मैं आपको सब कुछ दूंगी

Main aapko sab kuch dungi:

Hindi sex story, kamukta मेरा नाम सुरेश है मैं एक दिन अपने घर पर था और मैं नाश्ता कर रहा था तभी मेरे फोन पर किसी का फोन आया मैं अपने डाइनिंग टेबल से उठकर अपने रूम में फोन लेने गया और जब मैंने देखा तो उस पर किसी अननोन नंबर से फोन आ रहा था। मैंने वह फोन रिसीव किया तो सामने से किसी नौजवान हीरो की आवाज आई उसने मुझे कहा अरे भैया कैसे हो? मैंने उसे कहा मैंने तुम्हें पहचाना नहीं लेकिन वह मुझे कहने लगा आप क्या बात कर रहे हो आपने मुझे पहचाना नहीं आप मुझे कैसे भूल सकते हो। मैंने उसे कहा तुम अपना नाम तो बताओ लेकिन वह इस दुविधा में था कि आखिरकार मैंने उसे पहचाना कि नहीं मैंने उससे कहा भैया तुम अपना नाम बताओ तो मैं तुम्हे बताऊं कि मैंने तुम्हें पहचाना या नहीं।

उसने जब मुझे अपना नाम बताया तो मैंने उसे कहा मैं इस नाम के किसी बच्चे को नहीं जानता हूं वह मुझे कहने लगा मेरा नाम रोहित है क्या आप सिन्हा साहब नहीं बोल रहे? मैंने उसे कहा मैं सिन्हा नहीं बोल रहा हूं मेरा नाम सुरेश वर्मा है। वह कहने लगा लगता है सिन्हा साहब ने मुझे गलत नंबर दे दिया उसने मुझसे माफी मांगी और कहां भैया सॉरी आपको मैंने डिस्टर्ब किया मैंने उसे कहा कोई बात नहीं लेकिन यह नंबर सिन्हा साहब का नहीं है वह कहने लगा ठीक है। उसके बाद मैं वापस अपने खाने के टेबल में आया और अपना नाश्ता करके अपने ऑफिस चला गया मैं अपने ऑफिस निकल चुका था मैं अपने घर से जब ऑफिस जा रहा था तो रास्ते में मेरी कार में तेल ही खत्म हो गया और मुझे ऑफिस जाने में देरी हो गई। मैं इस बात से बहुत चिंता में था कि आखिरकार मैं ऑफिस कैसे पहुंचूंगा तभी मैंने एक ऑटो लिया और वहां से अपने ऑफिस चला गया मैं अपने ऑफिस थोड़ा लेट से पहुंचा था तो मेरे बॉस ने मुझे कहा तुम आज ऑफिस लेट आ रहे हो। मैंने उन्हें कहा हां सर मुझे ऑफिस आने में लेट हो गई दरअसल मेरी कार में तेल खत्म हो गया था वह मुझे कहने लगे चलो कोई बात नहीं।

