मटरू के लौड़े का मन डोला

Matru ke laude ka man dola:

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मेरा नाम संजय है और मैं बैंक में मैनेजर हूं। मैं इंदौर में रहता हूं और मेरा घर भी इंदौर में ही है। मेरी पोस्टिंग यहां कुछ वर्ष पहले ही हो गई थी। तब से मैं यहीं पर हूं और मेरी पत्नी और मेरे बच्चे सब लोग हम साथ में ही रहते हैं। जब मेरी इंदौर पोस्टिंग हुई तो मैं बहुत खुश हुआ। क्योंकि पहले मैं चेन्नई में रहता था। जहां से मुझे अपने घर आने जाने में बहुत तकलीफ होती थी और बहुत समय लगता था। इसलिए मैं अपने घर आ भी नहीं सकता था जिससे मुझे बहुत ही दिक्कत होती थी लेकिन अब मैं इंदौर में हूं तो अपने परिवार को पूरा समय दे पाता हूं। मैं अपने बैंक से सीधा घर जाता हूं और जब मुझे समय मिल जाता है तो बीच में मैं कभी थोड़ी सी शराब पी लिया करता हूं और उसके बाद सीधा ही अपने घर निकल जाता हूं। मैं बहुत खुश भी हूं क्योंकि मुझे अच्छा लगता है की मेरी लाइफ बहुत ही अच्छे से चल रही है।

हमारे स्टाफ में एक व्यक्ति आय जो कि नए-नए आए थे। उनका नाम सुरेंद्र है। उससे पहले मेरी ज्यादा मुलाकात नहीं हुई लेकिन बाद में धीरे-धीरे उनसे मेरी बात अच्छे से होने लगी और मुझे पता चला कि वह यहां पर अकेले रहते हैं। फिर मैंने उनसे पूछा कि आप यहां पर अकेले रहते हैं आपकी पत्नी कहां है। वह कहने लगे कि मेरी पत्नी पुणे में ही रहती है। क्योंकि हम लोगों का घर पुणे में ही है। मैंने उन्हें बताया कि आप अपनी पत्नी को इंदौर ले आइए तो आपको कंपनी मिल जाया करेगी और आपको अच्छा भी लगेगा। वह कहने लगे सर मैं सोच तो रहा था लेकिन कुछ दिनों बाद मैं अपने घर जाने वाला हूं। फिर मैं अपने घर में अपने माता-पिता से बात करने के बाद उसे यहीं पर ले आऊंगा। तब सुरेंद्र ने मुझे कहा कि सर यदि आपकी नजर में कहीं कोई टू बीएचके का घर हो तो मुझे बता दीजिएगा। मैंने उन्हें कहा कि मैं तुम्हारे लिए 2 बीएचके का घर देख लूंगा। तुम उसकी चिंता मत करो। अब सुरेंद्र कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर घर गए हुए थे। जब वहां से लौटे तो उनके साथ उनकी पत्नी भी थी। फिर वह ऑफिस में मुझसे कहने लगे कि सर आपने घर देख लिया तो हमे भी घर दिखाए।

मैंने उन्हें बताया कि हां मैंने तुम्हारे लिए एक घर देखा है। मेरे साथ शाम को चलना और वह घर देख लेना यदि तुम्हें पसंद आ जाए तो तुम अपनी पत्नी को भी ले आना। क्योंकि वह हमारे पड़ोस में ही है। अब सुरेंद्र मेरे साथ शाम को चल पड़े और मैंने उन्हें वहां टू बीएचके फ्लैट दिखा दिया। वह घर देखकर बहुत खुश हुए और कहने लगे, सर यह तो बहुत अच्छा है। मैं कल ही यहां पर शिफ्ट कर लूंगा और सुरेंद्र ने अगले दिन वहां पर शिफ्टिंग कर ली। अब वह हमारे पड़ोस में ही आ चुके थे। इसलिए हम दोनों ऑफिस से साथ में आया करते थे। सुरेंद्र मेरे साथ मेरी कार में ही ऑफिस साथ में ही आते जाते थे। हालांकि सुरेंद्र मुझसे बहुत छोटे थे क्योंकि उनकी नौकरी को लगे हुए ज्यादा वर्ष नहीं हुए थे और मुझे बहुत समय हो चुका था। मेरी उम्र लगभग 48 वर्ष की है और सुरेंद्र की उम्र 35 के आसपास पर है। फिर भी हम दोनों के बीच में बहुत ही अच्छी बातचीत हो गई थी और हम दोनों साथ में ही आते थे। जब हम दोनो साथ में होते तो रास्ते में कभी हम लोग शराब ले लिया करते थे। हम लोग अपना आराम से पीकर घर आ जाते थे। 1 दिन मेरी छुट्टी थी तो मैंने सुरेंद्र को फोन किया और कहा कि आज तुम हमारे घर पर आ जाओ। वह अब अपनी पत्नी को लेकर हमारे घर पर आ गया।

