मौसम ने मेरा मूड बना दिया

Antarvasna, kamukta:

Mausam me mera mood bana diya भैया अपनी शादी से बिल्कुल भी खुश नहीं थे पापा की जिद के आगे वह कुछ कह ना सके इसलिए उन्हें संजना भाभी से शादी करनी पड़ी। संजना भाभी काफी मेहनती हैं और वह शादी के बाद भी जॉब कर रही हैं लेकिन शायद भैया उन्हें कभी पसंद करते ही नहीं थे क्योंकि भैया तो निकिता से प्यार किया करते थे। इस बारे में घर में सबको ही पता था लेकिन बस पापा को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी पापा की जिद के आगे किसी की नहीं चलती थी। पापा बहुत ही सख्त मिजाज थे लेकिन जब उनका देहांत हुआ तो उसके बाद घर में सब कुछ बदलने लगा भैया और संजना भाभी के झगड़े होने लगे थे और कई बार मैं भैया को इस बारे में समझा भी था। एक दिन भैया ने मुझे ही कह दिया कि रोहित अगर तुम्हें इतनी हमदर्दी है तो तुमने उस वक्त पापा से क्यों नहीं कहा कि मैं संजना से शादी नहीं करना चाहता हूं। भैया की मुंह से यह बात निकली तो संजना भाभी को यह बात बहुत बुरी लगी उन्हें शायद इस बारे में कभी कुछ जानकारी ही नहीं थी वह गुस्से में अपने मायके चली गई घर का माहौल पूरी तरीके से बदल चुका था और घर में सिर्फ झगड़े ही होते रहते थे।

मैं घर में बिल्कुल भी नहीं रहना चाहता था इसीलिए मैंने जाना ही ठीक समझा मैं अपने मामा जी के पास चला गया मामा जी इस बात को बहुत ही अच्छे से जानते थे कि घर में अब कुछ भी ठीक नहीं है उन्होंने मुझे समझाया और कहा देखो रोहित बेटा तुम रोहन को समझाते क्यों नहीं हो। मैंने मामा जी से कहा मामा जी आपको तो घर की सारी स्थिति पता ही है रोहन भैया को सब लोगों ने कितनी बार समझा दिया लेकिन वह संजना भाभी से हमेशा ही झगड़ते रहते हैं और अब तो बात कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ चुकी है संजना भाभी अपने मायके जा चुकी हैं और घर में कुछ भी ठीक नहीं है मेरा भी घर पर बिल्कुल मन नहीं लगता इसलिए मैं अब दिल्ली ही रहना चाहता हूं। मामा जी मुझे कहने लगे कि बेटा लेकिन तुम दिल्ली में रह कर क्या करोगे मैंने मामा जी से कहा मामा जी मैं यहां पर कोई भी छोटी-मोटी नौकरी कर के अपना गुजारा चला लूंगा लेकिन फिलहाल कुछ समय के लिए तो मैं घर नहीं जाना चाहता। पापा ने बहुत मेहनत से कपड़ों का शोरूम शुरू किया था और पापा चाहते थे कि मैं और भैया ही उसे संभाल ले हम दोनों साथ में ही काम कर रहे थे लेकिन हम दोनों के बीच अब बिल्कुल भी नहीं बनती थी और इसकी वजह सिर्फ संजना भाभी थी।

