खुशी का ठिकाना ना रहा

Antarvasna, kamukta:

Khushi ka thikana na raha रविवार का दिन था और सब लोग घर पर ही थे उस दिन जब दरवाजे की डोर बेल बजी तो मैंने दरवाजा खोला दरवाजे पर मामा जी खड़े थे मामा जी कहने लगे कि संजय बेटा क्या आज तुम घर पर ही हो तो मैंने मामा जी से कहा मामा जी आज रविवार है और आज मेरे ऑफिस की छुट्टी है। वह मुझे कहने लगे बेटा तुम कैसे हो उसके बाद हम दोनों बात करते करते अपने घर के हॉल में आकर बैठ गए। मामा जी ने कहा कि तुम्हारी मम्मी नजर नहीं आ रही है तो मैंने मामा जी से कहा बस वह अभी आती ही होंगी वह पड़ोस में गई हुई हैं। पापा घर पर ही थे तो पापा और मामा जी साथ में बैठे हुए थे लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि आखिर मामा जी घर पर क्यों आए हैं। मैंने उस दिन जब इस बारे में पापा से पूछा तो पापा ने मुझे बताया कि वह तुम्हारी बहन के लिए एक रिश्ता लेकर आए थे उनके पड़ोस में ही एक फैमिली रहती है जो कि बहुत ही सज्जन है और उनसे तुम्हारी बहन दिव्या की शादी की बात चल रही है।

मैंने पापा से कहा लेकिन पापा मुझे तो इस बारे में आपने कुछ बताया ही नहीं तो पापा कहने लगे कि बेटा सिर्फ अभी बात ही चल रही है जैसे ही सब कुछ फाइनल हो जाएगा तो तुम्हें अपने आप ही पता चल जाता। उस दिन तो मामा जी घर से चले गए थे लेकिन वह थोड़े दिनों बाद दोबारा घर आए। जब लड़के लोगों का परिवार हमारे घर पर आया तो हमे पता चला कि वह लोग बहुत ही अच्छे और सच्चे लोग है दिव्या को भी राजेश पसंद आ गया था और जल्द ही उन दोनों की सगाई हो गई। उन दोनों की सगाई हो जाने के बाद पापा चाहते थे की दिव्या की शादी में किसी भी प्रकार की कोई कमी ना रह जाए इसलिए उन्होंने शादी का पूरा अरेंजमेंट बहुत ही अच्छे से कर दिया था। कुछ ही समय मे दिव्या की शादी हो चुकी थी दिव्या की शादी हो जाने के बाद घर काफी सुना सा लग रहा था। कुछ दिनों तक तो घर में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था क्योंकि जब दिव्या घर पर होती तो घर में हर वक्त वह शरारत किया करती थी और मुझे भी उसके साथ बहुत अच्छा लगता था लेकिन अब दिव्या अपने ससुराल जा चुकी थी तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था।

