महिमा की तेज सिसकियाँ

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Mahima ki tej siskiyan मैं अपने घर पर था उस वक्त मुझे मेरे दोस्त का फोन आया मेरे दोस्त राकेश ने मुझे काफी दिनों बाद फोन किया। उसने जब मुझे फोन किया तो मैंने राकेश को कहा आज तुम्हारा फोन काफी दिनों बाद आ रहा है। राकेश ने मुझे कहा कि अब तुम तो मुझे याद करते हो नही तो मैंने सोचा कि मैं ही तुम्हें फोन कर लूं। मैंने राकेश को कहा तुम अभी कहां हो तो राकेश ने मुझे बताया कि मैं लखनऊ आया हुआ हूं मैंने राकेश को पूछा लेकिन तुम लखनऊ कब आये राकेश ने कहा कि मैं कल रात को ही लखनऊ आया हूं और सोचा कि तुम्हें फोन कर लूं। मैंने राकेश को कहा मैं तुमसे मिलने के लिए अभी तुम्हारे घर पर आता हूं तो राकेश कहने लगा कि ठीक है तुम घर पर आ जाओ। मैं राकेश को मिलने के लिए उसके घर पर चला गया मैं जब राकेश को मिलने के लिए उसके घर पर गया तो उसके पापा मम्मी से भी मैं काफी दिनों बाद मिल रहा था। राकेश और मैं बचपन से ही साथ में पढ़ा करते थे राकेश मेरे साथ कॉलेज में ही पड़ता था और हम दोनों स्कूल में भी साथ ही पढ़ा करते थे लेकिन राकेश जॉब करने के लिए कोलकाता चला गया और वह कोलकाता में ही जॉब करता है।

मैं जब राकेश को मिला तो मैंने राकेश को देखते ही उसे गले लगा लिया और राकेश को मैंने कहा की आज तुमसे कितने समय बाद मिल रहा हूं। राकेश कहने लगा कि हां गौतम तुम ठीक कह रहे हो हम दोनों की मुलाकात काफी समय बाद हो रही है। मैं राकेश को मिलकर काफी खुश था और राकेश भी मुझसे मिलकर काफी खुश था। राकेश ने मुझे बताया कि उसने कोलकाता में ही एक लड़की को पसंद कर लिया है और वह लोग जल्द ही सगाई करने वाले हैं। मैंने राकेश को कहा लेकिन तुमने मुझे कभी इस बारे में कुछ बताया नहीं तो राकेश मुझे कहने लगा कि गौतम तुम तो जानते हो कि हम लोगों की बात भी तो नहीं हो पाई थी और मैं  कोलकाता में जिस कॉलोनी में रहता हूं वहीं पर मुझे सुहानी मिली और सुहानी के साथ मेरा रिलेशन चलने लगा और हम दोनों ने सगाई करने का फैसला कर लिया है जल्द ही हम दोनों की इंगेजमेंट हो जाएगी और उसके बाद हम दोनों शादी कर लेंगे। मैंने राकेश को कहा यह तो बहुत ही अच्छी बात है।

उस दिन मैं राकेश के घर पर काफी समय तक रहा और मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब मैं राकेश के घर पर राकेश के साथ था हम दोनों ने एक दूसरे से उस दिन काफी बातें की उसके बाद मैं अपने घर लौट आया था। जब मैं अपने घर लौटा तो उस वक्त शाम हो चुकी थी मां ने मुझे कहा कि गौतम बेटा क्या तुम मुझे अनीता दीदी के घर पर छोड़ दोगे तो मैंने मां से कहा की हां मां मैं आपको अनीता आंटी के घर छोड़ देता हूं। अनीता आंटी हमारे घर से कुछ दूरी पर ही रहती हैं और उन लोगों का हमारे साथ काफी अच्छा रिलेशन है। उस दिन मैंने मां को अनिता आंटी के घर पर छोड़ दिया था, मैंने जब मां को अनिता आंटी के घर तक छोड़ा तो मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम मुझे लेने के लिए थोड़ी देर बाद आ जाना मैंने मां को कहा ठीक है मां। मां को कुछ जरूरी काम था इसलिए मां अनिता आंटी से मिलने के लिए गई थी और थोड़ी देर बाद मैं मां को लेने के लिए चला गया। जब मैं मां को लेने के लिए गया तो मां ने मुझे कहा कि बेटा रास्ते से हम लोग सब्जी भी खरीद लेते हैं। घर आते हुए रास्ते में हम लोग सब्जी खरीदने लगे जब हम लोग सब्जी ले रहे थे तो वहां पर मैंने एक लड़की को देखा उस लड़की को देख कर मुझे ऐसा लगा कि शायद मैं इस लड़की से पहले भी कभी मिल चुका हूं लेकिन मुझे यह ध्यान नहीं आ रहा था की इससे पहले मेरी उससे कहा मुलाकात हुई।

सब्जी खरीदने के बाद हम लोग घर चले आए उसके कुछ दिनों बाद मुझे वह लड़की दोबारा से दिखी तो मैंने सोचा कि आज मैं उस लड़की से बात कर लेता हूं। मैंने जब उस लड़की से पहली बार बात की तो उसने मुझे बताया कि हम लोग एक बार हमारे कॉलेज में मिले थे मैंने उससे कहा की क्या तुम्हारा नाम महिमा है तो वह मुझे कहने लगी कि हां मेरा नाम महिमा है। मैंने उसे कहा तुम मेरे साथ फेसबुक पर भी जुड़ी हुई हो तो वह मुझे कहने लगी कि हां हो सकता है उसके बाद मैं महिमा से बातें करने लगा। हम लोगों की फेसबुक पर चैट के माध्यम से बात होने लगी थी मैंने भी महिमा का नंबर ले लिया था। मैं महिमा का नंबर ले चुका था और हम लोगों की फोन पर बातें होने लगी थी हम दोनों जब भी एक दूसरे से बात करते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता। मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगता था जब मैं महिमा से बातें किया करता हूं। एक दिन महिमा ने मुझे कहा कि उसे मुझसे मिलना है तो मैंने महिमा को कहा ठीक है और उस दिन हम दोनों ने मिलने का फैसला किया। हम दोनों जब एक दूसरे को मिले तो हम दोनों को ही काफी अच्छा लगा और महिमा उस दिन मेरे बिल्कुल सामने बैठी हुई थी तो मैं महिमा को बार बार देख रहा था।

