मैडम आज तो चूस कर चोदुंगा

Madam aaj to chus kar chodunga:

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मेरा नाम साक्षी है और मैं कॉलेज में पढ़ती हू। मेरा कॉलेज, रोज ही बस से आना जाना होता है। क्योंकि हमारे घर से कॉलेज थोड़ा दूर है। इस वजह से मुझे बस से ही जाना पड़ता है। हमारे कॉलेज की बस हमें लेने आती है। उसमें जो बस ड्राइवर और कंडक्टर है वह दोनों मुझे अच्छे से पहचानते हैं। कभी मुझे लेट भी हो जाती है तो मैं उन्हें फोन कर देती हूं। तो वह लोग मेरे लिए थोड़ा इंतजार भी कर लेते हैं और हमेशा ही मुझे कहते रहते हैं कि तुम समय पर आ जाती हो। इसलिए हम तुम्हारे लिए रुक जाया करते हैं। क्योंकि मैं अक्सर समय पर ही पहुंच जाती हूं। बहुत कम बार ऐसा हुआ होगा जब मेरी वजह से उन लोगों ने इंतजार किया होगा। इसलिए वह मुझे कहते हैं कि तुम हमेशा वैसे तो समय पर आ जाती हो। इसलिए हम तुम्हारे लिए इंतजार भी करते हैं। मेरा कॉलेज आना जाना अपने कॉलेज बस से ही था। हमारे कॉलेज के बहुत सारे बच्चे बस से ही आया करते थे और जब भी सब लोग मिलते तो हम बहुत सी बातें कर लिया करते हैं। क्योंकि बस से हमें काफी समय लग जाता है कॉलेज तक जाने में। इस वजह से हम लोग बहुत बातें कर लिया करते हैं।

कॉलेज में भी कुछ ना कुछ होता रहता था। कभी वहां पर किसी प्रकार का कंपटीशन होता था।  कभी कोई प्रोग्राम हमारे कॉलेज में करवा दिया करते थे। इस बार भी हमारे कॉलेज का एनुअल फंक्शन होने वाला था। उसी को लेकर हमारी तैयारियां चल रही थी। मैंने भी उस में हिस्सा लिया था। क्योंकि मैं गाना बहुत ही अच्छा गाती हूं। इसलिए मुझे मेरे टीचर ने कहा कि तुम भी सिंगिंग कंपटीशन में हिस्सा ले लो। मैंने उसमें हिस्सा लिया और मैं उसकी ही तैयारी करने लगी। उसकी तैयारी के दौरान मुझे कॉलेज जाने में थोड़ा लेट हो जाया करती थी और मैं अपने कॉलेज से कुछ दिनों तक बस से घर नहीं जा पा रही थी। मुझे मेरे पिताजी ही लेने आया करते थे। क्योंकि उनका ऑफिस भी हमारे कॉलेज की तरफ ही था। इसलिए उन्होंने कहा कि तुम्हें वैसे भी लेट हो जाती है तो मैं भी उसी समय घर के लिए निकलता हूं। इसलिए मैं तुम्हें लेता हुआ आ जाया करूंगा। तब से मैं अपने पिताजी के साथ ही कॉलेज से घर जाया करती और मैं बहुत ही मेहनत से तैयारी कर रही थी। अब हमारे कॉलेज का एनुअल फंक्शन नजदीक आने वाला था। जिस दिन हमारे कॉलेज का एनुअल फंक्शन था तो उस दिन हमारे कॉलेज के सब बच्चे आ रखे थे और बहुत ही भीड़ थी। मैंने भी सिंगिंग कंपटीशन में हिस्सा लिया हुआ था और मैंने बहुत ही अच्छा गया। जिससे कि सब लोग खुश हो गए और कहने लगे कि तुमने बहुत अच्छा गाया है।

अब मैं अगले दिन से कॉलेज बस से ही अपने कॉलेज और कॉलेज से घर जाने लगी। जब मैं अगले दिन बस में आई तो मुझे ड्राइवर और कंडक्टर दिखा। कंडक्टर तो नौजवान युवक ही था और ड्राइवर थोड़ा अधेड़ उम्र के थे। मैंने उनसे पूछा कि क्या आप लोग नए है। वह कहने लगे कि हां हम लोगों ने अभी कुछ दिन पहले ही इस बस में काम करना शुरु किया है। मैंने उनसे पूछा कि जो पहले इस बस में थे, वह लोग कहां चले गए। वह कहने लगे कि उन दोनों की ड्यूटी कहीं और लग गई है। इसलिए अब हम लोगों ने यहां पर आना शुरू कर दिया है और अब से हम ही इस कॉलेज बस में आया करेंगे। फिर मैंने उस लड़के का नाम पूछा तो उसका नाम शरद था। वह देखने में तो ठीक-ठाक घर का ही लग रहा था लेकिन ना जाने क्यों वह कंडक्टर का काम कर रहा था। मैं अब हमेशा ही कॉलेज बस से आने लगी और जब मैं कॉलेज बस से आती तो शरद ही मुझे बहुत घूर घूर कर देखा करता और मुझे यह बात अच्छी नहीं लगती थी। एक दिन मैंने उससे यह बात कह दी कि तुम मुझे इतना घूर कर क्यों देखते हो। तो वह कहने लगा कि तुम मुझे बहुत ही अच्छी लगती हो। इस वजह से मैं तुम्हें घूर कर देखता हूं। मैंने उसे कहा कि तुम सोच भी रहे हो की तुम क्या बोल रहे हो।

