लंड डालकर अन्तर्वासना शांत करो

Lund dalkar antarvasna shaant karo:

Antarvasna, hindi sex kahani घर की जिम्मेदारियों के चलते मुझे अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी होते ही जॉब करनी पड़ी। मैं चाहता था कि मैं एक क्रिकेटर बनूं लेकिन घर की स्थिति की वजह से मुझे जॉब करनी पड़ी जब मैंने जॉब करनी शुरू की तो उस वक्त मेरी उम्र काफी कम थी क्योंकि मेरा कॉलेज उसी वक्त पूरा हुआ था। मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे जॉब करते हो 5 वर्ष बीत चुके हैं इन 5 वर्षों में मेरे जीवन में काफी कुछ उतार-चढ़ाव आये। मेरे पिताजी ने हमारे घर के कागज तक गिरवी रख दिए थे मैंने वह पैसे भी चुका दिए हैं और उसके बाद अब मैं अपनी बहन की पढ़ाई के ऊपर पूरा ध्यान दे रहा हूं। मैंने उसे कहा है कि तुम्हें पैसों की कोई भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है तुम सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो और अब वह अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रही है।

सब कुछ सामान्य होने लगा उसी बीच हमारे घर पर मेरा एक पुराना दोस्त आया जो मेरे साथ कॉलेज में पढ़ा करता था उसका नाम मनोज है। मनोज मुझे कहने लगा सोहन क्या तुम मेरे साथ आज शादी में चल सकते हो मैंने उसे कहा लेकिन शादी किसकी है। वह कहने लगा हमारे किसी परिचित की शादी है और आज मेरे साथ कोई भी नहीं है क्योंकि पापा मम्मी गांव गए हुए हैं। पापा ने मुझे फोन किया और कहा कि बेटा तुम शादी में चले जाना इसलिए मैंने सोचा शायद तुम्हारे पास आज वक्त हो तो तुम्हे ही मैं अपने साथ शादी में चलने के लिए कहता हूं। मैंने मनोज से कहा हां कोई बात नहीं आज मैं तुम्हारे साथ चलूंगा क्योंकि आज मेरी छुट्टी है इसलिए मुझे तुम्हारे साथ आने में कोई परेशानी नहीं है। मनोज कहने लगा ठीक है मैं तुम्हें शाम के वक्त कहने के लिए आ जाऊंगा। मनोज का घर मेरे घर से कुछ ही दूरी पर है वह ज्यादा देर हमारे घर पर नहीं रुका और वह चला गया उसके बाद मनोज ने शाम को मुझे फोन किया और कहने लगा क्या तुम तैयार हो चुके हो। मैंने उसे कहा मुझे सिर्फ आधा घंटा लगेगा तुम आधे घंटे बाद घर पर आ जाना मैं तब तक तैयार हो जाऊंगा। मैं फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चला गया उसके बाद मैं जल्दी से तैयार हो गया मैं जब तैयार हुआ तो मनोज भी पहुंच चुका था मनोज मुझे कहने लगा क्या हम लोग चलें।

मैंने उसे कहा थोड़ी देर रुको तो सही तुम पानी तो पी लो वह कहने लगा नहीं अभी चलते हैं। हम दोनो वहां से चले गए जैसे ही हम लोग शादी में पहुंचे तो वहां पर काफी लोग थे लेकिन मैं किसी को भी नहीं जानता था। मनोज कुछ लोगों से मुलाकात कर रहा था और जब उसने मुझे उसी शादी के दौरान मुक्ता से मिलवाया तो मुझे मुक्ता बहुत अच्छी लगी। उसके बात करने का तरीका और उसके अंदर जो एक अलग ही कॉन्फिडेंस था वह मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन मुझे मुक्ता के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था उस वक्त मैंने मनोज से भी उसके बारे में नही पूछा। हम लोग जब शादी से वापस लौट रहे थे तो मैंने मनोज से पूछा तुमने मुझे मुक्ता से मिलवाया था मुक्ता बहुत ही अच्छी लड़की है। मनोज मुझे कहने लगा वह बहुत अच्छी लड़की है लेकिन उसके साथ भी बहुत बुरा हुआ है और उसके पिताजी की भी मृत्यु कुछ समय पहले ही हुई है मैंने मनोज से पूछा लेकिन उसके साथ यह सब कैसे हुआ। मनोज मुझे कहने लगा मुक्ता के पिताजी ने उसके लिए एक लड़का देखा था और सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था लेकिन जब मुक्ता की शादी हो गई तो उन्होंने मुक्ता को दहेज के लिए बहुत परेशान करना शुरू कर दिया। मुक्ता के पिताजी इस बात से बहुत ज्यादा टेंशन लेने लगे और कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। मुक्ता के पिताजी से जितना हो सकता था उतना उन्होंने उन्हें दिया लेकिन उसके बाद भी उनकी जरूरत पूरी नहीं हुई और वह मुक्ता को बहुत परेशान करने लगे। मुक्ता बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि वह अब उस घर में रहे इसलिए मुक्ता ने अपने घर आने का फैसला कर लिया।

