कमला भाभी के साथ बिताए वह पल

Kamla bhabhi ke sath bitaye wah pal:

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मेरा नाम राजेंद्र है मेरी उम्र 27 वर्ष है, मैं पटना का रहने वाला हूं। मेरे घर पर मेरे माता-पिता हैं, मेरे पिताजी हमेशा से यही चाहते थे कि मैं किसी सरकारी विभाग में काम करूं इसीलिए मैंने अपनी पढ़ाई के दौरान ही कई सरकारी परीक्षाओं के फॉर्म भरे। एक दिन अखबार में सुबह मैंने इस्तेहार देखा और उसमें पोस्ट ऑफिस की कुछ भर्तियां थी, मैंने उसके लिए अप्लाई कर दिया। मेरे मां और पिता जी हमेशा ही चाहते थे कि मैं किसी सरकारी विभाग में निकल जाऊं इसीलिए मैंने इसकी तैयारी शुरू कर दी और मेरे कई दोस्तों ने भी पोस्ट ऑफिस के फॉर्म भरे थे। वह लोग मुझसे पूछने लगे कि इस फॉर्म में योग्यता क्या है, मैंने उन्हें बताया कि इस के लिए 10 वीं पास होना चाहिए और यह पोस्टमैन की जॉब है। मैंने अपने दोस्तों के भी फॉर्म ऑनलाइन हीं भरे।

मै परीक्षा की तैयारी करने लगा और कुछ समय बाद परीक्षा हुई, परीक्षा में मैंने बहुत ही अच्छा किया, मुझे पूरी उम्मीद थी कि इस बार मेरा सिलेक्शन जरूर हो जाएगा। मेरे पिताजी मुझसे पूछने लगे की तुम्हारी परीक्षा कैसी रही, मैंने उन्हें बताया कि मेरी परीक्षा बहुत अच्छी थी और इस बार मेरा जरूर सलेक्शन हो जाएगा। कुछ दिनों बाद उसका ऑनलाइन रिजल्ट आ गया और मैंने अपना नंबर चेक किया तो उसमें मेरा सिलेक्शन हो चुका था, मैं बहुत ही खुश था और मेरे पिताजी भी बहुत खुश हुए वह कहने लगे मुझे तुम पर पूरा भरोसा था। जब यह बात मेरे रिश्तेदारों को भी पता चली तो वह सब भी खुश हो गए क्योंकि हमारे परिवार में सरकारी नौकरी यदि किसी व्यक्ति की लग जाती है तो उसकी बड़ी ही इज्जत होती है। अब मेरी भी सरकारी नौकरी लग चुकी थी और कुछ दिनों बाद ही मुझे ट्रेनिंग पर जाना था। जब मैं ट्रेनिंग पर गया तो वहां उन्होंने हमें सारी कुछ जानकारी दी और कुछ दिनों बाद हमारी ट्रेनिंग खत्म हो गई। पटना से कुछ दूरी पर एक छोटी सी जगह है, मेरे विभाग ने मुझे वहां पर भेज दिया। मैं वहां पर चला गया, वहां एक छोटा सा कस्बा है मैंने वहां पर रहने का बंदोबस्त कर दिया और मैंने जिस जगह रहने का प्रबंध किया था वहां से कुछ दूरी पर ही हमारा पोस्ट ऑफिस है इसलिए मुझे वहां से जाने में सुविधा होती है,  इसी वजह से मैंने पोस्ट ऑफिस के नजदीक पर ही रहने के बारे में सोचा।

मैं सुबह अपने काम पर चला जाता हूं और वहां से ही मैं सब जगह डाक पहुंचाता। गांव का इलाका होने की वजह से मुझे अब सब लोग वहां पहचानने लगे थे और सब लोग मुझे पोस्टमैन साहब कहकर बुलाते। मेरे सब लोगों से घरेलू संबंध बनने लगे थे, जब भी किसी की चिट्ठी आती तो वह लोग मुझसे संपर्क कर लिया करते हैं और मैं जब भी किसी के घर पर जाता तो वह मेरा बहुत ही आदर करते है। मैं समय-समय पर अपने घर पर भी फोन कर दिया करता हूं और अपने घर वालों का हाल-चाल पूछ लिया करता। हमारे मकान मालिक का व्यवहार बहुत ही अच्छा है और उनके परिवार में उनकी पत्नी और उनकी दो छोटी बेटियां हैं, उनके साथ में मेरे बड़े अच्छे संबंध बन चुके हैं। मेरे मकान मालिक का नाम गोविंद है, वह लोग खेती पर ही निर्भर हैं और उनकी पत्नी भी उनके साथ उनकी खेती में मदद करती है। मेरा छोटा सा ही कमरा है, मैं अपने काम से आने के बाद में पड़ोस में ही एक चाय की दुकान है वहां पर बैठ जाया करता हूं, उस दुकान का नाम श्रीवास्तव टी स्टॉल है। वहां पर आसपास के काफी लोग आते हैं और शाम को बैठ कर बाते करते। मुझे भी सब लोग पहचानते है इसलिए मुझसे वह लोग पूछ लिया करते हैं कि आपका काम कैसा चल रहा है, मैं उन्हें कहता हूं कि मेरा काम अच्छा चल रहा है, यदि किसी की कोई चिट्ठी आनी होती थी तो वह लोग मुझसे शाम को ही पूछ लिया करते है कि हमारी चिट्ठी आने वाली थी यदि आप के पास हमारी चिट्ठी आए तो आप हमें बता दीजिएगा। मेरे फोन पर सुबह से ही फोन आने लग जाते है और मैं सब लोगों के घर जाकर चिट्ठियां पहुंचा देता हूं। एक दिन मेरे फोन पर एक महिला का फोन आया और वह कहने लगी कि मेरे पति ने कुछ जरूरी कागजात भिजवाए थे लेकिन अभी तक वह मुझे मिले नहीं हैं, मैंने उन महिला से उनके पति का नाम पूछा तो वह कहने लगी कि मेरे पति का नाम गोविंद है। मैंने उन्हें कहा कि उन्होंने किसके नाम से कागजात भेजे थे, वह कहने लगी उन्होंने मेरे नाम से वह कागजात भिजवाए थे।

