लंड बोला मजा आ गया

Hindi sex kahani, antarvasna: मेरे और सुहानी के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था तो मैंने सुहानी से कहा कि मुझे लगता है अब हम दोनों को अलग हो जाना चाहिए। सुहानी और मेरे बीच अब बहुत ज्यादा झगड़े होने लगे थे क्योंकि सुहानी मेरे साथ रहना ही नहीं चाहती थी। सुहानी और मैं एक दूसरे को पहली बार एक शादी में मिले थे वहां पर मेरी मुलाकात मेरे दोस्त ने सुहानी से करवाई थी। जब मेरी मुलाकात सुहानी से हुई तो मुझे सुहानी से मिलकर काफी अच्छा लगा मुझे ऐसा लगा जैसे सुहानी ही अब मेरी जिंदगी है, मैं सिर्फ सुहानी के बारे में ही सोचने लगा था। शुरुआत में तो मुझे लगा कि शायद सुहानी मुझसे बात नही करेगी लेकिन उसके बाद जब हम दोनों एक दूसरे को मिलने लगे तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। सुहानी को भी काफी अच्छा लगता था जब हम दोनों साथ में समय बिताया करते। मैं सुहानी के साथ काफी ज्यादा खुश था और मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब भी हम दोनों साथ में होते थे।

एक दिन मैंने सुहानी को अपने दिल की बात कह दी और उसके बाद हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था। हम दोनों ने कुछ समय बाद शादी कर ली और फिर हम दोनों का रिलेशन अच्छे से चल रहा था लेकिन समय के साथ ही हम दोनों के रिलेशन में खटास पैदा होने लगी और हम दोनों एक दूसरे से दूर हो चुके थे। मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर क्यो हम दोनों के बीच झगड़े होने लगे और हम दोनों एक दूसरे के साथ रहना भी पसंद नहीं करते थे इसलिए सुहानी और मैंने अलग रहने का फैसला कर लिया। सुहानी अपने घर जा चुकी थी सुहानी और मैंने उसके बाद डिवोर्स ले लिया और हम दोनों का डिवोर्स हो जाने के बाद मैं और सुहानी एक दूसरे से मिले भी नहीं। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि सुहानी और मेरे बीच इतनी ज्यादा दूरियां पैदा हो जाएगी कि हम दोनों एक दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करेंगे। सुहानी मेरी जिंदगी से जा चुकी थी और अब मेरी जिंदगी में काफी कुछ उथल पुथल पैदा हो चुकी थी क्योंकि मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि सुहानी मुझसे अलग हो जाएगी लेकिन अब सुहानी मुझसे अलग हो चुकी थी।

