क्या तुम भी गांड मारोगे?

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Kya tum bhi gaand maroge? मैं अपनी पत्नी के साथ पार्क में बैठा हुआ था मेरी पत्नी सुनैना मुझे कहने लगी कि राजेश सब कुछ कैसे बदल गया है बच्चे भी कितने बड़े हो गए हैं और हमारी शादी को इतने वर्ष हो गए कुछ पता ही नहीं चला। मैंने सुनैना को कहा हां सुनैना तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो हमारी शादी को काफी वर्ष हो चुके हैं लेकिन इस बात का पता ही नहीं चला कि कब हम दोनों कि शादीशुदा जीवन को 15 वर्ष हो गए देखते ही देखते सब कुछ कितना बदल चुका है। सुनैना मुझसे कहने लगी कि तुम्हें वह दिन याद है जब हम लोग पहली बार मेले में मिले थे मैंने सुनैना को कहा हां सुनैना मुझे आज भी याद है हम लोगों की मुलाकात कैसे गांव में पहली बार मेले के दौरान हुई थी। सुनैना और मैं अपने गांव गए हुए थे और इत्तेफाक से हम दोनों की मुलाकात मेले के दौरान हुई मैं सुनैना को जानता तक नहीं था लेकिन जब सुनैना के पापा जी हमारे घर पर आए तो उन्होंने सुनैना के रिश्ते की बात मेरे पापा से कि वह लोग एक दूसरे को पहले से ही जानते थे। जब सुनैना से मेरी मुलाकात हुई तो मैंने कभी सोचा नहीं था कि सुनैना मेरी पत्नी बन पाएगी लेकिन हम दोनों की रजामंदी के बाद पापा और सुनैना के पापा हम दोनों की शादी के लिए तैयार हो चुके थे और हम दोनों की शादी हो गई।

उसके बाद सुनैना ने घर की सारी जिम्मेदारियों को अपने कंधे पर ले लिया और मैं भी अपने कारोबार में पूरी मेहनत करने लगा सब कुछ बदलता चला गया और मैं सुनैना के साथ बहुत खुश हूं। मेरे जीवन में हर वह खुशियां हैं जो मैं चाहता था मुझे लगता कि शायद मैं दुनिया में सबसे ज्यादा खुश हूं परंतु जब मेरी मुलाकात प्रभात से हुई तो प्रभात की जिंदगी देखकर तो मैं थोड़ा हैरान रह गया। प्रभात के पिताजी स्कूल में पियून थे लेकिन उसके बाद भी उन्होंने प्रभात को कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी परंतु प्रभास के सपने बहुत बड़े थे और मुझे भी लगता था कि प्रभात जरूर अपने जीवन में कुछ ना कुछ अच्छा कर लेगा। जब काफी वर्षों बाद प्रभात से मेरी मुलाकात हुई तो प्रभात मुझे कहने लगा कि राजेश कभी मुझे घर पर भाभी से तो मिलवाओ मैंने प्रभात को कहा तुम्हें मैं जरूर घर पर अपनी पत्नी से मिलवाऊँगा।

