मेरे कॉलेज का प्यार शालू

Mere college ka pyar Shalu:

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मैं एक शादीशुदा पुरुष हूं मेरा नाम सुमित है और मेरी एक 5 साल की बेटी है। उसका नाम आरुषि है। जिसे मैं खुद ही स्कूल छोड़ने जाता हूं और उसे वहां से घर लेकर आता हूं। उसके बाद मैं अपने ऑफिस जाता हूं। मेरी बीवी का नाम अमृता है उसे घर के कामों से कोई मतलब नहीं रहता। मैं जब भी किसी मेड को घर के कामों के लिए लेकर आता, तब वह हमेशा उससे झगड़ा करके उसे घर से निकाल देती थी। उसका ऐसा बर्ताव देखकर कोई भी मेड घर में आने को तैयार नहीं थी और जो आई थी वह भी अमृता की वजह से घर से चली गई।

एक दिन मेरी ऑफिस की मीटिंग थी, मैंने अमृता से कहा कि आरुषि को स्कूल से पिक कर ले लेकिन उसने मना कर दिया। वह कहने लगी कि आज उसे कोई जरूरी काम है और फिर यह कहकर वह अपने कमरे में चली गई। उसके बाद मैं आरुषि को उसके स्कूल छोड़ने गया और फिर ऑफिस चले गया। कुछ समय बाद आरुषि के स्कूल से घर आने का टाइम हो गया था और मेरी मीटिंग भी थी। मैं आरुषि को लेकर ऑफिस आ गया और उसके बाद अपनी मीटिंग खत्म करके घर चले गया।

