काला लंड देख डर गई

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Kala lund dekh dar gayi कॉलेज में मेरा पहला ही दिन था कॉलेज में जब मैं पहले दिन गई तो उस दिन मेरी मुलाकात रवीना से हुई रवीना से मेरी पहले ही दिन अच्छी बातचीत होने लगी रवीना से अब मेरी बहुत ही अच्छी बातचीत हो चुकी थी और हम दोनों बहुत अच्छी सहेली बन चुकी थी। हमारे परिवार में किसी भी चीज की कभी कोई कमी नहीं थी पिताजी एक गारमेंट शॉप चलाते हैं और वह गारमेंट शॉप काफी पुरानी है पिताजी को भैया से बहुत ज्यादा उम्मीदें थी लेकिन भैया ने पिताजी के सारे सपनों को तोड़ दिया था क्योंकि भैया ने अपनी मर्जी से ही एक लड़की से शादी कर ली जिसके बाद पापा इस बात से बहुत ज्यादा नाराज हुए और वह घर छोड़ कर चले गए। पापा इस बात को कभी भी किसी से कह नहीं पाए कि वह चाहते क्या है इस बात को एक साल बीत चुका था और भैया से किसी की भी मुलाकात नहीं हो पाती थी क्योंकि भैया अब अलग रहते थे और वह अपनी नौकरी के लिए दिल्ली चले गए थे और हमारा परिवार लखनऊ में ही रहता है। पापा इस बात से हमेशा ही चिंतित रहते कि कहीं मैं भी पापा को बिना बताए किसी लड़के से शादी ना कर लूं इसलिए वह मुझ पर बहुत ही ज्यादा पाबंदी लगाने लगे।

मेरे लिए भी अब सब कुछ बदलने लगा था इस एक साल में मेरे जीवन में सब कुछ बदल चुका था मैं किसी लड़के से बात भी नही करती थी। पापा ही मुझे कॉलेज छोड़ने के लिए जाते और वही मुझे कॉलेज से घर वापस लेकर आते यदि वह कभी कॉलेज नहीं आते तो वह मुझे कह देते कि तुम जल्दी घर आ जाना और यदि कभी मुझे थोड़ा बहुत भी देर हो जाती तो पापा मुझ पर बहुत गुस्सा होते। कई बार मेरी मम्मी ने पापा को समझाने की कोशिश की कि तुम्हें ऐसे गुस्सा नहीं होना चाहिए और तुम अब इस बात को भूल जाओ लेकिन पापा रवि भैया से बहुत प्यार करते थे और उन्हें कभी भी इस बात की उम्मीद नहीं थी कि रवि भैया हमसे बिना बताइए शादी कर लेंगे।

भैया ने दूसरी जाति की लड़की से शादी की थी इस वजह से पापा बहुत ज्यादा नाराज थे और पापा हमेशा से ही रवि भैया को कहते थे कि तुम जरूरी एक दिन कुछ अच्छा करोगे। भैया ने उन्हें कभी भी कोई शिकायत का मौका नहीं दिया था लेकिन इस बात से वह इतना ज्यादा टूट गए कि अब पापा किसी से भी ज्यादा बात नहीं किया करते थे वह शॉप में जाते और शाम के वक्त वापस लौट आते बस उनकी यही दिनचर्या थी मेरे लिए भी कुछ नया नहीं था। मेरी सहेली रवीना से ही सिर्फ मैं बातें किया करती थी, अब हमारे कॉलेज के एग्जाम आने वाले थे और मैं कॉलेज के दूसरे वर्ष में पहुंच चुकी थी इसी बीच एक दिन मेरी मां ने मुझे कहा कि पायल बेटा तुम मेरे साथ कुछ दिनों के लिए तुम्हारे मामा के घर चलो। मैंने अपनी मां से कहा नहीं मां मैं वहां जाकर क्या करूंगी लेकिन मां की जिद के आगे मुझे जाना पड़ा और पापा ही हमें वहां छोड़ने के लिए आए हुए थे पापा ने हमें मेरे मामाजी के घर छोड़ा और उसके बाद वह वापस लौट आए थे। मेरा मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था क्योंकि मेरे मामा जी के घर पर कोई भी मेरी उम्र का नहीं था इस वजह से मैं अकेली ही थी मैं सोचने लगी कि क्या मुझे घर चले जाना चाहिए। मैंने अपनी मां से कहा कि मां मैं सोच रही हूं मैं घर चली जाऊं लेकिन मां ने कहा बेटा तुम यहां कुछ दिन रुक जाओ। मैं उस वक्त रूम में बैठी हुई थी और अपनी सहेली रवीना से फोन पर बात कर रही थी। जब मैं रवीना से बात कर रही थी तो उसी वक्त मेरे पापा का फोन आ रहा था पापा का फोन वेटिंग में था फिर मैंने जल्दी से रवीना का फोन काट दिया और उसके बाद पापा को मैंने तुरंत फोन किया। उन्होंने गुस्से में मुझे कहा कि पायल तुम किस से बात कर रही थी मैंने पापा से कहा पापा मैं अपनी सहेली से बात कर रही थी पापा मुझ पर कुछ ज्यादा ही पाबंदी लगाने लगे थे मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। मैंने पापा से कहा क्या कोई जरूरी काम था तो वह कहने लगे कि तुम्हारी मम्मी फोन नहीं उठा रही हैं और मुझे उससे बात करनी थी मैंने पापा से कहा ठीक है मैं आपकी आपकी मम्मी से बात करवा देती हूं। मैंने मम्मी को इधर-उधर ढूंढा लेकिन मम्मी मुझे कहीं दिखाई नहीं दी मेरी मामी से मैंने पूछा मम्मी कहां है तो वह कहने लगी कि वह सामान लेने के लिए गई हुई हैं अभी थोड़ी देर बाद आते ही होंगे।

