मालूम है तुम मुझे चोदोगे

Maloom hai tum mujhe chodoge:

Antarvasna, hindi sex stories मैं अपने काम के सिलसिले में अपने घर से निकला मैं सुबह ही अपने घर से निकल जाता हूं क्योंकि गर्मी बहुत ज्यादा पड़ रही थी जिससे कि दोपहर के वक्त बहुत परेशानी होती है इसलिए मैं सुबह ही घर से निकल गया था। मुझे किसी के पास कुछ जरूरी काम से जाना था लेकिन रास्ते में बहुत ज्यादा ट्रैफिक था मुझे जिस व्यक्ति से मिलना था वहां जाने में मुझे देरी हो गई थी परन्तु मेरा काम हो चुका था और मैं जब वापस लौट रहा था तो रास्ते में बहुत ज्यादा ट्रैफिक था मुझे बहुत प्यास लग रही थी तो मैंने सोचा क्यों ना नींबू पानी पी लिया जाए इसलिए मैं एक नींबू पानी बनाने वाले के पास रुका और मैंने नींबू पानी पी लिया। मैं वहीं खड़ा था वहां पर एक व्यक्ति आये और कहने लगे गर्मी कितनी ज्यादा हो रही है मैंने भी उन्हें कहा हां गर्मी तो बहुत ज्यादा है दोपहर के वक्त घर से बाहर निकलना ही मुश्किल हो जाता है लेकिन क्या करें मजबूरी है वह कहने लगे तुम बिल्कुल सही कह रहे हो, मैंने उन्हें कहा हां भाई साहब वाकई में बहुत ज्यादा गर्मी है।

मैं जब वहां खड़ा था तो एक लड़की भी वहां पर आई और उसने भी नींबू पानी के लिए कहा लेकिन उसने अपने मुंह पर कपड़ा लपेटा हुआ था मैं उसकी आंखों को देखे जा रहा था उसकी बड़ी बड़ी आंखें मुझे बार-बार घूर रही थी गर्मी होने के बावजूद भी मैं वहीं पर खड़ा रहा मैं उस लड़की का चेहरा देखना चाहता था और शायद इसी वजह से मैं वहां पर रुक गया था जैसे ही उसने अपने मुंह से कपड़ा निकाला तो उसकी सुंदरता का जैसे मैं कायल हो गया मैं उसे एक टक नजर से देखता रहा। मैं काफी देर तक उसे देखता रहा मुझे लग गया था कि उसे पता चल चुका है लेकिन फिर भी मैं उसे देखता रहा और जब उसने मुझे कहा कि आप मुझे ऐसे क्यों देख रहे हैं तो मैंने उसे कहा मुझे आपकी आंखें बहुत सुंदर लगी तो मैं आपकी आंखों को निहार रहा था वह मुस्कुराने लगी उसने कोई जवाब नहीं दिया मैंने उसे अपना नाम बताया मैंने कहा मेरा नाम रोशन है उसने भी मुझे अपना नाम बताया उसका नाम कनिका था।

