लंड ने चूत मे घोसला बनाया

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Lund ne chut me ghosla banaya पापा का ट्रांसफर हो जाने के बाद हम लोग लखनऊ शिफ्ट हो गए लखनऊ में हमें आए हुए सिर्फ एक महीना ही हुआ था। लखनऊ में मेरे मामा जी रहते हैं इसलिए उनका हमारे घर पर अक्सर आना जाना लगा रहता था, मेरी भी अब कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने वाली थी मेरा यह कॉलेज का आखिरी वर्ष था।  हम लोग जिस कॉलोनी में रहते हैं है वहां पर मेरी मुलाकात कविता के साथ हुई जब कविता से मैं पहली बार मिला तो मुझे कविता से मिलकर बहुत ही अच्छा लगा कविता और मेरी बातचीत अब काफी अच्छी होने लगी थी। हम दोनों एक दूसरे से मिलने लगे थे और एक दूसरे के साथ समय भी बिताने लगे लेकिन मुझे क्या पता था कि कविता की सगाई हो जाएगी। कविता के परिवार वालों ने उसकी सगाई करवा दी हालांकि वह सगाई के लिए तैयार नहीं थी लेकिन उसके पास और कोई रास्ता भी तो नहीं था शायद इसी वजह से उसने सगाई के लिए हामी भर दी।

वह अपने परिवार वालों को सगाई के लिए मना नहीं कर पाई और उसके घर वालो ने उसकी सगाई कर दी। कविता की सगाई हो जाने के बाद हम लोग बहुत कम मिला करते थे उसके बाद मैंने भी एक कंपनी ज्वाइन कर ली इसलिए मुझे भी समय नहीं मिल पाता था और मैं कविता से मिल ही नहीं पाता था, समय बड़ी तेजी से चला जा रहा था। एक दिन मम्मी ने मुझे बताया कि कविता की शादी का कार्ड आया हुआ है मुझे उसकी शादी का पता चला तो मैंने कविता को फोन किया। हालांकि हम दोनों एक दूसरे से कम बात किया करते थे लेकिन मैंने फिर भी कविता को उसकी शादी के लिए बधाई दी, कविता चाहती थी कि मैं उसकी शादी में आऊं लेकिन मैं उसकी शादी में नहीं गया। कुछ समय बाद कविता की शादी हो गयी और मैं भी अपनी जिंदगी में बिजी था मैं अपने ऑफिस के काम में इतना ज्यादा बिजी रहने लगा था कि मुझे अपने लिए भी समय नहीं मिल पाता था। एक दिन मैं जब घर लौट रहा था तो शायद मेरे दिमाग में कुछ चल रहा था जिस वजह से मेरी मोटरसाइकिल स्लिप हो गई। जब मोटरसाइकिल स्लिप हुई तो मुझे काफी चोट आई और किसी तरीके से मैं घर पहुंचा। मैं घर पहुंचा तो मेरे घर वाले बहुत घबरा गए थे और वह लोग मुझे कहने लगे कि अमन बेटा तुम मोटरसाइकिल देखकर चलाया करो। उनकी चिंता बिल्कुल जायज थी लेकिन मुझे भी समझ नहीं आ रहा था कि मेरे दिमाग में चल क्या रहा है कुछ दिनों तक मुझे डॉक्टर ने घर पर ही रेस्ट करने के लिए कहा था और करीब 15 दिनों तक मैं घर पर ही रहा उसके बाद मैं ठीक हो चुका था। ठीक हो जाने के बाद मैं अपने ऑफिस जाने लगा था जब मैं ऑफिस गया तो उस दिन हमारे ऑफिस में एक नई लड़की ने ज्वाइन किया था उसका सुहानी है।