पापा और मम्मी ने मुझे काफी समझाया और कहा कि बेटा अब तुम शादी कर लो क्योंकि पापा और मम्मी को भी लगने लगा था कि मैं खुश नहीं हूं। सुहानी के बिना मेरी जिंदगी अधूरी तो थी लेकिन मैं अपनी जिंदगी में अब आगे बढ़ चुका था और मैंने फैसला किया कि मैं मुंबई में नहीं रहूंगा। मैंने पुणे जाने के बारे में सोच लिया था और मुझे पुणे में ही एक कंपनी में जॉब मिल चुकी थी। पुणे में मैं जिस कंपनी में जॉब कर रहा था वहां पर भी सबसे मेरी दोस्ती होने लगी थी और मैं पुणे में ही रहने लगा था। पापा मम्मी ने मुझे काफी समझाया और कहा कि बेटा तुम घर आ जाओ लेकिन मैं पुणे में रहकर ही नौकरी करना चाहता हूं और मैं अपनी जिंदगी में खुश था। पुणे में मेरी जॉब अच्छे से चल रही थी और सब कुछ मेरी जिंदगी में नॉर्मल हो चुका था। एक दिन मैंने सुहानी से बात करने की सोची और मैंने उस दिन सुहानी को फोन किया जब मैंने सुहानी को फोन किया तो सुहानी भी मुझसे बात कर के खुश थी और कहने लगी कि आकाश मुझे तो लगा था कि तुम शायद कभी मुझे फोन ही नहीं करोगे। उस दिन मेरा सुहानी से बात करने का काफी ज्यादा मन था सुहानी का बर्थडे भी था और मैंने उसे बर्थडे विश किया उसके बाद मैंने फोन रख दिया था। सुहानी की यादें मेरे दिल में बसी थी और मैं सुहानी के बिना अधूरा महसूस करता हूं। मुझे हमेशा लगता है कि शायद सुहानी के बिना मेरी जिंदगी है ही नहीं। पुणे में मेरा काफी अच्छा फ्रेंड सर्कल बन चुका था हमारे ही ऑफिस में काम करने वाले महेश ने जब मुझे अपनी एक फ्रेंड से मिलवाया तो मुझे काफी अच्छा लगा उसका नाम साक्षी है। साक्षी से मिलकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा मुझे ऐसा लगा कि जैसे कि मैं उसे चाहने लगा हूं साक्षी से मेरी ज्यादा मुलाकात तो नहीं हुई थी लेकिन साक्षी जब भी मेरे साथ होती तो मुझे अच्छा लगता। हम दोनों के बीच दोस्ती हो गई थी और हम दोनों एक दूसरे को मिलने भी लगे थे जब हम दोनों एक दूसरों को मिलते तो मैं सोचता कि साक्षी को मैं अपने डिवोर्स के बारे में बता दूँ। एक दिन मैंने साक्षी को अपने डिवोर्स के बारे में बता दिया और जब मैंने साक्षी को अपने डिवोर्स के बारे में बताया तो उसे भी इस बात से कोई एतराज नहीं था क्योंकि मैं साक्षी को अपने दिल की बात कह चुका था और हम दोनों रिलेशन में थे।

मैं साक्षी के साथ रिलेशन में था और मैं काफी खुश था कि साक्षी और मैं एक दूसरे के साथ समय बिता पा रहे हैं। हम दोनों एक दूसरे के साथ अधिकतर समय बिताया करते थे। साक्षी को मैं अपने परिवार वालों से मिलाना चाहता था और मैंने जब उसे अपनी फैमिली से मिलवाया तो वह भी काफी खुश थे पापा और मम्मी को साक्षी से मिलकर अच्छा लगा। साक्षी को मिलने के बाद मम्मी पापा ने साक्षी को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था और मुझे भी अच्छा लगा जब उन्होंने साक्षी को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था। एक दिन मैंने साक्षी से कहा कि चलो आज हम लोग कहीं घूम आते हैं उस दिन साक्षी और मैं साथ में ही घूमने के लिए गए उस दिन हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया और फिर हम लोग घर लौट आए थे। साक्षी के परिवार वाले भी मुझसे मिल चुके थे और उन्हें भी मेरे साथ साक्षी के रिलेशन को लेकर कोई आपत्ति नहीं थी। मेरे और साक्षी का रिलेशन बहुत ही अच्छे से चल रहा था।

साक्षी मुझसे मिलने के लिए मेरे फ्लेट में आ जाया करती थी क्योंकि मैं अकेला ही रहता था इसलिए साक्षी और मैं साथ में अच्छा समय बिताते। अब साक्षी और मेरे रिलेशन को काफी समय हो चुका था हम दोनों ने पहली बार जब एक दूसरे के होंठों को चूमा तो हम दोनों को ही बहुत अच्छा लगा। मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आया जब मैंने साक्षी के होंठों को चूमा। मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी और मुझे लग रहा था अब मुझे साक्षी को अपने साथ सेक्स करने के लिए कहना चाहिए। साक्षी इस बात के लिए तुरंत तैयार हो गई वह मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार थी।