महिमा का चेहरा देख कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और महिमा को भी काफी ज्यादा खुशी मिल रही थी वह बहुत ज्यादा खुश थी। हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया उसके बाद महिमा चली गई लेकिन फोन पर हम दोनों की बातें काफी ज्यादा होने लगी थी। मेरे और महिमा के बीच बातें काफी ज्यादा होने लगी थी यही वजह थी कि हम दोनों एक दूसरे के बहुत ही करीब आने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे के इतने करीब आने लगे थे कि मैं महिमा के बिना एक पल भी रह नहीं पाता था और ना ही महिमा मेरे बिना एक पल रह पाती थी इसीलिए तो हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तड़पने लगे थे। हम दोनों की गर्मी अब कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी थी। मैंने एक दिन महिमा को घर पर बुला लिया। उस दिन घर पर कोई नहीं था महिमा ने भी मेरी बात मान ली और वह मुझसे अपनी चूत की खुजली मिटाने के लिए आ गई। जब महिमा मेरे घर पर आई तो मैंने महिमा के होंठों को चूमना शुरू किया। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे मैंने महिमा के होठों को इस कदर चूमा कि वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी और उसकी गर्मी बढ़ने लगी थी। मै बिल्कुल भी रहा नहीं पा रहा था और ना ही महिमा अपने आपको रोक पा रही थी। मैंने महिमा को कहा मुझे अब तुम्हारी चूत मारनी है। वह इस बात पर मुस्कुराने लगी वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार थी।

मैं महिमा को अपने साथ अपने बेडरूम में लेकर गया और जब मैं महिमा को अपने बेडरूम में लेकर गया था तो मैंने महिमा को कहा तुम अपने कपड़े उतार दो। महिमा ने मेरे सामने अपने कपड़े उतारे। महिमा का गोरा बदन देख मै बहुत ही ज्यादा खुश था और मुझे काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था। जब महिमा ने मेरे सामने अपने कपड़ों को उतारकर उसने मेरी गर्मी को बढ़ाना शुरू कर दिया था तो महिमा के अंदर की गर्मी भी बढ चुकी थी। उसने मेरे अंदर की गर्मी को इतना ज्यादा बढ़ा दिया था कि मैं महिमा के ऊपर टूट पड़ा। मैंने महिमा के स्तनों को चूसना शुरू किया। मैं जब महिमा के स्तनो को चूस रहा था तो उसे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और मैं महिमा की गर्मी को बढा रहा था। मै जब महिमा के स्तनो का रसपान कर रहा था तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ रही थी। अब मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ने लगी थी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था। मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मैंने अब महिमा से कहा मुझे तुम्हारी चूत का रसपान करना है। महिमा कहने लगी मेरी चूत अब तुम्हारी हो चुकी है तुम्हें जो करना है तुम कर लो। मैंने भी महिमा की पैंटी को उतार कर उसकी चूत पर अपनी उंगली का स्पर्श किया। मैंने जब महिमा की चूत पर अपनी उंगली का स्पर्श किया तो महिमा को मजा आने लगा और मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था।

मैंने महिमा की चूत को बहुत देर तक चाटा। मैं महिमा की चूत को चाट रहा था उससे मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था और महिमा को भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। मैंने महिमा की चूत को बहुत देर तक चाटा और मै महिमा के अंदर की गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ा चुका था। महिमा की चूत से निकलता हुआ पानी अब कुछ ज्यादा ही बढने लगा था। मैंने महिमा की चूत पर अपने लंड को लगाकर अंदर की तरफ डालना शुरू किया धीरे-धीरे मेरा मोटा लंड महिमा की योनि के अंदर चला गया। मेरा लंड महिमा की चूत मे गया तो मुझे गर्मी महसूस होने लगी। उसकी चूत बहुत ज्यादा टाइट थी मुझे उसे धक्के मारने में मजा आने लगा था। महिमा मेरा साथ दे रही थी। मै जब महिमा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करता तो मुझे बहुत ज्यादा मजा आता। महिमा ने मुझे कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है।

मैंने महिमा को कहा मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। मैंने महिमा के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था। महिमा की तेज सिसकारियां मेरे कानों मे जा रही थी और वह मेरे अंदर की गर्मी को बढ़ा रही थी। मैंने महिमा से कहा मेरे अंदर की गर्मी को तुम ऐसे ही बढ़ाते जाओ। महिमा मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। मैं महिमा को बड़ी ही तेजी से धक्के मार रहा था जिससे कि मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगता और महिमा को भी काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था। मेरा मोटा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था और जैसे ही मैंने अपने माल को ही माहिमा की चूत मे गिरा कर अपनी और महिमा की गर्मी को शांत किया तो वह खुश हो गई थी और कहने लगी आज तो तुमने मुझे पूरे मजे दे दिए। उसके बाद भी महिमा अपनी चूत की गर्मी को शांत करवाने के लिए मेरे पास आ जाती।


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