मैंने आपसे कहा था ना चोद लूँगा

Maine aapse kaha tha na chod lunga:

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मेरा नाम राज है और मैं अलवर का रहने वाला एक 25 वर्षीय युवक हूं। मेरा एक बड़ा भाई है। वह मुझसे 2 वर्ष बड़े हैं। उनका नाम गौरव है। हमारे पिताजी के हार्डवेयर की दुकान है जो कि हमारे शहर में बहुत ही अच्छे से चलती है। हमारे यहां से सारे शहर के लोग सामान खरीद कर ले जाते हैं और वह मेरे पिताजी को भली भांति जानते हैं। मैंने इस वर्ष अपना कॉलेज भी कंप्लीट कर लिया है और मेरे भैया का पहले से ही कॉलेज कंप्लीट हो चुका था। तो वह पिताजी के साथ ही दुकान पर काम करते थे। मेरे पिताजी भी चाहते थे कि मैं भी दुकान का काम संभाल लूं। जिससे कि वह फ्री हो जाएं लेकिन मैं उनके दुकान में काम संभालना नहीं चाहता था। मैं अपने लिए कुछ अलग ही काम खोलना चाहता था। परंतु मेरे पिताजी यही चाहते थे कि मैं उनकी दुकान पर ही काम चला लू। क्योंकि हमारी दुकान बहुत ही अच्छी चलती है और हमारा जमा-जमाया काम है। जिस वजह से उन्हें भी यही लगता था कि कहीं और धक्खे खाने से तो अच्छा है की किसी दुकान में काम करते रहें और कारोबार को आगे बढ़ाते रहे। मैं कुछ दिन अपने भैया के कहने पर दुकान में भी गया लेकिन मेरा मन दुकान में बिल्कुल भी नहीं लगता था। मैंने इस बारे में अपने पिताजी से भी बात की लेकिन इस बात को लेकर मेरा उनसे हमेशा ही झगड़ा होता रहता था। वह कहते थे कि मैंने तुम्हें कॉलेज में भी पढ़ाया और तुम्हें एक अच्छी शिक्षा दी। उसके बावजूद भी तुम इसी तरीके से कुछ और काम करना चाहते हो  मैंने अपने काम में कितनी मेहनत की है। उसके बाद ही मुझे बहुत सफलता मिली है। मैं नहीं चाहता कि तुम दर बदर की ठोकरें खाते रहो और उसके बाद फिर तुम अपना काम संभालो। इससे अच्छा है तुम अभी से अपने काम में ही ध्यान दो और दुकान में आ जाया करो। जिससे कि मैं अब घर में आराम कर सकूं।

मेरे भैया ने भी मुझे समझाया। मेरे भैया बहुत ही अच्छे थे तो मैंने उनकी बात मान ली। और उन्होंने भी मुझे मना लिया। वह कहने लगे कि तुम खुश हो तो दुकान में आ जाया करो। उसके बाद जब पिताजी का गुस्सा थोड़ा शांत हो जाए तब तुम इस बारे में उनसे बात करना। मैंने उन्हें कहा ठीक है। मैं कल से आपके साथ ही दुकान में चल लिया करूंगा। अब मैं उनके साथ दुकान में जाने लगा। मुझे काफी समय हो चुका था दुकान का काम संभालते हुए। कब मेरे पिताजी दुकान में आते नहीं थे। वह घर पर ही रहने लगे थे। हम दोनों भाइयों ने अब पूरा काम संभाल लिया था। कुछ दिनों बाद मेरे भैया भी काम से बाहर चले जाते थे। वह काफी दिनों तक ऐसे ही बाहर जाया करते थे लेकिन मैं उनकी बात को समझ नहीं पा रहा था कि वहां जाते कहां है। एक दिन मैंने उनसे पूछ ही लिया की भैया आप जाते कहां है। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं काम से बाहर जाता हूं। लेकिन मैं सोचने लगे गया कि ऐसा कौन सा काम है जो भैया को रोज बाहर जाना पड़ता है।

एक दिन मैं उनके फोन में गेम खेल रहा था। तो उसके बाद मैं उनके फोन में ऐसे ही छेड़ने लग गया। फिर मैंने देखा कि उसमें किसी लड़की का नंबर सेव था। वह नंबर पारुल नाम से उन्होंने सेव कर रखा था। मैंने जैसे ही उनके फोन से उस नंबर पर फोन किया तो किसी लड़की ने उनका फोन उठाया। अब मैं सारी बात को समझ चुका था और मैंने तुरंत ही अपने भैया से इस बारे में बात की। मैंने कहा कि आपका किसी लड़की के साथ चक्कर चल रहा है। वह कहने लगे नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है। मैने उनसे कहा कि मैंने आपके फोन पर एक लड़की का नंबर देखा। तब उन्होंने मुझे कहा कि तुम यह बात किसी को बताना मत। मैं सिर्फ तुम्हें यह बात बता रहा हूं। अब उन्होंने  मुझे सारी बात बता दी। एक बार पारुल के पिताजी हमारी दुकान से कुछ सामान ले गए थे और उन्होंने समय पर पैसे नहीं दिए। जिसके चलते उनकी और मेरे पिताजी की बहुत ज्यादा तू तू मैं मैं हो गई। मेरे पिताजी अब पारुल के पिताजी को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं और ना ही वह हमारी दुकान से कुछ भी सामान लेकर जाते हैं। मैंने इस बारे में अपने भैया से बात की तो वह भी कहने लगे की टेंशन तो मुझे भी है लेकिन देखते हैं क्या पता पिताजी मान जाए। अब हम दोनों भाई ऐसे ही दुकान में काम करने लगे। काफी समय बाद उन्होंने मुझे भाभी से मिलाया। वह बहुत ही ज्यादा सुंदर थी और उन्होंने मुझसे बहुत ही अच्छे से बात भी कि।

