मेरे दिल का राजकुमार

Mere dil ka rajkumar:

Kamukta, antarvasna मैं बहुत ही सीधी साधी लड़की हूं मेरा नाम मधु है मेरी कॉलेज की पढ़ाई को ज्यादा समय नहीं हुआ था लेकिन मेरे परिवार वाले मेरे लिए लड़का देखना चाहते थे इसलिए उन्होंने मेरे लिए एक लड़का देखा उसका नाम संतोष था। जब मैं पहली बार संतोष से मिली तो मुझे बहुत अच्छा लगा संतोष एक सरकारी नौकरी में थे और वह मुझे अच्छे लगे मैंने उनसे काफी देर तक बात की। मैंने उन्हें अपने बारे में सब कुछ बता दिया था उन्होंने मुझे कहा तुम मुझे बहुत अच्छी लगी। सब कुछ तय हो चुका था संतोष और मेरी बातें भी फोन पर काफी होती थी हमारे घर वालों ने हमारी सगाई करने का फैसला कर लिया था और कुछ ही समय बाद हम दोनों की सगाई हो गई।

सब कुछ ठीक चल रहा था मेरे परिवार के सारे सदस्य बहुत खुश थे क्योंकि संतोष का परिवार भी बहुत अच्छा था और शायद ऐसा परिवार हमें मिल पाना मुश्किल था। मेरे पिताजी तो हमेशा मुझे कहते कि तुम कुछ समय बाद दूसरे घर चली जाओगी तो हमें बहुत दुख होगा मेरे बड़े भैया और भाभी मुझे बहुत प्यार करते हैं परिवार के सारे सदस्य मुझे बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। मेरी संतोष से फोन के माध्यम से बात होती थी और कभी-कबार हम लोग मिल लेते थे लेकिन जब शादी नजदीक आने वाली थी तो संतोष के परिवार ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया और उन्होंने मेरे पिताजी को दहेज के लिए परेशान करना शुरू कर दिया। मेरे पिताजी ने यह बात किसी को भी नहीं बताई और वह अंदर ही अंदर घुटने लगे वह बहुत परेशान रहने लगे वह घर में ज्यादा किसी से बात नहीं किया करते थे। एक दिन मैंने अपने पापा से कहा पापा आजकल आप बहुत ज्यादा परेशान रहने लगे हैं तो उन्होंने मुझे कुछ भी नहीं बताया और कहा नहीं बेटा ऐसी कोई बात नहीं है दरअसल तुम्हारी शादी होने वाली है ना इस वजह से मैं परेशान हूं लेकिन उनकी परेशानी की वजह तो कुछ और ही थी। वह बहुत ज्यादा दुखी थे उन्होंने शायद इस बारे में मेरी मम्मी से भी बात नहीं की थी उन्होंने मम्मी को भी कुछ नहीं बताया था।