मैंने उसे अपनी पत्नी से मिलाया तो वह बहुत ही खुश थे। सुरेंद्र ने भी मुझे अपनी पत्नी से इंट्रोडक्शन कराया। उसकी पत्नी का नाम साक्षी था। वह मेरी पत्नी से मिलकर बहुत ज्यादा खुश हुई और कहने लगी कि इतने दिनों बाद मैं घर से बाहर निकली ऐसा लग रहा है जैसे जेल में बंद थी। तो मैंने साक्षी को कहा कि तुम हमारे घर पर आ जाया करो। तुम्हारा भी मन बहल जाया करेगा।  वह हमारे घर पर आ जाती थी। मेरी पत्नी दीप्ति भी बहुत ही अच्छी है। वह एक अच्छी महिला है। अब साक्षी और दीप्ति में बहुत ही अच्छी दोस्ती हो गई और वह हमारे घर आने जाने लगे। हम लोगों का भी उनके घर पर अब आना जाना लगा रहता। जिससे कि मेरी पत्नी को भी बहुत अच्छा लगता था और वह हमेशा ही साक्षी की बहुत ही तारीफ किया करती थी और कहती थी कि वह मुझे नई-नई चीजें सिखाती है। क्योंकि मुझे तो ज्यादा कुछ जानकारी नहीं है। हम लोगों ने तो इतना कुछ देखा नहीं है। इस वजह से वह मुझे नई-नई चीजें सिखाती और बताती रहती है।

कुछ दिनों के लिए मेरी पत्नी  मायके चली गई और मैं घर पर उस दिन अकेला ही था। मैं उस दिन ऑफिस भी नहीं गया और साक्षी हमारे घर पर आ गई। जब वह हमारे घर पर आई तो मुझे कहने लगी दीदी कहां हैं। मैंने उसे कहा कि वह तो अपने मायके आज सुबह ही चली गई उसे कुछ काम था। वह कहने लगी कि मैंने कुछ चीजें मंगवाई थी वह देने आई थी। मैंने उसे कहा कि वह मुझे ही दे दो लेकिन वह  नहीं दे रही थी और कह रही थी मैं नहीं दूगी। मैंने जब उसे कहा मुझे ही दे दो तो वह नहीं दे रही थी। मैंने उससे वह बॉक्स छीन लिया और जब मैंने उसे खोला तो उसके अंदर मोटे मोटे दो नकली लंड थे। मैंने उससे पूछा कि यह किसके लिए है। वह कहने लगी कि मैंने अपने लिए और दीदी के लिए मंगाए थे। मैंने उसे कहा कि क्या सुरेंद्र तुम्हारी इच्छा पूरी नहीं कर पा रहा है। वह कहने लगी कभी जरूरत पड़ जाती है तो मैं अपनी चूत मे डाल लेती हूं।

मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और मैंने उसे कहा कि आज मैं तुम्हारी चूत मे अपने लंड को डाल देता हूं। अब मैंने उसे वहीं जमीन पर लेटा दिया और मैंने उसके मुंह में अपना लंड को दे दिया साक्षी ने उसे अपने पूरे मुह के अंदर तक ले लिया और वह उसे चूसने लगी। मैं भी उसकी  मुंह के अंदर धक्के देने लगा और मैं बहुत देर तक ऐसे ही धक्के दिया जा रहा था। उसे बहुत मजा आ रहा था और वह अच्छे से चूसने लगी लेकिन थोड़ी देर बाद उसकी चूत गीली हो गई। मैंने उसकी चूत के अंदर उंगली डालना शुरू कर दिया और अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा। जिससे कि उसका शरीर पूरा गरम हो गया और अब मैंने उसके पूरे कपड़े उतार दिए और उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। उसके स्तन बहुत ही टाइट थे और मैंने उसके दोनों पैरों को खोलते हुए अपने मोटे लंड को उसकी चूत मे डाल दिया। जैसे ही मैंने उसकी चूत मे अपने लंड को डाला तो उसके मुंह से बहुत तेज आवाज निकली और वह कहने लगे कि आपका लंड तो बहुत ही मोटा है। अब मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और धक्के मारने लगा। उसकी योनि से पानी बाहर की तरफ गिरता जाता मैं उसे ऐसे ही चोदने लगा। उसकी योनि  चिपचिपी हो चुकी थी और मैं तेजी से झटके दिए जा रहा था। उसका शरीर गर्म हो गया और मुझे बहुत ही मजा आने लगा।

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसे चोदता ही रहूं और मैं उसे बड़ी देर से चोदे जा रहा था। अब वह बहुत मस्ती में आने लगी और वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी। मेरा वीर्य जब उसकी योनि में गिरा तो वह बहुत ज्यादा खुश थी। उसने मेरे लंड को दोबारा से अपने मुंह के अंदर समा लिया और उसे चूसने लगी। थोड़ी देर बाद मैंने उसे अपने ऊपर बैठा लिया मैंने उसे अपने लंड पर बैठा दिया तो उसके मुंह से आवाज आने लगी। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में गया तो वह चिल्लाने लगी और मैंने उसे कसकर पकड़ लिया। मैं उसके स्तनों को अपने मुंह के अंदर लेने लगा और वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करने लगी। वह बहुत ही अच्छे से अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करती जाती। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को ऊपर नीचे कर रही थी। मै उसे ऐसे ही धक्के दिए जा रहा था उसका शरीर पूरा गर्म हो चुका था और मेरा शरीर भी अब गर्म होने लगा था। लेकिन मैं उसके चूतड़ों पर अब भी प्रहार कर रहा था और वह भी अपने चूतड़ों को बड़ी तेजी से हिलाने पर लगी हुई थी। लेकिन कुछ समय बाद वह झड गई और ऐसे ही बैठी रही। उसके साथ साथ मेरा भी वीर्य उसकी योनि के अंदर बड़ी तेजी से चला गया। अब वह बहुत खुश हुई और कहने लगी कि मुझे अब नकली लंड की जरूरत नहीं है। जब भी मेरा मन करेगा तो मैं आपके पास अपनी इच्छा पूरी करवाने आ जाऊंगा।

 


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