मामा की वह माल पड़ोसन

Mama ki wah maal padosan:

antarvasna, desi kahani

मेरा नाम सार्थक है मैं पानीपत का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 23 वर्ष है। मेरे ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हो चुकी है और अब मैं अपनी आगे की पढ़ाई करने के लिए कोई अच्छा कॉलेज देख रहा हूं। मैं पढ़ाई में बचपन से ही अच्छा था इसलिए हमेशा ही मैं टीचरों का फेवरेट रहा। मेरी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी इसलिए मैं घर पर ही बैठा हुआ था और कोई अच्छा कॉलेज सर्च कर रहा था लेकिन मुझे कोई अच्छा कॉलेज नहीं मिल रहा था इसीलिए कुछ दिनों तक मैं अपने पापा के साथ काम पर जाने लगा। मेरे पापा की ज्वेलरी की शॉप है और उनके साथ मैं कुछ दिन तक तो काम पर जाने लगा। जब मैं उस काम से भी बोर हो गया तो मैंने एक दिन अपनी मम्मी को कहा कि मैं बहुत बोर हो चुका हूं मुझे समझ नहीं आ रहा कि मुझे क्या करना चाहिए। मेरी मम्मी कहने लगी कि हम दोनों तुम्हारे मामा के घर चलते हैं कई सालों से हम लोग उनसे मिलने भी नहीं गए हैं। मैंने अपनी मम्मी से कहा जब से नानी का देहांत हुआ है उसके बाद से तो हम लोग उनके घर भी नहीं गए। मेरे मम्मी मुझे कहने लगी उनके घर पर एक प्रोग्राम भी है और उन्होंने मुझे फोन भी किया था। मैंने उन्हें कहा कि यदि तुम्हारे पापा साथ आएंगे तो ही मैं आ पाऊंगी लेकिन तुम्हारे मामा कहने लगे कि तुम्हें इस बार आना ही है तुम काफी समय से हमारे घर नहीं आई हो।

मैंने अपनी मम्मी से पूछा कि उनके घर पर क्या प्रोग्राम है। मम्मी कहने लगी कि उनकी बड़ी लड़की डॉक्टर बन गई है और उन्होंने घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी है। मैंने उन्हें कहा यह तो बहुत खुशी की बात है लेकिन मुझे तो पता ही नहीं था। मम्मी कहने लगी अब उन लोगों से इतना संपर्क ही नहीं रहता इसलिए मुझे भी कुछ पता नहीं चल पाता। हम दोनों ने जाने की तैयारी कर ली और इस बारे में जब हमने मेरे पिताजी से बात की तो पापा कहने लगे हां तुम लोग वहां चले जाओ वह लोग भी हमेशा यह शिकायत करते हैं कि आप लोग हमारे घर पर नहीं आते हो। मेरे पापा ने भी जाने की इजाजत दे दी थी।  फिर हम दोनों मेरे मामा के घर चले गए। मेरे पापा ने ही रिजर्वेशन करवाया था। मेरे मामा भोपाल में रहते हैं और वह लोग वहीं पर काफी सालों से सेटल हो चुके हैं।

मैं और मेरी मम्मी जब भोपाल पहुंचे तो मेरे मामा हम दोनों को देखकर बहुत खुश हो गए। वह मुझे देखते ही कहने लगे सार्थक तुम तो बहुत बड़े हो गए हो तुम तो बिल्कुल भी पहचान में नहीं आ रहे। तुम्हारी कद काठी तो बिल्कुल तुम्हारे पिताजी की तरह है और तुम्हारा चेहरा भी बिलकुल उन्ही के जैसा है। मैंने मामा से कहा आप लोग तो अब हमसे मिलने भी नहीं आते। मामा कहने लगे बेटा तुम्हें तो पता है कि समय का कितना भाव रहता है तुम अपनी मम्मी से ही इस बारे में पूछ लो। हमे तो समय बिल्कुल भी नहीं मिल पाता। जब तुम भी गृहस्थ जीवन में आओगे तो तुम्हें पता चलेगा कि ग्रहस्थ जीवन कितना कठिन हो जाता है। मामा ने मम्मी से पूछा क्या तुम्हारे पति नहीं आए। मम्मी कहने लगी नहीं वह नहीं आ पाए क्योंकि काम भी संभालना होता है इसलिए उनका आना संभव नहीं हो पाया लेकिन मेरे मामा हम दोनों से मिलकर बहुत खुश थे। उन्होंने कहा आप लोग रूम में जाकर फ्रेश हो जाइए। हम लोग जब फ्रेश हुए तो उसके बाद हम घर के सारे सदस्यों से मिले। हम लोगों से मिलकर वह लोग बहुत खुश थे। मेरी मामी भी बहुत खुश हो रही थी और उनकी लड़की रुपल भी बहुत खुश थी। रुपल को मैंने बधाई दी और कहा कि दीदी आपने तो अपने पिताजी का नाम रोशन कर दिया है और आप अब एक अच्छी जॉब पर हैं उसके लिए मैं आपको बधाई देना चाहता हूं। वह कहने लगी कि यह सब तो पापा की मेहनत का नतीजा है यदि वह मुझे प्रोत्साहित नहीं करते तो शायद मैं कभी इतना बड़ा कदम नहीं उठा पाती। उन्होंने मेरे हर एक कदम पर मेरा साथ दिया और मेरी मम्मी ने भी मुझे बहुत सपोर्ट किया इसीलिए आज मैं इस मुकाम पर पहुंच पाई हूं। वह मुझसे भी पूछने लगी की तुम्हारा आगे का क्या विचार है। मैंने उन्हें कहा कि अभी तो मैं फिलहाल घर पर ही हूं और कोई अच्छा कॉलेज देख रहा हूं। मेरी ग्रेजुएशन पूरी हो चुकी है। वह कहने लगे चलो यह तो बहुत अच्छी बात है कि तुमने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली। रुपल दीदी मुझसे कहने लगी मैंने हमेशा ही पिताजी से सुना है कि तुम पढ़ने में बहुत अच्छे हो। मैंने कहा हां बस थोड़ा बहुत पढ़ाई में ध्यान दे देता हूं। वह कहने लगे कि तुम पढ़ाई अच्छे से करो तो तुम्हारा भविष्य अच्छा होगा।

