मैं थक चुका था

Mai thak chuka tha:

Antarvasna, kamukta मेरा रचना के साथ अब डिवॉर्स हो चुका है और मैं अपनी जिंदगी में काफी अकेला था लेकिन उसी वक्त मेरी मुलाकात अक्षिता से हुई उसने ही मेरी जिंदगी को संभाला और दोबारा से मेरी जिंदगी में सब सामान्य हो गया। दरअसल मैं रचना से करीब 5 वर्ष पहले मिला था रचना और मेरी मुलाकात एक कॉफी शॉप में हुई थी और वहां पर हम दोनों की मुलाकात पहली बार हुई थी। जब रचना के साथ मेरी पहली मुलाकात हुई तो उस वक्त हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी और उसके कुछ समय बाद हम दोनों ने एक ही ऑफिस में काम किया। उसी दौरान मैंने रचना से अपने दिल की बात कही और शायद रचना भी मना ना कर सकी कुछ समय बाद हम लोगों ने शादी करने का फैसला कर लिया। हम दोनों ने जब शादी की तो सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था क्योंकि हम दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे और मैं बहुत खुश था क्योंकि रचना मेरी जिंदगी में थी मेरी खुशी की वजह सिर्फ रचना ही थी।

छै महीने तक सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन उसके बाद हम दोनों के बीच तकलीफे शुरू होने लगी और हम दोनों हर रोज झगड़ा करने लगे लेकिन मेरे माता-पिता के समझाने पर हम दोनों के बीच में समझौता हो जाया करता। रचना भी दोबारा से जॉब करने लगी थी क्योंकी शादी के कुछ समय बाद उसने जॉब छोड़ दी थी लेकिन रचना ने दोबारा से जॉब ज्वाइन कर ली थी और वह जिस कंपनी में जॉब करती थी वहां पर उसे घर आने में काफी लेट हो जाती थी। कई बार मैं रचना को इस बारे में कहता भी था लेकिन जब भी मैं उसे कुछ कहता तो वह मुझे हमेशा ही यह बात कहती कि तुम मेरी जॉब को गलत मतलब में लेकर जा रहे हो। जबकि ऐसा नहीं था मैं उसकी चिंता करता था लेकिन वह बात को कहीं से कहीं और ही ले जाती थी जिस वजह से हम दोनों के बीच में हमेशा ही झगड़े रहते थे। मैंने बहुत कोशिश की लेकिन मेरा रिलेशन ज्यादा समय तक ना चल सका हम दोनों ने कुछ समय बाद ही अलग होने का फैसला कर लिया।

मुझे बहुत तकलीफ हुई क्योंकि मैं रचना से बहुत प्यार करता था लेकिन ना जाने हम दोनों के बीच में क्यों समस्याएं होने लगी थी जिससे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ रहने को तैयार नहीं थे। मैं अब अकेला रहता था क्योंकि इसी बीच मेरे माता पिता का भी देहांत हो चुका था और मैं पूरी तरीके से अकेला हो चुका था मेरी जिंदगी में ऐसा कोई भी नहीं था जो की मुझे समझ पाता। तभी उसी दौरान मेरी मुलाकात  अक्षिता से हुई अक्षिता से मुझे मेरे दोस्त ने मिलवाया था। जब मैं पहली बार अक्षिता से मिला तो मेरे दिमाग में उसे लेकर कुछ भी ऐसा नहीं था हम दोनों की बड़ी ही सामान्य सी मुलाकात हुई थी उसके बाद हम लोग एक दो बार और मिले। मुझे मेरे दोस्त ने अक्षिता के बारे में बताया कि उसके माता पिता नहीं है लेकिन उसके बावजूद भी उसने कभी हार नहीं मानी और वह अकेले अपने दम पर आज भी अपना जीवन यापन कर रही है। मैंने अपने दोस्त से पूछा तो अक्षिता किसके साथ रहती है उसने मुझे बताया कि वह अपने चाचा के साथ रहती है लेकिन वह किसी से भी कभी कोई मदद नहीं लेती और वह बहुत ही स्वाभिमानी लड़की है। इस बात से मेरे दिल में अक्षिता के लिए एक इज्जत पैदा हो गई और जब अक्षिता मुझे मिली तो मैंने अक्षिता से कहा कि तुम बड़ी हिम्मत वाली लड़की हो मुझे तुम्हारे बारे में रमन ने बताया था। अक्षिता कहने लगी इसमें हिम्मत वाली कोई बात ही नहीं है मैंने तो जबसे अपना होश संभाला है तब से अपने आप को अकेला पाया और मुझे हमेशा ऐसा लगता कि यदि मैं अपने लिए नहीं लडूंगी तो शायद मैं दुनिया की भीड़ में कहीं खो जाऊंगी। मैंने अक्षिता से कहा तुम्हें देख कर तो मुझे भी एक अलग ही कॉन्फिडेंस आ रहा है अक्षिता ने मुझे कहा क्यों तुम्हारी जिंदगी में ऐसा क्या हुआ है तो मैंने अक्षिता से सारी बात शेयर की। मैंने उसे बताया किस प्रकार से रचना और मेरी मुलाकात हुई थी और उसके बाद हम लोगों ने शादी करने का फैसला किया जब हम दोनों की शादी हो गई तो उसके बाद हम लोगों का रिलेशन ज्यादा समय तक नहीं चल पाया और हम दोनों का डिवॉर्स हो गया। अक्षिता मुझे कहने लगी तो इसमें तुम्हें टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है तुम्हें सिर्फ तुम्हारी पत्नी ने हीं तो छोड़ा है कौन सा तुम्हारा जीवन खत्म हो गया है।