मुक्ता के पास इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं था लेकिन मुक्ता ने हार नहीं मानी और अपने पैरों पर खड़े होने की सोची। मुक्ता का डिवोर्स हो चुका था मुक्ता ने उसके बाद एक कंपनी शुरू की जो कि बहुत अच्छी चल रही है। मैं यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ मनोज मुक्ता की बहुत तारीफ कर रहा था उसके बाद तो मैं भी मुक्ता से मिलने के लिए उत्सुक होने लगा लेकिन मुक्ता से मेरी मुलाकात उसके बाद नहीं हुई। एक दिन मैंने मनोज को फोन किया तो मनोज मुझे कहने लगा क्या तुम फ्री हो मैंने उसे कहा आज मेरे ऑफिस की छुट्टी है तो आज हम लोग कहीं चलते हैं। हम दोनों साथ में मॉल चले गए क्योंकि मैंने काफी समय से कुछ लिया भी नहीं था तो मैंने सोचा अपने लिए कुछ शॉपिंग कर लेता हूं। मनोज भी कहने लगा हां यार मैंने भी काफी समय से अपने लिए कुछ खरीदा नहीं है तो मैं भी शॉपिंग कर ही लेता हूं। हम दोनों ने शॉपिंग की और हम दोनों जब मॉल से बाहर निकल ही रहे थे तो सामने से मुझे मुक्त आती हुई दिखाई दी लेकिन मनोज ने उसे नहीं देखा। मैंने मनोज से कहा वह देखो सामने से मुक्ता आ रही है उसने मुझे कहा चलो मुक्ता से बात करते हैं। हम लोग मुक्ता के पास गए तो हम लोगों ने उससे बात की मैंने मुक्ता से कहा मुझे मनोज ने तुम्हारे बारे में काफी कुछ बताया मैं तुम्हारी हिम्मत की दाद देता हूं जिस तरीके से तुम ने अपने जीवन में संघर्ष किया है उससे मैं बहुत प्रभावित हूं। मुक्ता ने मुझे कहा देखो मनोज अपने जीवन में संघर्ष तो करना ही पड़ता है क्योंकि यदि मैं यह सब नहीं करती तो मेरी मां को बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता। अब मेरा उनके सिवा है ही कौन हम दोनों ही एक दूसरे का सहारा है।

