लंड कमसिन बदन की शोभा बना

Lund kamsin badan ki shobha bana:

Antarvasna, hindi sex story मेरी मां की तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं थी तो उन्हें हम शहर के सबसे बड़े अस्पताल में ले गए वहां पर उनका इलाज करीब एक महीने तक चला। डॉक्टर ने उन्हें ना जाने कितने प्रकार की दवाइयां और कितने इंजेक्शन लगाए होंगे परन्तु मेरी मां पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था लेकिन फिर भी मेरी मां ने हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार उन्होंने मृत्यु को भी मात दे दी। मेरी मां बचपन से ही हम लोगों का बहुत ध्यान देती थी मेरे बड़े भैया जो कि अब इस दुनिया में नहीं है मां उन्हें बहुत प्यार करते थे। जब पिताजी और भैया की मृत्यु एक कार दुर्घटना में हुई तो उसके बाद वह पूरी तरीके से टूट चुकी थी और उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि कैसे वह मेरी परवरिश करेंगे लेकिन उसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मेरी परवरिश में उन्होंने कोई कमी नहीं रखी।

उस वक्त हमारे रिश्तेदारों का चेहरा भी हमारे सामने आ चुका था उन लोगों ने मां की कोई मदद नहीं की लेकिन फिर भी मेरी मां ने हिम्मत नही हारी उन्होंने मेरी पढ़ाई पूरी करवाई और उसके बाद मेरी एक अच्छी नौकरी लगी उन्होंने मेरी बहुत ही अच्छी परवरिश की। अब मेरी शादी हो चुकी थी मेरी शादी को भी दो वर्ष ही हुए थे मेरी पत्नी आरती का स्वभाव भी बहुत अच्छा है और वह मां का बहुत ध्यान रखती है। हम लोग को मां को घर ले आए थे मां  को कैंसर ने अपनी ओर जकड़ लिया था लेकिन मां ने कैंसर को मात देते हुए धीरे धीरे वह स्वस्थ होने लगी थी। वह अभी पूरी तरीके से स्वस्थ नहीं हो पाई थी उन्हें चलने में अब भी परेशानी थी तो डॉक्टर ने उन्हें कहा था कि अभी कुछ समय तक आप चलिएगा नहीं इसलिए हम लोग उन्हें व्हीलचेयर पर ही लेकर जाते थे। मां धीरे धीरे ठीक होने लगी थी और आरती एक दिन कहने लगी कि मैं सोच रही थी कि अपने मायके चली जाऊं मैंने आरती से कहा लेकिन मां की देखभाल कौन करेगा। आरती कहने लगी कुछ दिनों के लिए मैं पड़ोस में रहने वाली दीदी को कह कर चली जाऊंगी वह आप लोगों के लिए खाना बना दिया करेगी। हमारे पड़ोस में सुधा भाभी रहती हैं उनका व्यक्तित्व बहुत अच्छा है और वह किसी को भी अपनी बातों से आकर्षित कर लेती हैं उनके बात करने का तरीका और उनका स्वभाव किसी भी दुश्मन को अपनी ओर खींच सकता था।