अक्षिता ने मुझे उस वक्त बहुत सपोर्ट किया और अक्षिता से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती भी हो चुकी थी। मैंने अक्षिता से कहा मैं बहुत अकेला हूं और मुझे तुम्हें देख कर ऐसा लगता है कि यदि तुम जैसा कोई मेरे साथ होता तो कितना अच्छा होता लेकिन अक्षिता ने मुझे उस वक्त मना कर दिया। उसने मुझे कहा अजय मुझे मालूम है कि तुम कितने अकेले हो लेकिन मैं तुम्हारे साथ शादी नहीं कर सकती क्योंकि मेरे भी कुछ सपने हैं जिन्हें मुझे सच करना है और मैं उनके पीछे ही भाग रही हूं। मैंने अक्षिता को समझाया और कहा हम दोनों मिलकर तुम्हारे सपने पूरे करेंगे और मेरे जीवन में भी तो कोई ऐसा मकसद नहीं है मैं भी तो अकेला हूं। अक्षिता ने मुझसे कहा कि मुझे कुछ समय चाहिए, तुम में कोई कमी नहीं है तुम बहुत ही अच्छे व्यक्ति हो और शायद तुम जैसा मुझे मिल नहीं पाएगा लेकिन फिर भी मुझे अपने सपनों को पूरा करना है और मुझे खुद का घर लेना है। मैं चाहता था कि मैं भी अक्षिता की मदद करूं इसलिए मैं जिस कंपनी में नौकरी करता था उस कंपनी में मुझे काम करते हुए काफी समय हो चुका था और मेरा काफी पैसा भी जमा हो चुका था मैंने वह पैसा निकाल लिया और मैंने अक्षिता को वह पैसे दे दिए।