जब उन्होंने मम्मी को इस बारे में बताया तो मम्मी ने मुझे इस बारे में बता दिया और जब मुझे इस बारे में पता चला तो मैंने संतोष को फोन किया और संतोष से कहा तुम तो मुझसे बहुत प्यार करते हो संतोष मुझे कहने लगे हां मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और तुम्हारे सिवा मैं किसी और से शादी नहीं कर सकता। मैंने संतोष से कहा तो तुम्हारे परिवार वाले मेरे पिताजी से जो दहेज की मांग कर रहे हैं क्या वह सही है संतोष चुप हो गया उसके पास कोई जवाब नहीं था। उसने मुझे कहा तुम्हे शायद कोई गलतफहमी हो गई है ऐसा कुछ भी नहीं है लेकिन मैंने जब संतोष से कहा कि मैं अपनी जगह सही हूं लेकिन शायद तुम्हारे परिवार वाले अपनी जगह गलत है इसलिए तुम्हे उन्हें समझाना चाहिए ना कि मुझे इस बारे में कुछ कहना चाहिए। संतोष ने फोन रख दिया और हम दोनों के बीच बस यह आखिरी बात थी उसके बाद ना तो कभी संतोष ने मेरा फोन उठाया और ना ही उससे मेरी बात हुई। मैं समझ गई थी इसमें संतोष भी जिम्मेदार है इसलिए मैंने अब अपने दिल से संतोष का ख्याल निकाल दिया था और मैं नहीं चाहती थी कि संतोष से मेरी शादी हो। मैंने अपने पिताजी से साफ तौर पर कह दिया था कि मैं अब संतोष से शादी नहीं करना चाहती पापा इस बात से बहुत दुखी हुए वह कहने लगे बेटा तुम्हें मालूम है यदि किसी लड़की की सगाई टूट जाती है तो उसकी शादी होने में कितनी तकलीफ होती है। मैंने अपने पापा से कहा अब आप यह सब मुझे ना बताएं बस मैं अब संतोष से शादी नहीं करना चाहती और आपको भी मैं दुखी नहीं देख सकती। पापा के कुछ समझ में नहीं आ रहा था मेरे भैया ने भी मुझे समझाने की कोशिश की लेकिन मैं तो संतोष से शादी करना ही नहीं चाहती थी और ना ही अब उससे कोई संबंध रखना चाहती थी इसीलिए मैंने अपने दिमाग से शादी का ख्याल निकाल दिया था। कुछ समय बाद मेरी सगाई टूट चुकी थी मुझे इस बात का बहुत ज्यादा दुख था लेकिन भला मैं कब तक दुख मनाती इसलिए मैंने अब आगे कुछ करने की सोची। मैं मेहनत करना चाहती थी और अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी ताकि मेरे पिताजी को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो इसलिए मैंने कोई काम करने की सोच ली थी लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए।

तब मुझे मेरे चाचा जी ने सलाह दी कि तुम टिफिन सर्विस शुरू कर लो। मैंने टिफिन सर्विस शुरू कर ली और देखते ही देखते मेरा काम भी अच्छा चलने लगा और सब कुछ ठीक चलने लगा था हालांकि मेरे माता-पिता बहुत ज्यादा दुखी थे कि मेरा रिश्ता टूट चुका है लेकिन मैं उन सब चीजों को भूल चुकी थी और मैं चाहती थी कि जिसे मैं पसंद करूं उसी से मैं शादी करुं। मैं अपने काम में ही ज्यादातर बिजी रहती थी और जब मुझे समय मिलता तो मैं बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया करती जिससे हमारे पास पैसे भी जमा होने लगे थे। सब कुछ ठीक चलने लगा था उसी दौरान मेरी मुलाकात मोहन से हुई मोहन से मैं अपने चाचा के घर में मिली मोहन मुझे बहुत अच्छा लगा लगता है। वह मेरे चाचा के पड़ोस में ही रहता है मोहन से मेरी इससे पहले तो कोई बातचीत नहीं थी लेकिन जबसे मोहन से बात होने लगी तो वह मुझे बहुत पसंद आने लगा। मैं उससे अपने दिल की बात कहना चाहती थी लेकिन मैं मोहन से अपने दिल की बात नहीं कर पाई और ना हीं अपने प्यार का इजहार मैं मोहन से कर पाई।