उस दिन ऑफिस में मेरा झगड़ा मेरे ऑफिस में काम करने वाले एक व्यक्ति से भी हुआ हमारी बात इतनी ज्यादा बढ़ गई की हमारे बॉस को हमारे बीच में आना पड़ा मैं बहुत शर्मिंदा था क्योंकि इसमें मेरी गलती नहीं थी लेकिन इसमें मेरे साथ काम करने वाले व्यक्ति की गलती थी जिसकी वजह से हमारी बात इतनी आगे बढ़ गयी। श्याम के वक्त मैंने अपने दोस्त से कहा तुम मुझे मेरी कार तक ड्राप कर दोगे उसने मुझे वहां तक ड्राप किया वहां से मैंने अपने गाड़ी में तेल डलवा लिया था और उसके बाद मैं वापस अपने घर आ गया। मैं जब अपने घर पहुंचा तो मुझे दोबारा से उसी व्यक्ति का फोन आया और वह कहने लगा सर मैं रोहित बोल रहा हूं मैंने उसे कहा मैंने सुबह ही आपसे कहा था कि यह नंबर सिन्हा साहब का नहीं है तो भी आप जबरदस्ती मेरे नंबर पर फोन किए जा रहे हैं। वह मुझे कहने लगा सर मैंने आपको परेशान करने के लिए फोन नहीं किया बल्कि मैंने आपसे यह जानने के लिए फोन किया था कि क्या वाकई में आप सिन्हा साहब को नहीं जानते क्योंकि उनसे मेरा बहुत जरूरी काम था और मुझे उनका नंबर कहीं से भी नहीं मिल पा रहा है। मैंने उसे कहा मैं किसी भी सिन्हा को नहीं जानता वह बहुत दुखी होकर मुझसे कहने लगा लगता है अब सिन्हा साहब का नंबर मुझे नहीं मिल पाएगा। ना जाने उस युवक को सिन्हा साहब से क्या काम था लेकिन वह बार-बार सिन्हा साहब का नाम लिए जा रहा था मैंने फोन रख दिया और उसके बाद मैं अपनी पत्नी से बात करने लगा मेरी पत्नी पूछने लगी आज आप बहुत ज्यादा टेंशन में लग रहे हैं। मैंने अपनी पत्नी को बताया कि आज सुबह से मेरे साथ कुछ ज्यादा ही बुरी घटनाये हुई मैंने उसे बताया कि आज जब मैं ऑफिस जा रहा था तो मेरी कार का तेल खत्म हो गया और मुझे ऑफिस पहुंचने में देरी हो गई। उसके बाद ऑफिस में ही मेरी एक व्यक्ति के साथ किसी बात को लेकर बहुत ज्यादा बहस हो गई जिससे कि उसके और मेरे बीच में झगड़ा हो गया और एक व्यक्ति मुझे दो दिन से फोन करे जा रहा है जो कह रहा है की आप मेरी बात सिन्हा जी से करवा दीजिए। मेरी पत्नी कहने लगी लगता है सारी परेशानी आजकल आप ही को मिल रही हैं मुझे उसकी बात सुनकर बहुत हंसी आई और मैंने उसे कहा अब तुम भी मेरा मजाक बना लो।

मैंने उसे कहा तुम मेरे लिए कुछ नाश्ता लगा दो मुझे काफी भूख लग रही है उसने मेरे लिए चाय बनाई मैंने उसके साथ थोड़ी नमकीन खाई फिर मैं अपने ऑफिस का काम करने लगा। काफी दिनों तक मुझे रोहित का फोन नहीं आया था तो एक दिन मैंने उसे फोन कर के पूछ लिया कि क्या भैया तुम्हें सिन्हा साहब का नंबर मिल गया। वह मुझे कहने लगा मुझे अभी तो सिन्हा साहब का नंबर नहीं मिला है लेकिन उम्मीद है कि जल्द से जल्द उनका नंबर मुझे मिल जाएगा, मैंने उनके किसी जानने वाले का नंबर लिया है और आज ही उन्हें फोन करूंगा। रोहित मुझे बड़ा ही इंटरेस्टिंग सा लगा तो मैंने उससे मिलने के बारे में सोचा मैंने सोचा कि क्यों ना रोहित से मिल लिया जाए। एक दिन मैंने रोहित को फोन किया मैंने उससे कहा क्या तुम मुझसे मिल सकते हो हालांकि मेरा उसे मिलना उचित नहीं था लेकिन मुझे उसे  मिलना था मैं जब रोहित को मिला तो वह 27 28 वर्ष का नौजवान युवक था। मैंने उसे कहा तुम्हें आखिरकार सिन्हा साहब से काम क्या था तो वह कहने लगा अब मैं आपको क्या बताऊं दरअसल मुझे सिन्हा साहब एक दिन एक मीटिंग में मिले थे उस वक्त मुझे उनसे किसी ने मिलाया था उन्होंने मुझे कहा मैं तुम्हारी नौकरी एक कंपनी में लगवा दूंगा और इसीलिए मैं उन्हें बार-बार फोन किये जा रहा था लेकिन शायद तुमने मुझे गलत नंबर दे दिया था।

