कडक लंड और कोमल चूत का मिलन

Kamukta, hindi sex story, antarvasna:

Kadak lund aur komal chut ka milan सुबह 7:00 बज चुके थे और 7:00 बजते ही बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना पड़ता है मेरी पत्नी मेघा बच्चों के लिए नाश्ता बना रही थी और मैं बच्चों को तैयार कर रहा था। शादी के 10 साल बाद भी अभी तक कुछ भी नहीं बदला था सब कुछ वैसा ही था जैसे पहले था बचपन से ही मेरे ऊपर जिम्मेदारियां आ गई मैं अपना जीवन तो जैसे जी ही नहीं पाया था क्योंकि मेरे माता पिता के मृत्यु मेरी शादी के कुछ वर्ष बाद ही हो गई और सारी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आन पड़ी। उस जिम्मेदारी के लिए मैंने बहुत ही मेहनत की हमारे जीवन में सब कुछ सामान्य होने लगा है और मैं इस बात से खुश भी हूं कि सब कुछ अब सामान्य होने लगा है।

बच्चों को मैंने तैयार कर दिया था और मेरी पत्नी मेघा कहने लगी चलिए आपने बच्चों को तो तैयार कर ही दिया है अब मैं बच्चों को नाश्ता दे देती हूं मेघा ने बच्चों को नाश्ता दिया और वह उनको छोड़ने के लिए स्कूल बस में चली गई। वह जब लौटी तो मैंने मेघा से कहा मुझे भी तुम नाश्ता दे दो मैं भी अपने ऑफिस के लिए निकल रहा हूं तो मेघा कहने लगी ठीक है मैं अभी आपके लिए नाश्ता बना देती हूं। मेघा ने मेरे लिए नाश्ता बना दिया और जब मेघा ने मेरे लिए नाश्ता बनाया तो मैंने जल्दी से नाश्ता किया और मैं अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ा उस वक्त घड़ी में 9:00 बज रहे थे। हमारे पड़ोस में ही हमारे ऑफिस में काम करने वाले व्यक्ति संतोष रहते हैं हम दोनों अक्सर एक साथ ही ऑफिस जाते हैं कभी मैं अपनी कार से उन्हें ऑफिस ले जाता हूं और कभी वह अपनी कार ले जाते हैं। हम दोनों को जाना तो एक ही जगह होता है और हम लोग शाम को घर भी साथ मे लौटते है मैं और संतोष अपने ऑफिस के लिए निकल चुके थे। हम दोनों अपने ऑफिस के लिए निकले ही थे कि मेघा का मुझे फोन आया और वह कहने लगी आप अपना लैपटॉप घर ही भूल गए हैं मैंने संतोष से कहा लगता है हमें दोबारा घर जाना पड़ेगा। वह कहने लगे क्यों मैंने संतोष को बताया कि मैं अपना लैपटॉप घर ही भूल आया हूं संतोष ने जल्दी से गाड़ी घुमाई और हम लोग दोबारा घर आ गए।

जब हम लोग घर आए तो मैंने जल्दी से लैपटॉप लिया और हम लोग उसके बाद ऑफिस निकल गए जब मैं ऑफिस पहुंचा तो ऑफिस में सब लोग बड़े खुश नजर आ रहे थे मैंने अपने ऑफिस में काम करने वाले अपने सहकर्मी से पूछा कि आज सब लोग बड़े खुश नजर आ रहे हैं। वह कहने लगे की मैनेजर साहब के लड़के ने उच्च अधिकारी की परीक्षा निकाल ली है उसकी ही खुशी में आज वह सबको मिठाई खिला रहे हैं। मैंने मैनेजर साहब को बधाई देते हुए कहा साहब आपको बहुत-बहुत बधाइयां हो वह कहने लगे कि अरे विशाल जी क्या बात कर रहे हैं आप तो मुझसे गले मिलिए। मैनेजर साहब और मेरे बीच में बहुत ही अच्छी बातचीत है उन्होंने मुझे अपने गले लगा लिया और कहा लीजिये आप भी मुंह मीठा कीजिए। मैनेजर साहब के चेहरे पर बहुत खुशी थी अब सब लोग अपने काम पर लग चुके थे और शाम होते ही सब लोग अपने घर के लिए तैयारी करने लगे मैंने भी सामान को अपने बैग में रख दिया था। मैंने अपने सामान को अपने बैग में रखते ही संतोष से कहा चलो हम लोग भी चलते हैं तो संतोष कहने लगे बस 5 मिनट रुक जाओ मैं अभी टॉयलेट से हो आता हूं। संतोष टॉयलेट में चले गए कुछ देर बाद वह लौटे और हम लोगों ने गाड़ी में अपना सामान रखा उसके बाद हम लोग वहां से अपने घर के लिए निकल पड़े। हम लोग अपने घर के लिए निकले तो रास्ते में एक व्यक्ति बड़े ही गलत तरीके से गाड़ी चला रहे थे उन्होंने अचानक से हमारे आगे ब्रेक लगा दिया जिस वजह से संतोष को ब्रेक लगाने में थोड़ा समय लग गया और संतोष की कार जाकर उनकी कार से टकरा गई। इसमें पूरी गलती उनकी थी हम लोग गाड़ी से नीचे उतरे तो वह हम पर ही दोष मारने लगे। वह संतोष को कहने लगे कि क्या तुम गाड़ी देखकर नहीं चला सकते हो मैंने उन्हें कहा देखिए मिस्टर गाड़ी आप ही गलत चला रहे थे इसमें हमारी कोई गलती नहीं है आप बेकार ही हम पर अपना गुस्सा दिखा रहे हैं।

