मैंने सेक्स क्यूँ किया

Mai sex kyun kiya:

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मेरा नाम रीता है और मैं एक शादीशुदा महिला हूं। मेरी शादी को बहुत वर्ष हो चुके हैं और मेरे पति के साथ भी मेरी अच्छी बनती है लेकिन उसके बावजूद भी मेरे अंदर कुछ ऐसा था जिसकी वजह से मुझे बहुत ज्यादा डर लगता था। क्योंकि बचपन में मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ था जो कि मेरे दिमाग में बैठ चुका था और वह मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रहा था। पहले तो मैं इस बात को इग्नोर कर दिया करती थी लेकिन अब जैसे जैसे मेरी उम्र बढ़ती जा रही है वैसे मुझे समस्या होने लगी है। मुझे कभी भी अचानक से डर लग जाता और ऐसा लगता कि कोई मेरा पीछा कर रहा है और कभी अलग तरीके के कुछ ख्यालात दिमाग में आ जाते हैं। कभी बैठे बैठे ही अचानक से मेरे दिमाग में कुछ आ जाता। जिसकी वजह से मुझे बहुत ज्यादा परेशानी होने लगी। मैंने यह बात अपने पति से कह दी। वो कहने लगे कि तुम किसी अच्छे डॉक्टर को दिखा दो। मैंने उन्हें कहा कि आप भी मेरे साथ चलिए। तो मैं किसी अच्छे डॉक्टर को दिखा दूंगी। या फिर आप कहीं पर पता करवा लीजिए। तो हम किसी अच्छे से डॉक्टर को दिखा देते हैं। मेरी बात सुनकर उन्हें भी थोड़ा लगने लगा कि अब मेरी तबीयत कुछ ज्यादा खराब रहने लगी है और मेरी यह समस्या वाकई में बढ़ने लगी है।

उनके दोस्त के ही परिचय में एक डॉक्टर थे। उनका नाम मोहन है। मेरे पति मुझे उनके पास ले गए। उन्होंने मुझे अच्छे से देखा और देखने के बाद कहने लगे कि आप मुझे अपनी समस्या बताइए। मैंने उन्हें कहा कि मुझे अचानक से डर लग जाता है और कभी मेरे दिमाग में कुछ ख्यालात पैदा हो जाते हैं। जिसकी वजह से मुझे बहुत तकलीफ होने लगी है। उन्होंने मुझसे पूछा क्या आप के बचपन में कभी कोई ऐसी घटना घटित हुई, जिसकी वजह से आपको ऐसा आभास होता हो की वाकई में कुछ ऐसा हो रहा है। मैंने उन्हें बताया कि बचपन में एक बार मैं सीढ़ियों से नीचे गिर गई थी। उसके बाद से मुझे बहुत ज्यादा डर लगने लगा और मेरे दिमाग में अलग-अलग तरीके के ख्यालात पैदा हो जाते हैं। जिसकी वजह से मुझे बहुत ज्यादा डर लगने लगात हैं। मुझे ऐसा लगता है जैसे कोई मेरे पीछे से खड़ा है। पहले तो यह समस्या नहीं थी परंतु आप जैसे जैसे मेरी उम्र बीती जा रही है वैसे ही यह समस्या भी बढ़ने लगी है। अब उन्होंने मुझे कहा कि आप महीने में दो बार मेरे पास आ जाइए। जिससे कि मैं अब आपका इलाज कर पाऊं। अब मैं उनके पास जाने लगी। मेरे पति भी मेरे साथ ही आया करते थे। वह मेरे लिए थोड़ा बहुत समय निकाल लिया करते थे। अब मेरी तबीयत में थोड़ा सुधार होने लगा और मेरे दिमाग से डर बाहर निकलने लगा। क्योंकि वह  मेरे दिमाग में ही घुस चुका था। जिसे कि डॉक्टर मोहन ने बहुत ही अच्छे से अब ठीक कर दिया। मैं भी बहुत ज्यादा खुश थी और मेरे पति भी बहुत खुश होने लगे। धीरे-धीरे मुझे भी अच्छा लगने लगा लेकिन अभी भी मेरा डर पूरी तरीके से समाप्त नहीं हुआ था और अभी मुझे 1 साल तक डॉक्टर मोहन के पास ही जाना था। उसके बाद ही शायद मैं पूरी तरीके से ठीक हो पाती।

डॉ मोहन का नेचर बहुत ही अच्छा था। वह बहुत ही शांत स्वभाव के है और एक अच्छे डॉक्टर भी हैं। तब उनका और हमारा घरेलू संबंध बन चुका है। जब कभी मैं नहीं जा पाती हूं उनके पास तो वह हमारे घर आ जाया करते हैं लेकिन उनके पास भी अधिकतर समय नहीं होता है। इसलिए वह हमारे घर पर सिर्फ एक दो बार ही आए है। अधिकांश हमें ही उनके पास जाना पड़ता है। अब धीरे-धीरे मेरे दिमाग से डर निकलने लगा और मैं थोड़ा सही होने लगी। मुझे भी अच्छा लगने लगा। कुछ दिनों बाद अचानक से मुझे फिर से ऐसा लगने लगा की कोई मेरे पीछे खड़ा होकर मुझे देख रहा है और मेरे दिमाग में ऐसे ही चलने लगा। मैंने यह बात डॉक्टर मोहन को बताई तो वह कहने लगे आप चिंता मत कीजिए। यह सिर्फ आपका वहम ही है और अब आप ठीक भी होने लगी हैं। मेरे पति ने भी मेरा बहुत साथ दिया। यदि वह मेरे साथ नहीं आते तो शायद मुझे भी बहुत समस्या हो जाती। मुझे मेरे घर वालों ने बहुत ज्यादा सपोर्ट किया। अब मुझे धीरे-धीरे लगने लगा कि मैं ठीक होने लगी हूं। अब मैं अकेले ही डॉक्टर मोहन के पास चले जाया करती थी। डॉ मोहन मेरा बहुत ही सपोर्ट करते थे और वह मुझे अच्छे से ध्यान भी देते थे। उनके जितने भी पेशेंट आते थे वह सबसे ज्यादा मुझे ही ध्यान से देखा करते थे।