सुधा भाभी का हमारे परिवार के साथ बहुत लगाव था और वह मेरी मां को बहुत ही अच्छा मानती थी इसी वजह से वह अक्सर हमारे घर पर आती रहती थी। जब उन्हें मेरी मां की तबीयत के बारे में मालूम चला तो सबसे पहले वह अस्पताल में मां से मिलने के लिए आई थी। आरती कहने लगी कि मैं सुधा दीदी से कह दूंगी कि वह घर का खाना बना लिया करें, सुधा भाभी भी हमारे परिवार को बहुत मानती थी। हालांकि हमारा कोई रिश्ता नहीं था लेकिन हम लोगों के दिल आपस में जुड़े हुए थे और कभी भी सुधा भाभी उनके परिवार में कोई तकलीफ होती तो हम लोग भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते थे। मैंने आरती से कहा ठीक है तुम देख लो जैसा तुम्हें उचित लगता है आरती कहने लगी मैंने माजी से भी पूछ लिया था तो माजी ने भी कहा कि तुम अपने घर हो आओ। मैं अपने रूम में बैठकर अपने लैपटॉप पर काम कर रहा था आरती अपना सामान पैक करने लगी और आरती ने अपना पूरा सामान पैक कर लिया था। आरती ने मुझे कहा क्या आप मुझे कल घर पर छोड़ देंगे मैंने आरती से कहा ठीक है मैं सुबह तुम्हें तुम्हारे घर पर छोड़ दूंगा। मैंने आरती से कहा लेकिन सुबह तुम्हें जल्दी तैयार होना पड़ेगा क्योंकि मुझे अपने ऑफिस भी जाना है आरती कहने लगी हम लोग यहां से सुबह ही निकल जाएंगे। आरती का घर हमारे घर से करीब 2 घंटे की दूरी पर था इसलिए हम लोग सुबह के वक्त ही निकल पड़े। मैं और आरती साथ में कार में बैठे हुए थे तो हम दोनों बात कर रहे थे आरती कहने लगी यदि कोई भी परेशानी हो तो आप मुझे फोन कर दीजिएगा। मैंने आरती से कहा हां ठीक है मैं तुम्हें फोन कर दूंगा मुझे कुछ ऐसा लगा तो मैं तुम्हें फोन करूंगा। आरती और मैं आपस में बात कर ही रहे थे तभी सामने से एक मोटरसाइकिल गलत दिशा में हमारी तरफ आ रही थी मेरा ध्यान उस मोटरसाइकिल की तरफ नहीं गया।

जब मैंने देखा कि वह बिल्कुल हमारे सामने आ चुका हैं तो मैंने एक जोरदार ब्रेक मारा जिससे कि मोटरसाइकिल पर सवार नौजवान युवक वहीं गिर पड़ा। मैंने उसे उठाया और कहा अरे भैया आप गलत तरफ से कहां आ रहे थे उस युवक को मैंने अपने बटुए से कुछ पैसे निकाल कर दिये और कहा तुम अपना इलाज करवा लेना। हालांकि उस युवक की ही गलती थी लेकिन फिर भी मुझे अच्छा नहीं लगा, मैंने आरती को उसके घर पर छोड़ दिया था मैं 10 मिनट ही वहां पर रुका उसके बाद मैं अपने ऑफिस के लिए निकल रहा था। मैं अपने दफ्तर पहुंचा और हमेशा की तरह शाम तक का पता ही नहीं चला मैं शाम के वक्त घर जाने की तैयारी करने लगा। मैं जैसे ही घर पहुंचा तो सुधा भाभी मुझे दिख गयी मैंने सुधा भाभी से कहा आप क्या मां के साथ बैठी हुई थी। वह कहने लगी हां मैं आंटी के साथ ही बैठी हुई थी अब आंटी पहले से ठीक हो चुकी हैं मैंने सुधा भाभी से कहा आजकल भाई साहब दिखाई नहीं दे रहे है। सुधा भाभी कहने लगे वह कुछ दिनों के लिए गांव गए हुए हैं और शायद कल वह लौट आएंगे मैंने उन्हें कहा ठीक है। भाभी ने उस दिन हमारे लिए रात का डिनर बना दिया था और उसके बाद वह अपने घर चली गई। मुझे आरती का फोन आया और आरती कहने लगी कि आप लोगों ने खाना तो खा लिया था ना। मैंने आरती को कहा हां हम लोगों ने खाना खा लिया था सुधा भाभी ने हमारे लिए खाना बना दिया था आरती कहने लगी ठीक है मैं अभी फोन रखती हूं।

