कोई ऊंच नीच ना हो जाए

Antarvasna, hindi sex story:

Koi unch nich na ho jaye मैं अपने कॉलेज से घर लौट रहा था तभी मैंने तभी देखा कि हमारे पड़ोस में कुछ लोग कुछ सामान शिफ्ट कर रहे थे उस दौरान मैंने एक लड़की को भी देखा उसकी सुंदरता ने मुझे जैसे अपनी ओर आकर्षित कर लिया था। मैं उस लड़की के बारे में कुछ भी नहीं जानता था काफी दिन बीत जाने के बाद एक दिन उसी लड़की की मां हमारे घर पर आई हुई थी और जब वह हमारे घर पर आई तो उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा क्या तुम्हारी मम्मी घर पर है तो मैंने उन्हें कहा हां आंटी मम्मी घर पर ही हैं। मैंने मम्मी को बुलाया तो मम्मी आंटी के साथ बैठी हुई थी और उनके साथ वह बातें करने लगी कुछ देर बाद आंटी चली गई तो मैंने मां से पूछा कि मां क्या आंटी कोई काम से आई हुई थी। वह कहने लगी नहीं ऐसे ही बस वह मुझसे मिलने के लिए आई हुई थी मैंने मां से पूछा की मां उनके घर में कौन-कौन है तो मां ने मुझे बताया कि बेटा उनकी एक ही लड़की है और उसका नाम राधिका है।

जब मुझे मां ने राधिका के बारे में बताया तो मैं फुले नहीं समा रहा था क्योंकि मुझे उसका नाम पता चल चुका था। मैं जब भी कॉलेज से आता तो मैं राधिका को देखा करता था वह घर पर ही रहती थी। एक दिन मैं कॉलेज से घर लौट रहा था उस दिन मैंने देखा कि राधिका भी मेरे आगे आगे चल रही थी मैं तेजी से दौड़ता हुआ राधिका के बिल्कुल पीछे चल रहा था कि तभी उसके हाथ से उसका रुमाल गिरा और जब उसका रुमाल गिरा तो मैंने उसका रुमाल तुरंत उठा लिया और राधिका को आवाज दी। राधिका रुकी और उसने पीछे मुड़कर देखा तो कुछ देर के लिए तो मैं उसकी आंखों में देखता रहा और जब वह मेरे पास आई तो वह मुझे कहने लगी क्या अपने आवाज दी तो मैंने उसे कहा कि आपका रुमाल गिर गया था। जब मैंने उसका रुमाल उसे दिया तो उसके बाद वह वहां से चली गई यह पहली बार ही था कि मैं उससे बात कर पाया। हालांकि हमारी बात ज्यादा तो नहीं हो सकी लेकिन कुछ देर की ही बातचीत के दौरान मुझे राधिका से बात कर के अच्छा लगा और उसके बाद तो मैं उसे कुछ ज्यादा ही देखने लगा था वह भी मुझे देख कर मुस्कुरा दिया करती।

