मेरा बदन कमाल का

Mera badan kamal ka:

Kamukta, antarvasna मैं अपने घर पर ही थी मैं घर का सारा काम संभालती हूं तभी मेरी सहेली का फोन आया वह हमारे पड़ोस में ही रहती है उसका नाम गीतिका है। गीतिका ने मुझे फोन किया मैंने गीतिका से पूछा तुम कैसी हो वह कहने लगी मैं तो ठीक हूं तुम सुनाओ तुम्हारा क्या चल रहा है मैंने उसे कहा यार क्या बताऊं बस घर पर ही रहती हूं और घर का सारा काम संभालती हूं बच्चों के काम संभालते संभालते इतनी परेशान हो जाती हूं कि अपने लिए तो समय ही नहीं मिल पाता। गीतिका मुझे कहने लगी संजना तुम्हें अपने लिए समय निकालना चाहिए तुम पहले कितनी एक्टिव थी और अब तुम जैसे घर के कामों में ही बिजी रहने लगी हो जब गीतिका ने मुझे यह बात कही तो मुझे भी लगा कि मुझे कुछ करना चाहिए मैंने गीतिका से पूछा तुम आजकल क्या कर रही हो तो वह कहने लगी मैंने पार्लर खोला है और मैं आजकल वही काम कर रही हूं।

मैंने उसे कहा तुम्हारा काम कैसा चल रहा है तो वह कहने लगी अभी कुछ समय पहले ही मैंने पार्लर खोला था मैंने तुम्हें फोन भी किया था लेकिन लेकिन तुम्हारा फोन लगा ही नही मैंने उसे कहा हां शायद उस वक्त हम लोग गांव गए हुए थे। मैंने गीतिका को बधाई दी और कहा चलो तुमने अच्छा किया जो अपना ही काम शुरू कर लिया मैंने जब गीतिका को बधाई दी तो वह कहने लगी कि तुम्हें भी अपना काम शुरू करना चाहिए तुम बहुत ही एक्टिव हो तुम्हें कुछ काम शुरू करना चाहिए मैंने गीतिका से कहा ठीक है मैं तुम्हें मिलती हूं फिर बात करते है। मैं घर के कामों में व्यस्त हो गई थी मेरे पास जैसे किसी और चीज के लिए समय था ही नहीं जब शाम के वक्त बच्चे घर लौटते तो मैं उनकी देखभाल करती लेकिन मुझे अब लगने लगा की मुझे कुछ करना चाहिए इसी सिलसिले में मैं गीतिका से मिली थी। वह मुझे कहने लगी आओ मैं तुम्हें अपने पार्लर लेकर चलती हूं वह मुझे अपनी स्कूटी से अपने पार्लर लेकर चली गई जब मैंने उसका पार्लर देखा तो वह काफी बड़ा था। मैंने उसे कहा तुमने तो काफी अच्छा पार्लर खोला है क्या तुम्हारे यहां पर कस्टमर आने लगे हैं तो वह कहने लगी अभी तो शुरुआत में काम हल्का ही चल रहा है लेकिन धीरे धीरे काम अच्छा चलने लगेगा गीतिका मुझे कहने लगी कि तुम भी कहीं पर अपना कोई छोटा सा काम शुरू कर लो जिससे कि तुम्हें कुछ पैसे में मिल जाएंगे और तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।