जब मैंने प्रभात को अपने घर पर बुलाया तो मैंने उसे सुनैना से मिलवाया प्रभात मुझे कहने लगा कि सुनैना भाभी को कभी घर पर लेकर आना मैंने प्रभात को कहा ठीक है प्रभात मैं सुनैना को कभी अपने साथ तुम्हारे घर पर जरूर लेकर आऊंगा। प्रभात हमारे घर पर ज्यादा देर तो नहीं रुका वह कहने लगा कि मेरा कुछ जरूरी काम है मुझे अभी चलना चाहिए। प्रभात ने बहुत ज्यादा तरक्की कर ली थी और उसकी तरक्की के पीछे सिर्फ और सिर्फ उसकी मेहनत थी प्रभात से मिलकर मुझे अच्छा लगा। इतने वर्षों बाद जब प्रभात मुझसे मिला तो मुझे कहीं ना कहीं ऐसा लगने लगा कि शायद मैं अपनी जिंदगी नही जी पा रहा हूं मेरे अंदर इस बात की भावना पैदा हो गई थी कि प्रभात मुझसे अच्छी जिंदगी जी रहा है। मैंने अपने जीवन में सिर्फ अपने परिवार को ही सबसे ऊपर रखा मेरे परिवार की खुशियां ही मेरे लिए सब कुछ थी मैंने अपनी खुशियों की तरफ कभी ध्यान ही नहीं दिया मैं हमेशा से ही अपने परिवार के बारे में सोचता हूं। प्रभात मुझे कहने लगा कि राजेश तुम थोड़ा बहुत समय अपने लिए भी तो निकाल लिया करो। मुझे भी लगा की प्रभात शायद बिल्कुल ठीक कह रहा है मुझे भी अपने लिए थोड़ा बहुत समय तो निकालना ही चाहिए इसलिए मैं भी अपनी लिए थोड़ा बहुत समय निकालने लगा। मैं अपने परिवार को पूरा समय देता लेकिन मुझे लगता कि मुझे भी थोड़ा समय अपने लिए निकालना पड़ेगा प्रभात मुझे कहने लगा कि राजेश मैंने कुछ दिनों पहले ही एक फार्महाउस खरीदा है यदि तुम कहो तो हम लोग वहां चले। मैंने प्रभात को कहा हां प्रभात हम लोग तुम्हारे फार्महाउस पर चलेंगे परंतु मुझे फिलहाल तो कोई जरूरी काम है इस हफ्ते तो मैं तुम्हारे साथ नहीं चल सकता लेकिन अगले हफ्ते हम लोग जरूर तुम्हारे फार्महाउस पर चलेंगे। प्रभात मुझे कहने लगा कि जब भी तुम्हें लगे की तुम्हें मेरे साथ चलना है तो तुम मुझे बता देना मैंने प्रभात को कहा ठीक है प्रभात जब मुझे समय मिलेगा तो मैं तुम्हें जरूर बताऊंगा वैसे तो अगले हफ्ते मैं फ्री हो जाऊंगा। प्रभात कहने लगा कि ठीक है तुम जब अगले हफ्ते फ्री हो जाओ तो मुझे फोन करना। एक हफ्ते बाद मैं फ्री हुआ और मैंने प्रभात को फोन किया तो प्रभात कहने लगा कि राजेश क्या तुम्हारे पास अब समय है। मैंने प्रभात को कहा हां मेरे पास अब समय है हम लोग तुम्हारे फॉर्म हाउस पर चल सकते हैं प्रभात मुझे कहने लगा कि चलो ठीक है हम लोग फार्महाउस पर चलते हैं।

हम दोनों प्रभात के फार्महाउस पर चले गए और जब हम लोग प्रभात के फार्महाउस पर गए तो मुझे इस बात की खुशी थी कि काफी सालों बाद हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे। जब प्रभात ने मुझे बताया कि उसने किस प्रकार से अपने जीवन में मेहनत की और अपनी तरक्की के रास्ते को उसने आसान बना दिया। मैंने प्रभात को कहा लेकिन तुम वाकई में बहुत मेहनती हो और तुम्हारे अंदर हमेशा से ही कुछ कर गुजरने की चाहत थी जिस वजह से तुम अपने जीवन में सफल हो पाए। प्रभात ने मुझे कहा कि राजेश तुमने भी तो अपने जीवन में बहुत मेहनत की है और तुमने अपने परिवार को हमेशा समय दिया है लेकिन मेरे साथ इसके बिल्कुल उलट है मेरी पत्नी और मेरे बीच बिल्कुल भी अच्छे संबंध नहीं है तुम बहुत ही खुश नसीब हो जो तुम्हें सुनैना जैसी पत्नी मिली शायद मैं इतना खुश नसीब नहीं हूं मेरे पारिवारिक रिश्ते बिल्कुल भी ठीक नहीं है। उस दिन मुझे प्रभात ने अपने पारिवारिक रिश्तो के बारे में बताया तो मैंने प्रभात को कहा तुम्हें अपनी पत्नी से बात करनी चाहिए।