अब मुझे राधिका के बारे में धीरे-धीरे पता चलने लगा था राधिका ने अपने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली थी और उसके बाद उसने कॉलेज छोड़ दिया था मैं भी अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा था। एक दिन राधिका की मम्मी ने मुझे कहा कि बेटा क्या तुम राधिका को उसके सहेली के घर छोड़ दोगे तो मैंने उन्हें कहा हां आंटी जी मैं राधिका को उसकी सहेली के घर छोड़ दूंगा। राधिका के पापा अपने काम पर जा चुके थे और उस दिन मैं घर पर ही था और मेरे पापा भी उस दिन घर पर ही थे इसलिए मैंने पापा से कहा कि मुझे आप कार की चाबी दे दीजिए। पापा ने मुझे कार की चाबी दी और उसके बाद राधिका को मैंने उसकी सहेली के घर तक छोड़ दिया था रास्ते में हम लोगों की काफी बात हुई और मैं राधिका के साथ बात करके बहुत खुश था। राधिका भी इस बात से काफी खुश थी उस दिन के बाद राधिका और मैं एक दूसरे से बहुत ही अच्छे से बात करने लगे और मैं राधिका से बात कर के बहुत खुश रहता था। एक दिन राधिका ने मुझे कहा कि अमन क्या तुम मेरे साथ आज मेरी सहेली के घर चल सकते हो उस दिन भी मैंने राधिका को उसकी सहेली के घर छोड़ा और जब भी राधिका को कोई काम होता तो वह मुझसे कहती मुझे तो बहुत ही अच्छा लगता था इस बहाने मेरी राधिका से बात हो जाया करती थी। अब हम दोनों की बातें होने लगी थी तो राधिका और मेरे बीच काफी अच्छी दोस्ती भो हो गई थी और एक दिन राधिका ने मुझसे कहा कि चलो आज कहीं घूमने चलते हैं। उस दिन हम दोनों ने मूवी देखने के बारे में सोचा उस दिन हम दोनों मूवी देखने के लिए चले गए मैं राधिका के साथ बहुत ही खुश था और राधिका भी इस बात से बहुत खुश थी। हम लोग वहां पर काफी देर तक रुके और उसके बाद हम दोनों वापस लौट आए राधिका अक्सर ही मुझसे मिलने के लिए मेरे घर पर आती रहती थी या फिर मैं उससे मिलने के लिए उसके घर पर चला जाया करता था।

हम दोनों ने साथ में मूवी देखी और उसके बाद तो जैसे राधिका और मैं एक दूसरे के करीब आने लगे थे और हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी समय बिताने लगे थे। राधिका को अभी तक इस बारे में पता नहीं था कि वह मेरे साथ रिलेशन में रहना चाहती है या नहीं लेकिन मेरे दिल में तो राधिका को लेकर प्यार उमड़ने लगा था और मैं राधिका से प्यार करने लगा था राधिका इस बात से अनजान थी लेकिन मैं राधिका को जब भी देखता तो मुझे बहुत अच्छा लगता। एक दिन राधिका ने मुझे कहा कि अमन क्या आज तुम फ्री हो तो मैंने राधिका से कहा हां राधिका मैं आज फ्री हूं उस दिन मेरे कॉलेज की छुट्टी थी और मुझे कहीं जाना नहीं था तो राधिका और मैं उसकी सहेली के घर चले गए। उस दिन राधिका ने मुझे अपनी सहेली से भी मिलवाया राधिका और मैं उस दिन उसकी सहेली के घर पर काफी देर तक रुके और उसके बाद हम दोनों वापस लौट आए। राधिका अक्सर ही मुझसे मिलने के लिए मेरे घर पर आती रहती थी या फिर कभी मैं भी उससे मिलने के लिए उसके घर पर चला जाया करता था।