दूसरे दिन मैंने अपनी नई मेड से मिलना था उसके बारे में जानकर ही मैं उसे रखता। जब हमारी पड़ोसन उस मेड को लेकर आई उसका नाम शिवानी था तो उसने बताया कि यह कुछ दिन पहले ही शहर आई है। इसके मां-बाप का देहांत हो गया है यह एक अच्छे घर की है और काम की तलाश में है तो मैंने सोचा कि यह मेरी बेटी की देखभाल भी कर लेगी और घर का काम भी संभाल लेगी इसलिए मैंने उसे रख लिया। कुछ समय बाद वह मेरी बेटी से अच्छी तरह घुल मिल गई थी और मेरी बेटी भी उसे बहुत पसंद करती थी। शिवानी को मैंने कभी एक मेड की तरह नहीं समझा। उसे मैंने अपने परिवार का ही हिस्सा समझा क्योंकि वह हर वह काम करती थी। जो घर में रहने वाली हर एक औरत को करना चाहिए। घर को संभाले रखती थी सबके लिए टाइम से नाश्ता बनाने के बाद वह आरुषि को नाश्ता कराती और स्कूल छोड़ने जाती थी। मेरी और अमृता की घर पर काफी बहस होती थी। शिवानी हम दोनों के बीच की दूरियां कम करने की कोशिश करती थी लेकिन वह हमेशा नाकाम रहती क्योंकि अमृता कभी चाहती ही नहीं थी कि वह मेरे और मेरी बच्ची के साथ समय बिताएं। वह तो किसी और से ही चुदकर आती थी। एक दिन मुझे पता चला कि हमारे घर में मनोज नाम का एक लड़का हमेशा आता जाता रहता था लेकिन मुझे उस टाइम ऐसा लगा कि यह अमृता का कोई दोस्त होगा और वह मिलने आता होगा लेकिन मैं कुछ नहीं कहता था। मुझे सिर्फ अपनी बेटी की चिंता थी लेकिन जब से शिवानी हमारे घर पर आई तब से मेरी आधी चिंता दूर हो गई क्योंकि वही आरुषि को पढ़ाई में मदद करती थी और उसे स्कूल का सारा काम करवाती थी। एक दिन ऐसी ही मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था और तभी शिवानी कमरे में आई और साफ-सफाई करने लगी, जैसे ही वह सफाई कर रही थी तो मैंने देखा कि उसके स्तन उसके सूट के गले से बाहर झांक रहे थे। जिसे देख कर मेरा मन बहुत ज्यादा खराब हो गया और मैं यह सोचने लगा कि मैं इसे चोदता हूं। मेरा लंड खड़ा हो गया उसके स्तन बहुत ही गोरे-गोरे थे और बहुत बड़े बडे थे। मुझे उसे देखकर ना जाने क्या हो गया। मैंने उसे बिस्तर पर अपने पास बुलाया और कहा तुम मेरी बेटी का बहुत ही ध्यान रखती हो उसके लिए मैं तुझे धन्यवाद कहना चाहता हूं। अब तुम मेरा भी ऐसा ही ध्यान रखोगे जैसे तुम मेरी बेटी का ध्यान रखती हो। वह कहने लगी हां साहब आप बोलिए आपको क्या जरूरत है। मैंने उसे कहा कि मेरी बीवी मुझे चोदने नहीं देती है तो मैं तुम्हारी चूत मारना चाहता हूं। अब तुम ही बताओ मैं क्या करूं वह मुझे हाथ भी नहीं लगाने देती है और ना जाने उसका किस लड़के से भी चल रहा है। जैसे ही यह बात मैने शिवानी से कहीं तो वह कहने लगी कि मैं आप का भी ध्यान रखूंगी। मुझे तो बहुत अच्छा लगता है ऐसे आपका ध्यान रखना मैं आरुषि का भी ध्यान बहुत ज्यादा रखती हूं उसे भी अपनी लड़की की तरह समझते हूं। जैसे ही वह यह सब कह रही थी तो मैंने उसे अपनी बाहों में कस कर पकड़ लिया। वह थोड़ा भी हिल नहीं पाई और जैसे ही मैंने उसे पकड़ा तो उसका पूरा बदन मेरे बाहों में था और मैं उसे महसूस कर सकता था। मुझे उसके बदन को अपने हाथों में लेकर बहुत ही खुशी हो रही थी क्योंकि वह एकदम कमसीन और जवान थी उसके योवन का रस अभी तक किसी ने नहीं पिया था। मैंने उसे वहीं नीचे लेटा दिया। वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई और मुझे कहने लगी कि क्या आप मुझे चोदोगे मैंने उसे कहा हां मैं तुम्हें चोदूंगा। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसे अपने सामने नंगा कर दिया। जैसे कि वह मेरे सामने नंगी लेटी थी तो मैंने उसकी चूत की तरफ देखा तो उसमें हल्के से बाल थे लेकिन वो एकदम फ्रेश थी। मैंने अपनी उंगली से रगडना शुरु किया जैसे ही मैंने उंगली को उसकी चूत मे घुसाया तो उसका पानी निकल जाता और उसकी चूत गीली हो जाती। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था क्योंकि मुझे बहुत समय बाद ऐसा मौका मिला था कि मैं किसी की चूत मे उंगली डाल रहा था। मैंने अब उसके स्तनों को अपने हाथों से सहलाना शुरू किया जैसे ही मैं उसके स्तनों को सहलाता जाता वह बहुत ही खुश हो जाती और मचलने लगती। अब उसने भी मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे होठों को अपने होठों में लेते हुए चूसने लगी जैसी ही वह मेरे होठों को चूस रही थी तो उसका पूरा बदन गर्म हो चुका था। मैंने उसके निप्पलों को अपने मुंह में लेते हुए अंदर बाहर करना शुरू किया। जैसे ही मैंने उसके निप्पलों को अपने मुंह में लिया तो उसके स्तन बड़े ही टाइट हो गए और वह एकदम से मेरे मुंह के आगे दिखाई दे रहे थे। मैं अपनी नाक को भी उसके स्तनों पर रगड़ रहा था और अपनी जीभ से भी उसके स्तनों को चाटता जा रहा था। थोड़े समय बाद मैंने उसकी चूत मे अपनी जीभ लगा दी और अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा। जैसे ही मैं यह सब करता जाता तो उसे बहुत ही अच्छा लगता है और वह बहुत खुश हो जाती। उसकी चूत मे मेरी जीभ जैसे ही लगने लगी तो उसकी चूत बहुत ही गर्म हो गई। मैंने उसकी गरमा गरम और नरम चूत पर अपना लंड सटा दिया जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी चूत मे लगाया तो उसकी चूत से बहुत ही गर्मी निकल रही थी और वह एकदम मदहोश हो रही थी। थोड़ी देर तक मैंने ऐसे ही उसकी चूत मे अपने लंड को रगड़ता रहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। जब मैं ऐसा करता जा रहा था। अब उसकी चूत बहुत ज्यादा गीली हो गई थी तो मैंने अपने लंड को धीरे धीरे अंदर डालना शुरू किया जैसे-जैसे मैं लंड अंदर डालता जाता तो उसके मुंह से आवाज निकलती जाती और जब मेरा पूरा अंदर जा चुका था तो उसकी बहुत ही तेज आवाज आने लगी। मुझे यह बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने धीरे से अपने लंड को बाहर निकाला और फिर अंदर धक्का मारना शुरू कर दिया अब मैं ऐसा ही करता जा रहा था। मैंने बड़ी तेज स्पीड में ऐसा करना शुरू कर दिया जिससे कि उसके मुंह से चीखें निकलती जाती और वह मुझे कहती आप तो बड़े ही अच्छे से कर रहे हो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है जब आप मेरी चूत मे अपना लंड डाल रहे हो। मैं ऐसे ही करता जा रहा था और उसे अच्छा लग रहा था और कहीं ना कहीं मेरे अंदर की भूख भी मिट रही थी। मैं बड़ी तेज धक्के मारे जा रहा था।  15 मिनट के बाद मेरा वीर्य पतन होने वाला था। मैंने उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया और वह मेरे लंड को चुसती जाती दो मिनट तक उसने मेरे लंड को ऐसे ही चूसा और मेरा वीर्य उसके मुंह के अंदर बड़ी ही तेजी से गिर गया। मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगा और मेरी भूख मिट गई।

यह तो मेरी भूख मिटाने की बात है लेकिन आरुषि को शिवानी की जरूरत थी। मुझे ऐसा लगने लगा था कि शिवानी ही अब आरुषि को संभाल सकती है। वही आरुषि को मां का प्यार दे सकती है फिर एक दिन मैंने फैसला किया कि मैं शिवानी से शादी की बात करूंगा और मैंने उसे शादी के लिए बात की तो वह घबरा गई। उसे अच्छा नहीं लगा लेकिन यह आरुषि के लिए अच्छा रहेगा। यह सब कह कर मैंने उसे मनाया और फिर उससे शादी का फैसला करके आज हमारी बेटी बहुत खुश है।

 


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