हम लोग मॉल के बाहर खड़े होकर बात कर रहे थे, मुक्ता ने कहा हम लोग बैठ जाते हैं हम लोग वहां से फूड कोर्ट में चले गए और वहां बैठकर हम लोग एक दूसरे से बातें करने लगे। मुझे मुक्ता से बात करना बहुत अच्छा लग रहा था और मैंने भी उसको अपने बारे में बताया तो वह कहने लगी हम दोनों के जीवन में काफी समानताएं हैं। हम लोग सब साथ में ही घर लौटे मुक्ता ने भी कुछ शॉपिंग की थी और उस दिन मुक्ता का नंबर मुझे मिल चुका था तो हम लोग एक दूसरे से मैसेज के द्वारा बातें करने लगे थे। हमारी बातें इतनी नहीं होती थी परंतु धीरे-धीरे हम दोनों बातें करने लगे और हम दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा। मुक्ता को भी शायद मेरे साथ में बातें करना और रहना अच्छा लगने लगा था इसलिए हम लोग कभी कबार मिल लिया करते थे। हम लोग एक दूसरे से जब भी मिलते तो मुझे मुक्ता के साथ समय बिताना अच्छा लगता था। एक बार मुक्ता ने मुझे कहा आज मैं तुम्हें अपनी मम्मी से मिलवाती हूं, मैं जब उसकी मम्मी से मिला तो उसकी मम्मी की उम्र 70 वर्ष के आसपास की रही होगी। उसकी मम्मी काफी बुजुर्ग थी लेकिन मुझे उसकी मम्मी से बात कर के अच्छा लगा और उसकी मम्मी से मैंने काफी देर तक बातें की। मैंने मुक्ता से उस दिन कहा कि तुम शादी क्यो नही कर लेती तुम्हारे लिए भी तो आगे चलकर यह सब बहुत बड़ी समस्या होने वाली है। मुक्ता ने इस बात का मुझे कोई जवाब नहीं दिया उस दिन तो मैं उसके घर से चला गया लेकिन काफी दिनों बाद उसने मुझे इस बात का जवाब दिया और कहा सोहन तुम्हें मालूम है मेरी शादी टूट चुकी है।

मुझसे कोई भी शादी करने को तैयार नहीं है क्या मैं इस बारे में कभी नहीं सोचती लेकिन कोई भी मेरा साथ देने को तैयार नहीं है यदि मैं किसी ऐसे व्यक्ति से शादी कर लू जो कि बिल्कुल भी मेरा साथ ना दे तो क्या यह उचित होगा। उस दिन वह बहुत भावुक हो गई मैंने उसे कहा मैं तुमसे मिलने के लिए आता हूं मैं जब उससे मिलने के लिए गया तो वह अपने रूम में उदास बैठी हुई थी। मैंने मुक्ता से कहा तुम इतनी उदास क्यों बैठी हुई हो तो वह कहने लगी कि मैं तुम्हें क्या बताऊं मुझे भी तो कई बार अकेलापन महसूस होता है और लगता है कि मेरा जीवन कितना सूना है लेकिन उसके बावजूद भी मैं कभी हिम्मत नहीं हारी। मने मुक्ता के कंधे पर हाथ रखा तो वह मुझसे गले मिलने लगी जब वह मेरी बाहों में आ गई तो उसके स्तन मेरी छाती से टकराने लगे उसके स्तन मेरी छाती से टकराते तो मेरे अंदर भी एक अलग ही फीलिंग आती। जैसे ही मैंने मुक्ता की स्तनों को अपने हाथ से दबाना शुरू किया तो वह उत्तेजित होने लगी उसके शरीर से गर्मी बाहर निकलती मैंने जैसे ही अपने लंड को बाहर निकाला तो मुक्ता ने मेरे लंड हिलाना शुरू किया और अपने मुंह में ले लिया। जैसे ही उसने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को लिया तो हम दोनों ही पूरे जोश में आ गए मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर लगा दिया उसकी योनि से गिला पदार्थ निगल रहा था उसकी योनि में काले रंग के बाल थे।

उसकी योनि बहुत गिली हो चुकी थी मुझे उसे देख कर रहा नहीं जा रहा था मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी मैंने उसके दोनों पैरों को खोलते हुए उसे बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए। मेरे धक्के इतने तेज होते कि उसके मुंह से चीख निकल जाती उसके मुंह से जो मादक आवाज निकलती उससे मैं और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगता। जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो उसके अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ जाती। वह अपने मुंह से मादक आवाज निकालती जिससे कि मेरी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ रही थी जब उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही गरम पानी बाहर की तरफ को निकालने लगा तो मैं समझ गया कि वह झड़ चुकी है। मेरा वीर्य पतन कुछ क्षणो बाद होने वाला था मैंने भी उसे बड़ी तेज धक्के दिए जिससे कि मेरा भी वीर्य पतन हो गया इस बात से मुक्ता बहुत खुश हुई।


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