मैं चाहता था कि संजना भाभी घर पर रहे और भैया के साथ अच्छे से व्यवहार करें लेकिन भैया का बदलता हुआ रूप देखकर मैं भी हैरान था वह अब किसी से भी अच्छे से बात नहीं करते थे। मैंने अब दिल्ली में हीं नौकरी तलाश ली और दिल्ली में ही मैं काम करने लगा था मेरी मां ने मुझे कई बार कहा कि बेटा तुम घर आ जाओ लेकिन मैं घर नहीं जाना चाहता था। संजना भाभी से किसी का कोई संपर्क नहीं था और रोहन भैया तो घर में सिर्फ झगड़ते ही रहते थे जिस वजह से घर का माहौल बिलकुल ही खराब हो चुका था। एक दिन मां ने मुझे कहा कि रोहित बेटा तुम कुछ दिनों के लिए ही सही लेकिन घर पर आ जाओ जब मैं घर पर गया तो मैंने देखा भैया को अब शराब की लत भी लग चुकी थी और वह पूरी तरीके से बदल चुके थे। उनका रिश्ता टूटने की कगार पर था भाभी ने भी उन्हें डिवोर्स का नोटिस भिजवा दिया था लेकिन मैं नहीं चाहता था कि संजना भाभी से भैया का रिश्ता टूटे इसलिए मैं संजना भाभी से मिलने के लिए उनके घर पर गया। मैंने उनसे उस दिन बात की और उन्हें समझाने की कोशिश की मैंने संजना भाभी को कहा की भाभी अगर आप घर पर रहेंगे तो सब कुछ ठीक हो जाएगा मैंने भाभी को पूरी बात बताई तो भाभी को भी लगा कि हमारे परिवार को उनकी जरूरत है इसलिए संजना भाभी वापस घर लौट आई और वह अब मां की भी देखभाल करने लगी रोहन भैया के व्यवहार में तो कोई परिवर्तन नहीं आया था। मैंने नौकरी छोड़कर अपनी दुकान संभालना ही बेहतर समझा भैया का काम में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था इसलिए हमारे कई कस्टमर टूट चुके थे और अब दोबारा से मुझे दुकान का काम अच्छे से संभाल पड़ा। भैया दुकान में आते भी नहीं थे और वह मुझसे भी अच्छे से बात नहीं किया करते थे, भैया का जन्मदिन भी नजदीक आने वाला था और हम लोगों ने सोचा कि हम उनका जन्मदिन सेलिब्रेट करें संजना भाभी भी बहुत खुश थी और उस दिन हम लोगों ने घर में पूरी तैयारियां की थी।

मैंने अपनी बहन राधिका को भी उस दिन बुला लिया था और राधिका भी घर पर आई थी उस दिन हम लोगों ने भैया का जन्मदिन सेलिब्रेट किया तो भैया के चेहरे पर खुशी थी और वह काफी खुश नजर आ रहे थे। काफी समय बाद उन्होंने सबसे अच्छे से बात की थी और उस दिन भैया की गलतफहमी मैंने दूर भी कर दी थी भैया और संजना भाभी के बीच में भी अब सब कुछ ठीक होने लगा तो हमारे परिवार में पहले की तरह ही खुशियां वापस लौट आई थी। एक दिन मैं रूम में बैठा हुआ था तो संजना भाभी ने उस दिन मुझसे बात की और कहा कि रोहित यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है तुम्हारे भैया अब बदल चुके हैं और सब कुछ अब ठीक हो गया है। मैंने संजना भाभी से कहा कि भाभी इसमें आपका सबसे अहम योगदान है यदि आप वापस घर नहीं लौटते तो शायद कुछ भी ठीक नहीं होता। संजना भाभी चाहती थी कि मैं उनकी मौसी की लड़की लता के साथ शादी करूं मैं लता से एक दो बार पहले भी मिल चुका था लेकिन मैं लता से शादी करना नहीं चाहता था।

