किसी चमत्कार की कल्पना

Kisi chamatkar ki kalpana:

desi chudai ki kahani, antarvasna

मेरा नाम रतन है मैं पटना का रहने वाला हूं, मेरा गांव पटना से कुछ दूरी पर ही है लेकिन मेरे पिताजी पटना में आ गए थे, वह एक मजदूर थे और मैं भी एक मजदूर हूं। मैं मजदूरी कर के ही अपने घर का गुजार करता हूं, मैं जब भी सुबह काम पर निकलता हूं तो हमेशा मैं यही सोचता हूं कि कब मेरे जीवन में परिवर्तन होगा। मैं किसी चमत्कार की कल्पना लेकर हर दिन सुबह अपने घर से निकलता हूं लेकिन 40 वर्ष की उम्र हो चुकी है उसके बावजूद भी आज तक कभी भी कोई दिन मेरे लिए अच्छा नहीं रहा। हर दिन मैं मजदूरी करता हूं और शाम के वक्त मैं घर चला जाता हूं, मेरी पत्नी भी हर दिन इसी आस में रहती है कि आज मैं उसके लिए कुछ लेकर आऊँगा लेकिन मेरे पास जितने भी पैसे होते हैं उन पैसों से मैं सिर्फ घर का खर्चा चला सकता हूं उससे अधिक मैं कुछ भी नहीं कर सकता। मैं बड़ी मेहनत करके अपने बच्चों को स्कूल भेजता हूं क्योंकि मैं नहीं चाहता कि वह भी मेरी तरह अनपढ़ रह जाएं और मजदूरी करें।

मेरा जीवन तो मजदूरी कर के ही कट जाएगा लेकिन मैं अपने बच्चों का भविष्य सुधारना चाहता हूं और उन्हें एक अच्छी शिक्षा देना चाहता हूं ताकि वह पढ़ लिखकर एक अच्छा इंसान बन पाए। मुझसे जितना बन पड़ता है मैं अपने बच्चों के लिए करता हूं और उनके लिए ही मैं मेहनत कर रहा हूं। मेरा बड़ा लड़का पढ़ने में बड़ा अच्छा है इसलिए मैं उसे किसी अच्छी स्कूल में दाखिला दिलवाना चाहता हूं लेकिन मेरे पास पैसे नहीं हो रहे थे, मैंने अपने रिश्तेदारों से पैसे की बात की तो उन सब लोगों ने मुझ से मुंह फेर लिया, जैसे कि वह मुझे जानते ही ना हो इसलिए मैंने भी सोच लिया कि मैं अपने बच्चे को किसी अच्छे स्कूल में दाखिला दिलवा कर ही रहूंगा लेकिन मेरे पास तो सिर्फ दो वक्त की रोटी के लिए ही पैसे हो पाते थे। मैं जितना भी पैसा बचाता वह सब मैं अपने बच्चे की फीस में दे देता लेकिन मैंने भी यह पूरी तरीके से निर्णय कर लिया था कि अपने बच्चे को तो मैं किसी अच्छे स्कूल में पढाऊंगा।

एक दिन मैं मजदूरी कर रहा था उस दिन मैं मकान में काम कर रहा था, वहां से मेरा पैर फिसल गया जिससे कि मैं नीचे गिर पड़ा, जब मैं नीचे गिरा तो मुझे बहुत चोट आ गई, मुझे मेरे साथ के लोग मेरे घर तक ले गए,  मेरी पत्नी मुझे एक डॉक्टर के पास ले गई और वहां पर ही उस डॉक्टर ने मेरी मरहम पट्टी की। उन्होंने मुझे साफ कह दिया कि तुम कुछ दिनों तक काम नहीं करोगे। मेरे लिए यह बहुत ही संकट की स्थिति थी क्योंकि यदि मैं काम नहीं करता तो मेरे घर का कैसे खर्चा चलता, मैं यही सोच रहा था। मेरी पत्नी मुझे कहने लगी कि आप कुछ दिन आराम कर लो ताकि आपकी तबीयत अच्छी हो जाए, मैंने उसे कहा यदि मैं आराम करूंगा तो घर का खर्चा कैसे चलेगा, तुम्हें तो पता ही है कितने कष्टों से मैं जीवन काट रहा हूं और अपने बच्चे को भी मैं अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहता हूं क्योंकि वह पढ़ने में बहुत अच्छा है इसलिए मैं नहीं चाहता कि उसका जीवन मैं बर्बाद करूं। मेरी पत्नी मुझे दिलासा देकर कहने लगी आप चिंता मत कीजिए सब कुछ अच्छा होगा, आपने भी आज तक कुछ गलत नहीं किया है इसलिए हमारे बच्चों के साथ भी अच्छा होगा, यह कहते हुए उसने मुझे सांत्वना दी। जब मैं और मेरी पत्नी घर आ गये तो मेरी पत्नी ने मेरी घर पर ही देखभाल की लेकिन मैं इसी चिंता में डूबा रहता कि घर का खर्चा कैसे चलेगा, मेरे पास मेरी एक पुरानी सोने की अंगूठी पड़ी थी मैंने सोचा कि इस वक्त मुझे पैसों की जरूरत है इसलिए मै ऐसे बेच देता हूं। मैं एक दिन वह अंगूठी अपने जेब में रख कर ले गया, हमारे घर से कुछ दूरी पर एक सुनार है मैंने वहां पर वह अंगूठी बेच दी, हालांकि मुझे उसने बहुत कम पैसे दिए लेकिन मेरा कुछ दिनों तक का गुजारा चल सकता था इसीलिए मैंने वह अंगूठी बेच दी। कुछ दिनों बाद मैंने अपनी पत्नी को वह पैसे दिए, मुझसे पूछने लगी यह पैसे तुम्हारे पास कहां से आए, मैंने उसे कहा कि तुम मुझसे ज्यादा सवाल मत करो बस तुम यह पैसे रख लो क्योंकि इस वक्त पैसों की आवश्यकता है। मेरी पत्नी ने भी उसके बाद मुझसे कुछ नहीं पूछा और उसने वह पैसे संभाल लिए। मैं अब थोड़ा थोड़ा सही होने लगा था इसलिए मैं सोचने लगा कि मैं काम पर चला जाऊं।

