लंड की भूख मिटाने का सुख

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Lund ki bhukh mitane ka sukh हमारा परिवार संयुक्त परिवार में रहता है मैं आज से 5 वर्ष पहले मोहन के घर पर शादी कर के आई थी। मोहन और मैं एक दूसरे को पहले से ही जानते थे इसीलिए हम दोनों की शादी में कोई भी परेशानी नहीं आई मैंने अपने परिवार को कह दिया था कि मैं मोहन से शादी करना चाहती हूं। मोहन के पापा का हमारे घर पर अक्सर आना-जाना होता था और जब मोहन एक दिन हमारे घर पर आए तो मुझे वह बहुत अच्छे लगे और मैंने उनके साथ शादी करने का फैसला कर लिया। दिल ही दिल मैं मोहन को चाहने लगी थी और यही कारण था कि मैंने मोहन से शादी करने का फैसला कर लिया था मोहन मेरा बहुत ध्यान रखा करते है लेकिन संयुक्त परिवार होने की वजह से कई बार मुझे परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है उसके बावजूद भी मैं कभी भी गुस्सा नहीं होती थी। मोहन के बड़े भैया जो कि एक इंजीनियर है वह बहुत ही गुस्सा किया करते थे और मुझे हमेशा से ही लगता कि ना जाने वह इतना गुस्सैल क्यों है परंतु वह दिल के बहुत अच्छे थे।

जब भी मोहन को उनकी मदद की जरूरत पड़ती तो वह हमेशा सबसे आगे खड़े रहते। सुबह के वक्त मैं झाड़ू पोचे का काम कर रही थी तभी मेरी जेठानी ने मुझे आवाज देते हुए कहा कि सुधा जरा देखना अंदर क्या छोटू रो रहा है। मैं दौड़ते हुए अंदर गई तो मैंने देखा छोटू रो रहा था मैंने छोटू को उठा लिया जब छोटू मेरे गोद में आया तो वह चुप हो गया तभी मेरी जेठानी भी पीछे से आई और कहने लगी लाओ सुधा मुझे छोटू को पकड़ा दो। मैंने कहा नहीं दीदी रहने दो मैं कुछ देर छोटू को पकड़ लेती हूं छोटू के साथ कुछ देर बैठ कर मुझे अच्छा लग रहा था और वह मुझे देखे जा रहा था उसकी छोटी छोटी आंखें मुझे घूर रही थी। मैंने जब उसके छोटे हाथों को पकड़ा तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा कुछ ही देर बाद मैंने छोटू को अपनी जेठानी को दे दिया और वह मुझे कहने लगी कि तुमने तो छोटू को चुप करवा दिया। मैंने उन्हें कहा हां दीदी और फिर मैं दोबारा से झाड़ू पोचे का काम करने लगी तभी मैंने देखा कि कुछ मेहमान घर पर आए हुए हैं। मेरी सासू मां ने आवाज लगाते हुए कहा कि सुधा जरा इधर आना तो मैं और मेरी जेठानी जब बैठक हॉल में गए तो वहां पर हमने देखा कुछ मेहमान आए हुए थे।