संजना भाभी के कहने पर मैं लता से मिला तो लता और मैंने साथ में काफी अच्छा समय बिताया फिर मुझे भी लगा कि शायद मुझे शादी कर लेनी चाहिए। मैं लता के साथ बात करने लगा था हम दोनों एक दूसरे को समय देने लगे थे। मैं और लता एक दूसरे से फोन पर बातें किया करते थे अब भैया और मैं दुकान का काम अच्छे से संभाल रहे थे। एक दिन भैया ने मुझे कहा आज मैं संजना के साथ समय बिताना चाहता हूं इसलिए वह उस दिन दुकान नहीं आए थे मौसम बडा सुहावना था आसमान में बादल छाए हुए थे। लता का मुझे फोन आया वह कहने लगी रोहित मैं तुमसे मिलना चाहती हूं। मैंने उसे दुकान पर बुला लिया वह दुकान पर ही आ गई। जब वह दुकान में पहुंची तो वह मेरे लिए टिफिन लेकर आई हुई थी क्योंकि उस वक्त खाने का टाइम भी हो चुका था इसलिए हम दोनों दुकान के अंदर स्टोर रूम मे बैठकर खाना खाने लगे। लता मुझे अपने हाथों से खाना खिला रही थी मेरे दिल में लता के लिए प्यार बढता ही जा रहा था। मैंने लता को अपनी बाहों मे ले लिया उसे चूमना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो। लता भी कहीं ना कहीं खुश थी वो शर्मा रही थी लेकिन मैंने उसे दोबारा से चूमना शुरू किया तो अब वह अपने आपको रोक ना सकी। मैंने लता के स्तनों को दबाना शुरू किया जब मैं उसके स्तनों को दबा रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था मुझे उसके स्तनों को दबाने मे ऐक अलग प्रकार की फीलिंग पैदा हो रही थी। मेरे अंदर की आग और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी मैंने लता के कपड़े उतार दिए जब मैंने उसके बदन से कपड़े उतारे तो वह मेरे सामने नग्न अवस्था मे थी। मै उसके टाइट और गोल स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था मुझे उसके स्तनों को चूसने मे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने उसके स्तनों को बहुत देर तक चूसा लता भी खुश हो गई थी। मैं जब उसकी चूत को सहलाने लगा तो लता के अंदर की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी और मैं लता की चूत के अंदर अपनी उंगली को घुसा रहा था।

जब उसकी चूत को मैंने देखा तो उसकी चूत से लावा बाहर की तरफ को निकलने लगा था उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर निकल रहा था जिससे कि वह इतनी ज्यादा बेचैन हो गई कि मुझे कहने लगी मैं नहीं रह पा रही हूं। मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर लगाया जब मैंने उसकी टाइट और मुलायम योनि में लंड को सटाया तो उसकी चूत बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी। मुझे उसकी गर्मी का एहसास हो रहा था मैंने अपनी चूत के अंदर लंड को धकेलते हुए डाला तो वो जोर से चिल्लाई। मैंने उसके स्तनों को दबा दिया मेरा लंड उसकघ योनि के अंदर प्रवेश हो गया मैंने उसकी सील तोड़ दी थी और उसकी चूत से खून निकलने लगा था।

वह अपने पैरों को खोलने की कोशिश करने लगी मेरे धक्के अब तेज होने लगे थे क्योंकि उसकी चूत के अंदर से इतना ज्यादा गर्म पानी बाहर निकाल रहा था कि मैं उसे बिल्कुल भी नहीं झेल पा रहा था। मैंने लता को कहा तुम अपने पैरों को चौड़ा कर लो उसने अपने पैरों को खोल लिया। मैंने उसकी जांघों को कस कर पकड़ा और उसे तेज गति से मै धक्के देने लगा मेरे धक्के तेज होते ही जा रहे थे और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर होता तो वह बहुत जोर से चिल्लाती और मेरा पूरा साथ देती। उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर आने लगी थी मैंने करीब 5 मिनट तक उसके साथ संभोग किया और 5 मिनट बाद मुझे एहसास होने लगा था कि मेरे अंडकोषो से मेरा वीर्य जल्दी बाहर आने वाला है। लता भी मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में जकडने लगी जिससे कि मै रह नहीं पा रहा था। जैसे ही मेरा वीर्य बड़ी तेजी से बाहर की तरफ निकला तो वह बहुत ही खुश हो गई। उसने मुझे कहा शादी से पहले ही तुमने मेरी सील तोड दी तो मैंने उसे कहा आज मौसम भी बहुत सुहाना था और मैं अपने आपको रोक ना सका।


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