एक दिन मै राधिका को मिलने के लिए उसके घर पर गया था उस दिन राधिका घर पर अकेली थी वह उसी वक्त बाथरूम से नहाकर बाहर निकली थी उसके बाल खुले हुए थे उसने अपने बदन में तौलिए से ढका हुआ था। वह मुझे देखकर घबरा गई और अपने रूम की तरफ दौड़ते हुए गई। मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया। जब मैं राधिका के रूम में गया तो वह शर्माने लगी थी मैंने उसके तौलिए पर हाथ लगाते हुए अपनी और खींचा तो उसका नंगा बदन मेरे सामने था। वह अपने हाथ से अपने बदन को ढकने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं तो उसके बदन को देखकर उत्तेजित हो चुका था और उसके साथ में संभोग करना चाहता था। मैं उसके होठों को चूमने लगा था और उसके होठों को चूम कर मुझे ऐसा लगता जैसा उसके होंठो को मै चूमता रहू काफी देर तक मैंने ऐसा ही किया। जब वह पूरी तरीके से जोश में आ गई तो मुझे कहने लगी मैं नहीं रह पांऊगी मैंने उसे गोद में उठाते हुए बिस्तर पर पटक दिया जिसके बाद वह मेरी हो चुकी थी। उसने अपने तन बदन को मुझे सौंप दिया था मैंने उसके गुलाबी होंठों को चूमना शुरू किया जब मैं उसके होठों को चूसता तो वह सिसकिया लेने की कोशिश कर रही थी उसका बदन तड़प रहा था। मैंने उसके स्तनों को अपने हाथ से मसलना शुरू कर दिया लेकिन जैसे ही मैंने उसके स्तनों पर अपनी जीभ का स्पर्श किया तो वह जोर से चिल्लाई और कहने लगी अमन तुम ऐसा मत करो मुझे बेचैनी हो रही है। उसके शरीर में एक अलग ही करंट सा दौड़ रहा था वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अजीब सा महसूस हो रहा है। मैं समझ चुका था उसकी चूत को मुझे चाटना चाहिए मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और कहने लगी। वह मुझे बोली तुम यह क्या कर रहे हो लेकिन मुझे तो उसकी योनि को चाटने मे मजा आ रहा था मैंने उसकी गुलाबी चूत को बहुत देर तक चाटा। वह मुझे कहने लगी अमन मुझसे बिल्कुल रहा नहीं जा रहा है मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डालना चाहता हूं। वह मुझे कहने लगी कहीं कोई ऊंच-नीच हो गई तो मैंने उसे कहा राधिका कुछ नहीं होगा तुम घबराओ मत वह मुझ पर पूरी तरीके से भरोसा करती थी इसलिए उसने मेरा साथ दिया और अपने पैरों को खोल लिया। मैंने उसके पैरों को खोलते हुए जब उसकी योनि के अंदर लंड घुसाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा मेरा लंड उसकी योनि के अंदर तक चला गया।

जब उसकी चूत के अंदर मेरा लंड घुसा तो वह मुझे कहने लगी मेरी चूत से खून निकलने लगा है और मुझे ऐसा एहसास हो रहा है जैसे मेरी सील टूट चुकी है मुझे बहुत ज्यादा दर्द भी हो रहा है। मैंने उसे कहा राधिका कुछ नहीं होगा राधिका कहने लगी मुझे इस दर्द में भी मजा आ रहा है तुम मुझे ऐसे ही धक्के देते रहो थोड़ी देर बाद मेरा लंड उसकी योनि में पूरी तरीके से सेट हो चुका था जिस से कि उसे भी मजा आने लगा था। अब मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मारता जिस से कि वह मुझे कहती तुम ऐसे ही मुझे धक्के मारते रहो और मेरी गर्मी को तुम शांत करते रहो। मैं इस बात से बहुत ज्यादा उत्साहित और खुश था कि मैं राधिका के साथ सेक्स कर पा रहा हूं।

राधिका ने मेरा साथ बड़े अच्छे से दिया जब उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया तो वह मुझे कहने लगी मुझे लग रहा है मैं झड़ने वाली हूं। मैंने उसे कहा तुम अपने पैरों को थोड़ा और खोल लो उसने अपने पैरों को थोड़ा सा खोला तो मैंने उसकी चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया। मैंने उसकी चूत से अपने माल को साफ किया और अपने लंड को साफ करते हुए कहा तुम मेरे लंड को सकिंग कर लो उसने ऐसा ही किया। जब वह ऐसा कर रही थी तो मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो रहा था कुछ देर बाद मैंने उसे डॉगी स्टाइल पोजीशन में बनाते हुए उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह चिल्लाई और मैं उसे पूरी ताकत के साथ धक्के मारने लगा था। मुझे यह पता था कि मैं ज्यादा देर तक राधिका के सामने टिक नहीं पाऊंगा क्योंकि उसकी चूत बहुत ही ज्यादा टाइट थी करीब 5 मिनट तक ऐसा करने के बाद जब मेरा वीर्य की पिचकारी बाहर की तरफ आई तो मैंने उसे उसकी चूत मे गिरा कर अपनी गर्मी को शांत किया।


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