मेरी सासू मां ने मुझे उन लोगों से मिलवाया वह मेरी सासू मां को पहले से ही पहचानते हैं इसीलिए तो वह हमारे घर पर आए थे। उनका परिचय हमसे हमारी सासू मां ने करवाया और वह कहने लगे कि इनके पिताजी के साथ हमारे बड़े अच्छे संबंध है और उनका हमारे घर पर भी उठना बैठना था। मुझे अरुण जी से मिलकर अच्छा लगा और उनकी पत्नी भी बड़ी हंसमुख और अच्छे हैं उनसे मुलाकात कर के अच्छा लगा। अब हम लोग उनके लिए खाने की तैयारी करने लगे मैं और मेरी जेठानी रसोई में थे हम लोग आपस में बात करने लगे की हम लोगों को कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए क्योंकि हम लोगों को कहीं गए हुए काफी समय भी हो गया था और इतने लंबे अंतराल में हम लोग कहीं जा भी नहीं पाए थे। हमारा पूरा परिवार एक साथ ही रहता है लेकिन हम लोग काफी समय से कहीं घूमने भी नहीं जा पाए थे। हम लोगों ने अब खाना बना लिया था और दोपहर का लंच अरुण जी ने हमारे साथ ही किया और उनकी पत्नी मेघा भी कहने लगे कि आप लोगों ने खाना बहुत अच्छा बनाया है। यदि कोई महिला किसी के खाने की तारीफ करें तो इसका मतलब आपने खाना अच्छा बनाया है। मैं और मेरी जेठानी एक दूसरे के चेहरे पर देख कर मुस्कुराने लगे वह लोग खाना खाकर टेबल से उठे और कुछ देर आराम करने लगे थोड़ी ही देर बाद मेघा ने कहा कि हम लोगों के रिलेशन में जयपुर में शादी है यदि आप लोगों को कोई आपत्ति नहीं हो तो आप हमारे साथ वहां चलिए। मैंने उन्हें कहा लेकिन हम लोग वहां आकर क्या करेंगे वह कहने लगे आप लोग हमारे साथ चलिए तो सही वहां कम से कम एक साथ घूमना भी हो जाएगा हम लोग तो इसी लिए वहां जा रहे हैं कि कम से कम इस बहाने जयपुर घूमने का मौका तो मिल जाएगा। मैं तो अंदर ही अंदर खुश थी लेकिन मैं कुछ कह नहीं सकती थी, आखिरकार मेरी सासू मां ने हामी भर दी और उन्होंने हां कह दिया तो अब हम लोगों का जाना पक्का था क्योंकि उनकी बात को ना तो मेरे जेठ जी टाल सकते थे और ना हीं मेरे पति मोहन उनकी बात को मना करते थे।

मैं और मेरी जेठानी बहुत ज्यादा खुश थे हम दोनों सोचने लगे की जयपुर जाकर अच्छा लगेगा क्योंकि मौसम बड़ा सुहाना था। हम लोगों के दिल की मुराद पूरी हो गई थी हम लोग तो यही चाहते थे कि कहीं घूमने का मौका मिल जाए और इससे अच्छा मौका भला क्या हो सकता था। जब शाम को मोहन घर लौटे तो मेरी सासू मां ने कहा कि मोहन मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी तो वह कहने लगे हां कहिए ना। मेरी सासू मां ने मोहन से कहा कि आज अरुण और मेघा घर पर आए हुए थे मोहन कहने लगे क्या यह वही अरुण तो नहीं है जिनके पापा पिताजी के साथ काम किया करते थे। मेरी सासू मां कहने लगी हां मोहन मैं उन्ही की बात कर रही हूं जब मेरी सासू मां ने कहा कि हम लोगों ने जयपुर घूमने के बारे में सोचा है तो मोहन ने एक बार भी उनसे इस बारे में कुछ भी नहीं पूछा और उन्होंने अपनी हामी भर दी। मेरे जेठ जी भी तैयार हो चुके थे और हम लोग जयपुर जाने की तैयारी में थे मैं बहुत ज्यादा खुश थी क्योंकि इतने समय बाद कहीं घूमने का मौका जो मिल रहा था नहीं तो घर में वही जिंदगी चल रही थी उसमें कुछ नयापन नहीं था और ना ही कुछ जिंदगी में नया हो रहा था। हम लोगों का परिवार अरुण जी के साथ जयपुर चला गया उनकी पूरी फैमिली भी उनके साथ में थी।

