क्या आप कॉल गर्ल हैं?

Kya aap call girl hain?:

antarvasna, hindi sex story मेरा नाम सार्थक है, मैं सतारा का रहने वाला हूं, ज्यादा पढ़ा लिखा ना होने के कारण मुझे मेरे एक रिश्तेदार के यहां काम करना पड़ा उनकी दुकान में मैंने काफी समय तक काम किया लेकिन उनकी दुकान का काम चलना कम हो गया इसलिए उन्होंने मुझे कहा कि अब मैं तुम्हें तनख्वा नहीं दे पाऊंगा तुम अपने लिए कहीं और नौकरी देख लो। मेरा मन अब सतारा में काम करने का नहीं था इसीलिए मैंने पुणे जाने की ठान ली, मैं जब पुणे आ गया तो वहां पर मेरे मामा रहते हैं मैं कुछ दिनों तक तो अपने मामा के घर पर ही रुका था उन्होंने मुझे एक कंपनी में नौकरी दिलवा दी, मै बचपन में भी पुणे आया करता था लेकिन इस बार मेरे लिए आना बिल्कुल नया अनुभव था, मैं अपने दोस्तों से भी मिला और जब मुझे मेरे सतारा के दोस्त मिले तो वह मुझे कहने लगे तुम हमारे साथ ही रह लो इसलिए मैं उनके साथ रहने के लिए चला गया।

मेरे दोस्त का नाम राजीव है राजीव और मेरी पहले से ही बहुत अच्छी बातचीत है उसका घर सतारा में मेरे घर से थोड़ी ही दूरी पर है उसके माता-पिता को भी मैं जानता हूं और वह लोग हमारे घर भी अक्सर आते रहते थे, जिस दिन हमारी छुट्टी होती है उस दिन हम लोग घर पर ही रहते हैं और हम लोग जब बालकनी में गए तो हमारे सामने की बालकनी में एक भाभी खड़ी थी, वह देखने में बड़ी ही सुंदर थी, मैं और राजीव उन्हें ही देख रहे थे लेकिन मुझे नहीं पता था कि उनसे मेरी बहुत जल्दी बातचीत होने वाली है, हम लोग उन्हें हमेशा ही देखा करते थे। एक दिन जब मैं दुकान में दूध लेने के लिए गया तो उस वक्त मुझे वही भाभी मिल गई और मुझे कहने लगी क्या तुम लोग हमारे घर के सामने वाले फ्लैट में रहते हो? मैंने उन्हें कहा हां हम लोग आपके सामने वाले फ्लैट में रहते हैं। वह मुझे कहने लगी कि तुम लोग मुझे कुछ ज्यादा ही देखते हो, क्या तुम लोगों के घर में तुम्हारी बहन नहीं है जो तुम मुझे ऐसे देखते रहते हो, मैंने उन्हें कहा हम लोग आपको देखते जरूर हैं लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि हम लोग आपको किसी गलत नजर से देख रहे हैं आप हमें अच्छे लगते हैं तो हम लोग आपको देख लिया करते हैं।

वह मुझे कहने लगी आइंदा से तुम लोग कभी भी ऐसे मत देखा करना, मैंने उन्हें कहा ठीक है भाभी जी आइंदा से हम लोग आपको कभी भी नहीं देखेंगे और आपको देखते ही हम लोगों अपना रास्ता बदल लिया करेंगे, मैं वहां से जब घर आया तो मैंने राजीव को सारी बात बताई, राजीव मुझे कहने लगा क्या तुम्हें वही भाभी मिली थी? मैंने उसे कहा हां वहीं सामने वाली भाभी जी और वह बहुत ही गुस्से में थी उन्होंने मुझे कहा कि तुम लोग अपनी बालकनी से ऐसे मत देखा करो सब लोग बहुत गलत मतलब में बात को लेते हैं। मैंने राजीव से कहा कि आइंदा से जब भी वह आए तो तुम उन्हें मत देखना, राजीव मुझे कहने लगा मैं आइंदा के भाभी की तरफ कभी देखूंगा भी नहीं और तुम्हें तो पता है उन्होंने यदि किसी को बता दिया तो हमें यहां से घर खाली करना पड़ सकता है, हम लोगों ने अब उनकी तरफ देखना ही बंद कर दिया था जब भी वह अपनी बालकनी में आती तो हम लोग अंदर आ जाते, राजीव की एक गर्लफ्रेंड है उसका नाम पारुल है पारुल बहुत ही अच्छी लड़की है और उससे राजीव ने मुझे भी मिलवाया, राजीव और उसकी मुलाकात उनके किसी दोस्त ने करवाई थी, पारुल का नेचर बहुत ही अच्छा है और वह बहुत समझदार लड़की है। राजीव और पारुल शादी करने वाले हैं वह दोनों शादी को लेकर बहुत ही सीरियस हैं लेकिन पारुल के परिवार वाले राजीव से उसकी शादी नहीं करवाना चाहते, पारुल एक अच्छे परिवार से है और उसके परिवार वाले उसके लिए कोई अमीर घर का लड़का देख रहे हैं लेकिन राजीव की तो बहुत कम सैलरी है और वह लोग उससे उसकी शादी नहीं करवाना चाहते परंतु पारुल राजीव से बहुत प्यार करती है और राजीव भी उससे बहुत प्रेम करता है वह दोनों एक दूसरे को बहुत ज्यादा चाहते हैं, पारुल भी कई बार हमारे फ्लैट में आ जाती है वह राजीव का बहुत ज्यादा ख्याल रखती है और राजीव भी उसे बहुत ही ज्यादा प्यार करता है। एक दिन राजीव की तबीयत बहुत खराब हो गई जब मैंने पारुल को यह बात बताई तो वह अपने ऑफिस से तुरंत फ्लैट में आ गई और कहने लगी क्या तुमने राजीव को डॉक्टर को नहीं दिखाया? मैंने उसे कहा राजीव तो डॉक्टर के पास जाने से मना कर रहा है, अब तुम ही उसे कुछ समझाओ।