वह मुझे कहने लगे देखिए इसमें आपकी ही गलती है मैंने उन्हें कहा एक तो चोरी करो ऊपर से सीना जोरी आप हम पर गलत आरोप लगा रहे है। बात बहुत आगे बढ़ चुकी थी और संतोष भी गुस्से में आग बबूला हो गए थे और वह व्यक्ति भी गुस्से में आग बबूला थे मैं स्थिति को संभालना चाहता था लेकिन मैं भी शायद अपना आपा खो चुका था क्योंकि यह उनकी वजह से हुआ था। तभी गाड़ी से महिला उतरी और वह हमें कहने लगे कि भाई साहब आप शांत हो जाइए उन्होंने हमें शांत होने के लिए कहा मैंने उन्हें कहा देखिए मैडम आप उनके साथ ही थी तो वह कहने लगे आप हमें माफ कर दीजिए हमारी ही गलती है। उन्हें शायद अपनी गलती का एहसास था और उनकी आंखों में अपनी गलती को लेकर इस बात कि गिलानी थी कि उन्होंने ही गलती की है वह हमें कहने लगे कि भाई साहब आप बात को आगे ना बढ़ाए मैं आपके हाथ जोड़ती हूं। उनके कहने पर हम दोनों उनकी बात मान गए और वहां से हम लोग अपने घर के लिए निकल पड़े लेकिन संतोष का नुकसान हो चुका था और उन्हें अपनी गाड़ी को सर्विस सेंटर में देना पड़ा। अगले दिन मैं और संतोष साथ में ही थे तो संतोष मुझे कहने लगे कल तुमने देखा वह व्यक्ति किस तरीके से बात कर रहे थे। मैंने संतोष से कहा जाने भी दो और फिर हम लोग ऑफिस पहुंच गए हम लोग जब ऑफिस पहुंचे तो संतोष का मूड बिल्कुल भी ठीक नहीं था और वह सब लोगों से बहुत कम बातें कर रहे थे।

कुछ दिनों बाद उनकी गाड़ी सर्विस सेंटर से वापस आ गई और वह भी अब इस बात को भूल चुके थे। मैंने और संतोष ने शिमला जाने का प्लान भी बना लिया था हम लोग जब शिमला घूमने के लिए गए तो उस दौरान मुझे रूप की रानी मिल गई। रूप की रानी गौतमी जब मुझे मिली तो मैंने संतोष से कहा कि भैया मेरा तो काम हो चुका है। वह मुझे कहने लगा अरे तुम्हारा ऐसा क्या काम हो गया तो मैंने उन्हें कहा आपको मैं यह सब बाद में बताऊंगा। मैंने उन्हें यह बात नहीं बताई और जब गौतमी और मैं एक दूसरे को देखते तो हम दोनों के अंदर से आवाज आ जाती। मैं गौतमी के मदमस्त फिगर को महसूस करना चाहता था उसका मदमस्त बदन किसी कमसिन बला से कम नहीं था। मैं उसके हुस्न के रस को एक ही घूंट मे पीना चाहता था गौतमी को मैंने रूम में बुलाया तो वह रूम में आ गई। जब वह रूम में आई तो मैंने गौतमी से कहा मुझे आज तुम खुश कर दो। वह कहने लगी आप इसकी बिल्कुल भी फिक्र ना करें आज मैं आपको पूरी तरीके से खुश कर दूंगी गौतमी ने जैसे सेक्स की पाठशाला पड़ी हो। उसने मेरे लंड को हाथ में लिया और कुछ देर तक वह ऐसे ही मेरे लंड को हिलाती जिससे कि मेरा लंड खड़ा हो चुका था। मेरा लंड कुछ इंच लंबा हो चुका था जैसे ही गौतमी ने उसे अपने मुंह के अंदर समाया तो मुझे अच्छा लगने लगा। वह बडे ही अच्छे तरीके से मेरे लंड को मुंह के अंदर ले रही थी और मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। मैं इस बात से खुश था कि शिमला की मस्त वादियों में मुझे गौतमी का साथ मिला और गौतमी ने मेरा साथ भरपूर तरीके से दिया।