मैं उससे बात कर के बहुत ज्यादा खुश था और कुछ ही देर बाद कनिका वहां से चली गई मैं भी अपने घर वापस लौट आया मैं अपने घर से ही अपना कारोबार चलाया करता था क्योंकि हमारा घर काफी बड़ा है और मैंने एक दुकान अपने पास रखी हुई है वहीं से मैं अपना डिस्ट्रीब्यूशन का काम चलाता हूं मैं दुकान में सामान सप्लाई करवाता हूं सुबह के वक्त लड़के काम पर निकल जाते हैं और जब मुझे पैसे लेने जाना होता है तो ही मैं घर से पैसे लेने के लिए जाता हूं। मेरा काम अच्छा चल रहा है परंतु मेरी अब तक शादी नहीं हो पाई क्योंकि मैं जिस लड़की से प्यार करता था उसकी शादी कहीं और ही हो गई और उसके बाद तो जैसे मेरा शादी करने का मन ही नहीं हुआ मेरी उम्र 35 वर्ष हो चुकी है मैंने अब शादी का ख्याल अपने दिल और दिमाग से निकाल दिया था परंतु जब मैंने कनिका को देखा तो मुझे ऐसा लगा कि मुझे दोबारा से शादी के बारे में सोचना चाहिए परन्तु ना तो मुझे कनिका का कोई पता था और ना ही मैं उसे जानता था बस मुझे उसका नाम मालूम था। जब कनिका और मेरी किस्मत में मिलना लिखा था तो एक दिन अचानक से कनिका मुझे मिल गई दरअसल मैं अपने काम के सिलसिले में गया हुआ था और जिस मार्केट में मैं गया था वहीं पर मुझे कनिका दिखी वह भी शायद कोई सामान लेने के लिए आई हुई थी मैंने जैसे ही कनिका को देखा तो मैं खुश हो गया उसकी नजर मुझ पर पड़ी तो वह मुझे कहने लगी मैं आपसे पहले भी मिली हूं, मैंने उसे याद दिलाया और कहा हम लोग एक दिन रास्ते में मिले थे वहां पर तुमने नींबू पानी पिया था और मैं तुम्हें देख रहा था वह खुश हो गई और उसके बाद तो जैसे उस दिन मुझे उसके साथ समय बिताने का मौका मिल गया था। उस दिन मेरे पास भी वक्त था मेरा कलेक्शन का काम हो चुका था और उसके बाद मैं घर ही जाने वाला था लेकिन शायद मेरी किस्मत अच्छी थी कि कनिका के पास भी उस दिन समय था मैंने कनिका से कहा मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं कनिका कहने लगी कि नहीं मुझे अभी यहां पर कुछ काम है मैंने उससे कहा लेकिन तुम्हें यहां क्या काम है तो वह कहने लगी मैंने एक रेडीमेड सूट यहां से लिया था और उसी की फिटिंग करने के लिए मैं आई हूं दुकानदार ने मुझे दो घंटे बाद आने के लिए कहा है।

मेरे पास अब कनिका के साथ बिताने के लिए दो घंटे थे मैं बहुत खुश था मैंने उसे कहा क्या तुमने लंच कर लिया है? वह कहने लगी कि नहीं मैंने लंच तो नहीं किया मैं घर जाकर ही लंच करूंगी लेकिन मैं तो कनिका के साथ में समय बिताना चाहता था और फिर मैं उसे एक रेस्टोरेंट में लेकर चला गया हम दोनों वहां बैठे हुए थे मैं सिर्फ कनिका की झील सी आंखों को निहारता रहा और वह भी मेरे चेहरे को देख रही थी। हम दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे से कुछ भी बात नहीं की लेकिन जब हम दोनो एक दूसरे से बात करने लगे तो मैं और कनिका एक दूसरे की बातों में ही खो गए मुझे ऐसा लगा कि मैं कनिका को काफी समय से जानता हूं उसकी बातों से मैं खुश हो जाता और उसके चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ जाती। कनिका ने मुझे बताया कि वह घर पर ही रहती है और घर में ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करती है कनिका ने मुझे अपने घर का एड्रेस भी दे दिया था। मुझे अब  यह तो पता चल चुका था कि कनिका के दिल में भी मेरे लिए कुछ चल रहा है मैंने कनिका को अपने बारे में सब कुछ बता दिया था और पहले दिन ही हम दोनों की एक दूसरे से खुल कर बात हुई, मैंने कभी सोचा ना था लेकिन कनिका से बात करना मुझे अच्छा लगा और उसके साथ उस दिन दो घंटे कैसे बीत गए कुछ मालूम ही नहीं पड़ा।