वह उसे डॉक्टर के पास ले कर चली गई, मैं अपने मन में सोचने लगा पारुल राजीव से कितना प्यार करती है और जब इन दोनों की शादी हो जाएगी तो यह दोनों कितने खुश रहेंगे और एक मैं हूं कि मेरे जीवन में कोई भी लड़की नहीं है लगता है मुझे अकेले ही अपना जीवन व्यतीत करना पड़ेगा, मैं कमरे में बैठकर टीवी देखने लगा और जब मैं टीवी देख रहा था तो उस वक्त मुझे ध्यान आया कि मुझे अपने पापा को फोन करना था उन्होंने सुबह ही मुझे फोन किया था और उन्हें कुछ काम था, मैंने तुरंत पापा को फोन कर दिया और उसके बाद वह कहने लगे कि मैंने तुम्हें सुबह फोन किया था लेकिन तुम उस वक्त काम पर थे, मैंने उन्हें कहा हां पिताजी मैं उस वक्त काम पर था आप कहिए आपको क्या काम था, वह कहने लगे, तुम्हारी मम्मी कुछ दिनों बाद पुणे आ रही हैं तुम उन्हें अपने मामा के घर छोड़ देना, मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं उन्हें मामा के घर छोड़ दूंगा, यह कहते हुए मैंने फोन रख दिया। उस दिन मेरा सेक्स करने के मूड हो गया मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं कहां जाऊं। मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया उसने मुझे एक नंबर दिया और कहने लगा तुम इस नंबर पर फोन करो वह भाभी तुम्हें बड़े मजे देगी। मैंने उसे कहा लेकिन वह पैसे भी तो ज्यादा लेगी, वह कहने लगा तुम फोन कर लो उसके बाद उनसे तुम अपने तरीके से बात कर लेना।

मैंने जब उस नंबर पर फोन किया तो वहां से एक बड़ी मधुर आवाज में कोई महिला बोल रही थी। हम दोनों के बीच रेट तय हो गया, मैंने उन्हें कहा आप इस पते पर आ जाइए। मैं उन्हें लेने के लिए बाहर गेट पर चला गया जब मैंने देखा तो वह वही भाभी थी जो हमारे पड़ोस में रहती हैं। वह मुझे देख कर बड़ी चौक गई और मुझे कहने लगी क्या तुमने ही मुझे फोन किया था। मैंने उन्हें कहा हां मैंने ही आपको फोन किया था उन्हें देखकर तो मेरा लंड एकदम तन कर खड़ा हो गया, वह जिस प्रकार से शराफत का ढोंग कर रही थी उससे मैंने अंदाजा लगा लिया यह बडी तेज औरत है। मैंने उनसे उनका नाम पूछा उनका नाम प्रीति है, मैं उन्हें अपने घर पर ले आया जब हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो मैंने उन्हें कहा फिर हम अपना कार्यक्रम शुरू करें। वह कहने लगी हां क्यों नहीं मैंने उनसे सारे कपड़े उतार दिए, जब मैंने उनके बड़े और भारी भरकम स्तनों को देखा तो उन्हें मैंने अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दिया। मैं जब उनके स्तनों को चूस रहा था उनकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढने लगी। मैंने अपने लंड को निकालते हुए उनके स्तनों पर रगडना शुरू किया, जब मैंने अपने लंड को उनके मुंह के अंदर डाला तो वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से सकिंग करने लगी, जब मेरे लंड से पानी बाहर निकलने लगा तो मैंने उनकी चिकनी चूत में लंड डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उनकी चूत के अंदर गया तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी तुम्हारा लंड मेरी चूत के अंदर तक जा रहा है। मैने उनसे कहा मुझे पता नहं था आप लंड लेने की इतनी आदि है आप शराफत से इस कॉलोनी में रह रही हैं मुझे पता ही नहीं था आप एक नंबर की जुगाड है। वह कहने लगी मुझे तो पैसों से मतलब है मैंने उनहें और तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए, उनके दोनों पैरो को मैंने अपने कंधे पर रखते हुए उनकी चूत के अंदर बहार अपने लंड को करना शुरू कर दिया। वह मुझे कहती तो ऐसे ही तेजी से धक्के मारते रहो। हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा समय तक संभोग नहीं कर पाए क्योंकि उनकी योनि बड़ी ही टाइट थी जब मेरा वीर्य पतन उनकी योनि के अंदर हुआ तो वह कहने लगी अभी मैं चलती हूं मेरे पति आने वाले होंगे लेकिन तुम्हें जरूरत पडी तो तुम मुझे फोन कर देना। मुझे जब भी सेक्स की तलब होती तो मैं प्रीति भाभी को बुला लेता वही मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर उसकी प्यास बुझाती।


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