मेरा यादगार पल

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Mera yaadgar pal मेरी मां मुझे कहने लगी कि सरोज बेटा तुम जल्दी से तैयार हो जाओ तुम्हें देखने के लिए लड़के वाले आने वाले हैं लेकिन मैं बिल्कुल भी खुश नहीं थी मैं नही चाहती थी कि मैं शादी करूं। मेरी उम्र अब 26 वर्ष हो चुकी थी और पापा इस बात से बहुत टेंशन में रहते थे कि मेरी अभी तक शादी नहीं हो पाई है लेकिन मैं शादी करना ही नहीं चाहती थी क्योंकि मैं सुनील से प्यार करती थी। मैंने अब तक ना जाने कितने ही रिश्तो को ठुकरा दिया था और मैंने फैसला कर लिया था कि उस दिन भी मैं लड़के को मना कर दूंगी। जब लड़के वाले मुझे देखने के लिए आए तो मैंने उस दिन भी मना कर दिया पापा मुझे कहने लगे कि सरोज बेटा तुम मुझे बताओ तुम्हें कैसा लड़का पसंद है। मैंने पापा से कुछ भी नहीं कहा क्योंकि मैं चाहती थी कि सुनील पहले कुछ कर ले उसके बाद ही मैं इस बारे में घर पर बात करूंगी लेकिन सुनील अभी तक कुछ भी नहीं कर रहा था। वह जब मुझे मिला तो मैंने सुनील को कहा देखो सुनील अब तुम्हें कुछ करना ही पड़ेगा।

सुनील चाहता था कि वह किसी बड़ी कंपनी में जॉब करें लेकिन अभी तक उसे जॉब ही नहीं मिल पाई थी। मैंने सुनील से कहा अगर तुम ऐसे ही करते रहे तो शायद मैं एक दिन मैं शादी कर लूंगी सुनील मुझे कहने लगा कि सरोज मुझे कुछ समय दो मैं जरूर कुछ ना कुछ कर लूंगा। मैंने सुनील को कहा देखो सुनील मेरे पास अब इतना वक्त नहीं है मैं कब तक अपने पापा और मम्मी से झूठ बोलती रहूंगी। घर में मैं एकलौती थी इस वजह से पापा और मम्मी कुछ ज्यादा ही चिंतित होने लगे थे और उनकी चिंता की वजह सिर्फ मैं थी क्योंकि मैं अभी तक मेरी शादी नहीं हुई थी। मैं और सुनील एक दूसरे को पिछले एक वर्ष से जानते हैं सुनील से जब मैं पहली बार शादी में मिली थी तो मुझे सुनील बहुत अच्छा लगा और हम दोनों की नजदीकियां बढ़ती चली गई।

