ़ी उदास होगआई. मैने याद किया आंटी का उस दिन का सुस्ती पं वजहयेह था.उन्होने बताया की मैं आंटी को खूब प्यार कराता हू. और अंकल ने ये वी कहाकी आव अंकल आनएसए आंटी और उदास दिखती है इसलिए वो घर वी नही आना चाहते. एकमस्त औरात को पाती आनेका पहेले ख़ुसी जो होनी चाहिए अंकल का पास हू नैयरहा.अंकल ने इसे बात को सम्हालके लिखा‚बेटा मैं सयद आव नही जीऊँगा अगर जियू तोवी कवि दिखा नही दूँगा. मुझे तेरी आंटी की उदासी दिखा नही जा सकती. आव तेरी माकी ख़ुसी तुझ पर छोड़ता हू. मैं इसके आगे कुछ नही कहेसकता. हा मैनेरेतुर्न आते वक्त तेरी आंटी को बताया था की तू थोड़ा नालयक ज़रूर है उसके लियेकूच वी कर सकता हू. आज का लेटर मे क्या लिखा हू तेरे को जल्द पता चलेगा.माफ़ करना बेटा आज की लेटर मे वी मैने तुझे नालयाल लिखा हू. बेटा मैनेमा की लेटर मे जो कुछ भी लिखा हू मेरी तरफ से लिखा हू. बस तेरा आगे जोकुछ भी आना है तुझे हॅंडल करनी पड़ेगी. अगर आंटी तुझे नालयक बोलेगी तोसे दर्द वारी प्यार देना जो कीमती है. मेरा घर संपाति तेरी है और आंटी किखूसी की ज़िम्मेदारी वी आव तुझे देता हू.

समाज मे इज़्ज़त को कवि कम नही होनदेना. मुझे मालूम है तू कर सकता है क्यू की तू अपनी आंटी बहुत प्यार कराता है.’मुझे अंकल अछा राइटर लगे. उनकी दुखद घतना के बड़े मे पता होकर मुझेफ़िकर होगआई. सही मे अंकल सही थे. मैं उनको प्यार कराता था लेकिन क्या होनेजराहा है कुछ पता नही चलराहा था. मे सोचने लगा आंटी की लेटर मे क्यलिखे होंगे. अंकल की कहानी यह दुखद अंत थी लेकिन मुझे लगा यह मेरी कहानीकी सुखद सुरुवत थी. लेटर प़ड़ पड़ते मैं सोने लगा सोते वक्त मैने आंटी कोडद ने लेटर मे क्या लिखे होंगे बोलके सोच रहा था. सोते मैने इसी बारएमएसपना दिखा. आंटी की लेटर मे अंकल ने लिखा था की मैं आंटी से मोहोब्बत कराता हुओो वी इश्क वाली. और उन्होने लिखा था की मेरी लंड किसी घोड़े की तरह है.यह वी कहा की आव बेटा को तुम सावकुछ मनलेना अपने पाती भी. लेटर पड़के माकी तड़पाती चुत झूम उठी. और सुबह छाए के साथ मस्त बनके आई. मुझसेसरारात करके कहेने लगी तुमको वी एसा कुछ लिखा है ना! हा आंटी एसा कुचबोलके मैने उनको अपनी और खिच लिया और उनको नीचे लेक तरिकेसे चुदाई की.मुझे यह बकवास सपना रियल लग रहा था जाव की आंटी सपनो जेसे उतावली कवि तीही नई.

