मै इंतजार करूंगी

Antarvasna, hindi sex kahani:

Mai intjar karungi मैं और मेरे भैया मौसी के घर गए हुए थे मौसी घर पर अकेली रहती हैं उनके दोनों बच्चे विदेश में रहते हैं। उनकी देखभाल के लिए घर पर एक नौकरानी रहती है लेकिन कुछ दिनों से मौसी की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए हम दोनों भाइयों को वहां जाना पडा। हम लोग जब मौसी से मिले तो उनकी तबीयत काफी खराब थी डॉक्टर उनके इलाज के लिए घर पर ही आते थे लेकिन फिर भी उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। मैंने मौसी को कहा कि मौसी आप कुछ दिनों के लिए हमारे साथ आ जाइए घर पर आपकी देखरेख भी अच्छे से हो जाया करेगी तो मौसी कहने लगी कि बेटा मैं सोच रही हूं कि मैं अपने बच्चों के पास ही चली जाऊं। भैया ने कहा कि मौसी अगर ऐसा है तो आप उनके पास चले जाइए कम से कम आपकी तबीयत तो ठीक रहेगी। मौसी कहने लगी हां बेटा इस बार जब सोहन घर आएगा तो मैं उसे कह दूंगी कि मैं तुम्हारे साथ आ रही हूं मैंने मौसी को कहा वह सब तो ठीक है लेकिन अभी आप हमारे साथ चलिए। उस दिन मौसी हमारे साथ हमारे घर पर आ गई जब मौसी हमारे घर पर आई तो मां कहने लगी कि तुम दोनों ने बहुत ही अच्छा किया जो मौसी को यहां ले आए।

भाभी मौसी की देखभाल कर रही थी थोड़े समय बाद मौसी भी ठीक हो गई मौसी करीब दो महीने तक हमारे साथ ही रही। सोहन भी कुछ दिनों के लिए घर पर आने वाला था सोहन मौसी का लड़का है और जब वह घर आया तो वह मौसी को अपने साथ ले गया।  हमारी गारमेंट शॉप है और हम लोग उसे काफी सालों से चला रहे हैं पहले उसे पापा चलाया करते थे लेकिन पापा अब दुकान में नहीं आते हैं वह अब काफी बूढ़े भी हो चुके हैं इसलिए हम दोनों भाई ही दुकान को संभाल रहे हैं। दुकान का काम हमारा अच्छे से चलता था लेकिन कुछ समय पहले ही हमारी दुकान के सामने ही एक मॉल बनने लगा जिससे कि हम लोग काफी परेशान हो गए। हमें यह बात पता थी कि मॉल बनने के बाद हमारी दुकान की बिक्री काफी घट जाएगी जिससे कि हमारी दुकान में कस्टमर भी काम आएंगे इसलिए हम लोगों ने उस दुकान को बेचने का फैसला कर लिया लेकिन उससे पहले हम लोग चाहते थे कि इस बारे में हम पापा से बात करें। पापा ने कहा कि देखो बेटा अगर ऐसा है तो तुम लोगो को वह दुकान बेच देनी चाहिए और कहीं पर दोबारा से काम शुरू करना चाहिए।