एक दिन हम दुकान में बैठे हुए थे। उस दिन मेरे पिताजी भी दुकान में आए हुए थे। तो भैया ने हिम्मत कर कर उनसे पारुल के बारे में बात कर ही ली। पिताजी बहुत खुश हो गए लेकिन जब बाद में उन्होंने पारुल के पिता का नाम बताया था तो वह आग बबूला हो गए और कहने लगे कि मेरे जिंदा रहते तो तुम उस घर में बिल्कुल भी शादी नहीं कर सकते। उन्होंने उन्हें साफ शब्दों में मना कर दिया था। जिससे कि वह अभी थोड़ा डर गया और उन्होंने भी आगे से इस बारे में पिताजी से कोई बात नहीं की लेकिन वह तो पारुल भाभी से ही शादी करना ही चाहते थे। फिर उन दोनों ने किसी को बिना बताए शादी करने की सोची और उन्होंने एक दिन कोर्ट मैरिज कर ली। जब वह शादी करके पारुल को घर पर लाए तो पिताजी उस दिन बहुत ज्यादा गुस्सा हुए और गुस्से में उन्होंने भैया को घर से निकाल दिया। मुझे यह बात बहुत बुरी लगी लेकिन मैं भी पिताजी के आगे कुछ कह नहीं सकता था। अब वह घर से अलग ही रहते थे और दुकान पर भी नहीं आते थे। वह एक छोटी सी नौकरी कर के अपना गुजारा चला रहे थे। अब दुकान का सारा काम मैं ही संभालता था लेकिन पिताजी को यह टेंशन रहती थी कि कहीं किसी दिन मैंने भी दुकान छोड़ दी तो कहीं उनकी दुकान अब बंद ना हो जाए और इसी तरह समय बीतता चला गया। एक दिन मेरा भी भैया से मिलने का बहुत मन हुआ। मैं गौरव भैया के घर चला गया। जब मैं उनके घर में पहुंचा तो वह दोनों बहुत ज्यादा खुश हो गए और गौरव भैया भी पिताजी के बारे में पूछने लगे और पारुल भाभी भी मुझे देखकर बहुत ज्यादा खुश थी। मैं उन दोनों की खुशी से बहुत ज्यादा खुश हो रहा था। मेरा उनके घर पर आना जाना लगा रहता था लेकिन यह बात मेरे पिताजी को मालूम नही थी।

एक दिन जब मैं गौरव भैया के घर गया तो वह घर पर नहीं थे और पायल भाभी बाथरूम में नहा रही थी। मैं सोफे में जाकर बैठ गया शायद उन्होंने सोचा कोई भी घर पर नहीं है इसलिए वह पैंटी ब्रा में ही बाथरुम से बाहर निकल गई। जैसे ही उन्होंने मुझे देखा तो वह एकदम से डर गई लेकिन मैंने उनके पूरे बदन को देख लिया था। अब मेरा लंड खड़ा हो गया मैंने उनके पास जाकर उनके स्तनों को दबाना शुरु कर दिया। वह भी मेरी तरफ आकर्षित होने लगी और मेरे लंड को अपने हाथ से दबाने लगी। मैंने उनको होठों को अपने होठों में लिया तो वह थोड़े से गीले हो रखे थे क्योंकि वह अभी अभी नहा कर बाहर निकली थी। उनका बदन भी गीला था और मैंने उसे अपनी जीभ से चाट कर पूरा सुखा दिया। अब मैंने उनकी पैंटी को उतारते हुए उनकी चूत मे अपनी उंगली घुसेड़ दी। अब उनसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह नीचे लेटते हुए अपने दोनों पैरों को खोलने लगी। जैसे ही उन्होंने अपने पैरों को खोला तो मैंने भी अपने लंड को उनकी योनि के अंदर घुसेड़ दिया और उनके जांघों को कसकर पकड़ लिया। मै ऐसे ही बड़ी तीव्र गति से उन्हें धक्के देने लगा मैं उन्हें बड़ी तेजी से चोद रहा था। उनकी चूत अभी भी बहुत टाइट थी मुझे काफी आनंद आ रहा था जब मैं अपने लंड को अंदर बाहर करता जाता। वह भी उत्तेजना में अपने मुंह से मादक आवाज निकालती जाती। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब वह अपने मुंह से मादक आवाज निकालने लगी। मैं भी उन्हें बड़ी तेजी से चोदे जा रहा था। जब उनका झड़ने वाला था तो उन्होंने अपने दोनों पैरों को आपस में मिलाते हुए मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया। वह ऐसे ही शांत हो गई लेकिन मैं उनकी चूत की गर्मी को झेल नहीं पाया और मेरा वीर्य पतन हो गया मैंने अपना वीर्य पायल भाभी की चूत मे ही डाल दिया।

 


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