मैं कॉलेज में स्टूडेंट हूं और तुम गाड़ी में कंडक्टर हो। वह कहने लगा कि कंडक्टरी करना मेरी मजबूरी है। इस वजह से मैं यह कर रहा हूं। नहीं तो मैं भी एक अच्छे घर से ही था। किंतु हमारे घर में कुछ समस्याएं हो गई हैं। इसकी वजह से मुझे भी न कंडक्टर की नौकरी करनी पड़ रही है। जब यह बात मैंने सुनी तो मुझे बहुत ही अजीब सा लगा और मैंने उससे इस बारे में माफी मांगी। अगले दिन उसने भी मुझसे माफी मांगी और कहने लगा इसमें मेरी भी गलती है। मुझे तुम्हें घूर कर नहीं देखना चाहिए था। अब हम दोनों की बहुत बातें होने लगी और जब भी वह मेरे घर के पास से जाता तो हमेशा ही मुझे देख कर मुस्कुराने लगाता। मुझे भी बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे घर में ऐसी क्या स्थिति हो गई थी। जिसकी वजह से तुम यहां काम कर रहे हो। वह कहने लगा मेरे पिताजी का देहांत हो गया और उसके बाद मेरे ताऊजी ने हमारे घर पर कब्जा कर लिया और हमें दर बदर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया। इसलिए मुझे मजबूरन यह काम करना पड़ रहा है। मेरे पास कोई भी रास्ता नहीं था। मैं यह बात सुनकर बहुत ही दुखी हुई। मैंने शरद का नंबर भी ले लिया और हम दोनों फोन पर भी बातें करने लगे। हम लोग फोन पर भी बहुत सारी बातें किया करते और वह अब कॉलेज बस में जब भी मुझे मिलता है तो मुझसे मुस्कुरा कर बातें किया करता।

एक दिन मेरे कॉलेज की छुट्टी थी और शरद ने मुझे फोन किया और कहने लगा कि क्या तुम मेरे साथ चल सकती हो। मैंने उसे कहा कि कहां जाना है वह कहने लगा कि बस ऐसे ही तुम्हारे साथ थोड़ी देर बैठना चाहता हूं। जैसे ही उसने यह बात कही तो मैंने उसे मना नहीं किया और मैं  उससे मिलने के लिए तैयार हो गई। वह मेरे घर के बाहर बाइक लेकर आया। वह मुझे अपने दोस्त के घर पर ले गया जब वह मुझे अपने दोस्त के घर पर ले गया तो वहां पर कोई भी नहीं था। मैंने उससे पूछा यहां कोई भी नहीं है वह कहने लगा कि मेरा दोस्त अभी थोड़ी देर बाद आ जाएगा। हम दोनों ऐसे ही बैठ कर बात कर रहे थे बात करते-करते उसका लंड खड़ा हो रहा था और मैं उसके लंड को साफ-साफ देख रही थी उसका लंड कुछ ज्यादा ही खड़ा हो गया। मैंने उसके पैंट के अंदर से हाथ डालते हुए उसके लंड को बाहर निकाल लिया और उसे चूसने लगी। मैं उसके लंड को बहुत ही अच्छे से चूस रही थी वह मेरे गले के अंदर तक चला गया था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था जब मैं उसके लंड को चुसती जाती। थोड़ी देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे चूत को चाटने लगा मेरी चूत जब पूरी गिली हो गई तो उसने मुझे घोड़ी बनाते हुए मुझे चोदना शुरु किया। उसने जब मेरी चूत के अंदर डाला तो मेरी बहुत ज्यादा टाइट चूत थी उसके लंड अंदर ही नहीं जा रहा था लेकिन उसने बड़ी तेजी से मेरे अंदर डाल दिया जिससे कि मेरी सील भी टूट चुकी थी।

मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था लेकिन वह ऐसे ही मुझे धक्के मारते जा रहा था। कुछ समय बाद मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा और मैं भी उसका साथ देने लगी। मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकल रहा था और वह बहुत ज्यादा तेज मुझे धक्के दे रहा था। वह इतनी तेजी से मुझे झटके दे रहा था कि मेरा पूरा शरीर गर्म हो चुका था और मुझे बहुत ज्यादा गर्मी लग रही थी। मेरी चूतडे उसके लंड से टकरा रही थी और उनसे भी बहुत तेज आवाज आने लगी। मैं भी अपनी चूतड़ों को उसके लंड से सटाने लगी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था जब शरद मेरी चूत मार रहा था मुझे बहुत ही आनंद आ रहा था। वह ऐसे ही बड़ी तेज गति से मुझे धक्के देता जिससे कि मेरी चूतडे उसके लंड पर लग रही थी। अब मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्मी निकलने लगी जिससे वह बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसका वीर्य मेरी योनि के अंदर ही गिर गया। जब उसने अपने लंड को बाहर निकाला तो कुछ देर तक मैंने उसके लंड को मुंह में लेकर चूसना जारी रखा और मैं उसे अच्छे से चूसती रही। उसके बाद उसका माल दोबारा से मेरे मुंह के अंदर गिर गया और मैंने वह अपने अंदर ले लिया। उसके बाद हम दोनों उसके दोस्त के घर से चले गए और कुछ देर बाद उसका दोस्त भी आ गया।

 


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