हम दोनों एक दूसरे को अक्सर मिलने लगे और जब भी हम दोनों एक दूसरे को मिलते तो हमें बहुत ही अच्छा लगता हम दोनों के बीच प्यार कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा था। एक दिन सुनील ने मुझे प्रपोज़ कर दिया और मैं भी सुनील को मना ना कर सकी लेकिन मुझे क्या पता था कि सुनील अभी तक कुछ कर ही नहीं पाएगा और मैं इस बात से बहुत चिंतित होने लगी थी। मुझे इस चीज की चिंता सताने लगी थी की क्या सुनील मेरी बातों को अभी भी समझता है या नहीं सुनील हमेशा ही मुझे कहता कि मैं जरूर कुछ ना कुछ कर लूंगा लेकिन अभी तक वह कुछ कर नहीं पाया था। वह दिन भी नजदीक आ गया था जब मेरे माता-पिता मेरी शादी करवाने के लिए मुझ पर दबाव बनाने लगे और मैंने भी अब शादी करने का फैसला कर लिया था क्योंकि सुनील अभी तक कुछ कर नहीं पाया था। मेरे पास अब और कोई रास्ता ही नहीं बचा था मेरी शादी अब तय हो चुकी थी और मेरी सगाई भी हो चुकी थी मेरी सगाई हो जाने के बाद मैंने सुनील से दूरियां बना ली। सुनील का मुझे कई बार फोन आता लेकिन मैं उसका फोन ही नहीं उठाती थी। एक दिन मैं अपनी सहेली के साथ अपने घर के बाहर थी तो मुझे सुनील दिखाई दिया जब मुझे सुनील दिखाई दिया तो मैंने सोचा कि सुनील से बात करके कोई फायदा नहीं है इसलिए मैं घर की तरफ जाने लगी लेकिन सुनील मेरा पीछा करते हुए मुझे रोकने की कोशिश करने लगा। उसने मुझे रोकते हुए कहा सरोज मैं तुम्हें कब से फोन कर रहा हूं लेकिन तुम हो कि मेरा फोन ही नहीं उठाती हो मैंने सुनील से कहा देखो सुनील अब हम दोनों एक दूसरे से अलग हो जाए तो ही बेहतर होगा और तुम्हें तो पता ही है कि अब मेरी सगाई हो चुकी है। सुनील मुझे कहने लगा मुझे यह सब पता है लेकिन तुम्हें यह भी तो पता होगा कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं और मैं तुम्हें इसलिए फोन कर रहा था कि मैं तुम्हें बता सकूं कि मेरी जॉब लग चुकी है। सुनील की एक कंपनी में जॉब लग चुकी थी लेकिन अब काफी देर हो चुकी थी और मैं शायद इस बात को घर पर कह भी नहीं सकती थी। मैंने सुनील से कहा देखो सुनील अब हमें एक दूसरे को भूल जाना चाहिए तो सुनील मुझसे कहने लगा कि सरोज मुझे तुमसे सिर्फ कुछ देर बात करनी है लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि मैं सुनील से बात करूं। मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हें कल मिलूंगी सुनील कहने लगा ठीक है मैं कल तुम्हारा इंतजार करूंगा।

जिस जगह हम लोग अक्सर मिला करते थे उस जगह हम लोगों ने मिलने का फैसला किया लेकिन मैं सुनील को मिलने के लिए नहीं गई सुनील मुझे फोन करता रहा परंतु मैंने सुनील का फोन ही नहीं उठाया मैं चाहती ही नहीं थी कि सुनील मेरी जिंदगी में वापस लौटे क्योंकि मैंने अब अपने रास्ते बदल दिए थे। सुनील भी अब मुझे फोन नहीं करता और कुछ समय बाद मेरी शादी होने वाली थी मेरी शादी को अब 10 दिन ही बचे थे। एक दिन मैं अपनी मम्मी के साथ शॉपिंग करने के लिए गई हुई थी उसी दौरान मेरी सुनील से मुलाकात हुई लेकिन मैंने सुनील से अपनी नजरें बचाने की कोशिश की क्योंकि मेरी मम्मी मेरे साथ थी इसलिए मैंने सुनील के साथ कोई भी बात नहीं की और मैं अपने घर लौट आई। मैं एक बार सुनील से मिलना चाहती थी और मैंने सुनील को उसी कॉफी शॉप में मिलने बुलाया जिस कॉफ़ी शॉप में हम लोग पहली बार मिले थे। मैंने सुनील को कहा देखो सुनील अब तुम मुझे भूल कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश करो और तुम भी किसी अच्छी सी लड़की को देखकर उससे शादी कर लो। हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे लेकिन सुनील ने मुझसे ज्यादा बात नहीं की।

