मेरे लंड पर सुरभि की चूत का पानी

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Mere lund par surabhi ki chut ka pani मैं अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई की एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करने लगा था। मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई भी मुंबई से ही पूरी की है और उसके बाद मैंने मुंबई में ही जॉब कर ली और मैं अपनी जॉब से बहुत ज्यादा खुश हूं। मेरा परिवार नासिक में रहता है और मैं उन लोगों से मिलने के लिए कभी कबार चले जाया करता हूं लेकिन काफी समय हो गया था मुझे घर जाने का भी समय नहीं मिल पाया था। एक दिन मेरे पापा का मुझे फोन आया और जब पापा ने मुझे फोन किया तो उन्होंने मुझे बताया कि सुहानी को देखने के लिए घर पर लड़के वाले आने वाले हैं। सुहानी मेरी छोटी बहन का नाम है जो कि उम्र में मुझसे दो वर्ष छोटी है और वह स्कूल में पढ़ाती है, वह एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती है। जब पापा ने मुझे इस बारे में बताया तो मैंने पापा से कहा कि पापा मैं अभी कुछ दिनों के लिए घर आ जाता हूं। मैं कुछ दिनों के लिए घर जाना चाहता था मैं मैंने अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी ले ली थी और ऑफिस से छुट्टी लेने के बाद मैं कुछ दिनों के लिए नासिक चला गया था।

मैं जब नासिक गया तो अपने परिवार वालों से मिलकर मैं बहुत ही ज्यादा खुश था और मुझे बड़ा अच्छा भी लगा था जिस तरीके से मैं अपनी फैमिली से मिला था और उन लोगों से मिलकर मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा था। पापा और मम्मी से मिलकर मैं बहुत ही खुश था और अब सुहानी को देखने के लिए लड़के वाले भी आने वाले थे। जब वह लोग सुहानी को देखने के लिए आए तो उन लोगों ने रिश्ते को लेकर बात आगे बढ़ाई। सुहानी को उनका परिवार पसंद कर चुका था और वह लोग सुहानी से अपने लड़के की शादी करवाने के लिए तैयार हो चुके थे। जल्द ही सुहानी की सगाई भी हो गई थी उस वक्त मैं घर पर ही था और फिर कुछ दिन बाद मैं मुंबई चला आया था। जब मैं मुंबई आया तो उसके बाद मेरी पापा मम्मी से फोन पर बातें होती ही रहती थी। पापा बैंक में जॉब करते हैं और वह भी जल्द ही अपनी जॉब से रिटायर होने वाले हैं। समय का कुछ पता ही नहीं चला कि कब समय बीत गया और सुहानी की शादी का दिन भी तय हो चुका था और अब सुहानी की शादी होने वाली थी। जब सुहानी की शादी होने वाली थी तो उस वक्त मैं घर पर गया हुआ था मैं उस कुछ समय तक घर पर ही रहा।

सुहानी की शादी में मेरी मुलाकात सुरभि के साथ हुई थी जब मैं पहली बार सुरभि से मिला तो मुझे उससे मिलकर बहुत ही अच्छा लगा था और उसके बाद भी हम लोगों की मुलाकात होती रही। सुरभि मेरी बहन की शादी में आई थी वह उसकी सहेली है लेकिन अब सुरभि को मैं पसंद करने लगा था। सुरभि और मेरी बात फोन पर भी होने लगी थी सुरभि की नौकरी भी मुंबई में ही लग चुकी थी इसलिए हम दोनों का मिलना भी अक्सर होने लगा था। हम दोनों एक दूसरे को मिला करते थे और हम दोनों को एक दूसरे का साथ बहुत ही अच्छा लगता। जब भी मैं और सुरभि साथ में होते तो हम दोनों बहुत ही अच्छा समय साथ में बिताया करते थे क्योंकि मैं सुरभि को पसंद करने लगा था इसलिए मैं चाहता था कि सुरभि से मैं अपने प्यार का इजहार कर दूं। मैं और सुरभि जब एक दिन कॉफी शॉप में बैठे हुए थे तो मैंने उस दिन पूरा मन बना लिया था कि मैं सुरभि को अपने प्यार का इजहार कर दूंगा और उस दिन मैंने सुरभि से अपने प्यार का इजहार कर दिया था। जब मैंने सुरभि से अपने दिल की बात कही तो वह भी मना ना कर सकी और हम दोनों का रिलेशन चलने लगा था।

सुरभि भी मुझे कहीं ना कहीं पसंद करती थी इसी वजह से हम दोनों एक दूसरे के बहुत ही ज्यादा नजदीक आते चले गए थे और अब हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी नहीं रह पाते थे। हम दोनों का मिलना हर रोज हुआ करता था और जब भी हम दोनों एक दूसरे से मिलते तो हमें काफी अच्छा लगता था। यह बात मेरी बहन सुहानी को भी मालूम चल चुकी थी, अब यह बात सुहानी को भी मालूम चल चुकी थी इसलिए सुहानी ने मुझे कहा कि भैया आप सुरभि से शादी के बारे में बात क्यों नहीं करते। मैंने सुहानी को कहा कि मैं भी चाहता हूं कि मैं सुरभि से शादी कर लूं लेकिन मुझे उसके लिए थोड़ा समय चाहिए होगा तो सुहानी ने मुझे कहा कि भैया जैसा आपको ठीक लगता है आप वैसा ही कीजिए। मैं चाहता था कि थोड़े समय के बाद मैं और  सुरभि अपनी फैमिली से इस बारे में बात करें और हम दोनों ने अपने परिवार से इस बारे में बात करने का फैसला कर लिया था। जल्द ही हम दोनों ने अपनी फैमिली से बात कर ली जब हम लोगों ने अपनी फैमिली से बात की तो किसी को भी हम दोनों के रिश्ते से कोई भी ऐतराज नहीं था। मैं भी एक अच्छी कंपनी में जॉब करता हूं और सुरभि की फैमिली भी मेरे साथ सुरभि का रिश्ता करवाने के लिए तैयार हो चुकी थी और फिर हम दोनों की इंगेजमेंट हो गई थी।