कुछ दिनों तक तो घर में कुछ भी अच्छा नही लग रहा था लेकिन अब सब कुछ सामान्य होने लगा था। अगले दिन सुबह मैं अपने ऑफिस जल्दी चला गया उस दिन मुझे ऑफिस जल्दी जाना था मैं जब ऑफिस पहुंचा तो मेरे प्रमोशन की खबर सुनकर मैं बहुत ज्यादा खुश हुआ। मेरा प्रमोशन हो जाने के बाद जब मैं शाम को घर लौटा तो पापा और मम्मी को मैंने इस बारे में बताया तो वह लोग भी बहुत खुश थे और कहने लगे कि बेटा यह तो बड़ी खुशी की बात है कि तुम्हारे ऑफिस में तुम्हारा प्रमोशन हो गया है। मैंने पापा से कहा कि हां पापा मेरी सैलरी भी बढ़ गई है और मेरा प्रमोशन भी हो गया है आखिर मुझे वहां काम करते हुए 6 वर्ष भी तो हो गए थे। मैं अपने काम को पूरी मेहनत से कर रहा था इसलिए मेरा प्रमोशन भी जल्दी हो गया उस कंपनी में मुझसे भी सीनियर थे लेकिन फिर भी मेरे बॉस को मुझ पर पूरा भरोसा था इसलिए उन्होंने मुझे प्रमोशन दे दिया। मैं इस बात से बड़ा खुश था प्रमोशन मिल जाने के बाद मेरे ऊपर काम की और भी जिम्मेदारियां बढ़ गई इसलिए मैं घर अब देरी से आने लगा मुझे घर आते हुए कई बार काफी देर हो जाया करती थी। एक दिन मैं अपने घर रात के वक्त पहुंचा तो मैंने देखा कि उस दिन हमारे ही पड़ोस में रहने वाली लड़की जिसका नाम राधिका है वह बहुत ही नशे में थी और वह अच्छे से चल भी नहीं पा रही थी। राधिका को हमारी कॉलोनी में कोई भी अच्छा नहीं मानता था इसलिए मैंने भी उसकी तरफ देखकर जैसे उसे नजरअंदाज करने की कोशिश की लेकिन फिर मुझे लगा कि यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है इस वक्त मुझे उसकी मदद करनी चाहिए। मैंने उसकी मदद की और उसे मैंने उसके घर तक छोड़ दिया, राधिका को मैंने उसके घर तक तो छोड़ दिया था शायद उसे यह बात पता चली भी या नहीं यह मुझे नहीं मालूम लेकिन अगले दिन उसने मुझे देखा तो उसने मुझे कहा कि कल आपने मेरी मदद की उसके लिए मैं आपका शुक्रिया कहना चाहती हूं। मैंने राधिका को उस दिन समझाया और कहा कि तुम्हें मालूम है कॉलोनी में कोई भी तुम्हारे बारे में अच्छा नहीं कहता है।

राधिका कहने लगी कि मुझे सब कुछ मालूम है कॉलोनी में कोई भी मेरे बारे में अच्छा नहीं कहता लेकिन मैं ऐसी नहीं हूं इसके पीछे भी कुछ कारण है। मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं था कि आखिर इसके पीछे क्या कारण था कि वह शराब के नशे में डूबी रहती और सब लोग कॉलोनी में उसे ठीक नहीं बताते थे। जब उस दिन राधिका और मैं हमारे कॉलोनी के पार्क में ही बैठे थे तो उस दिन राधिका ने मुझे बताया कि उसकी दीदी का डिवोर्स हो चुका है और दीदी के डिवोर्स हो जाने के बाद घर में परेशानियां बहुत बढ़ गई थी। मुझे यह बात तो मालूम थी लेकिन मुझे जब राधिका ने बताया कि वह एक लड़के से प्यार करती थी उससे उसकी सगाई भी हो चुकी थी लेकिन अचानक से उन लोगों ने सगाई तोड़ दी। मैंने राधिका से इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि वह लोग दहेज की मांग कर रहे थे और मेरे पापा इतना पैसा कहीं से जुटा नहीं पाए जिससे कि उनकी तबीयत खराब रहने लगी और अब वह घर पर ही रहते हैं डॉक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए कहा है। मैंने राधिका से कहा लेकिन राधिका तुम्हें यह सब नहीं करना चाहिए तो राधिका मुझे कहने लगी कि संजय यह सब बोलना बहुत आसान है लेकिन जब किसी के ऊपर इतनी मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है तो यह बात सिर्फ वही समझ सकता है।