मैं सुनील की तरफ देख रही थी तो उसने मुझसे ज्यादा बात नहीं की और वह कहने लगा सरोज अब तुमने शादी करने का फैसला कर ही लिया है और हम दोनों को एक दूसरे को भूल जाना चाहिए मैं भी अब आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा हूं। सुनील इस बात से बहुत ज्यादा दुखी था मैं नहीं चाहती थी कि सुनील को मैं दुख दू उसे तकलीफ में देखकर मुझे बहुत दुख हो रहा था। मैंने उसके हाथ को पकड़ा मैंने उसके हाथ को चूम लिया सुनील कहने लगा देखो सरोज यह सब ठीक नहीं है। जब मैंने उसके होठों को किस कर लिया तो वह अपने आपको कहां रोक पा रहा था उसने मुझसे कहा क्या शादी से पहले तुम मेरे साथ सेक्स करना चाहती हो। वह मेरी भावनाओं को समझ चुका था मैं भी उसके साथ जाने के लिए तैयार हो चुकी थी। सुनील मुझे अपने साथ लेकर चला गया जब हम दोनों एक सुनसान जगह पर गए तो वहां पर कोई भी नहीं था आसपास कोई भी नहीं दिखाई दे रहा था। सुनील ने अपने मोटे लंड को बाहर निकाला उसने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसे बड़े अच्छे से मैं चूसने लगी। मैं उसके लंड को मुंह मे लेकर चूस रही थी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और उसे भी बड़ा मजा आ रहा था। उसने मेरा साथ बहुत ही अच्छे से दिया उसके बाद उसकी गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह मेरी चूत मारना चाहता था। मैंने उसे कहा चलो हम लोग झाड़ियों के बीच में चले जाते हैं हम लोग घनी झाड़ियों के बीच में चले गए। वहां पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था सुनील ने मेरे कपड़े उतार दिए जब उसने मेरे कपड़े उतारे तो मैं अब नंगी हो चुकी थी। वह मेरी चूतडो को देखकर कहने लगा तुम्हारी चूतडे बहुत ही बड़ी है। उसने मेरी गांड को दबाना शुरू किया उसने जब मुझे झाड़ियों मे लेटाकर मेरी चूत को चाटना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैं अपने दोनों पैरों को खोल रही थी। मेरी योनि से इतना ज्यादा पानी निकल आया था अब मैं उसके लंड को लेने के लिए तैयार हो चुकी थी। मैंने सुनील को कहा मैं तुम्हारे लंड को चूत मे लेना चाहती हूं।

मैंने जब उसके लंड को अपनी चूत पर लगाया तो उसका लंड बहुत ही ज्यादा गर्म हो चुका था उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना शुरू किया। उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर तक प्रवेश हो चुका था उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर गया तो मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरी सील टूट चुकी है। पहली बार मैंने सुनील के साथ सेक्स किया था जब उसने मेरी सील तोड़ी तो मुझे अच्छा लग रहा था। वह मुझे कहने लगा मुझे तुम्हे चोदने में बहुत मजा आ रहा है। मैंने सुनील को कहा सुनील हो सकता है आज के बाद हम लोग कभी नहीं मिले इसलिए तुम अपनी सारी गर्मी को आज मिटा कर रख दो। सुनील मुझे कहने लगा आज मैं सारी गर्मी को बाहर निकाल दूंगा सुनील मुझे तेजी से धक्के मार रहा था उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था।

जिसके बाद तो उसने अपनी स्पीड कुछ ज्यादा ही बढा ली थी उसकी गति अब इतनी तेज हो चुकी थी कि मेरी चूत का उसने पूरी तरीके से भोसड़ा बना दिया। मेरी चूत से खून निकल रहा था मैं अपनी गर्मी को बिल्कुल नही रोक पा रही थी। मेरी चूत पूरी तरीके से छिल चुकी थी मैने उसे कहा आराम से धक्के दो लेकिन वह मुझे बडी तेज गति से चोद रहा था। जिस प्रकार से वह मुझे धक्के दे रहा था उससे मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो रही थी और मेरे चूतड़ों से भी एक अलग ही प्रकार की आवाज पैदा हो रही थी परंतु वह तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था और बड़ी तेजी से वह मुझे धक्के दिए जा रहा था। उसने बहुत देर तक ऐसे ही धक्के दिए मेरे अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैंने उसे कहा मुझे लगता है मैं झड़ चुकी हूं। मैं अपने पैरों को आपस में मिलाने लगी लेकिन उसने मेरी चूतड़ों पर बड़ी तेजी से प्रहार किया उसका वीर्य अंदर ही गिरा चुका था। मैंने उसे कहा क्या तुम्हारी इच्छा पूरी हो चुकी है? वह कहने लगा नहीं उसके बाद उसने मेरे साथ तीन बार और सेक्स के मज़े लिए उसने मेरी चूत को पूरी तरीके से छिल कर दिया था। उसके बाद उसने मुझे घर छोड़ दिया मेरी शादी तो हो चुकी है लेकिन आज भी मैं सुनील के साथ अपने उस सेक्स को कभी भूल नहीं पाई हूं। वह मेरे लिए बड़ा ही यादगार क्षण था।


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