हम लोग कुछ देर तक बैठे हुए थे और उसके बाद हम लोग उठ कर बाहर हॉल में आ गए। जब हम लोग हॉल में आए तो वहां पर उनके और भी परिचित आ गए। उनके आसपास के पड़ोस के लोग भी घर पर आने लगे थे। वह रूपल दीदी को बधाई दे रहे थे और मेरे मामा को भी बधाई दे रहे थे। कुछ लोग तो उनके स्टाफ के भी थे। मामा लोग सब को अटेंड कर रहे थे और मैं बैठा हुआ था। मेरी मम्मी भी मेरी मामी के साथ काम कर रही थी। मैंने सोचा कि मैं बाहर टहल कर आता हूं। जैसे ही मैं बाहर निकल रहा था तभी मुझे किसी ने आवाज दी। मैंने जब पीछे मुड़कर देखा तो मैं इधर-उधर देखने लगा लेकिन मुझे कोई भी नहीं दिखा। मुझे लगा शायद यह मेरा वहम हो लेकिन जब दोबारा से मुझे आवाज सुनाई दी तो मैंने पीछे पलट कर देखा तो मेरे सामने एक 45 वर्ष की महिला थी। मैंने उन्हें नहीं पहचाना लेकिन उन्होंने मुझे पहचान लिया था। वह मुझे कहने लगी तुमने शायद मुझे पहचाना नहीं। मैंने उन्हें कहा सॉरी मैंने आपको नहीं पहचाना। वह कहने लगी मैं यहीं पड़ोस में रहती हूं जब तुम बचपन में आया करते थे तो हमारे घर पर बहुत आते जाते थे।

मैंने अपने दिमाग पर जोर डाला तो मुझे ध्यान आया कि हां मैं बचपन में पड़ोस में तो जाया करता था। वह मुझे कहने लगी मेरा नाम राधिका है। वह मुझे कहने लगी आओ तुम मेरे घर चलो। मैं जब उनके घर पर गया तो वह मुझे कहने लगी तुम बैठ जाओ। मैं उनके साथ बैठा हुआ था। मैं उनसे बातें करने लगा लेकिन उनके घर पर मुझे कोई भी नहीं दिखाई दे रहा था। मैंने उनसे पूछा आपके घर पर मुझे कोई नहीं दिखाई दे रहा। वह मुझे कहने लगी। मैं अकेली ही यहां रहती हूं। मेरे पति दिल्ली में नौकरी करते हैं और उनकी पोस्टिंग वहीं पर है। मैंने उनसे पूछा आप अकेले कैसे रह लेते हैं और आपके बच्चे कहां हैं? वह कहने लगी मेरे बच्चे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते हैं। वह सिर्फ छुट्टियों में ही आते हैं। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे। उनकी नियत मुझे कुछ अच्छी नहीं लग रही थी वह बार बार अपने स्तन पर हाथ लगाती। मैं भी समझ गया कि उनकी नियत ठीक नहीं है। यह मुझे देखकर अपनी लार टपका रही है। मैंने भी उनसे कहा क्या मैं आपके पास बैठ सकता हूं। वह कहने लगी हां क्यों नहीं हम दोनों बिल्कुल चिपक कर बैठे हुए थे। मैंने जब उनकी जांघ पर हाथ रखा तो वह एकदम से सहम गई और मुझे कसकर पकड़ लिया। मैं समझ गया कि अब यह मुझसे अपनी इच्छा पूरी करवाना चाहती हैं। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और उन्हें कहा कि आप इस सकिंग कीजिए। उन्होंने काफी देर तक मेरे लंड का रसपान किया। जब मैं उत्तेजित हो गया तो मैंने उनके कपड़े उतार कर फेंक दिए। उनके बदन को मैंने ऊपर से लेकर नीचे तक पूरा रसपान किया। जब उनकी चूत में पानी का रिसाव होने लगा तो मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और उनकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। जब मेरा लंड उनकी योनि में प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाने लगी। मुझे भी पूरा मजा आ रहा था। मेरा लंड उनकी चूत के अंदर बाहर होता तो मुझे और भी मजा आता। उन्होंने अपने दोनों पैरो को खोल लिया जिससे कि मेरा लंड उनकी योनि की दीवार तक आसानी से जा सके। मेरा लंड उनकी योनि की गहराई में जाता तो उन्हें और भी मजा आ जाता। वह मुझे कहती अब तो तुम बड़े हो चुके हो। मैंने उनके स्तनों का जमकर रसपान किया। मैं उन्हें बड़े अच्छे से चोद रहा था। जब मैं उन्हें झटके देता तो हम दोनों पूरे मूड में हो जाते। मैंने उनके साथ 10 मिनट तक जमकर संभोग किया। 10 मिनट बाद जब मेरी इच्छा पूरी हो गई तो हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए लेकिन जितने दिनों तक मैं वहां रुका रहा। उतने दिनों तक मैंने उनके बदन के मजे लिए।


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