मैंने राधिका की तरफ देखा और कहा कि राधिका तुम ठीक कह रही हो लेकिन इसका मतलब यह भी तो नहीं है कि तुम इन सब चीजों से भागने की कोशिश करो भागना भी तो किसी चीज का समाधान नहीं है। राधिका को मैंने काफी समझाया तो राधिका मेरी बात को समझ चुकी थी और मुझे उस वक्त काफी खुशी हुई जब राधिका के अंदर अब बदलाव आने लगा था। राधिका बदलने लगी थी और उस पर शायद मेरी बातों का कुछ असर पड़ा था। हम दोनों एक दूसरे से अक्सर बात करते राधिका ने मुझे कहा संजय शायद यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है तुम्हारी बातों का असर मुझ पर बहुत ही अच्छे से हुआ इसलिए मैंने अपनी जिंदगी में बदलना ही बेहतर समझा। मैंने राधिका यह तो बड़ी खुशी की बात है कि तुम अब बदल चुकी हो। राधिका ने मुझे कहा संजय आज हम लोग कहीं डिनर के लिए चलते हैं। मैंने उसे कहा कि ठीक है और उस दिन हम दोनों साथ में डिनर के लिए गए तो मुझे नहीं मालूम था कि राधिका उस दिन मुझसे अपने दिल की बात कह देगी। वह मुझे कहने लगी मुझे लगने लगा है कि मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं। मैंने इस बारे में कभी सोचा नहीं था मेरे लिए तो यह किसी सरप्राइस से कम नहीं था लेकिन अब राधिका ने मुझसे अपने दिल की बात कह दी थी तो मैं इस बात से काफी खुश था। उस दिन राधिका और मेरे बीच में लिप किस हो गया जब हम दोनों के बीच किस हुआ तो शायद राधिका और मेरे बीच में प्यार की यह पहली शुरुआत थी अब हम दोनों का प्यार आगे बढ़ने लगा। हम दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा था इसलिए हम दोनों एक दूसरे को मिलने लगे थे फोन पर ही हम दोनों की काफी बातें होने लगी थी लेकिन उस दिन हम दोनों का प्यार और भी ज्यादा मजबूत हो गया जिस दिन हम दोनों के बीच सेक्स संबंध बना। उस दिन मैंने राधिका को अपने घर पर बुलाया था राधिका और मैं साथ में बैठे हुए थे हम लोग एक दूसरे से बात कर रहे थे तभी मैंने राधिका की जांघ पर अपने हाथ को रखा और उसकी जांघ को सहलाने लगा उसे कोई आपत्ति नहीं थी।

उसने मेरी शर्ट के बटन को खोलते हुए किस किया जिस से मे बहुत ही ज्यादा खुश हो गया था। जब उसने मुझे किस किया तो मेरे अंदर की आग जैसे बढ़ चुकी थी। मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया उसके होठों को चूमकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था अब मैंने उसके कपड़ों को खोलकर जब उसकी ब्रा को उतारा तो मैं उसके स्तनों को अपने हाथों में दबाने लगा मै उसके निप्पल को भी चूसने लगा था। ऐसा करने से उसके अंदर की आग बढ़ती जाती है और मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आता जाता जब मैं ऐसा कर रहा था तो मेरे अंदर की आग बढ़ने लगी थी और मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गया। मेरे अंदर कि उत्तेजना इस कदर बढ़ गई कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाया और मैंने राधिका से कहा मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा हूं।

मैंने राधिका की पैंटी को उतारा तो मैंने देखा उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी टपक रहा है उसकी चूत से जिस प्रकार से पानी बाहर की तरफ निकल रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो रही थी मैंने उसकी चूत को करीब 2 मिनट तक सहलाया उसके बाद हम दोनौ ने 69 पोज मे एक दूसरे की गर्मी को और भी बढ़ा दिया। जब हमने ऐसा किया तो हम दोनो बिल्कुल भी नहीं रह पा रहे थे। मैंने उसकी चूत को चाटकर उसकी चूत का पानी निकाल दिया मैंने अपने लंड को उसकी योनि में घुसा दिया तो उसकी चूत से जोर से खून की पिचकारी निकल आई और मैं इस बात से काफी खुश था कि वह एकदम सिल पैक टाइट माल है। उसकी गुलाबी चूत से खून निकल रहा था और मैं उसे बड़े अच्छे से धक्के मार रहा था। जिसके बाद वह और भी ज्यादा खुश थी वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम मुझे ऐसे ही चोदते जाओ मेरे अंदर गर्मी पैदा हो गई थी करीब 10 मिनट की चुदाई का आनंद लेने के बाद मेरा वीर्य बाहर की तरफ गिरा तो हम दोनों के चेहरों पर खुशी थी और हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे।


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