वह मुझे कहने लगा कि मैंने कई बार अपनी पत्नी से इस बारे में बात की लेकिन वह मेरी बात कभी भी नहीं समझती और उसे लगता है कि वह अपनी जगह हमेशा सही है और रात दिन वह सिर्फ अपनी सहेलियों के साथ पार्टी में ही रहती है हम लोगों के बीच कभी भी एक साथ बैठकर बात नहीं होती है मेरी पत्नी हमेशा ही मुझसे कहती कि तुम्हारे पास मेरे लिए वक्त ही नहीं होता है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मैंने हमेशा अपनी पत्नी को वक़्त देने की कोशिश की लेकिन वह अपनी सहेलियों के साथ कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहती है इसलिए मैं भी अब उससे ज्यादा बात नहीं करता हूं। मैंने प्रभात को कहा लेकिन प्रभात तुम्हारे जीवन में तो सब कुछ है तो प्रभात कहने लगा राजेश मैं अपने काम से बहुत खुश हूं मैंने कभी उम्मीद भी नहीं कि थी कि मुझे इतनी तरक्की मिल पाएगी लेकिन यह सब मेरी मेहनत से ही हासिल हो पाया है। हम दोनों फार्म हाउस मे थे तभी फार्महाउस में काम करने वाली एक महिला आई वह कहने लगी साहब आपको कुछ चाहिए तो नहीं? मेरी नज़र उसकी बड़ी गांड पर थी मैंने और प्रभात ने कुछ ज्यादा ही नशा कर लिया था इसलिए हम दोनों होश में बिल्कुल भी नहीं थे। मैने उसे अपने पास बुलाकर उसकी सहमति पूछी तो वह भी अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार हो गई वह पैसे की बड़ी लालची थी उसने मुझे कहा मुझे कुछ पैसे चाहिए? मैंने उसे पैसे पकड़ते हुए कहा चलो रूम में चलते हैं मैंने प्रभात को कहा क्या तुम भी उसकी चूत के मजे लोगे? वह कहने लगा नहीं तुम पहले मजे ले लो अगर मेरा मूड हुआ तो मैं जरूर उसे चोदूंगा। मैं उसे बेडरूम में ले गया मैंने उसकी साड़ी को उतारकर उसकी पैंटी को नीचे उतारा तो उसकी चूत पर हल्के काले रंग के बाल थे मैंने उसके ब्लाउस को खोलते हुए उसकी ब्रा को भी उतार दिया। जब मैं अपने लंड को उसकी चूत पर रगड रहा था तो वह अपने मुंह से सिसकियां निकालती और मुझे कहती थी मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है।

मैंने जब अपने लंड को उसके मुंह के अंदर डाला तो उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेते हुए चूसना शुरु किया वह बड़े ही अच्छे से लंड का रसपान कर रही थी। इस से मै बहुत ज्यादा खुश हो गया था मैंने उसे कहा मुझे तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डालना है। वह कहने लगी साहब आप तेल लगाकर मेरी चूत मारो मेरा पति भी तेल लगाकर मेरी चूत का मजा लेता है। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हारी चूत का मजा तेल लगा कर लूंगा जैसे ही मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड पर तेल लगाकर डाला तो वो चिल्ला उठी उसके मुंह से जो मादक आवाज निकलती उससे मुझे उसे चोदना में और भी मजा आता मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था। मुझे उसे चोदने में बड़ा आनंद आता और मैने उसकी चूत का मजा लिया जब उसकी चूत पूरी गिली हो चुकी थी मैंने उसे कहा तुम्हारी चूत के अंदर में अपने वीर्य को गिरा देता हूं।

वह मुझे कहने लगी हां साहब आप अपने वीर्य को मेरी चूत मे गिरा दो मैंने अपने वीर्य को उसकी चूत के अंदर ही गिरा दिया वह खुश हो गई। उसके बाद मैंने अपने लंड पर दोबारा से तेल लगाते हुए उसकी गांड के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह मुझे कहने लगी आपने तो मेरी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। मैंने उससे कहा मुझसे तुम्हारी गांड देखकर रहा नहीं जा रहा था। वह मुझे कहने लगी साहब आपका लंड तो बड़ा मोटा है मैंने उसे कहा तुम्हारी गांड के छेद में जब मेरा लंड जा रहा है तो मुझे बड़ा मजा आ रहा है। वह इस बात से बहुत खुश थी मैं लगातार तेज गति से उसकी गांड मारे जा रहा था मैंने उसकी गांड के मजे बहुत देर तक लिए उसके मुंह से चीख निकलती जाती। वह मुझसे कहने लगी आज तो आपने मुझे मजे ही दिलवा दिए मैंने उसे कहा तुमने भी तो आज मुझे बड़े मजे दिलवाए। मैंने प्रभात को कहा क्या तुम भी गांड मारोगे? वह कहने लगा हां हम दोनों ने ही फार्महाउस पर बडे मजे किए।


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