वह मेरे लिए तड़प रही थी। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो साक्षी ने मेरे मोटे लंड को देखते हुए कहा तुम्हारा लंड बहुत ज्यादा मोटा है। मैं साक्षी से कहा तुम इस अपने मुंह में ले लो। साक्षी ने उसे अपने मुंह में ले लिया वह मेरे लंड को सकिंग करने लगी। वह मेरे मोटे लंड को सकिंग करने लगी थी। जब साक्षी ने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर लेकर उसे अच्छे से चूसना शुरू किया तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ रही थी मेरी उत्तेजना भी पूरी चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी। मैंने साक्षी के बदन को महसूस करना शुरू किया और उसके स्तनों का रसपान करना शुरू किया। जब मैं साक्षी के स्तनों का रसपान कर रहा था तो उसकी चूत से निकलता हुआ पानी बहुत ज्यादा होने लगा था उसके निप्पल भी अब खड़े होने लगे थे। वह अपनी चूत में अपनी उंगली को लगा रही थी जिससे कि मुझे लग चुका था वह मेरे लंड को लेने के लिए तैयार हो चुकी है। मैंने साक्षी की चूत को चाटना शुरू किया और उसकी चूत को मैं तब तक चाटता रहा जब तक वह पूरी तरीके से गरम नहीं हो गई। अब वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गई थी मैंने उसे कहा मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। अब मैंने साक्षी की योनि के अंदर अपने मोटे लंड को प्रवेश करवा दिया और उसकी चूत के अंदर मेरा मोटा लंड घुसते ही वह बहुत जोर से चिल्ला कर मुझे बोली मुझे मजा आ गया। मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था साक्षी की चिकनी चूत से खून निकल रहा था उसकी योनि से खून निकल रहा था तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था। मैं साक्षी की योनि के अंदर बाहर अपने मोटे लंड को बड़े ही अच्छे से किए जा रहा था।

मेरा मोटा लंड साक्षी की चूत को फाड़ कर अंदर बाहर हो रहा था। मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था साक्षी की चूत से निकलता हुआ खून भी बहुत ज्यादा हो चुका था। अब मेरा लंड साक्षी की चूत की गर्मी को झेल नहीं पाया जिससे कि मैंने अपने माल को उसकी योनि में गिरा दिया। मेरा माल साक्षी की योनि में गिरा तो वह खुश हो गई और मुझे कहने लगी मुझे आज बहुत ही ज्यादा मजा आ गया। साक्षी को बहुत ज्यादा मजा आ गया था वह मेरी बाहों में लेटी हुई थी। अब वह मेरी हो चुकी थी और मुझसे अपनी चूत मरवा कर बड़ी खुश थी। मुझे भी बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा जब मैंने साक्षी के साथ सेक्स का जमकर मजा लिया और उसकी चूत मारकर मैंने उसे पूरी तरीके से उत्तेजित कर दिया था। उसकी उत्तेजना को मैं पूरी तरीके से चरम सीमा पर पहुंच जा चुका था दोबारा से उसकी चूत मारने में मुझे जो मजा आ रहा था वह एक अलग ही फीलिंग पैदा कर रहा था।

मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो वह बहुत जोर से चिल्ला कर मुझे कहती मुझे तुम बस ऐसे ही चोदते जाओ। मैंने साक्षी को अपने ऊपर से लेटने के लिए कहा तो वह मेरे ऊपर से लेट गई साक्षी मेरा साथ अच्छे से देने लगी। वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे कर रही थी जब वह ऐसा करती तो साक्षी की चूत के अंदर बाहर मेरा लंड हो रहा था और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। जब साक्षी की चूत के अंदर मेरा लंड होता तो साक्षी को चोदकर मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आया। मेरे अंदर की गर्मी उसने पूरी तरीके से बढ़ा दी थी उस दिन के बाद तो साक्षी और मेरे बीच शारीरिक संबंध बनने लगे। अब हम दोनों जल्द ही शादी करने वाले हैं।


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