अक्षिता ने मुझे मना कर दिया और कहा यह पैसे में नहीं रख सकती यह तुम्हारी मेहनत के पैसे हैं। मैंने अक्षिता से कहा मेरे लिए शायद इन पैसों का कोई मोल नहीं है लेकिन तुम्हारे लिए इन पैसों का बहुत मोल है क्योंकि तुम्हें तुम्हारे सपने सच करने हैं और मुझे नहीं लगता कि तुम इतनी जल्दी अपने सपने सच कर पाओगी। मेरे पास यह पैसे पड़े थे तो तुम इसे अपने पास रख लो जब तुम्हारे पास हो तो तुम मुझे वापस कर देना। अक्षिता ने कहा कि मैं यह पैसे नहीं रख सकती लेकिन मेरे मनाने पर उसने वह पैसे रख लिए और अपने लिए घर ले लिया उसके पास भी थोड़े बहुत पैसे थे। अक्षिता अब अपने चाचा चाची से अलग रहने लगी थी और मेरी मुलाकात अक्षिता से हर रोज हुआ करती थी। एक दिन अक्षिता ने मुझसे कहा कि अजय मुझे तुमसे शादी करनी है मैंने अक्षिता से कहा लेकिन कल तक तो तुम मना कर रही थी तो अक्षिता मुझे कहने लगी कि मुझे एहसास हुआ कि तुम्हें शायद किसी की जरूरत है। मैं इस बात से बहुत खुश था क्यों कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि अक्षिता शादी के लिए मान जाएगी लेकिन अक्षिता शादी के लिए मान चुकी थी और उसने अपने चाचा चाची को भी इस बारे में बता दिया। उसके परिवार वाले सब तैयार हो चुके थे और हम दोनों ने अपनी शादी का फैसला कर लिया था। जब हम लोगों ने शादी की तो मैंने अपने कुछ चुनिंदा लोगों को ही बुलाया था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि शादी में बेवजह लोगों को बुलाया जाए। हम लोगों की शादी बड़े ही अच्छे तरीके से हुई और मैं बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि मुझे अक्षिता के रूप में मेरा जीवन साथी मिल चुका था। शादी की पहली रात थी, अक्षिता को जब मैंने देखा तो वह लेटी हुई थी उसका बदन देखकर मैं उसके बगल में जाकर बैठ गया।

मैंने उसकी कमर को अपने हाथों में लिया और उसे अपने मुंह से चूमने लगा, मैंने अक्षिता से कहा तुम्हारा मैं धन्यवाद कहना चाहता हूं जो तुमने मेरा साथ दिया। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी तुम मेरा साथ दोगी लेकिन अब मैं बहुत ज्यादा खुश हूं अक्षिता मुझे कहने लगी मैं भी तो तुमसे प्यार करती हूं। यह कहते हुए अक्षिता ने मेरे होठों को अपने होठों में ले लिया वह मेरे होठों को चूमने लगी। मैंने जैसे ही अक्षिता की स्तनों को अपने मुंह में लिया तो उसके अंदर जोश बढ़ने लगा और उसे भी बड़ा मजा आने लगा। मैंने अक्षिता के होठों को अपने होठों में ले लिया और उसके स्तनों को मे काफी देर तक चूसता रहा। जिससे कि उसके अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ने लगी मैंने जब अक्षिता की योनि को अपनी उंगली से सहलाना शुरू किया तो उसे बड़ा मजा आने लगा। जैसे ही मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो उसकी योनि से गिला पदार्थ बाहर की तरफ निकल रहा था मैंने उसे धक्का देते हुए चोदना शुरू किया। जब मेरा लंड अक्षिता की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो उसकी योनि से खून का बहाव तेजी से होने लगा वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी।

उसने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया, मैं अपने लंड को उसकी योनि के अंदर बाहर करता जा रहा था जिससे की हम दोनों के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। जैसे ही उसने अपने दोनों पैरों के बीच में मुझे जकड़ना शुरू किया तो मुझे महसूस हो गया कि वह झडने वाली है और काफी समय बाद इतनी टाइट चूत के मजे लेकर मैं बहुत ज्यादा खुश था। मैं उसे तेजी से धक्के दिए जाता अक्षिता झड चुकी थी लेकिन उसने मेरा साथ बखूबी दिया। हम दोनों ने एक साथ करीब 5 मिनट तक सेक्स किया 5 मिनट के दौरान हम दोनों ने एक दूसरे को पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया था। जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अक्षिता के मुंह में अपने लंड को डाला उसने मेरे लंड को बड़े अच्छे से चूसा। वह मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कि कोई लॉलीपॉप हो लेकिन जैसे ही मेरा वीर्य उसके मुंह के अंदर गिरा तो उसे बड़ा आनंद आया और वह खुश हो गई। मैं पूरी तरीके से थक चुका था और मेरा बदन दर्द होने लगा था मैं लेट गया लेकिन अक्षिता ने दोबारा से मेरे लंड को खड़ा किया और वह मुझसे अपनी चूत मरवाने को बेताब थी दोबारा से मैंने उसके साथ सेक्स किया। अब मेरे अंदर बिल्कुल भी ताकत नहीं थी मैं पूरी तरीके से थक चुका था।


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