मैं एक दिन उनके क्लीनिक में चली गई तो वह मुझे देख कर कहने लगे अब आपकी तबीयत कैसी है। मैंने उन्हें कहा कि दोबारा से मेरे साथ ऐसा ही होने लगा है मुझे अब फिर डर लगने लगा है। वह कहने लगे कि तुम्हें डरने की आवश्यकता नहीं है लेकिन मैने कहा मेरा डर अंदर से निकल ही नहीं रहा था। उन्होंने मुझे कहा कि तुम आराम से कुर्सी में बैठ जाओ और अपनी आंखे बंद कर लो। मैंने जैसे ही अपनी आंखे बंद कर ली उन्होंने पीछे से खड़े होकर अपने लंड को बाहर निकाल लिया। मैंने जैसे ही पीछे देखा तो  डॉक्टर मनोज मेरे पीछे खड़े थे और उन्होंने अपने पैंट से अपने लंड को बाहर निकाल रखा था। उन्होंने मुझे कहा कि तुम उसे अपने हाथ से पकड़ो तो मैंने हिम्मत करके उसे अपने हाथ में ले लिया। उनका लंड बहुत ज्यादा गर्म हो रखा था और मैं उसे ऐसे ही हिलाने लगी। मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और मेरे अंदर से डर भी खत्म होने लगा। ऐसा करते हुए मैंने उनके लंड को पकडते हुऐ अपने आगे से ले आई और उनके लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसने लगी। मैंने उसे बहुत देर तक सकिंग किया मुझे बहुत अच्छा लगता जब मैं उनके लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग कर रही थी। मेरे लंड से भी पानी निकलने लगा था और मुझे ऐसा लग रहा था कि मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उन्होंने मुझे अपने टेबल पर लेटा दिया और मेरी चूत को चाटने लगे। उन्होंने बहुत देर तक मेरी चूत को चाटा जिससे कि मेरा पानी निकलने लगा। वह ऐसे ही मेरी चूत को चाट रहे थे थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरे स्तनों को चाटना शुरू कर दिया। अब उनका मन मेरी चूत मारने का था तो उन्होंने अपने लंड को मेरे चूत के अंदर डाल दिया। जैसे ही उन्होंने मेरी चूत मे डाला तो मेरे मुंह से बड़ी तेज आवाज निकली और मैं ऐसे ही चिल्लाने लगी। उन्होंने मुझे छोड़ा नहीं और बड़ी तेज गति से वह मुझे चोदते जा रहे थे। जैसे ही उन्होंने मुझे झटके दिए तो मेरे अंदर का डर भी खत्म होने लगा और अब मैंने अपने पैरों को चौड़ा कर लिया।

वह बड़ी तीव्र गति से मुझे झटके देते जाते एक समय बाद  उनका वीर्य मेरी योनि में जा गिरा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरे अंदर से सॉरी गर्मी बाहर निकल गई। अब उन्होंने मुझे टेबल के सहारे खड़ा कर दिया और मेरी चूतडो को पकड़ते हुए मेरी गांड को चाटना शुरू किया और बहुत देर तक ऐसे ही चाट रहे थे। अब उन्होंने मेरी गांड को सहलाना शुरु किया। अपने लंड पर तेल लगा लिया उन्होंने इतना ज्यादा तेल लगाया था कि उनके लंड से टपक रहा था। उन्होंने तुरंत ही मेरे गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जिससे कि मेरे मुंह से बड़ी तेज आवाज निकलने लगी मैं ऐसे ही चिल्ला रही थी। वह मुझे पकड़ कर बड़ी तेज गति से झटके देते और मेरा शरीर पूरा कांपने लग जाता। वह बड़ी देर से मुझे ऐसे ही झटके दिए जा रहे थे और मेरा शरीर पूरा हिलता जाता।  अब मेरी के अंदर दर्द भी हो रहा था और मुझे मज़ा भी आने लगा। वह ऐसे ही काफी देर तक मेरी गांड के मजे ले रहे थे। अब मैंने भी अपनी गांड को उनके टकराना शुरू कर दिया और जैसे ही मैं अपनी चूतड़ों को उनके लंड पर ले जाती तो वह भी बड़ी तेज मेरी चूतड़ों पर प्रहार करते जिससे कि हम दोनों के अंदर से एक गर्मी निकलने लगी और उस गर्मी में उनका वीर्य मेरे गांब के अंदर ही गिर गया।

मेरा सारा दर्द खत्म हो गया और मुझे उसके बाद से कोई भी डर नहीं लगता है लेकिन मुझे डॉक्टर मनोज के पास जाने में बहुत मजा आने लगा। मैं फिर भी उनके पास जाती रहती हूं मेरे पति सोचते हैं कि मैं अब भी डरती हूं लेकिन मैं अब उनके लंड को अपनी गांड में लेने के लिए जाती हूं वह मुझे बहुत ही अच्छे से रगड़ते हैं। मुझे उनके साथ संभोग करने में बहुत ही आनंद आता है।

 


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