मैंने पापा से कहा पापा मैं थोड़ी देर बाद आपकी मम्मी से बात करवाती हूं पापा ने कहा ठीक है तुम मेरी बात अपनी मम्मी से थोड़ी देर बाद करवा देना। मैंने थोड़ी देर के बाद ही फोन कर दिया क्योंकि थोड़ी देर में मम्मी आ चुकी थी और मैंने पापा से मम्मी की बात करवा दी थी उन्होंने करीब 10 मिनट तक एक दूसरे से बात की उसके बाद मुझे मम्मी ने फोन दिया। मम्मी कहने लगी की पायल बेटा आओ मेरे साथ कुछ देर बैठ जाओ मैंने मां से कहा ठीक है मां। मैं मां साथ में बैठी हुई थी जब हम लोग साथ में बैठे हुए थे तो मैंने अपनी मां से पूछा की मां क्या कभी आपको रवि भैया की याद नहीं आती। मम्मी कहने लगी कि बेटा रवि की बहुत याद आती है लेकिन तुम तो जानती ही हो कि तुम्हारे पापा अब रवि को कभी घर आने ही नहीं देना चाहते। मैंने मां से कहा मां मेरा मन होता है कि मैं भी भैया से बात करुं लेकिन भैया से इतने वर्षों से कोई बात ही नहीं हो पाई है मां कहने लगी कि बेटा मेरा भी बहुत मन होता है कि मैं रवि से बात करूं लेकिन रवि का ना तो कोई नंबर है और ना ही उससे हमारा किसी भी प्रकार का कोई संपर्क है। मेरी मां और मैं साथ में बैठे हुए थे कि तभी मेरी मामी आई और कहने लगी कि चलो कहीं घूम आते हैं तो मैंने अपनी मां से कहा आप लोग चले जाओ मैं घर पर ही हूं।