एक दिन मैं सुबह तैयार होकर घर से निकल रहा था तब तक मेरी पत्नी बाहर हैंडपंप से पानी भरकर ले आई, जब वह पानी भरकर लाई तो मैंने उसे कहा मैं जा रहा हूं, वह कहने लगी तुम्हारी तबीयत अभी पूरी तरीके से ठीक नहीं हुई है तुम कुछ दिन घर पर ही रहो। उस दिन मैंने उससे जिद की और मैं कहने लगा कि यदि मैं घर से बाहर नहीं निकलूंगा तो हम लोग अपना खर्चा कैसे चलाएंगे। जब यह बात मैंने अपनी पत्नी से कहीं तो वह कहने लगी तुम आज के दिन घर पर रुक जाओ कल से तुम काम पर चले जाना, मैंने भी उसकी बात को मान लिया और उस दिन मैं घर पर ही रुक गया। जब अगले दिन मैं सुबह काम पर निकला तो मुझे एक व्यक्ति कहने लगे कि हमारे घर का सामान  रखवा दोगे, क्या तुम मेरे साथ चलोगे, मैंने उसे कहा हां क्यों नहीं मैं आपके साथ चलता हूं। मैं उन व्यक्ति के साथ चला गया और उनके घर का सामान मैंने रखवा दिया मै अपने घर लौट आया। अगले दिन उन्हीं व्यक्ति की पत्नी ने मुझे फोन किया और कहने लगी क्या तुम हमारे घर पर आ सकते हो? मैंने उसे कहा हां मैं आपके घर पर आ जाता हूं। मैं जब उसके घर पर गया तो उसकी पत्नी मुझे कहने लगी तुम्हें मेरा एक काम करना है। मैंने उन्हें कहा आप बोलिए क्या काम है वह मुझे कहने लगी तुम मेरी प्यास बुझा दो मैं तुम्हें उसके बदले पैसे दूंगी मेरे पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते लेकिन कल जब तुम काम कर रहे थे तो मैं तुम्हें देख रही थी तुम बड़े ही अच्छे से काम कर रहे थे।

उसने मुझे पैसे दिए तो मैंने भी उसके सारे कपड़े उतारे जब मैंने उसका गोरा बदन देखा तो मेरा लंड हिलोरे मारने लगा, मेरा लंड मेरे पजामे को फाड़ कर बाहर की तरफ आने की कोशिश कर रहा था। उसने जब मेरे पजामे से मेरे लंड को बाहर निकाला और मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। वह मुझे कहने लगी मेरे पति का लंड तो छोटा सा है तुम्हारा तो बहुत ही लंबा लंड है। मैंने काफी देर तक उसके पूरे बदन का रसपान किया और उसकी चूत से पानी का बहाव बड़ी तेजी से निकलने लगा, वह मुझे कहने लगी आज तो तुम मेरी प्यास बुझा दो। मैंने जैसे ही उनकी चूत में अपनी उंगली को डाला तो उनकी चूत टाइट थी। मैंने अंदाजा लगा लिया कि उनके पति उन्हें नहीं चोदते होंगे जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड वाकई में मोटा है, मुझे अपनी चूत में लेकर बड़ा मजा आ रहा है, तुम्हारा लंड बहुत ही गर्म हो रखा है। मैंने कहा मैडम हम लोग मजदूरी करने वाले आदमी हैं हमारा तो पूरा शरीर की गर्म रहता है। जब मैंने उनसे यह बात कही तो वह मुझे कहने लगी अब तुम और भी तेज गति से मुझे धक्के देने शुरू कर दो। मैंने उनके दोनों पैरों को खोल लिया और जैसे ही मैं उनकी चूत के अंदर अपने लंड को अंदर बाहर करता तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी कि तुम और भी तेजी से करते रहो ताकि मुझे मजा आ जाए। मैंने भी उनके दोनो दोनों पैरों को पकड़ लिया और उनके दोनों पैरों को मैंने इतना कस कर पकड़ा की उनकी योनि से बहुत तेज पानी निकल रहा था और उससे भी तेज गति से मैं झटके देता जाता मेरा माल गिरने का नाम नहीं ले रहा था। उनकी योनि बड़ी टाइट थी मेरा वीर्य उनकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह मुझे कहने लगी आज तुमने मेरी सालों की प्यास को बुझा दिया और जिस प्रकार से तुमने मेरी चूत मारी मुझे बहुत मजा आया। उन्होंने मुझे और भी पैसे दिए, वह कहने लगी मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं है जब भी मेरी चूत में खुजली हो गई तो मैं तुम्हें ही घर पर बुला लूंगी। वह मुझे हर दूसरे दिन अपने घर पर बुला लेते और मैं उनकी चूत की खुजली मिटा देता हूं वह मुझे उसके बदले बहुत अच्छे पैसे देती हैं।


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