हम दोनों की इंगेजमेंट हो जाने के बाद हम दोनों चाहते थे कि थोड़े समय के बाद हम लोग शादी भी कर ले क्योंकि सुरभि और मैं दोनों ही मुंबई में रहते थे इस वजह से हम दोनों अब ज्यादा से ज्यादा समय साथ में बिताने की कोशिश कर रहे थे। हम एक दूसरे को और भी ज्यादा समझने की कोशिश करते मुझे सुरभि का साथ बहुत ही अच्छा लगता है और सुरभि को भी मेरा साथ काफी अच्छा लगता है। जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं तो हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश रहते हैं और एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा हम लोग टाइम स्पेंड करने की कोशिश किया करते हैं। सुरभि और मैं हमेशा ही एक दूसरे से मिलते ही रहते थे। एक दिन सुरभि मुझसे मिलने आई जब वह मुझसे मिलने आई तो मै और सुरभि साथ मे थे। हम दोनो साथ मे बैठ कर बाते कर रहे थे। बाते करते करते जब मेरा हाथ सुरभि की जांघ पर लगा तो मैं उसकी जांघ को सहलाने लगा था। इतनी गरम हो गई मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया। अब हम दोनों के बीच सेक्स होने वाला था, सुरभि को कोई भी आपत्ति नहीं थी। मैंने अपने कपडे खोल दिए थे और जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो सुरभि ने उसे अपने हाथों में ले लिया वह मेरे लंड को हिलाने लगी थी और मेरी गर्मी को बढाने लगी थी। जब वह मेरे मोटे लंड को हिला रही थी मुझे मजा आने लगा था।

उसे भी बहुत मजा आ रहा था जिस तरह वह मेरे लंड को हिला रही थी। वह मेरे लंड को रसपान करने लगी थी मुझे मजा आने लगा था। वह मेरे लंड को गले तक ले रही थी। उसने मेरे लंड से पानी भी निकाल दिया था। मुझे अब सुरभि की चूत में अपने लंड को डाला था। मैंने सुरभि के कपडे उतारकर उसके पैरों को खोल लिया था। मैं सुरभि की गुलाबी चूत को देखकर खुश था मैं उसकी चूत को चाटना चाहता था। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। मैं उसकी योनि को चाटने लगा था वह गर्म हो गई थी। अब सुरभि गरम हो चुकी थी वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी मैं भी रह नहीं पा रहा था। सुरभि की चूत से पानी निकलता जा रहा था और मैं उसकी चूत पर लंड को रगड रहा था।

मेरे लंड पर सुरभि की चूत का पानी लग चुका था और मैं अपने लंड को उसकी चछत मे डालने को तैयार था। मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डाल दिया था। मेरा लंड सुरभि की चूत मे जाते ही वह चिल्लाकर बोली मजा आ रहा है। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता जा रहा था मुझे मजा आ रहा था और सुरभि को भी बहुत अच्छा लग रहा था। हम दोनों ही एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स के मजे ले रहे थे। सुरभि बहुत जोर से सिसकारियां ले रही थी वह मेरी गर्मी को बढा रही थी और वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी को तुम ऐसे ही बढ़ाते जाओ मुझे तेजी से चोदते जाओ। मेरी गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी थी मैं अपने वीर्य को सुरभि की चूत मे गिराना चाहता था। जब मेरे वीर्य की पिचकारी सुरभि की योनि में गिरी तो वह बहुत खुश हो गई थी मुझे बहुत मजा आ गया था जिस तरीके से मैंने और सुरभि ने सेक्स किया था।

हम दोनो दोबारा से सेक्स करने के लिए तडप रहे थे। मैंने अपने लंड को सुरभि की चूत के अंदर घुसा दिया था। जब मैंने सुरभि की योनि में लंड को घुसाया वह जोर से चिल्लाने लगी। सुरभि को मजा आने लगा था। वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी। सुरभि की चूतडे मेरी तरफ थी मैं उसकी चूतड़ों पर तेजी से प्रहार कर रहा था। सुरभि की चूतडे भी लाल हो चुकी थी वह अपनी चूतडो को मुझसे मिलाए जा रही थी। मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जब वह अपनी चूतडो को मुझसे मिलाए जा रही थी। अब हम दोनों की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी मैंने सुरभि से कहा तुम अपनी चूतडो को मुझसे मिलाती जाओ। वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाती तो मुझे मजा आता। मेरा माल गिरने को था और मैंने सुरभि की चूत में अपने वीर्य को गिरा दिया था। सुरभि की चूत से लंड बाहर निकालते ही उसकी चूत से मेरा माल निकल रहा था और मुझे बढा अच्छा लगा था जब मैंने उसे चोदा था। हम दोनो एक दूसरे के साथ सेक्स कर के बहुत ही खुश थे। वह मेरे लिए हमेशा ही तडपती है और मुझे भी बहुत अच्छा लगता है मैं और सुरभि जब भी सेक्स किया करते है। सुरभि हमेशा ही मेरे लिए तडपती है और मुझे बढा मजा आता है जब मै उसे चोदा करता हूं।


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