मैंने उन महिला का नाम पूछा उन्होंने अपना नाम मुझे बताया,  उनका नाम कमला है। मैंने उन्हें कहा कि अभी तो आपके नाम से कोई डाक नही आई है। उन्होंने फोन रख दिया और अगले दिन जब उनका फोन मुझे दोबारा आया तो मैंने उन्हें कहा कि आप मुझे मिल लीजिए। वह अगले दिन पोस्ट ऑफिस मे आ गई जब वह पोस्ट ऑफिस मे आई तो मैंने देखा वह बहुत ही सुंदर और माल लग रही थी। मुझे कमला भाभी को देख कर सेक्स की भावना आने लगी थी। मैंने उन्हें कहा कि जैसे ही मेरे पास आपकी डाक आ जाएगी तो मैं आपके घर वह डाक ले आऊंगा। मैं फोन पर कमला भाभी से बात करने लगा था और हम दोनों की फोन पर बात होने लगी थी। एक दिन रात को हम दोनों की फोन पर बहुत ही अश्लील बातें होने लगी वह मुझसे चुदने के लिए तैयार थी। जब उनकी डाक मेरे पास आई तो मैं उनके घर वह डाक लेकर चला गया। कमला भाभी के घर पर कोई भी नहीं था वह अकेली रहती हैं। मैं जब उनके घर पर पहुंचा तो मैंने उन्हें वह डाक दे दी वह मेरे पास ही बैठी हुई थी और कह रही थी तुम फोन पर तो बहुत ज्यादा अश्लील बातें करते हो। मैंने उन्हें कहा कि आपकी बड़ी बड़ी गांड देखकर मेरा मन खराब हो जाता है।

वह मेरे सामने ही बैठी हुई थी मैंने उन्हें कस कर पकड़ लिया और अपनी बाहों में ले लिया। उन्हें भी बहुत मजा आ रहा था जिस प्रकार से मैं उन्हें अपनी बाहों में ले रहा था वह पूरे मूड में थी। मैंने जब उनके पतले और नर्म होठों को अपने होठों में लिया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा मैं उनके होठों को चूसता रहा। मैंने उनके होंठों को इतने अच्छे से चूसा कि उनके होठों से खून भी निकलने लगा था। मैंने उनकी सलवार के अंदर हाथ डाल दिया और जब उनकी चूत पर मेरी उंगली लगी तो उनकी चूत बड़ी ही चिकनी थी और गीली हो चुकी थी। मुझसे बिल्कुल नहीं रहा गया और मैंने उनके कपड़े उतार दिए। जब मैंने उनके गोरे स्तनो को देखे तो मेरा लंड खड़ा हो चुका था मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटाते हुए उनके स्तनों का काफी समय तक रसपान किया। उनके निप्पल को जब मैं अपनी जीभ से टच कर रहा था तो वह मचल जाती। मैंने उनके मुंह में अपना लंड डाल दिया उन्होंने काफी समय तक मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग किया। उसके बाद जैसे ही मैंने उनकी योनि को अपनी जीभ से चाटा तो उनका पानी पूरा बाहर निकलने लगा था। मैंने उनकी चूत मे अपने मोटे और कड़क 9 इंच लंड को प्रवेश करवा दिया जैसे ही मेरा लंड उनकी योनि में प्रवेश हुआ तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ और मेरा लंड उनकी चूत की गहराई में जा चुका था। अब मैं अपने लंड को उनकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था वह भी पूरे मूड में थी। मैने उनके स्तनों को बहुत देर तक चूसा और उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के दिए जिस से कि उनकी चूत से पानी बाहर की तरफ कुछ ज्यादा ही निकलने लगा था। मैंने उन्हें काफी देर तक ऐसे ही चोदा उसके बाद मैंने उन्हें घोड़ी बना दिया। घोड़ी बनाते ही जब मैंने उनकी गांड पर अपने लंड को टच किया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ और मैंने धीरे-धीरे उनकी बड़ी बड़ी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उनकी गांड के अंदर गया तो वह उछल पड़ी और आगे की तरफ जाने लगी। मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेज गति से मैंने उन्हें झटके दिए। कमला रंडी की गांड से भी खून निकलने लगा था। वह कहने लगी कि मुझसे बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा है 5 मिनट के अंदर ही मेरा भी वीर्य कमला की गांड के अंदर जा गीरा मैंने जब अपने लंड को कमला रंडी की गांड से बाहर निकाला तो उन्होंने अपनी गांड और को साफ किया। उसके बाद हम दोनों काफी समय तक बैठे रहे। मैं अब भी उसी कस्बे में काम कर रहा हूं। जब भी मेरा मन होता है तो कमला भाभी को मैं फोन कर दिया करता हूं और वह मेरी इच्छा पूरी कर देती हैं। उन्हें भी मुझसे अपनी गांड के घोडे खुलवाना में बड़ा मजा आता है।


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