उसने मेरे लंड से पानी बाहर निकाल दिया था उसने मुझे अपना दीवाना बना दिया था। अब बारी मेरी थी मैने जैसे ही उसकी चुन्नी को उतारा तो उसके स्तन मुझे दिखाई देने लगे मैंने अब उसके सूट को उतारते हुए उसकी ब्रा को उतारा। उसके स्तनो को में दबाने लगा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था मैने जैसे ही उसके स्तनों पर अपने लंड का स्पर्श किया तो वह कहने लगी आपका लंड कितना गरम है। मैने गौतमी से कहा तुम्हारे स्तन भी तो गरम है मैंने गौतमी के दोनो स्तनों को आपस में मिला लिया था। जब मैंने गौतमी के स्तनो मे अपने लंड को लगाया तो उसको अच्छा लग रहा था। जब गौतमी के स्तनों को मैंने अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे मज़ा आने लगा। मैं गौतमी के स्तनों को अपने मुंह में ले रहा था उसके स्तनों से मैंने पानी भी निकाल दिया था। वह अपने अपने दांतो को भीचने लगी थी मैंने उसके होठों पर प्यारा सा मदमस्त चुम्मा दिया। मैने उसके बाद अपने होठों को उसके पेट की तरफ लेकर जाने लगा जब उसके पेट को मैं अपनी जीभ से चाटने लगा तो वह चिल्लाने लग जाती।

उसकी योनि से पानी निकालने लगा था जब मैंने उसकी योनि पर अपनी उंगली का स्पर्श किया तो उसकी योनि से पानी बाहर की तरफ टपक रहा था। मैंने उसकी योनि के अंदर अपनी उंगली को घुसा दिया उसकी योनि के अंदर मेरी उंगली जाते ही मुझे मज़ा आने लगा। जैसे ही मैंने अपने लंबे और मोटे लंड को गौतमी की योनि पर स्पर्श किया तो वह पूरी तरीके से मचलने लगी थी और उसके मुंह में मादक आवाज निकलने लगी। मेरा लंड गौतमी की योनि के अंदर जा चुका था जब गौतमी की योनि में मेरा लंड अंदर की तरफ गया तो मुझे आनंद की अनुभूति होने लगी। मैं लगातार तेज गति से आपने लंड को गौतमी की योनि के अंदर बाहर करता जा रहा था जिससे कि उसे भी मजा आ रहा था और मुझे भी बड़ा आनंद आ रहा था। मैंने गौतमी के दोनों पैरों को उठा लिया और उसे बहुत ही तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए थे। मेरे धक्को में इतनी तेजी आने लगी कि उसके स्तन बड़ी तेजी से हिलने लगे थे मुझे उसके स्तनों को अपने हाथ से पकड़ना पडा। उसके स्तनों को दबाते ही वह मेरी बाहों में आ जाती मैं लगातार तेजी से उसको धक्के दिए जा रहा था मैंने बहुत तेजी से उसको धक्के मरे जैसे ही मेरा वीर्य गौतमी की योनि में गिरा तो उस ठंड में गर्मी का एहसास पैदा हो गया। उस गर्मी को झेल पाना हम दोनों के बस की बात नहीं थी गौतमी भी अपने कपड़े पहन कर जा चुकी थी और संतोष कमरे में आ चुके थे।


Comments are closed.