मां कहने लगी की पायल बेटा तुम भी हमारे साथ चलो मैंने मां को कहा नहीं मां मैं घर पर ही हूं मेरा कहीं जाने का मन नहीं है। मेरी मां और मामी जी अब जा चुकी थी घर पर उस वक्त मामा जी ही थे मैंने सोचा थोड़ी देर मामा जी के साथ ही बैठ जाती हूं। थोड़ी देर मैं उनके साथ बैठी हुई थी कि तभी उनके दोस्त आ गए और उन्होंने मामा जी को अपने घर पर बुला लिया। मामा जी उनके घर पर चले गए उन्होंने मुझे कहा पायल बेटा मैं अभी थोड़ी देर बाद आता हूं। घर पर मैं अकेली हो गई थी और घर पर कोई भी नहीं था मैंने सोचा कि रवीना को मैं फोन कर देती हूं और रवीना से मैं फोन पर बातें करने लगी। जब मैं रवीना से बात कर रही थी तभी दरवाजे पर कोई खड़ा था क्योंकि दरवाजे का पर्दा लगा हुआ था और मुझे ऐसा एहसास हुआ कि शायद कोई दरवाजा खटखटा रहा है। मैं बाहर गई तो मैंने देखा बाहर एक व्यक्ति खड़े हैं और उन्होंने मुझसे पूछा क्या रमेश जी घर पर है? मैंने उन्हें कहा वह पड़ोस में गए हुए हैं बस थोड़ी देर बाद आते ही होंगे। मैंने उन्हें अंदर बैठने के लिए कहा वह अंदर बैठ गए उन व्यक्ति की उम्र यही कोई 40 वर्ष के आसपास रही होगी वह मुझसे बात करने लगे उनका नाम प्रदीप है। वह मुझसे पूछने लगे तुम क्या करती हो? मैंने उन्हें अपने बारे में बताया लेकिन उनकी बातों से मैं इतने प्रभावित हुई कि उन्होंने मुझे अपना नंबर दे दिया मैं इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि हम लोग रात के वक्त फोन पर बात करेंगे तो हम लोगों की बातें बहुत ही ज्यादा गरमा गरम हो जाएंगे जिस से मैंने अपनी चूत के अंदर उंगली घुसा दी मैं प्रदीप के साथ बातें करके अपने आपको रोक ना सकी। उन्होंने मुझे अपने घर पर बुला लिया क्योंकि मेरे ऊपर इतनी ज्यादा पाबंदी थी कि जिससे मैंने किसी भी पुरुष को छुआ नहीं था मैं चाहती थी कि मैं किसी के साथ सेक्स संबंध बनाऊ। प्रदीप शादीशुदा इंसान है लेकिन उनकी पत्नी उस दिन घर पर नहीं थी इस वजह से मुझे बहुत ही अच्छा मौका मिल चुका था। मैं प्रदीप से मिलने के लिए उनके घर पर गई तो उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा मैं थोड़ा घबराई हुई थी क्योंकि पहली बार ही मैं किसी के साथ सेक्स करने वाली थी और मेरे लिए यह सब नया ही था। जब उन्होंने मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगे मुझे तुम्हारे स्तन को दबाने में अच्छा लग रहा है।

उन्होंने मेरे होठों को भी चूमना शुरू किया और हम दोनों एक दूसरे के बदन की गर्मी को बढ़ाते चले गए। वह मुझे अब अपने बेडरूम में ले गए वहां पर उन्होंने मेरे होंठों को चूमा मैं कमसिन और नौजवान लड़की मेरे लिए तो सब कुछ नया ही था लेकिन मैंने जब उनके मोटे और काले लंड को देखा तो मैं इस बात से घबरा गई थी। मैंने उन्हें कहा आपका लंड तो बहुत ही मोटा है मैंने उनसे कहा आप मेरी चूत मे अपने लंड को डाल दीजिए। उन्होंने अब मेरे कपड़े उतारे और मेरी चूत को पहले बहुत देर तक चाटा और मेरी चूत से निकलता हुआ पानी इस कदर बढ़ चुका था कि उन्होंने मुझे कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डाल देता हूं। जैसे ही उन्होंने मेरी चूत पर अपने लंड को सटाया तो मैं उनसे कहने लगी थोड़ा धीरे से डालो लेकिन उन्होंने तो बड़ी तेजी से लंड को चूत के अंदर घुसा दिया। जब उनका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो मैं चिल्लाने लगी और मेरी सील टूट चुकी थी।

मेरी सील टूट जाने के बाद वह मुझे अब और भी तेजी से धक्के मारने लगे उन्होंने मुझे इतनी तेजी से धक्के मारे कि मेरी चूत से खून बहुत ज्यादा निकाल रहा था और मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी। उन्होंने मेरा दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और मेरी चूत के अंदर बहार बड़ी तेजी से अपने लंड को कर रहे थे उनका लंड मेरी चूत के अंदर तक जा रहा था। जब उन्होंने अपने वीर्य को मेरी चूत मे गिराया तो मैं खुश हो गई लेकिन उसके बाद मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मै उनके साथ सेक्स कर पाऊ। पहली बार ही किसी के लंड को मैंने अपनी चूत मे लिया था मैं बड़ी खुश थी जिस प्रकार से प्रदीप ने मेरे साथ सेक्स के मजे लिए थे। हम लोग कुछ दिनों बाद अपने घर लौट आए लेकिन उसके बाद वह मुझे हमेशा फोन करते हालांकि मैं उनसे कम ही मिला करती लेकिन जब भी मेरी प्रदीप से मुलाकात होती तो हम दोनों के बीच सेक्स संबंध जरूर बनते थे।


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