हम लोगों ने दुकान बेचने का पूरा मन बना लिया था और फिर हमारी दुकान हम लोग बेच चुके थे। कुछ समय बाद हम लोगों ने दूसरी जगह अपनी दुकान खोली शुरुआत में तो वहां पर बिल्कुल भी काम नहीं चल रहा था लेकिन धीरे-धीरे वहां कस्टमर आने लगे थे और हमारा काम अच्छे से चलने लगा। हम लोग इस बात से काफी खुश थे कि अब हमारा काम चलने लगा है मैं और भैया दुकान का काम अच्छे से संभाल रहे थे और सब कुछ ठीक चल रहा था। एक दिन मैं घर लौट रहा था तो उस दिन बाइक से मेरा एक्सीडेंट हो गया जिससे कि मुझे काफी चोट आई और कुछ दिनों तक मुझे घर पर ही आराम करना पड़ा। मैं घर पर ही बेड रेस्ट कर रहा था क्योंकि मुझे काफी चोट आई थी मेरे पैर में चोट लगने की वजह से मैं अच्छे से चल भी नहीं पा रहा था। करीब दो महीने तक मुझे घर पर ही आराम करना पड़ा दो महीने बाद जब मेरा पैर ठीक हो गया तो मैं दुकान में जाने लगा था लेकिन फिर भी मुझे चलने में काफी परेशानी होती थी लेकिन धीरे-धीरे मैं ठीक होने लगा था। एक दिन मैं अपनी दुकान में था उस दिन भैया दुकान में नहीं थे तो मैं ही दुकान का काम संभाल रहा था उस दिन हमारी दुकान में कस्टमर आए और वह कहने लगे कि हमें आप बच्चों के कुछ कपड़े दिखा दीजिए। मैंने अपने दुकान में काम करने वाले लड़के को कहा कि तुम बच्चों के कपड़े दिखा दो। उसने बच्चों के कपड़े उन्हें दिखाएं और फिर उन्होंने कपड़े ले लिए उसके बाद से वह अक्सर हमारी दुकान में आते ही रहते थे। एक दिन शाम के वक्त मैं घर पहुंचा तो उस दिन मम्मी ने मुझे कहा कि बेटा आज हम लोगों को पड़ोस में जाना है।

मैंने मां से कहा कि लेकिन आज पड़ोस में क्या है तो मां ने बताया कि हमारे पड़ोस में आज गोविंद जी रिटायर हो रहे हैं तो उन्होंने सब लोगों को वहां बुलाया है। हम लोग उस दिन गोविंद जी के घर चले गए और उन्हें हमने बुके गिफ्ट किया उन्होंने खाने का बहुत अच्छा अरेंजमेंट करवाया हुआ था इसलिए हम लोगों ने उस दिन वहीं खाना खाया। हमारी कॉलोनी में ही एक बड़ा हॉल है जहां पर उन्होंने सारा कुछ अरेंजमेंट किया हुआ था कुछ देर बाद हम लोग वहां से घर लौट आए। अगले दिन सुबह मैं और भैया जल्दी ही दुकान के लिए चले गए हम लोग जब दुकान पर गए तो उस दिन कुछ भी काम नहीं हुआ इसलिए हम लोगों ने जल्दी घर जाना ठीक समझा और हम लोग उस दिन जल्दी घर चले गए। उस दिन जब हम लोग घर पहुंचे तो पापा ने पूछा कि आज तुम लोग जल्दी घर आ गए हम लोगों ने बताया कि आज दुकान में काम नहीं था इसलिए हम लोग जल्दी घर आ गए पापा कहने लगे कोई बात नहीं बेटा। हम लोग उसके बाद अपनी दुकान का काम अच्छे से संभाल रहे थे एक बार मैं दुकान पर बैठा हुआ था तो उस दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी बारिश की वजह से काम भी नहीं था। भैया उस दिन जल्दी घर चले गए थे और मैं दुकान पर अकेला ही बैठा हुआ था काम बिल्कुल भी नहीं हुआ था। मैं सोच रहा था कि शायद आज काम बिल्कुल भी होने वाला नहीं है।