मैंने उससे कहा तुम क्या करते हो तो वह कहने लगा अभी तो मैं बेरोजगार हूं और फिलहाल मैं नौकरी करने के बारे में सोच रहा हूं लेकिन मुझे अभी तक कोई ऐसी नौकरी नहीं मिली है। मैंने कहा तुम चिंता मत करो तुम मुझे अपना रिज्यूम दे देना मैं तुम्हारी जॉब अपनी कंपनी में लगा दूंगा वह कहने लगा सर आपका बहुत बड़ा एहसान होगा यदि आप मेरी नौकरी लगवा दे तो। मैंने रोहित से कहा हां मैं तुम्हारी नौकरी जरूर लगवा दूंगा तुम बिल्कुल चिंता मत करो, मैंने रोहित से उस दिन पूछा कि आखिरकार तुम नौकरी क्यों करना चाहते हो। वह कहने लगा दरअसल मैं एक लड़की से प्यार करता हूं और उसके पिताजी मुझसे उसकी शादी करना नहीं चाहते हालांकि मैं एक अच्छे परिवार से हूं लेकिन मैं नहीं चाहता कि मैं अपने पिताजी के ऊपर बोझ बनूँ इसलिए मैं चाहता हूं कि मैं कहीं जॉब कर लूं मैंने उसे कहा चलो ठीक है मैं तुम्हारी जॉब की बात कर लूंगा। कुछ समय बाद मैंने रोहित की नौकरी अपने ऑफिस में ही लगवा दी रोहित मुझे बहुत मानता था हम दोनों की मुलाकात तो इत्तेफाक से हुई थी लेकिन उस का मेरे प्रति बहुत सम्मान था और वह बहुत ज्यादा मेरा आदर किया करता था। एक दिन उसने मुझे अपनी गर्लफ्रेंड से भी मिलवाया उसका नाम पारुल है पारुल ने मुझे बताया कि वह रोहित को काफी समय से जानती है और वह एक दूसरे से शादी करना चाहते हैं। मैंने पारुल से कहा अब तो रोहित नौकरी करने लगा है तो तुम दोनों अब एक दूसरे से शादी कर सकते हो और वैसे भी तुम दोनों बालिक हो तुम दोनों अपना निर्णय खुद ले सकते हो। रोहित ने मेरे बारे में पारुल से काफी कुछ कहा था इसलिए पारूल भी मेरी बहुत ही इज्जत किया करती थी। एक दिन मैंने पारुल को एक लड़के के साथ देखा वह उसे पार्क में किस कर रहा था मैं यह सब देखकर दंग रह गया।

मुझे रोहित के ऊपर बहुत ही दया आने लगी रोहित उससे कितना ज्यादा प्रेम करता है और पारुल ना जाने उसके साथ ऐसा क्यों कर रही है। मैंने पारुल से जब इस बारे में बात की तो मुझे मालूम पड़ा कि उसका कैरेक्टर ही ठीक नहीं है और वह ना जाने कहाँ बाहर मुंह मारती रहती है। उसने मुझे अपने माया जाल में फंसा लिया और वह मुझे कहने लगी सर आज कहीं चलते हैं। मैं जब उसे अपने साथ लेकर गया तो उसने मेरे होठों को चूमना शुरू किया और उसने मेरी छाती को भी चूमना शुरू कर दिया उसने मुझे अपने स्तन दिखाए तो मैं भी अपने आप को काबू में ना रख सका। मैंने पारुल को चोदने के बारे मे अपने मन ख्याल पैदा कर लिया था मै उसे अपने दोस्त के घर ले गया और वहां पर मैंने जब पारुल के बदन से उसके कपड़े उतारने शुरू किए तो उसने काले रंग की पैंटी ब्रा पहनी हुई थी जो कि उसके गोरे बदन में बहुत ही अच्छी लग रही थी। मैंने उसके होंठों को बहुत देर तक चूमा उसके स्तनों को जब मैं अपने मुंह में लेता तो उसके अंदर से गर्मी निकल जाती वह मुझे कहती मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

उसने जब अपनी चूत पर मेरे लंड को रगडना शुरू किया तो मैं जोश में आ गया और मै अपने आप पर बिल्कुल भी काबू ना कर सका। मैंने भी धक्का देते हुए पारुल की टाइट चूत में अपने 10 इंच मोटे लंड को प्रवेश करवा दिया मेरा लंड उसकी योनि में नहीं जा रहा था लेकिन मैंने धक्का देते हुए उसकी योनि में अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो मुझे बड़ा मजा आता इतने समय बाद किसी की टाइट चूत मारने को मुझे मिली थी तो भला मैं कैसे छोड़ सकता था। मैंने उसे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाते ही उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करने लगा उसकी योनि से तरल पदार्थ बाहर की तरफ को निकलने लगा और उसे बड़ा मजा आने लगा। जैसे ही मेरा वीर्य पारुल की योनि में गिरा तो वह खुश हो गई और वह मुझे कहने लगी सार आप यह बात रोहित को मत बताना। मुझे भी पारुल से वह सब कुछ मिल रहा था तो भला मैं भी क्यों रोहित को इस बारे में बताता लेकिन मुझे कई बार लगता कि रोहित पारुल के ऊपर कितना ज्यादा भरोसा करता है और वह उसके भरोसे को कैसे तोड़ रही है लेकिन मुझे तो पारुल के हुस्न के मजे लेने की आदत पड़ चुकी थी।


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