एक दिन हम दोनों की मुलाकात मॉल में हुई तो मोहन ने मुझे पहचान लिया और मुझसे कहने लगा क्या आपका नाम मधु है मैंने उसे कहा लेकिन आपको मेरा नाम कैसे पता। वह कहने लगा मैं आपसे पहले भी तो मिला हूं आपके चाचा जी के घर के पड़ोस में ही हम लोग रहते हैं मैंने मोहन से कहा हां मेरी आपसे पहले मुलाकात हुई थी लेकिन हम लोगों की उसके बाद कभी भी बात नहीं हो पाई। वह मुझसे कहने लगा चाचा जी आपकी बहुत तारीफ करते हैं और आपके बारे में कहते हैं कि आपने बहुत मेहनत की है मैंने मोहन से कहा यह तो चाचा जी का बड़प्पन है, मोहन ने मुझे कहा क्या आप मेरे साथ कुछ देर बैठ सकती हैं। मैं मोहन के साथ बैठ गई हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे मुझे मोहन से बात करना अच्छा लग रहा था हम दोनों ने उस दिन 20 मिनट तक बात की और उसके बाद मैं वहां से चली गई लेकिन उससे बात करना मुझे बहुत अच्छा लगा और उसके बाद यह सिलसिला जारी रहा। मोहन और मेरी बात हमेशा ही होने लगी थी हम दोनों ने एक दूसरे के नंबर भी ले लिए थे कभी हमारी फोन पर बात भी हो जाती थी मोहन को जब मैंने अपने सगाई के बारे में बताया तो वह मुझे कहने लगा उन्होंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया तुम्हारे जैसी लड़की शायद उन्हें कभी नहीं मिल सकती थी। मोहन की बात सुनकर मैंने उसे कहा यदि तुम संतोष की जगह होते तो तुम क्या करते तो वह कहने लगा कि मैं संतोष की जगह होता तो शायद मैं कभी अपने परिवार वालों का साथ नहीं देता और तुमसे शादी करता। उसकी बात सुनकर मैं खुश हो गई और उसके बाद हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो चुकी थी और हम लोग जब भी साथ होते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता था। मैं जब भी मोहन से मिलती तो मेरे अंदर एक अलग ही खुशी होती लेकिन मैं तो मोहन को अपना दिल दे बैठी थी और एक दिन मैंने फोन पर उससे बात की हम दोनों ने करीब एक घंटे तक फोन पर बात की मैंने मोहन से कहा मुझे तुमसे मिलना था।

मोहन मुझे कहने लगा ठीक है मैं तुमसे मिलने आता हूं मैंने मोहन को अपने पास बुला लिया मोहन जब मुझसे मिलने आया तो मैंने उसे गले लगा लिया मोहन जब मुझसे गले मिला तो वह मुझे कहने लगा मधु तुम यह सब सही नहीं कर रही हो लेकिन वह जब मेरे गले मिला तो मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने जैसे ही मोहन को किस किया तो मोहन भी मुझे किस करने लगा हम दोनों के बदन से गर्मी निकलने लगी थी मेरे अंदर से पसीना भी निकलने लगा था। मोहन ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया जब उसने मुझे बिस्तर पर लेटाया तो मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए जब मोहन ने मेरे बड़े स्तनों को अपने मुंह में लिया तो वह उन्हे अच्छे से चूसने लगा मेरे अंदर अब जोश पैदा होने लगा था, मेरे अंदर की उत्तेजना अधिक हो गई। मोहन ने मेरे स्तनों को चूसना शुरू किया वह काफी देर तक मेरे स्तनों को चूसता रहा जैसे ही मोहन ने अपने लंड को मेरी योनि पर रगडना शुरू किया तो मुझे बहुत मजा आने लगा मेरी योनि से गिला पदार्थ बाहर की तरफ को निकालने लगा।

जैसे ही मेरी योनि के अंदर मोहन ने अपने 9 इंच मोटे लंड को प्रवेश करवाया तो मैं उछल पड़ी और मोहन ने मुझे उतनी ही तेजी से धक्के देना शुरू कर दिया। उसके धक्के इतने तेज होते कि मेरा पूरा शरीर हिल जाता मैंने मोहन को अपने दोनों पैरों के बीच में जकड लिया था। मेरी योनि से लगातार पानी बाहर की तरफ को निकलता जाता, बड़ी तेजी से मेरी योनि का पानी बाहर निकल रहा था लेकिन मैं भी अपने आप पर काबू ना कर सकी और मैं झड़ गई। जब मोहन ने मुझे तेजी से धक्के मारना शुरू कर दिया तो मेरी योनि से खून निकलने लगा कुछ क्षणो बाद मोहन का वीर्य पतन भी मेरी योनि में हो गया जैसे ही उसका वीर्य पतन मेरी योनि के अंदर हुआ तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ। मैंने मोहन को गले लगाते हुए कहा मैं तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करती हूं मोहन मुझे कहने लगा मुझे भी तुम अच्छी लगती हो। हम दोनों एक दूसरे के साथ हमेशा सेक्स का मजा लेते रहते हैं मेरी ना तो शादी अब तक मोहन से हुई है और ना ही मैंने उससे शादी करने के बारे में सोचा है लेकिन मेरे कुंवारेपन को मोहन ने ही खत्म किया था और वही मेरे दिल का राजा है।


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