उनकी फैमिली जब उनके साथ में थी तो ना चाहते हुए भी मेरी नजरे उन पर पड जा रही थी क्योंकि जिस प्रकार से वह अपने परिवार का ध्यान अच्छे से रख रहे थे उससे मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। उन्हें देखकर मैं शायद दिल ही दिल सोचने लगी थी कि काश मोहन भी मेरा इतना ख्याल रख पाते लेकिन मोहन के पास समय नहीं होता था वह मेरा ध्यान तो बहुत रखते थे। जब हम लोग जयपुर पहुंचे तो हम लोगों ने वहां पर रहने के लिए होटल बुक कर लिया था और वही पर अरुण जी और मेघा जी हमारे कमरे में आए थे। वह मोहन के साथ बात कर रहे थे मैं भी उन लोगों के साथ बात कर रही थी लेकिन मेरे नजर उन पर ही थी। मै अरूण जी को देखे जा रही थी जब मैंने अरूण जी से कहा आप मेघा जी का इतना ध्यान कैसे रख लेते हैं? वह मुझे कहने लगे बस ऐसे ही मैं मेघा का ध्यान रख लेता हूं। हम लोग सब शादी में गए हुए थे तो गलती से और उनका हाथ मेरी चूतडो पर लग गया जैसे ही उनका हाथ मेरी चूतडो पर लगा तो मैंने जैसे उन्हें अपना तन बदन  सौप दिया था। वह भी मेरी तरफ देखे जा रहे थे वह भी अपने आपको कब तक रोक पाते हम दोनों ने एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बनाने का फैसला कर ही लिया था। मैं चाहती थी मैं अरुण जी के साथ सेक्स का पूरा मजा लूं और मैंने वही किया। जब मैं अकेले कमरे में थी तो हम दोनों ने एक दूसरे के बदन को बड़े ही अच्छे तरीके से महसूस किया। मैंने जब अरूण जी से कहा कि कहीं कोई आ ना जाए तो वह कहने लगे तुम डरो मत उन्होंने अपने मोटे से लंड को बाहर निकाला और कहने लगे मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। मैंने उनके लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसे अच्छे से चूसने लगी। मुझे उनके लंड को चूसने में बड़ा मजा आ रहा था मैंने काफी देर तक उनके लंड को चूसा और उनके लंड के मजे लिए तो उनके लंड से पानी बाहर निकलने लगा।

मैं बिल्कुल भी सहन ना कर सकी मेरी योनि भी गिली हो चुकी थी मैं बिल्कुल भी अपने आपको रोक ना सकी। मैंने उनसे कहा मुझसे रहा नहीं जाएगा मेरे अंदर की गरमाहट बाहर आ चुकी थी। मैने गर्मी में अपने कपड़े उतार दिए मैंने अपने बदन से कपडे उतार दिए और अरुण ने मेरे गोरे और सुडौल स्तनों को बहुत ही देर तक मसला। उन्हे मेरे स्तनों को चूसने में मजा आ रहा था मुझे भी अच्छा लग रहा था काफी देर तक उन्होंने मेरे स्तनों का रसपान किया और मेरी योनि के अंदर अपनी उंगली को डाल दिया। वह मुझे चोदना चाहते थे उन्हे लग रहा था मै उनके लंड को झेल नही पाऊंगी। उन्हें क्या मालूम था कि मैं अरुण जी की हालत खराब करने वाली हूं और जैसे ही उन्होंने मेरी योनि के अंदर लंड को घुसाया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा और मजा आ गया। मैंने अपने दोनों पैरों को खोलते हुए उनसे कहा आप अपनी पूरी ताकत के साथ मेरी चूत मारिए तो उन्होंने भी पूरी ताकत के साथ मेरी योनि के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया। मुझे भी मजा आने लगा और वह भी काफी मजे में आने लगे थे मेरी योनि के अंदर बाहर उनका लंड तेजी से होने लगा था।

मेरे मुंह से मादक आवाज निकलने लगी थी और मादक आवाज से वहां मेरी ओर आकर्षित होते चले गए और मुझे भी बड़ा आनंद आ रहा था और उन्हें भी मजा आने की लगा। मैंने अपने दोनों पैरों से अरुण जी को जकड़ लिया लेकिन वहां तो मुझे धक्के ही मारे जा रहे थे और उनका मोटा लंड मेरी योनि के अंदर बाहर हो रहा था काफी देर तक वह ऐसा ही करते रहे। जब उनकी इच्छा भरने वाली थी तो उन्होने मेरी योनि के अंदर ही लंड को घुसा दिया और मुझे अपना बना लिया। मुझे बड़ा अच्छा लगा और जिस प्रकार से उन्होने मेरी इच्छा को पूरा किया तो मैंने जल्दी से कपड़े पहने और अरुण जी से कहा हमें अब चलना चाहिए। वह कहने लगे ठीक है हम लोग चलते हैं हम लोग वहां से चले गएं लेकिन मेरी योनि से अब भी उनका वीर्य गिर रहा था।


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