मुझे भी काफी नींद आ रही थी क्योंकि सुबह मैं जल्दी उठ चुका था इसलिए मुझे बहुत नींद आ रही थी और मैंने सोचा कि जल्दी से मैं सो जाता हूं। मैं सोने की तैयारी कर ही रहा था कि तभी मेरी मां ने मुझे आवाज दी और कहां बेटा मेरे रूम में पानी रख देना मैंने मां के रूम में पानी रख दिया और उसके बाद मैं सो गया मुझे बहुत गहरी नींद आई। सुबह मैं 6:00 बजे उठ चुका था सुबह उठते ही मैंने अपनी मां से कहा की मां आज तुम मेंरे साथ घूमने चलोगी वह कहने लगे हां चलो बेटा मुझे भी थोड़ा अच्छा लगेगा। मैं मां को अपने साथ अपने घर के पास के पार्क में ले गया वहां पर हम दोनों करीब एक घंटे तक रहे और फिर घर वापस लौट आएं। सुधा भाभी ने सुबह का नाश्ता भी बना दिया था उस दिन भाभी के पति भी हमारे घर पर आ गए उनके साथ में एक 22 वर्ष की लड़की भी आई हुई थी। जब वह आई तो मैंने सुधा भाभी से पूछा कि यह कौन है? सुधा भाभी ने मेरा परिचय शिखा से करवाया और कहा यह मेरे जेठ जी की बड़ी लड़की है। शिखा को देखकर मुझे कुछ अच्छा महसूस हो रहा था उसकी जवानी और उसके कजरारे नैन देख कर मैं उसके साथ संभोग करने के बारे में सोचने लगा था। उसे देखकर ना जाने क्यों मेरे अंदर एक अलग फीलिंग पैदा हो रही थी वह भी मुझे अपनी नशीली आंखों से देखे जा रही थी। उसकी आंखों में जैसे मुझ पर जादू कर दिया था मैंने उसके साथ संबंध स्थापित करने के बारे में सोच लिया था और आखिरकार हम दोनों को मौका मिला तो हम दोनों ने ही इस मौके को नही छोडा। मैंने जब उसके बालों को सहलाना शुरु किया तो वह कहने लगी मुझे सेक्स में बहुत ज्यादा रुचि है।

शिखा ने ना जाने कितने लोगों को अपने नशीली आंखों के जाल में फसाया था वह मुझ पर भी पूरी तरीके से जादू कर चुकी थी। मैंने जब उसके होंठो पर अपनी उंगली को लगाया तो मुझे लगने लगा कि मुझे उसके होठों को चूसना चाहिए। मैंने शिखा के होठों को काफी देर तक चूमा और उसके गुलाबी होठों से मैंने खून तक निकाल कर रख दिया था। वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी और अपने कपड़ों को उतारने लगी मैंने जब उसके सुडौल और बड़े स्तनों को देखा तो मैंने उन्हें चूसना शुरू किया। जिस प्रकार से मैं उसके स्तनों को चूस रहा था उस समय वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई। मैंने उसकी नरम और मुलायम योनि को भी काफी देर तक चाटना जारी रखा मैंने उसे कहा कि तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो तो उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया वह लंड को बड़े ही अच्छे से चूसने लगी। उसने जैसे लंड चूसने की ट्रेनिंग हासिल कि हो वह इस तरीके से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले रही थी उसने मेरे लंड से पानी तक निकाल कर रख दिया था। मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था मैंने जैसे उसकी चूत पर अपने लंड को सटाया तो वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी।

मैंने लंड को अंदर की धक्का देते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया। जब मै उसे धक्का माराता तो उसके मुंह से सिसकिया निकलती उसकी सिसकियां लगातार तेज होती जा रही थी। जब वह सिसकिया लेती तो मैं और भी ज्यादा उत्तेजित होता चला गया उसका बदन और उसका फिगर बड़ा ही लाजवाब था। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी गांड में घुसाने का प्रयास किया तो मेरा लंड शिखा की गांड में नहीं घुस रहा था लेकिन फिर भी मैंने धक्का देते हुए उसकी गांड में लंड घुसा दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी गांड के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी आपने यह क्या किया। मैंने उसे कहा जीवन में कभी कुछ नया भी कर लेना चाहिए। वह इस बात से खुश हो गई और कहने लगी आपने तो मेरी गांड से खून निकाल कर रख दिया जब वह अपनी गांड टकरा रही थी और मैं भी उसकी गांड के पूरे मजे लेता। जैसे ही मेरा वीर्य शिखा की गांड मे गिरा तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया।


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