सुहानी से उस दिन मैं पहली बार ही मिला सुहानी और मैं एक दूसरे से बातें करने लगे तो हम दोनों एक दूसरे को काफी अच्छे से समझने लगे थे। सुहानी के साथ मैं काफी समय गुजारने लगा था एक दिन सुहानी का जन्मदिन था तो उस दिन उसने मुझे अपने जन्मदिन के लिए अपने घर पर बुलाया उसके बुलाने पर मैं सुहानी के घर पर गया। सुहानी ने किसी को भी घर पर नहीं बुलाया था लेकिन उसके कुछ पुराने दोस्त आए हुए थे जिनसे कि उसने मुझे मिलवाया। सुहानी ने मुझे अपने पापा मम्मी से भी मिलवाया जब मैं सुहानी के पापा मम्मी से मिला तो मुझे काफी अच्छा लगा उन लोगों का व्यवहार बहुत ही अच्छा है मुझे उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा। मैं उस दिन रात को घर लौट आया था जब मैं घर लौटा तो उस दिन मुझे सुहानी का फोन आया और वह मुझे कहने लगी कि अमन क्या तुम घर पहुंच गए हो। मैंने सुहानी से कहा हां मैं घर पहुंच गया हूं सुहानी मुझे कहने लगी कि मैंने यही पूछने के लिए तुम्हें फोन किया था मैंने सुहानी से कहा लगता है तुम्हें मेरी कुछ ज्यादा ही चिंता हो रही है। वह इस बात पर मुस्कुराने लगी और मुझे कहने लगी कि नहीं अमन ऐसा तो कुछ भी नहीं है बस एक दोस्त होने के नाते तुम्हें मैंने फोन किया। सुहानी और मैंने काफी देर तक बात की और उसके बाद हमने फोन रख दिया और जब अगले दिन मैं सुहानी को ऑफिस में मिला तो सुहानी और मैं उस दिन दोपहर के बाद साथ में ही लंच कर रहे थे। हम दोनों साथ में लंच कर रहे थे तो मैंने सुहानी से कहा कि कल तुमने अपने घर पर ज्यादा किसी को नहीं बुलाया था। वह मुझे कहने लगी कि अमन तुम जानते ही हो मेरा नेचर कैसा है मैं ज्यादा लोगों से तो बात नहीं करती लेकिन मेरे कुछ चुनिंदा दोस्त हैं इसलिए मैंने घर पर उन्हें ही पार्टी देने की सोची और तुम मुझे अच्छे लगते हो इसी वजह से मैंने तुम्हें भी घर पर बुलाया, मैं चाहती थी कि तुम पापा मम्मी से भी मिलो। मैंने सुहानी को कहा कि तुम्हारे पापा मम्मी से मिलकर कल मुझे बहुत ही अच्छा लगा। सुहानी और मैं एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो समय का कुछ पता ही नहीं चला। उस दिन हम लोगों ने काफी देर तक ऑफिस में काम किया और मुझे उस दिन सुहानी को उसके घर तक छोड़ने के लिए जाना पड़ा क्योंकि उस दिन काफी देर हो चुकी थी।जब मै सुहानी को उसके घर पर छोडने गया तो उसने मुझे अपने घर पर आने के लिए कहा मै सुहानी के साथ घर पर चला गया।

जब मै सुहानी के साथ घर पर गया तो वहां पर कोई भी नहीं था। सुहानी ने अपनी मम्मी को फोन किया तो उन्होने सुहानी से कहा हम लोग थैडे देर मे घर आ रहे है। सुहानी मेरे लिए चाय बनाने के लिए रसोई मे चली गई मै बैठक मे बैठा था फिर सुहानी मेरे लिए चाय बनाकर ले आई। अब हम दोनो साथ मे बैठकर बाते कर रहे थे। मैने सुहानी से बात की जब मै सुहानी से बात कर रहा था तो मेरी नजर उसके स्तनो पर पड रही थी। चाय पीने के बात सुहानी कपडे चेंज करने चली गई। जब वह कपडे चेंज कर रही थी तो मै उसे देख रहा था। मेरे अंदर एक अलग ही कंरट सा दौडने लगा। मैने सुहानी को कस कर पकड लिया वह अपने आपको मुझसे छुडाने कि कोशिश कर रही थी पंरतु मैने उसे अपनी बंहो मे दबोच लिया था। मैंने उसके बदन को महसूस किया और उसके होंठों को मैं बड़े अच्छे से चूमने लगा था। वह भी रह नही पाई मैं उसके होठों को जिस प्रकार से चूम रहा था उससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था। वह भी उत्तेजित होती जा रही थी उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। अब हम दोनों एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा तड़पने लगे थे। मैंने सुहानी के कपड़े उतारकर उसकी ब्रा को खोल दिया उसके स्तनों को जब मैंने अपने हाथों से दबाया तो वह तड़पने लगी थी।