जैसे ही बारिश रूकी तो उसके बाद दुकान में कुछ कस्टमर आए उन्ही मे से एक भाभी वह मुझसे बार-बार देख रही थी और अपने साड़ी के पल्लू को बार-बार वह ठीक कर रही थी जिससे कि मुझे उनका चरित्र ठीक नहीं लगा और मैं बिल्कुल सही था। मैंने उनका नाम पूछ लिया उन्होने अपना नाम बताया उनका नाम कविता है कविता भाभी दिखने मे बहुत सुंदर है उसके बाद वह दुकान में आने लगी। एक दिन वह दुकान में आई हुई थी तो मुझे कहने लगी आपके पास पैंटी ब्रा है? मैंने उन्हें पैंटी ब्रा दिखाए तो वह कहने लगी यह आप मुझे दे दिजिए। मैने उनकै कहा कभी हमें भी मौका दीजिए तो वह कहने लगी आपको भी मौका चाहिए। मैंने उन्हें कहा अब आप इतनी भी भोली नहीं है कि जो मेरी बात को समझ ना पाए वह बोली तुम कभी मेरे घर पर कभी आ जाना मैं तुम्हें फोन करूंगी। एक दिन उनका फोन आया उन्होंने मुझे अपने घर पर बुला लिया। जब मै उन्होने मुझे घर पर बुलाया तो मेरे लिए यह बहुत ही अच्छा मौका था। मैं बहुत ज्यादा खुश था मै चाहता था किसी भी तरीके से बस उनकी चूत के मे मजे ले सकूं मैंने ऐसा ही किया जब मैंने उन्हें उस दिन अपनी बाहों में लिया तो मैं उन्हें गर्म करने की कोशिश करने लगा वह भी पूरी तरीके से गरम हो चली थी। जब वह गर्म हो गई तो उनके अंदर की गर्मी बढने लगी वह अपने आपको रोक नहीं पा रही थी और मेरी गर्मी भी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी मैंने उन्हें कहा मैं बहुत ज्यादा उत्तेजीत हो चुका हूं और बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा हूं। वह मुझे कहने लगी चलो अब तुम मेरी चूत को चाट लो मैंने उनके कपड़े उतारे और उनकी चूत को चाटना शुरु किया तो उनकी चूत से बहुत अधिक पानी बहने लगा था। जब मैंने उनकी चूत को चाटकर पूरी तरीके से गर्म कर दिया तो वह कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर सटाया और अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया। जैसे ही मेरा लंड उनकी चूत में घुसा तो वह मुझे कहने लगी तुमने तो मेरी चूत को फाड़ दिया है मुझे बहुत दर्द हो रहा है मैंने उन्हें कहा लेकिन मुझे बहुत मजा आ रहा है वह जोर से चिल्लाई और उसके बाद मैंने उन्हें पेलना शुरू किया।

मै उनकी चूत मार रहा था उससे वह बड़ी खुश हो गई थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही मजा आ रहा है तुम मुझे ऐसे ही चोदते रहो। मैंने उनके पैरों को खोल दिया जब मैंने उनके पैरों को खोला तो उनकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर की तरफ को निकाल रहा था और उनकी चूत से काफी पानी बाहर निकल चुका था वह बिल्कुल भी रह नहीं पाई और मुझे कहने लगी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही हूं मुझे लग रहा है कि मैं झड़ने वाली हूं। मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और उनकी चूत बडे अच्छे से मारने लगा। मुझे बहुत ही मजा आता अब मैं उनको बहुत ही तेज गति से चोदता और मुझे उन्हें चोदने में इतना मजा आ रहा था कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। जब मुझे ऐसा एहसास हुआ कि मेरा माल बाहर आने वाला है तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाल कर उनके स्तनों पर अपने माल को गिरा दिया मेरे माल की पिचकारी उनके स्तनों पर गिर चुकी थी।

उसके बाद जब उन्होंने अपने स्तनों से मेरे माल को साफ किया था तो मैं उनके स्तनों को चूसने लगा। जब मै उनके स्तनो को अपने मुंह में लेकर चूसता तो मेरी गर्मी भी दोबारा से बढ़ने लगी। उन्होंने मेरे लंड को चूसकर और भी ज्यादा गर्मी बढ़ा दी। उन्होंने अपनी चूतडो को मेरी तरफ किया। जब मैने उनकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी मैं अपने लंड को उनकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था तो वह जोर से चिल्लाती। उनकी चूतड़ों पर मैंने अपने हाथ से प्रहार किया जिससे कि मेरी गर्मी बढ़ने लगी थी मुझे मजा आने लगा था वह खुश हो चुकी थी। जब मैंने अपने माल की पिचकारी को उनकी चूत के अंदर गिराया तो वह खुश हो गई और कहने लगी तुम दोबारा से मुझे चोदने के लिए आना। मैंने कहा हां भाभी बिल्कुल और उसके बाद भी मै उनको चोदने के लिए जाता रहता था।


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