मैंने भी सोचा कि गीतिका बिल्कुल ठीक कह रही है मैंने गीतिका से पूछा लेकिन मुझे तो पार्लर का काम आता ही नहीं है तो वह कहने लगी कोई बात नहीं तुम मेरे पास आ जाना मैं तुम्हें काम सिखा दूंगी और वैसे भी तुमने मेरी हमेशा से ही बहुत मदद की है। कॉलेज के वक्त में भी मैं गीतिका की बहुत मदद किया करती थी और हमेशा ही उसे जब भी मेरी जरूरत होती थी तो मैं उसकी मदद कर दिया करती थी इसलिए शायद गीतिका को इस बात का अच्छे से पता था और वह मेरी अच्छी सहेली भी है। मैंने अपने पति से इस बारे में बात की जब मैंने अपने पति मोहन से इस बारे में बात की तो वह मुझे कहने लगे तुम्हें कुछ काम करने की क्या जरूरत है तुम घर में आराम करो बेकार के चक्कर में कहां पड़ रही हो, क्या मेरी तनख्वाह से घर नहीं चल पा रहा मैंने उन्हें कहा ऐसा कुछ भी नहीं है लेकिन मैं अपना कोई काम शुरू करना चाहती हूं। मुझे उन्हें समझाने में बहुत ज्यादा समय लग गया जब वह मेरी बात मान गए तो मैं उसके अगले दिन से ही गीतिका के पास काम सीखने के लिए जाने लगी उस दौरान वहां पर आई हुई महिलाओं से भी मेरी बातचीत हो जाती थी अब धीरे-धीरे मैं काम भी सीख चुकी थी और मैंने भी सोच लिया था कि मुझे अपना काम शुरू करना है इसी के चलते मैंने एक दिन मोहन से बात की तो मोहन कहने लगे मैंने तुम्हें सिर्फ गीतिका के साथ काम सीखने के लिए भेजा था अब तो तुम अपना ही काम शुरू करना चाहती हो। वह मेरी बात को नहीं माने लेकिन मैंने भी ठान ली थी कि मैं अपना ब्यूटी पार्लर खोल कर ही रहूंगी इसके लिए मैंने अपने पापा से कुछ पैसे ले लिए लेकिन यह बात मैंने मोहन को नहीं बताई यदि मोहन को यह बात पता चलती तो शायद यह बात उनको बुरी लगती परंतु जब इस बात का पता मोहन को पता चला तो मोहन ने मुझे उस दिन काफी डांटा और कहा तुम्हें अपने पापा से पैसे लेने की क्या जरूरत थी मैंने उन्हें कहा यदि मैं उनसे पैसे नहीं लेती तो मैं अपना काम कैसे शुरू कर पाती आपने तो मुझे साफ मना कर दिया था अब मुझे कुछ ना कुछ तो करना ही था।

यह बात सुनकर मोहन मुझे कहने लगे तुम्हें समझ पाना भी मुश्किल है चलो अब तुमने काम शुरू कर दिया है तो कोई बात नहीं तुमने पापा से कितने पैसे लिए थे मैं उन्हें लौटा देता हूं मैंने मोहन को बता दिया कि मैंने पापा से कितने पैसे लिए थे मोहन ने भी वह पैसे लौटा दिए क्योंकि मोहन बहुत ही स्वाभिमानी किस्म के व्यक्ति हैं और वह नहीं चाहते कि वह किसी से भी मदद ले वह हर काम सोच समझ कर करते हैं। मैं इस बात से मैं बहुत खुश थी की धीरे धीरे मेरा काम भी अच्छा चलने लगा अब मेरा काम इतना अच्छा चलने लगा कि मेरे आस-पास जितनी भी महिला रहती थी वह सब मेरे पास आने लगी थी। एक दिन मोहन मुझे कहने लगे मैं सोच रहा था कि हम लोग अपने ऊपर का फ्लोर किराए पर दे देते हैं क्योंकि मम्मी पापा भी गांव में रहने लगे हैं और हम लोग भी वहां पर साफ-सफाई नहीं कर पा रहे हैं कम से कम इस बहाने वहां पर साफ-सफाई तो हो जाया करेगी और कुछ पैसे भी मिल जाएंगे मैंने मोहन से कहा ठीक है आप वह किराए पर दे दीजिए।