सुहानी की उत्तेजना बहुत ज्यादा बढने लगी थी मैंने अब उसके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया था। मैं उसके गोरे स्तनो को अच्छे से चूसने लगा। मैने सुहानी के स्तनों का रसपान किया वह गरम हो चुकी थी। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और सुहानी की चूत पर लंड को रगडने लगा उसे मज़ा आने लगा मेरे लंड से पानी बाहर आ गया था। सुहानी की चूत से पानी बाहर निकलने लगा था हम दोनो ही अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाए। सुहानी मुझे कहने लगी मुझे डर लग रहा है मैने उसे कहा तुम घबराओ मत कुछ नहीं होगा। मैंने अब अपने लंड को सुहानी की चूत के अंदर डालना शुरू किया मेरे लंड उसकी चूत के अंदर चला गया। जब मेरा लंड उसकी चूत को फाडता हुआ अंदर की तरफ घुसा तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मेरी चूत से खून निकलने लगा है। सुहानी की चूत से खून निकलने लगा था वह तड़पने लगी थी। उसने मुझे अपने पैरों के बीच में कस कर जकड़ लिया मैं उसके स्तनों को दबा रहा था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। मैंने सुहानी के स्तनों को बहुत देर तक दबाया और उनका रसपान किया। मुझे सुहानी को चोदना में बड़ा मजा आ रहा था। उसकी टाइट चूत से कुछ ज्यादा ही खून बाहर निकलने लगा था मुझे उसको धक्के मारने में बड़ा आनंद आता। मेरा लंड बहुत गरम होने लगा था मेरा माल बाहर की तरफ गिर गया। मैने सुहानी की चूत को अपने माल से भर दिया। जब मेरा माल बाहर गिरा तो मैंने अपने लंड को सुहानी की चूत से बाहर निकाला। सुहानी के चहेरे पर मुस्कान थी मैंने उसकी चूत मे लंड को लगाया उसकी चूत से मेरा वीर्य बाहर की तरफ निकल रहा था। मेरा लंड सुहानी की चूत मे घुस चुका था। जब मैं उसको धक्के मारता तो मुझे मजा आता। मैंने सुहानी की जांघो को कसकर पकड़ा हुआ था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

सुहानी की चूत और मेरे लंड के मिलन से गर्मी पैदा हो रही थी। सुहानी को मजा आ रहा था। मैंने अब सुहानी को घोडी बना दिया था जब मैंने उसे घोडी बनाया तो उसकी चूत के अंदर मे लंड को डाल चुका था। मै सुहानी की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करने लगा उसकी चूत के अंदर बाहर मेरे अपने लंड होता तो मुझे बहुत मजा आ रहा था। सुहानी मेरा साथ बड़े ही अच्छे से दे रही थी उसकी चूतड़ों पर मैंने बहुत तेजी से धक्के मारने शुरु कर दिए थे। उसकी चूतड़ों पर मैं जिस प्रकार से प्रहार करता उससे एक अलग ही आवाज आ रही थी। मुझे उसे चोदने मे बहुत मजा आ रहा था। मैंने उसे बहुत देर तक चोदा जब मुझे एहसास होने लगा कि मैं अब रह नहीं पाऊंगा तो मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत में वीर्य गिराने वाला हूं। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने वीर्य को गिराकर अपनी इच्छा को पूरा किया। हम लोगो ने अब कपडे पहन लिए थे और थोडे देर बाद सुहानी के माता-पिता भी आ चुकी थे। मैं भी अपने घर लौट चुका था लेकिन मुझे बहुत ही अच्छा लगा जिस प्रकार से मैंने और सुहानी ने एक दूसरे के साथ सेक्स के मज़े लिए।

 


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