कुंडी खुली रह गई और मैं चुद गयी

Kundi khuli rah gayi aur mai chud gayi:

antarvasna, kamukta मेरा नाम अर्पिता है मैं बेंगलुरु की रहने वाली हूं, मेरे माता पिता एक अच्छी फैमिली से थे लेकिन मैंने उनके खिलाफ जाकर रोहित से शादी कर ली, जब मेरी शादी रोहित से हुई तो वह लोग बहुत ही गुस्सा हो गए उसके बाद उन्होंने जैसे मुझसे अपना संपर्क ही खत्म कर लिया, मैं एक बार अपने माता पिता से मिलने भी गई थी लेकिन उन्होंने मुझे साफ तौर पर मना कर दिया कि अब हमारा तुमसे कोई भी लेना देना नहीं है। रोहित और मैंने कोर्ट मैरिज की थी उसके कुछ दोस्त और उसके कुछ रिश्तेदार भी आए हुए थे, मेरी तरफ से कोई भी नहीं था बस मेरे एक दो दोस्त थे, शादी के बाद सब कुछ अच्छे से चलता रहा रोहित और मेरे बीच में शादी के बाद सब ठीक चलता रहा हम दोनों के बीच बहुत प्यार और प्रेम था रोहित मेरा बहुत ध्यान रखता और मैं भी उसका बहुत ध्यान रखती थी, हम दोनों नौकरी करते थे इसलिए हमारा खर्चा अच्छे से निकल जाता था।

मैं शादी के बाद रोहित के साथ मुंबई में रहने लगी थी मुंबई में रोहित और मैं ही रहते थे उसकी फैमिली बेंगलुरु में ही रहती है लेकिन हम दोनों ने फैसला किया था कि हम दोनों शादी के बाद मुंबई चले जाएंगे इसलिए हम दोनों मुंबई में ही रहने लगे, कुछ समय तक तो उसने मेरा बहुत अच्छे से साथ दिया और सब कुछ बिल्कुल ठीक चलता रहा हम दोनों एक दूसरे के साथ जीवन यापन कर के बहुत खुश थे मुझे ऐसा लगता था कि जैसे मुझसे ज्यादा खुश कोई भी नही है लेकिन मेरे लिए मुसीबत उस वक्त पैदा हो गई जब रोहित का एक्सीडेंट हो गया, रोहित के एक्सीडेंट के कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई और मैं अकेली पड़ गई मैं काफी समय तक तो बहुत ही उदास रही, मैं इतना ज्यादा टूट गई थी कि मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था लेकिन मुंबई में मेरे कुछ जानने वाले थे उन्होंने मुझे बहुत सपोर्ट किया, मुझे अपने आप को उभारने में काफी समय लग गया लेकिन मेरे पास और कोई भी रास्ता नहीं था मैं कहीं भी नही जा सकती थी क्योंकि मेरे माता-पिता से तो अब मेरा कोई भी लेना देना नहीं था और रोहित के परिवार से भी अब जैसे मेरा संपर्क खत्म ही हो चुका था उन्होंने मुझे ही रोहित की मृत्यु के लिए दोषी ठहराया, मैं बहुत ज्यादा दुखी हो गई थी और मैं अंदर से इतना ज्यादा टूट गई कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था मैं अपने काम पर भी जाती तो मेरा मन नहीं लगता था लेकिन मेरी मजबूरी थी इसीलिए मैं काम पर जाती थी और रोहित की मृत्यु की वजह से मुझे सब लोग ऐसी नजरों से देखते जैसे कि मैंने पता नहीं क्या कर दिया हो।

मेरे मकान मालिक की नियत भी कुछ ठीक नहीं थी और वह हमेशा मेरे पास आ जाते थे मुझे लगा कि मुझे अब वहां से घर छोड़ देना चाहिए, मैंने घर ढूंढने की भी कोशिश की लेकिन अकेले होने की वजह से मुझे घर मिलने में भी तकलीफ होने लगी और जिस जगह मेरा ऑफिस था वहां से काफी दूरी पर मुझे एक घर मिला वहां का माहौल मुझे अच्छा लगा इसलिए मैंने वहां पर रहने की सोच ली, मैं अब अकेले ही वहां पर रहने लगी और मेरे ही पड़ोस में सतीश नाम का एक 28 वर्षीय युवक रहता है, सतीश बहुत ही अच्छा लड़का है उससे मेरी बातचीत होने लगी थी और जब भी वह मुझे दिखाई देता तो हमेशा उसके चेहरे पर मुस्कुराहट रहती थी उसे देख कर मुझे भी अच्छा लगता। मैंने एक दिन सतीश से पूछा तुम हमेशा ही इतने मुस्कुराते रहते हो क्या इसके पीछे कोई बात है? वह कहने लगा मैं अपने जीवन में हमेशा खुश रहना चाहता हूं जितने भी दुख और तकलीफ हो उन्हें अपनी हंसी में मिटा देता हूं। मुझे भी सतीश के बारे में ज्यादा पता नहीं था क्योंकि हम दोनों की कभी इतनी ज्यादा बात हो ही नहीं पाई थी जैसे जैसे समय बीतता गया तो हम दोनों के बीच में अच्छी बातचीत होने लगी, कभी उसे कुछ सामान चाहिए होता तो वह मुझसे ले लिया करता क्योंकि वह अकेला ही रहता था, वह हमेशा ही अपना काम खुद ही करता था मैं उसे बोलती थी कि तुम खाना भी क्या खुद ही बनाते हो, वह मुझे कहने लगा हां मैं खाना भी अपना खुद ही बनाता हूं, मैंने उसे कहा तुम तो बड़े ही अच्छे लड़के हो।