उन्होंने एक फैमिली को ऊपर वाला सेट किराए पर दे दिया जब वह परिवार हमारे घर पर रहने आए तो हम लोगों से भी उनकी अच्छी बातचीत होने लगी उनकी पत्नी मेरे ब्यूटी पार्लर में ही आया करती थी उनका नाम सुरभि है और उनके पति का नाम आकाश है। आकाश बैंक में नौकरी करते हैं और उनका नेचर भी बहुत अच्छा है सुरभि भी बहुत अच्छी हैं उसकी मेरे साथ अच्छी दोस्ती हो गई थी मैंने सुरभि को गीतिका से भी मिलवाया, सुरभि को मैंने यह बात बताई कि गीतिका की वजह से ही यह सब संभव हो पाया है। सुरभि मुझेसे कहने लगी मेरी एक सहेली है उसका नाम भी गीतिका है और वह मेरी बहुत अच्छी दोस्त है वह भी हमेशा मुझे समझाती रहती है और जब भी मुझे उसकी जरूरत पड़ती है तो वह हमेशा ही मेरी मदद के लिए तैयार रहती है। सुरभि और आकाश के दो छोटे बच्चे हैं आकाश का नेचर बहुत अच्छा है आकाश और मेरे पति की दोस्ती बहुत अच्छी हो चुकी है आकाश और मोहन कभी कबार साथ में भी बैठ जाया करते हैं और हम लोग कभी बाहर घूमने भी चले जाते हैं। जब भी हम लोग बाहर घूमने जाते हैं तो बच्चे बहुत खुश हो जाते हैं मेरा काम भी अब अच्छे से चल रहा था और सब कुछ बहुत ही सही चल रहा था मैं कभी कबार गीतिका से भी मिलने चले जाया करती थी। जब भी गीतिका मुझसे मिलने के लिए घर पर आती तो वह कहती कि तुम्हारा काम कैसा चल रहा है मैं उसे कहती कि मेरा काम तो अच्छा चल रहा है। उसका भी पार्लर का काम अच्छा चल रहा था। एक दिन मैं घर पर अकेली थी मोहन अपने काम के सिलसिले में कहीं बाहर गए हुए थे उस दिन आकाश घर पर आ गए। मैं सुबह अपने पार्लर जाने के लिए तैयार हो रही थी, जब वह घर में आए तो उस समय कोई भी नहीं था बच्चे भी स्कूल गए हुए थे। मैं बाथरूम से बाहर नहा कर निकली ही थी मैं पैंटी ब्रा में थी, आकाश ने मुझे देख लिया और जब आकाश ने मुझे देखा तो वह शायद अपने आपको ना रोक पाया।

वह मेरे पास आकर खडा हो गया मैं भी शर्माने लगी उन्होंने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। वह कहने लगे आपका बदन तो बड़ा ही अच्छा है आपका शरीर देखकर मैं अपने आपको नहीं रोक पाया। जब उन्होंने मेरे होठों को चूमा तो मैं भी अपने आपको ना रोक सकी और मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई। उन्होंने अपने हाथो से मेरे स्तन दबाए और उन्होंने अपनी बाहों में मुझे ले लिया। उन्होंने मेरी गांड को दबाना शुरू किया मेरी गांड पर वह अपने लंड को लगाने लगे जिससे कि मेरे अंदर का जोश और भी दोगुना हो गया। मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी उन्होंने मुझे वहीं जमीन पर लेटाते हुए मेरे बदन को सहलाना शुरु किया, जब मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई तो उन्होंने अपने लंड को मेरे स्तनों पर रगडना शुरू किया और मैने उनके लंड को काफी देर तक चूसा।

मुझे उनके लंड को चूसने में बहुत मजा आया, जब उन्होंने मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी योनि से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर निकलने लगा है। आकाश ने जैसे ही अपने मोटे लंड को मेरी योनि में डाला तो मेरी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ गई। वह मुझे बड़ी तेजी से धक्के दे रहे थे और मैं उनका साथ बहुत ही अच्छे तरीके से देती। यह सब बहुत देर तक चलता रहा, जैसे ही उन्होंने मेरी गांड के अंदर अपने लंड को पर डाला तो मैं पूरी तरीके से दर्द से चिल्ला उठी लेकिन मुझे मजा भी आ रहा था। वह बड़ी तेजी से मुझे ऐसे ही धक्के मार रहे थे जिससे कि मेरी गांड का छेद और भी चौड़ा हो जाता। मैं भी अपनी बड़ी और भारी भरकम चूतडो को उनसे टकराती उनके अंदर और भी ज्यादा जोश बढ़ जाता, वह बड़ी तेजी से मुझे झटक मारते यह सिलसिला बहुत देर तक चलता रहा। जब उनका वीर्य मेरी गांड के अंदर गिरा तो मुझे ऐसा लगा जैसे कि कोई गरम चीज मेरी गांड में चली गई हो। उन्होंने जैसे ही अपने लंड को मेरी गांड से बाहर निकाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ, उस दिन आकाश के साथ सेक्स करने मे बड़ा ही अच्छा अनुभव था।


Comments are closed.