सुबह माकी पायल की झाँक सुनके मन मे आनंद मिली. मेरी अंतर मन बहुत खुश तमगार दिल मे बहुत सवाल आरहे थे. वो सुबह अलग थी. आंटी ने टेबल पर छायरख़् दी. और चुपचाप मेरे बेड मे बीती. मे आख बंद कर के उनकी चूमने किँतेज़ार कर रहा था. देर तक चूमने की कोई संकेत नही मिली तो मैने आखेखोलदी. आंटी उदास थी. मैने पूछा आंटी आपने मुझे जगाया क्यू नई? आंटी कुछ बोलनएकोसिस कर राई थी लेकिन बोल नही पा रही थी. उनकी उलझन मुझे अजीब लगी. सयाद्दड़ ने कुछ लिखा लेटर मे जिस से वो इस स्तिति मे थी कई मेरी सपना कीतारह तो नही, नही एसा हो नही सकता. मैने अपना सर उठाया और चाय पीना उचित्संजा. चाय लेते मैने एसए बोलडिया‚आंटी मुझे आप की उदासी बर्दस्त नही होती.क्याहुवा बताओ ना.‚ मैने अपने लेटर की बड़े कुछ नही कहा. आंटी इतनी ज़ोर से मेरेबाहोमे टूड पड़ी की मेरा हाथ से चाय उछलके नीचे फर्श पर गिरा. मैने छाएसांहलने की कोसिस मे अपना हाथ गरंचाए जलदिया.मुझे बहुत दर्द होरही थी. सीसे की ग्लास जोरदार आवाज़ देकएफर्श मे टुकड़ा टुकड़ा होके ठूटगया. लेकिन यहा कोई बड़ी बात नही थी हलकी मेरिहत मे जलन बहुत था और आंटी की हालत बहुत खाराव थी. उन्होने मुझे बाहोमेलिएके अपनी सर मेरी कढ़ मे रख उची स्वोर्मे रोना शुरु कर दिया.मैने अपनी हात्से उनकी पीछे सहएलाया. उतना बड़ा लंड होने का मालूम होकर वी मुझे आज पहेलिबर बड़ा होने का एहेसस हो गयेा था जाव आंटी ने मुझे नाम से पुकारा‚जग्गुटूम्हारा अंकल हमे चोद के चले,‚ आंटी और उछाल के रोपड़ी. मुझे क्या कहेना हैसमझ मे नही आया. मैने आंटी की तड़प को दिलासा देते बोला‚नई आंटी ओह आएँगे.‚आंटी ने बिन रुकी आवाज़ से बोली‚ ‘जग्गू उन्होने कसम कवि नही थोड़ा है. वो फीरलौटके नही आएँगे.‚ मैं आंटी को सहेलते बोल रहा था.‚उदास मत हो ना आंटी.‚आंटी रोते रोते बोल राई थी..आव मैं क्या करू जग्गू.‚ मुझे आंटी की रोना बर्दस्तनाई होरहा था. मैने बोला की मैं अंकल को ढुद लौंगा’ आज से ही मैं निकलूंगमा आप फिकर मत करो,आप समझना आप का यह बेटा घर लौटेगा तो अंकल केसाथ नही तो कवि नई.’ ‘मेरे लाल बोलके आंटी ने चूमना शुरु कर दिया. उन्होने एक बार मेरी आखोने मे गहेराई सेदिकी. उनकी आख आसू से लाल दिख रहा था. ‘जग्गू तुम क्यू इतनी जल्दी पीगलतेहो,.मैं नही समझा.. तुमने अंकल से मेरी फिकर ज़्यादा दिखाया उन्होने बोला तटेरा लाल तेरी एक इसारएमए जान देगा. आख़िर क्यू इतनी ज़्यादा फिकर तूमे मेरी’दोस्तो मैं एक्सप्लेन नही कर सकता उस वक्त मेरा महेसुसी. मेरा दिल उवार उठा.मेरा आख से आसू आगेया. मैं रोने लगा और बोलना शुरु किया‚क्यू फिकर ना करुआप की,आप मेरी आंटी हो. मैं आप को खुश देखना चाहता हू,आपने मुझे संसर्दीखाया आप के लिए जान देना मेरे लिए गर्व बात है, अंकल को ढूड़ना कौन सी बताई.बस इतनी सी बात तो है.’ क्या आप सोच सकते है क्या हुवा उसके बाद. आंटी नेमेरी बाल को नोच लिया. मेरा सर उपर होगआई फिर वी उनकी चहेरेको दिख सक्तता. और आखे मे आखे डालके घुसे से बोली‚मैने तूमे पहेले वी बोली की मुझसेदुर होनेकी बात कवि नही करना लेकिन जग्गू ..ओह मेरा लाल..’ आंटी रुक गयी और्लंबी स्वास लेके मेरे सर अपनी तरफ खिचके चूमते बोली‚मेरा लाल तू सचमुछबाडा हुवा है. आंटी की घुस्सा और अचानक की प्यार ने मेरी दिल मे तहेलका मचड़िया. सुबह मीठी सपने से मुझ से वी पहेला सीना टंके खड़ा मेरा लंड कुचपेहेले तो मुज़रा गया था आव वो वी औकात मे आकर अनहोनी का संकेत कर डियता. आंटी मुझे चूमते जराही थी.


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