हम दोनो वहां से चले गए और कनिका ने अपना सूट ले लिया उसके बाद मैंने कनिका से कहा मैं तुम्हें घर छोड़ सकता हूं? कनिका मुझे कहने लगी नहीं मैं चली जाऊंगी मैंने उसे दो बार पूछा लेकिन वह कहने लगी कि नहीं मैं चली जाऊंगी मैंने कनिका को ऑटो में बैठा दिया और उसके बाद मैं वहां से अपने घर चला आया मैं कनिका से बात कर के बहुत ज्यादा खुश था और मैं दिल ही दिल इतना ज्यादा खुश हो गया की मुझे ऐसा लगा जैसे कनिका मेरे जीवन में आ चुकी है। मैंने कनिका को दो दिन बाद फोन किया और उससे पूछा क्या तुम्हारे पास समय है वह मुझे कहने लगी हां रोशन कहो मैं आज फ्री हूं, उस दिन शायद वह बच्चो को ट्यूशन नही पढा रही थी। मैंने उसे मिलने की बात की तो कनिका ने भी मुझे मना नहीं किया और वह मुझसे मिलने के लिए आ गई जब वह मुझसे मिलने आई तो मुझे ऐसा लगा वह भी मुझसे प्यार करने लगी है लेकिन मैं उसे सीधे तौर पर यह बात नहीं कह सकता था इसलिए मैंने थोड़ा समय लिया और करीब हम दोनों एक महीने तक एक-दूसरे को मिलते रहे हम दोनों को इस एक महीने में एक दूसरे के बारे में काफी कुछ पता चल चुका था। मैं कनिका को अपनी फैमिली से मिलाना चाहता था और एक दिन मैंने अपनी फैमिली से कनिका को मिलाया वह लोग कनिका से मिलकर बहुत खुश हुए और जब उन्होंने मेरे चेहरे पर भी मुस्कान देखी तो उन्हें पता चल गया कि मैं कनिका को पसंद करता हूं। मेरी मम्मी ने मुझसे पूछा कि क्या तुम कनिका को पसंद करते हो? मैंने उन्हें कहा जी मैं कनिका को पसंद करता हूं उसके बाद हम दोनों का मिलना जारी हुआ। हम दोनों एक दूसरे से मिलकर बहुत ज्यादा खुश थे कनिका को भी मेरे बारे में पता चल चुका था।

कनिका जब भी मेरे साथ होती तो मुझे अच्छा लगता हम दोनों एक साथ समय बिताने लगे थे। एक दिन मैंने शराब पी ली और उस दिन मैंने कनिका से बहुत अश्लील बात कि। अगले दिन मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई लेकिन कनिका ने मुझे कुछ नहीं कहा और उसके बाद तो जैसे मेरे हौसले और भी बुलंद हो गए। मैं कनिका के साथ अब हमेशा ही अश्लील बातें करने लगा उसे भी शायद मजा आता और वह मेरी बातों का हमेशा जवाब दिया करती धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया। एक दिन जब मैंने कनिका को अपने घर पर बुलाया तो कनिका को भी शायद पता था कि हम दोनों के बीच क्या होने वाला है लेकिन फिर भी वह घर आ गई उस दिन बड़ा ही अच्छा माहौल था और मैं बड़े रोमांटिक मूड में था कनिका जैसे ही घर आई तो मैंने उसके हाथ को पकड़ते हुए अपने बेडरूम में ले गया और जब मैं उसे अपने बेडरूम में ले गया तो वहां पर मैंने उसके गुलाबी होठों का रसपान किया। उसके होठों को मैंने अपने होठों में लिया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ और उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था।

मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने मेरे लंड को हिलाना शुरू किया पहले वह थोड़ा बहुत शर्मा रही थी लेकिन जब उसने मेरे लंड को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया तो मेरा लंड और भी तन कर खड़ा हो गया। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसके मुंह के अंदर डाला तो वह खुश हो गई वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेने लगी। मैंने उसके कपड़े उतार दिए और उसे नंगा कर दिया उसका बदन देखकर मैं उत्तेजीत हो गया मैंने उसके स्तनों का भी जमकर रसपान किया। मैंने उसे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाते ही मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया जब मेरा लंड उसकी योनि में चला गया तो उससे मैं समझ गया कि उसकी सील टूट चुकी है। मैं उसे धक्के देता रहा उसकी योनि से खून टपक रहा था जो कि मेरे बिस्तर पर पड़ रहा था लेकिन मुझे उसे धक्के देने में मजा आता कुछ देर मैंने उसे अपने नीचे लेटाकर भी चोदा जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने उसके पेट पर अपने सफेद वीर्य को गिरा दिया उसके बाद हम दोनों के बीच यह सब कुछ सामान्य हो चुका था, मुझे उसे चोदने में बड़ा मजा आता और हम दोनों एक दूसरे के साथ हमेशा सेक्स का मजा लेते।


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