एक दिन उसने मुझसे पूछ लिया कि आप अकेली रहती है, क्या आप की शादी अभी तक नहीं हुई? पहले तो मैंने उसे कोई जवाब नहीं दिया लेकिन जब मुझे लगा कि मुझे सतीश को सब सच बता देना चाहिए तो मैंने सतीश को सब कुछ बता दिया, मैंने उसे कहा कि मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है और मैंने लव मैरिज की थी। वह कहने लगा यह तो बड़ी ही दुख की बात है आप तो अभी ज्यादा उम्र की भी नहीं है, मैंने उसे कहा हां यह सब बस एक दुर्घटना के दौरान हो गया और मैं तब से अकेली ही हूं, वह कहने लगा लेकिन आप बड़ी ही हिम्मत वाली महिला है आपको देखकर मुझे ऐसा नहीं लगा कि कभी आपके ऊपर भी इतनी मुसीबत आई होगी। सतीश की बातें मुझे अच्छी लगती थी और सतीश भी हमेशा मुझे हंसाता रहता, जब हम लोग साथ में बैठे होते तो वह हमेशा रोहित और मेरे बारे में पूछता कि आप दोनों की मुलाकात कैसे हुई थी और आप लोग कहां मिले थे, मैंने उसे अपनी जिंदगी की लगभग हर एक बात बता दी थी और उसने भी मुझे अपने जीवन के बारे में सब कुछ बता दिया था। उसने मुझे बताया कि मेरे घर की स्थिति ठीक नहीं है इसलिए मैं जितना भी कमाता हूं वह मैं अपने घर भेज दिया करता हूं थोड़े बहुत पैसे से ही मैं अपने घर का गुजारा करता हूं।

एक दिन मैं अपने बाथरूम में नहा रही थी शायद मैंने दरवाजा खुला ही छोड़ दिया मुझे ध्यान नहीं था और उसी वक्त सतीश भी कमरे में आ गया। मैं जैसे ही टावेल लपेट कर बाहर निकली तो सतीश ने मुझे देख लिया। जब उसने मुझे देखा तो वह पीछे की तरफ पलट गया, मैंने उसे कहा अरे मैं दरवाजा लगाना ही भूल गई लेकिन शायद उसने मेरे बदन को देखकर अपने मन में मेरे लिए कुछ ख्याल पैदा कर लिए थे। मैंने भी काफी समय से किसी के बदन की खुशबू नहीं ली थी इसलिए मैं सतीश के साथ उस दिन सेक्स करने के लिए तैयार हो गई। उसने जब मेरे बदन को छुआ तो मुझे ऐसा लगा जैसे कि कितने समय बाद किसी ने मेरे नंगे बदन को हाथ लगाया है उसने मेरे टावेल को खोल दिया, उसने मेरे बदन को निहारना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगा अर्पिता जी आपका बदन बडा ही सुंदर हैं, आपका इतना सुंदर बदन जिसे देखकर मैं अपने आपको नहीं रोक पाया।

मैंने उससे कहा कोई बात नहीं यह तो शारीरिक जरूरते होती हैं मेरी भी शारीरिक जरूरत थी तुम आज मेरी जरूरतों को पूरा कर दो। उसने मेरी ब्रा को खोल दिया और मेरे स्तनों को चूसना शुरू किया वह मेरे स्तनों का काफी देर तक रसपान करता रहा जब वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो गया तो उसने मेरी पैंटी उतारते हुए मेरी योनि को चाटने शुरू कर दिया। वह मेरी योनि को बड़े ही अच्छे तरीके से चूस रहा था जब मै पूरे चरम सीमा पर पहुंच गई तो मेरा योनि से पानी निकलने लगा। उसने जैसे ही अपने लंड को सटाया तो मेरी चूत गिली हो चुकी थी कुछ देर तक तो वह अपने लंड को मेरी योनि पर रगडे जा रहा जब मेरी योनि से कुछ ज्यादा ही तरल पदार्थ बाहर निकलने लगा तो उसने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को धीरे धीरे प्रवेश करवा दिया। जैसे ही उसका मोटा लंड मेरी योनि में प्रवेश हुआ तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा, मैने इतने समय बाद किसी के लंड को अपनी योनि में लिया था, उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया मुझे वह बड़ी तेज गति से चोदने लगा। मुझे बहुत अच्छा महसूस होता जब वह मुझे इस प्रकार से धक्के दे कर चोद रहा था उसका लंड मेरी योनि के अंदर बाहर होता तो उसे लंड से एक अलग प्रकार की गर्मी पैदा होती जिससे कि मेरे शरीर में करंट पैदा हो रहा था और मैं उसकी तरफ खींची जा रही थी। वह बीच बीच में मेरे स्तनों को भी दबाता और उतनी ही तेजी से मुझे चोदता जब मैं झड़ने वाली थी तो मैंने उसे कहा सतीश अब मै झडने वाली हूं तुम धक्के मारते रहो। वह कहने लगा मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा है, वह लगातार ऐसी ही मुझे धक्के मारता रहा, मैं उसके सामने लेटी हुई थी लेकिन वह मुझे लगातार धक्के दिए जा रहा था। जब उसने मेरी चूत के ऊपर अपने वीर्य को गिराया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ और उस दिन के बाद से सतीश ने ही हमेशा मेरी इच्छाओं का ख्याल रखा है।


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